"आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 4 जुलाई 2027 रविवार से 13 जुलाई मंगलवार तक। जानें घट स्थापना, त्रिपुष्कर योग, प्रतिपदा से दशमी तक मां दुर्गा के 9 रूप और पूजा विधि और भुलकर भी न करें ये 09 काम"
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2027: घट स्थापना, योग और 9 दिनों की मां दुर्गा की पूजा विधि
आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि देवी उपासना का एक अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली पर्व है। इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 4 जुलाई 2027, दिन रविवार से शुरू होकर 13 जुलाई 2027, दिन मंगलवार को समाप्त होगी।
इस बार घट स्थापना रविवार को होने से यह नवरात्रि और भी विशेष बन गई है क्योंकि इसी दिन त्रिपुष्कर योग और आडल योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिष के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और अनुष्ठान का फल कई गुना बढ़ जाता है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है, जिससे तंत्र बाधा, शत्रु भय और नकारात्मकता दूर होती है।
यदि आप भी जीवन में सुख, समृद्धि और सिद्धि चाहते हैं तो इस गुप्त नवरात्रि में मां की नौ स्वरूपों की विधिवत आराधना करें। आइए जानते हैं प्रतिपदा से दशमी तक किस दिन किस देवी की पूजा होगी और इस बार के विशेष योग का क्या महत्व है।
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सनातनी पंचांग और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि की शुभारंभ 04 जुलाई 2027, दिन रविवार 7से हो रही है। जिसका समापन 13 जुलाई, दिन मंगलवार को होगा
प्रतिपदा तिथि का आरंभ - 04 जुलाई 2027, सुबह 8 बजकर 32 मिनट
प्रतिपदा तिथि का समाप्ति - 05 जून 2027, सुबह 04 बजकर 50 मिनट
अभिजित मुहूर्त - 04 जुलाई 2027, सुबह 11 बजकर 23 से 12 बजकर 17 मिनट तक
घट स्थापना शुभ मुहूर्त - 04 जुलाई 2027, सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त रहेगा।
प्रतिपदा से दशमी तक मां दुर्गा के 9 स्वरूप -
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में भी चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। प्रत्येक दिन एक विशेष देवी को समर्पित है।
*1. प्रतिपदा, 4 जुलाई 2027 रविवार - मां शैलपुत्री*: घट स्थापना इसी दिन होगी। हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा से मूलाधार चक्र जागृत होता है। त्रिपुष्कर और आडल योग में कलश स्थापना करने से घर में सुख और स्थिरता आती है।
*2. द्वितीया, 5 जुलाई 2027 सोमवार - मां ब्रह्मचारिणी*: तप और वैराग्य की देवी। विद्यार्थियों और साधकों के लिए विशेष फलदायी। सफेद वस्त्र और चीनी का भोग प्रिय है।
*3. तृतीया, 6 जुलाई 2027 मंगलवार - मां चंद्रघंटा*: शांति और साहस देने वाली देवी। इनकी पूजा से भय दूर होता है और आभा बढ़ती है।
*4. चतुर्थी, 7 जुलाई 2027 बुधवार - मां कूष्मांडा*: ब्रह्मांड की रचयिता। इनकी उपासना से यश, बल और आरोग्य मिलता है। मालपुए का भोग लगाएं।
*5. पंचमी, 8 जुलाई 2027 गुरुवार - मां स्कंदमाता*: भगवान कार्तिकेय की माता। संतान प्राप्ति और संतान सुख के लिए इनकी पूजा विशेष है।
*6. षष्ठी, 9 जुलाई 2027 शुक्रवार - मां कात्यायनी*: विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने वाली देवी। बृहस्पति और शुक्र का आशीर्वाद मिलता है।
*7. सप्तमी, 10 जुलाई 2027 शनिवार - मां कालरात्रि*: नकारात्मक शक्तियों और तंत्र बाधा को नष्ट करने वाली उग्र स्वरूप। काले तिल का दान करें।
*8. अष्टमी, 11 जुलाई 2027 रविवार - मां महागौरी*: शांति और पवित्रता की प्रतीक। कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व है।
*9. नवमी, 12 जुलाई 2027 सोमवार - मां सिद्धिदात्री*: सभी सिद्धियों को देने वाली अंतिम देवी। इस दिन साधना पूर्ण होती है।
*10. दशमी, 13 जुलाई 2027 मंगलवार - नवरात्रि समापन*: इस दिन हवन, कन्या पूजन और कलश विसर्जन किया जाता है। देवी को विदाई देकर आशीर्वाद लिया जाता है।
*आषाढ़ी गुप्त नवरात्र पूजा विधि - स्टेप बाय स्टेप
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के साथ 10 महाविद्याओं की साधना होती है। इसे तंत्र साधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। घर पर सामान्य पूजा इस विधि से करें:
*स्टेप 1: संकल्प और शुद्धि - प्रतिपदा सुबह*
स्नान करके साफ पीले या लाल वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। हाथ में जल, अक्षत, फूल लेकर पूजा का संकल्प लें। "मैं अमुक गोत्र का अमुक नाम आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का व्रत कर रहा हूं" बोलें।
*स्टेप 2: घट स्थापना - 4 जुलाई 2027 रविवार*
मिट्टी की वेदी में जौ बोएं। उस पर तांबे या मिट्टी का कलश रखें। कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, दूर्वा, अक्षत डालें। कलश के मुंह पर आम या अशोक के 5 पत्ते और नारियल रखें। कलश पर स्वास्तिक बनाएं। मंत्र "ॐ जयंती मंगला काली..." बोलकर कलश की स्थापना करें। त्रिपुष्कर और आडल योग में यह विशेष फलदायी है।
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*स्टेप 3: दीप और ध्वज*
अखंड ज्योति जलाएं। यह 9 दिन तक बुझनी नहीं चाहिए। मां की चौकी के पास लाल ध्वज लगाएं।
*स्टेप 4: दैनिक पूजा - 9 दिन*
हर दिन सुबह स्नान के बाद पूजा करें।
1. *ध्यान*: उस दिन की देवी का ध्यान करें। प्रतिपदा को शैलपुत्री, द्वितीया को ब्रह्मचारिणी आदि।
2. *स्नान और श्रृंगार*: देवी को जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत स्नान कराएं। फिर जल से स्नान।
3. *श्रृंगार*: लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, इत्र अर्पित करें।
4. *भोग*: हर दिन अलग भोग। गाय का दूध, फल, मिठाई, खीर। अंत में तुलसी पत्ता जरूर रखें।
5. *जप*: दुर्गा सप्तशती, कवच, अर्गला, कीलक का पाठ करें। "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र की 1 माला जपें। गुप्त नवरात्रि में महाविद्या मंत्र जपे जा सकते हैं।
*स्टेप 5: आरती और क्षमा*
धूप, दीप, कपूर से आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
*स्टेप 6: कन्या पूजन और हवन - अष्टमी/नवमी*
11 जुलाई अष्टमी या 12 जुलाई नवमी को 9 कन्याओं को भोजन कराएं। पैर धोकर उपहार और दक्षिणा दें। दशमी 13 जुलाई को हवन करके कलश का जल पूरे घर में छिड़कें और विसर्जन करें।
*ध्यान दें*: 9 दिन ब्रह्मचर्य, झूठ और तामसिक भोजन से बचें। जमीन पर सोएं।
साधक भुलकर भी न करें ये काम
गुप्त नवरात्र के दौरान मांसाहारी भोजन, लहसुन, प्याज को पूरी तरह त्याग करें।
दस दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए कुश के आसन पर या कंबल पर शयन करना चाहिए।
हर दिन निर्जल या फलाहार उपवास रखना चाहिए।
नवरात्र पूजन के बाद गुरुजन और माता पिता का आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए।
तंत्र, मंत्र, जाप की साधना किसी अनुभवी या गुरु के सानिध्य में करना चाहिए।
शराब पीना और व्रत रखकर झूठ बोलना सख्त मना है।
नवरात्र के दौरान अनाज या उससे बना खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
अगर आप कई तरह के दुःखों से ग्रस्त हैं और आप चाहते है कि माता की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि आ जाए तो गुप्त नवरात्र की मंत्र साधना जरूर करें।
अगर आप मनचाहा मां की कृपा पाना चाहतें हैं तो करें ये उपाय
पति पत्नी की आपसी मतभेद दूर करने के लिए करें इस मंत्र का जाप
सब नार करहि परस्पर प्रीति चलहि स्वधर्म नीरत श्रुति नीति। इस मंत्र के जप करते समय आपको घी की 108 बार आहुति देनी पड़ती है। प्रातःकाल 21बार इस मंत्र का जप करने के बाद, आपको निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
बच्चों को बुरी नजरों से दूर करें यह मंत्र
यदि आप अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाना या रक्षा करना चाहते हैं। तो गुप्त नवरात्र के दौरान आपको हनुमान चालिसा के श्लोकों का जप और पाठ करना चाहिए। साथ ही अपने बाएं पैर से बच्चे के माथे पर सिंदूर का टीका लगाना चाहिए।
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मंत्र का जाप करें मिलेगा रोजगार
अगर आप बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश कर रहे है। तो ऐसे जातकों को भैरव बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना करने चाहिए। यह पूजा आपको नौकरी प्राप्ति में निश्चित रूप से सहयोग करेगा।
आर्थिक लाभ पाए राम प्रभु के नाम से
आर्थिक लाभ के चाहते है, तो गुप्त नवरात्र के 9 दिनों तक पीपल पेड़ के पत्ते पर राम प्रभु का नाम लिखें और उन्हें हनुमान मंदिर में समर्पित कर दें। ऐसा इससे आपके आर्थिक स्थिति में सुधार होने की पूरी संभावना है।
स्वस्थ्य जीवन जीने का है यह मंत्र
स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए गुप्त नवरात्र के दौरान 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप करें। यह आपकी अनेक बीमारियों को दूर कर स्वस्थ्य होने में सहायता करता है। आपका परिवार भी स्वस्थ्य रहेगा। यह मंत्र है ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा श्यामा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।
शादी के बाधा को दूर करेगा यह मंत्र
यदि किसी जातक को शादी में कोई समस्या उत्पन्न हो रही है। तो वैसे जातक मंदिर में जाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा के समक्ष जाकर प्रार्थना करने से बाल बन सकता है। नीचे लिखे मंत्र का 5 बार जाप करना चाहिए। ॐ शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंशनाय, पुरुषार्थ चतुष्ठाय लभाय च पति म देहि कुरु कुरु स्वहा।
गुप्त नवरात्र के दौरान दस महादेवी की दस महाविद्याओं की होती है पूजा
प्रथम दिवस मां काली
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा का विधान है। पूजा करते समय उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए। साथ ही काली हकीक माला से जप करना है।
इस दिन मां काली के साथ आप भगवान कृष्ण की पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा। ऐसा करने से जातक की किस्मत चमक जाएगी। शनि के प्रकोप से भी खत्म हो जाएगा।
नवरात्रि में पहले दिन मां काली को समर्पित होता हैं। वहीं बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी को समर्पित होते हैं और अंत के तीन दिन मां सरस्वति को समर्पित होते हैं। मां काली की पूजा में इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। मंत्र- क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा। ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा।
द्वितीय दिवस मां तारा
दूसरे दिन मां तारा की पूजा करनी चाहिए। मां तारा की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और संतानों की प्राप्ति होती है। इस दिन स्फटिक और नीले रंग की माला से जप करने हैं। पूजा करने का मंत्र है। मंत्र- ऊँ ह्रीं स्त्रीं हूं फट।
तृतीय दिवस मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी की होती है पूजा
गुप्त नवरात्र के तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी पूजा होती है। पूजा करने से अच्छे व्यक्ति व निखरे हुए रूप के लिये इस दिन मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा की जाती है। इस दिन बुध ग्रह के लिये पूजा की जाती है. इस दिन रूद्राक्ष की माला का जप करना चाहिए। मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरी
चतुर्थ दिवस मां भुवनेश्वरी की होती है पूजा
गुप्त नवरात्र के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी पूजा की जाती है। इस दिन मोक्ष और दान के लिए मां भुनेश्वरी की पूजा की जाती है। साथ ही विष्णु भगवान की पूजा करना काफी शुभ और मंगल होगा। चंद्रमा ग्रह संबंधी परेशानी अगर किसी व्यक्ति को है। वैसे व्यक्ति यह पूजा अवश्य करें। मां भुनेश्वरी मंत्र- ह्रीं भुवनेश्वरीय ह्रीं नम:। ऊं ऐं ह्रीं श्रीं नम:
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पंचम दिवस मां छिन्नमस्ता की होती है पूजा
गुप्त नवरात्रि के पांचवे दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा होती है। इस दिन पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और रोगों का नाश होता है। इस दिन रूद्राक्ष माला से मंत्र का जप करना चाहिए। किसी को अगर वशीकरण मंत्र को सिद्ध करना है, तो नीचे लिखे मंत्र का जप करना चाहिए। राहू ग्रह से संबंधी किसी भी परेशानी से छुटकारा भी मंत्र जप से मिल जाता है। इस दिन मां को पलाश के फूल जरूर चढ़ाना चाहिए। मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा।
षष्ठं दिवस मां त्रिपुर भैरवी पूजा होती है
गुप्त नवरात्र के छठे दिन महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन मां त्रिपुर भैरवी पूजा नजर दोष व भूत प्रेत संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए करनी चाहिए। मूंगे की माला से जप करें। मां के साथ बालभद्र की पूजा करना श्रेष्ठ और फलदाई होगा। इस दिन जन्मकुंडली में लगन में अगर कोई दोष है तो मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से दूर हो जाता है। मंत्र- ऊँ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा।
सप्तम दिवस मां धूमावती की पूजा की जाती है
गुप्त नवरात्र के सातवें दिन महाविद्यामां धूमावती की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करने से द्ररिता का नाश होता है। इस दिन हकीक की माला से जप करें। मंत्र- धूं धूं धूमावती दैव्ये स्वाहा।
अष्ट्रम दिवस बगलामुखी मां की पूजा होती है
गुप्त नवरात्र के आठवें दिन महाविद्या मां बगलामुखी की पूजा करने का विधान है। मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना करने से कोर्ट-कचहरी संबंधित मामले और नौकरी संबंधी परेशानी दूर हो जाती है।
इस दिन पीले कपड़े धारण कर हल्दी माला से जप करना है। अगर आप की कुंडली में मंगल संबंधी कोई परेशानी है तो मा बगलामुखी की पूजा करने से जल्द ठीक हो जाएगा। मंत्र है ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊँ स्वाहा।
नवम दिवस मां मतांगी की पूजा की जाती है
गुप्त नवरात्र के नौवें दिन महाविद्या मां मतांगी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान धरती की ओर मुख करके पूजा करें। मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुंह करके करनी चाहिए। इस दिन पूजा करने से प्रेम संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। बुद्धि और विवेक में वृद्धि के लिए मां मातंगी कि पूजा की जाती है। मंत्र- क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा।
दशम दिवस मां कमला की पूजा करें
गुप्त नवरात्र के दसवें दिन मां कमला की जाती है। मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुख करके करनी चाहिए। दरअसल गुप्त नवरात्रि के नौंवे दिन दो देवियों की पूजा होती है। मंत्र- क्रीं ह्रीं कमला ह्रीं क्रीं स्वाहा देवी के ‘नवार्ण मंत्र’, ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ अथवा ‘दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र’ से का पाठ करना चाहिए ।
मां दुर्गा है शक्ति के प्रतीक जानें कैसे
मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि मां दुर्गा इस मायावी जगत में शक्ति का संचार करती हैं।मां की आराधना के लिए साल में दो बार बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन किया जाता है, जो लगातार नौ दिनों तक उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। 9 दिनों तक मनाये जाने वाले इस शक्ति पर्व को नवरात्र कहा जाता है।
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इन दो नवरात्र को चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन साल में दो बार नवरात्र ऐसे भी आते हैं जिनमें मां दुर्गा की नौ रुपों की जगह दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
यह साधना और पूजन चैत्र और शारदीय नवरात्र से कठिन होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस साधना और पूजन के परिणाम बड़े आश्चर्यचकित करने वाले होते हैं। तंत्र विद्या में विश्वास रखने वाले तांत्रिकों के लिए दोनों गुप्त नवरात्र बहुत ही खास माने जाते हैं। कारण इस दौरान मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाती है। इसलिये इसे गुप्त नवरात्र भी कहा जाता है।
कब मनाये जातें हैं गुप्त नवरात्र
चैत्र माह और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो सभी लोग जानते हैं। जिसे वासंती और शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। जबकि दूसरी ओर गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं। गुप्त नवरात्र की अधिक जानकारी अधिकतर वैसे लोगों को होती है जो तंत्र और मंत्र की साधना करते हैं। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र मनाये जाते।
गुप्त नवरात्र के संबंध में क्या है पौराणिक कथा
गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों से मिलती है। कथा के अनुसार एक समय की बात है। ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे।
उसी समय भीड़ में से एक महिला हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि ऋषिवर मेरे पति दुष्टकर्मी हैं। दुष्ट पति के कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य, व्रत, उपवास आदि अनुष्ठान नहीं कर पाती है। मैं मां दुर्गा की शरण में जाना चाहती हूं।
लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां दुर्गा की कृपा नहीं मिल पा रही है। कृपा करके मेरा मार्गदर्शन करें। ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है।
महिला ने सुनाई ऋषि को अपना दुखड़ा
लोग इन दिनों नवरात्र से भलिभांति परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं। इन दिनों नवरात्र में 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन सुखमय हो जायेगा।
ऋषि के वचन को सुनकर महिला ने गुप्त नवरात्र करने का संकल्प लिया। ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की। उक्त महिला की श्रद्धा व भक्ति से मां दुर्गा प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हो गया। महिला का घर खुशियों से भर गया।
क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि
गुप्त नवरात्र के पूजा की विधि के संबंध में कहना है कि इसका भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत करने का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा तिथि को घटस्थापना करना चाहिए। इसके बाद प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है।
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दूसरी ओर तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की मंत्र साधना करते हैं। इन दस महाविद्याओं के तहत मां काली, भुनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, माता छिन्नमस्ता, माता ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मां मातंगी और माता कमला देवी की पूजा करनी चाहिए।
तंत्र मंत्र की साधना करें प्रशिक्षित संतों से
सभी साधकों से अनुरोध है कि तंत्र साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के दिशा-निर्देश या अपने गुरु के देख रेख में ही करें। अगर मंत्र साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रभाव प्रतिकूल पड़ने से साधक महासंकट में पड़ सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य डा. रामजी शुक्ला का कहना है कि नवरात्र साल में चार बार आती हैं। इसकी शुरुआत माघ महीने से होती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में प्रथम नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक रहती है। इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है।
तीसरा नवरात्र अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक रहती हैं। इसे गुप्त नवरात्र कहते हैं।
चौथी नवरात्र अश्वनी माह के शुक्ला पक्ष के प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक रहती है। इसे शारदीय नवरात्र कहते हैं।
गुप्त नवरात्र में होती मंत्र सिद्धी और मां दुर्गा की साधना
ज्योतिषाचार्यो का कहना है कि माघ माह और आषाढ़ माह में जो नवरात्रि आती हैं। उसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्र में विशेष रूप से मंत्र साधना एवं उपासना की जाती है।
तंत्र-मंत्र और यंत्र, के साधना और सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र का दिन विशेष मना जाता है। व्यवसाय में वृद्धि करना है, रोजगार में प्रगति करना है या रोग निवारण सहित अन्य मनोकामनाओं के पूर्ति हेतु गुप्त नवरात्र में साधना की जा सकती है।
गौरतलब है कि चैत्र नवरात्रि एवं शारदीय नवरात्र को सार्वजनिक रूप में मनाया जाता है। लेकिन गुप्त नवरात्र को सामान्य जन विशेष रूप से नहीं जानते हैं। लेकिन मंत्र-तंत्र साधना में गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व है। अनेक प्रकार से रात्रि में उनकी साधना की जाती है जिससे सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
तंत्र मंत्र की साधना करें रात्रि में
धर्म शास्त्रों के अनुसार दस महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए ऋषि विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ ने बहुत प्रयास किए परंतु उन्हें सिद्धियां प्राप्त नहीं हुई। अनंत काल की गणना करने और ध्यान की स्थिति में रहने पर दोनों ऋषियों को ज्ञान हुआ कि केवल गुप्त नवरात्रों में शक्ति के अनेक स्वरूपों को सिद्ध किया जा सकता है।
गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की होती है मंत्र साधना
गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अदुतिय शक्तियों के मालिक बन गए। अपने सिद्धियों के बल पर उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी।
इसी प्रकार रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की साधना की थी। गुरु शुक्राचार्य ने मेघनाद को सुझाव दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुल देवी मां निकुम्बाला कि साधना करके वह विश्व विजेता बनाने वाली शक्तियों का अधिकारी सकता है।
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क्या देवी साधना से ग्रह दोष का होगा निवारण: जानें समस्त ग्रहों को अनुकूल बनाने का उपाय
ऐसी मान्यता है कि यदि नास्तिक भी संयोगवस गुप्त नवरात्र के समय मंत्र साधना कर ले तो उसका भी फल सफलता के रूप में अवश्य ही मिलता है ।
घरों में भी कर सकते हैं तंत्र-मंत्र साधना
गुप्त नवरात्र की यही महिमा है। यदि आप मंत्र साधना और शक्ति साधना करना चाहते हैं। काम-काज की उलझनों के कारण साधना के नियमों का पालन सही ढंग से नहीं कर पाते तो, यह अवसर आपके लिए है। माता की कृपा पाने के लिए। गुप्त नवरात्रों में साधना के लिए आवश्यक न्यूनतम नियमों का पालन करते हुए मां दुर्गा शक्ति की मंत्र साधना करने चाहिए।
गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना करने से मनुष्य के सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गुप्त नवरात्र के संबंध में यह भी कहा जाता है कि इस कालखंड में की गई तंत्र मंत्र साधना निश्चित रूप से फलवती होती है। गुप्त नवरात्र के समय की जाने वाली तंत्र मंत्र साधना को गुप्त बनाए रखना बहुत ही जरूरी है । अपना मंत्र और देवी का स्वरुप गुप्त बनाए रखें । गुप्त नवरात्र में तंत्र मंत्र साधना का काम आसानी से घरों में ही किया जा सकता है।
मंत्र साधना का उचित समय गुप्त नवरात्र
महाविद्याओं की साधना के लिए यह सबसे अच्छा समय होता है गुप्त नवरात्र। गुप्त नवरात्र में चामत्कारिक शक्तियां प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ समय होता है। धार्मिक और पौराणिक नजर से हम सभी जानते हैं कि नवरात्र देवी दुर्गा की स्तुति और शक्ति साधना की शुभ घड़ी है।
क्या है वैज्ञानिक कारण
गुप्त नवरात्र में तंत्र मंत्र और शक्ति साधना के पीछे छुपा संसारिक पक्ष ऐसा है कि नवरात्र के समय मौसम में बदलाव का होता है।
आयुर्वेद के अनुसार इस बदलाव से जहां शरीर में कफ, पित्त और वात में दोष पैदा हो जाते हैं। बाहरी वातावरण में रोगाणु और जीवाणु जो अनेक बीमारियों का कारक हैं। सुखी और स्वस्थ्य जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।
नवरात्र के विशेष दिनों में देवी दुर्गा की उपासना करने से खान-पान, रहन-सहन पर असर पड़ता है। देव पूजन करते समय अपनाए गए संयम और अनुशासन तन और मन को शक्ति प्रदान करने के साथ ही ऊर्जा देने का काम भी करता हैं। जिससे फलस्वरूप मनुष्य निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है।
गुप्त नवरात्र में शिव और दुर्गा की करें पूजन
मां दुर्गा शक्ति और तंत्र मंत्र साधना की साक्षात देवी है। दुर्गा शक्ति में विनाश का भाव भी जुड़ा है। यह दमन या अंत करता है। शरीर के शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग आदि विकारों का ये सभी हमारे जीवन में अड़चनें पैदा करने हैं और हमारे सुख-चैन छीन लेते हैं।
इन मंत्रों का करें जाप
इन्हीं सभी कारणों को खत्म करने के लिए मां दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का अनुष्ठान किया जाता है। देवी उपासना के विशेष काल में मंत्र जाप करने से शत्रु, रोग, दरिद्रता, भय और बाधा दूर करने वाला माना गया है। सभी’नवरात्र’ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है गुप्त नवरात्र। ‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’।
देवी पुराण में क्या है वर्णन
देवी पुराण में कहा गया है कि एक वर्ष में चार बार नवरात्र मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों तक सारा परिवेश श्रद्धा व भक्ति, धार्मिक संगीत के रंग से रंग जाता है। गुप्त नवरात्र धार्मिक आस्था के साथ नवरात्र भक्तों को आपसी एकता, सौहार्द, भाईचारे के प्रेम सूत्र में बांधकर उनमें सद्भावना जागृत करता है।
शक्ति ग्रंथो में गुप्त नवरात्रों का बड़ा ही माहात्म्य बताया गया है । मनुष्य के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई व्रत और त्योहार नहीं हैं।
इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
दुर्गावरिवस्या ग्रंथ में लिखा है माघ नवरात्र का वर्णन
दुर्गावरिवस्या नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में माघ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं, जबकि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना और आराधना करने वाले व्यक्ति को सभी तरह के सुख और समृद्धि प्राप्त होते हैं।
शिव संहिता में मिलता है गुप्त नवरात्र का वर्णन
शिवसंहिता ग्रंथ के अनुसार यह नवरात्र भगवान शिव और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए श्रेष्ठ दिन हैं। गुप्त नवरात्रों के दौरान साधना समय में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान और मंत्रों का जाप करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं खत्म होने लगती हैं।
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥
देवी भागवत पुराण में 10 विद्यायों का है उल्लेख
देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं। शारदीय नवरात्र और बसंती नवरात्र में जिस प्रकार देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की मंत्र साधना की जाती है।
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गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियमों के पालन करने के साथ ही व्रत और साधना भी करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
इन देवियों की करें पूजा होगा लाभ ही लाभ
गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या अर्थात तंत्र साधना करने के लिए मां काली, मां तारा देवी, माता त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मां मातंगी और माता कमला देवी की पूजा विधि विधान और पूरी निष्ठा से करते हैं।
मान्यता है कि नवरात्र में महाशक्ति की पूजा कर श्रीराम ने अपनी खोई हुई शक्ति पाई थी। इसलिए इस समय आदिशक्ति की आराधना पर विशेष बल दिया जाता है।
*आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि के अनसुलझे पहलू -
गुप्त नवरात्रि को "गुप्त" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके कई रहस्य और विधियां आज भी आम लोगों से छिपी हुई हैं। शास्त्रों में इसका जिक्र बहुत कम मिलता है, इसलिए कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
*1. 10 महाविद्या साधना का रहस्य*
सामान्य नवरात्रि में हम 9 देवियों की पूजा करते हैं। लेकिन गुप्त नवरात्रि का संबंध 10 महाविद्याओं से जोड़ा जाता है। काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। इनकी साधना तांत्रिक विधि से होती है। लेकिन आम गृहस्थ इनका सही मंत्र, यंत्र और विधि नहीं जानता। क्या इनकी पूजा घर पर की जा सकती है या गुरु अनिवार्य है, इस पर मतभेद है।
*2. घट स्थापना के गुप्त नियम*
कुछ मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में कलश की स्थापना रात्रि में की जाती है, जबकि अधिकतर लोग दिन में करते हैं। कलश पर कौन सा यंत्र रखा जाए, जौ कितनी गहराई में बोएं, और अखंड ज्योति में कौन सा तेल डालें, इसको लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। इस बार 2027 में त्रिपुष्कर योग पड़ रहा है, तो क्या स्थापना का समय बदल जाएगा, इसका स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता।
*3. फल और सिद्धि का प्रमाण*
कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में किया गया एक जप 100 गुना फल देता है। लेकिन यह फल किसे, कैसे और कब मिलता है, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। कई साधक सालों तक साधना करते हैं फिर भी उन्हें मनचाही सिद्धि नहीं मिलती।
*4. व्रत के नियम में भिन्नता*
कुछ जगह 9 दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, कुछ जगह फलाहार। कुछ लोग नमक बिल्कुल नहीं खाते, कुछ सेंधा नमक लेते हैं। सही नियम क्या है, यह क्षेत्र और परंपरा पर निर्भर करता है।
इसीलिए गुप्त नवरात्रि आज भी रहस्यों से भरी है। इसे करने से पहले योग्य गुरु से मार्गदर्शन लेना सबसे जरूरी माना जाता है।
*5 महत्वपूर्ण प्रश्न और सटीक उत्तर
*प्रश्न 1: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2027 की घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?*
उत्तर: 4 जुलाई 2027 रविवार को घट स्थापना होगी। त्रिपुष्कर योग और आडल योग के कारण इस दिन प्रातः काल में कलश स्थापित करना सर्वोत्तम माना जाएगा। सटीक मुहूर्त के लिए अपने स्थान के पंचांग से अभिजीत मुहूर्त देखें।
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*प्रश्न 2: गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या अंतर है?*
उत्तर: सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की सार्वजनिक पूजा होती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की तांत्रिक साधना की जाती है। यह साधना गुप्त रूप से की जाती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इसका फल बहुत जल्दी प्राप्त होता है।
*प्रश्न 3: त्रिपुष्कर योग और आडल योग का क्या महत्व है?*
उत्तर: जब रविवार को तीन तिथियां एक साथ पड़ें तो त्रिपुष्कर योग बनता है। आडल योग में किए गए कार्य बार फल देते हैं। इस बार घट स्थापना इन्हीं योगों में पड़ रही है, इसलिए इस दिन किया गया दान, जप और संकल्प अक्षय फल देता है।
*प्रश्न 4: गुप्त नवरात्रि में कौन से उपाय करने चाहिए?*
उत्तर: दुर्गा सप्तशती का पाठ, कनकधारा स्तोत्र, महाविद्या मंत्र का जप और लाल वस्त्र, चुनरी अर्पित करें। नौ दिनों तक जमीन पर सोएं और सात्विक भोजन करें। तंत्र बाधा से मुक्ति के लिए मां कालरात्रि की पूजा करें।
*प्रश्न 5: क्या गुप्त नवरात्रि में कन्या पूजन होता है?*
उत्तर: हां, अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष विधान है। 2 से 10 वर्ष तक की 9 कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार दें। इससे मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं।
*डिस्क्लेमर - *
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के आधार पर दी गई है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2027 की तिथियां, घट स्थापना का समय, त्रिपुष्कर योग और आडल योग का विवरण विभिन्न पंचांगों में थोड़ा बहुत भिन्न हो सकता है। पूजा पाठ, व्रत और अनुष्ठान करने से पहले अपने स्थानीय विद्वान, पंडित या कुल पुरोहित से परामर्श अवश्य कर लें।
यहां बताए गए मंत्र, उपाय और विधियां श्रद्धा और विश्वास के लिए हैं। इनका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। किसी भी तांत्रिक साधना को योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना न करें।
स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या के लिए देवी उपाय के साथ डॉक्टर की सलाह भी लें। लेख में दिए गए सुझावों का पालन आप अपनी समझ और जिम्मेदारी पर करें। लेखक और प्रकाशक किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है। सभी धर्मों और मान्यताओं का सम्मान करें।
