07 जुलाई 2029, दिन शनिवार को आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी व्रत है।07 जुलाई 2029, शनिवार को योगिनी एकादशी। त्रिपुष्कर योग, विडाल योग सहित सटीक मुहूर्त, पारण समय, व्रत लाभ और आध्यात्मिक महत्व।
सावधान! विडाल योग और शनिवार की एकादशी: 09 बातें जो भूलकर भी न करें – त्रिपुष्कर योग का करें सही उपयोग
क्या आप जानते हैं कि 07 जुलाई 2029, शनिवार का दिन आपकी ज़िंदगी बदल सकता है? इस दिन सिर्फ योगिनी एकादशी ही नहीं, बल्कि दुर्लभ त्रिपुष्कर और चुनौतीपूर्ण विडाल योग भी बन रहे हैं। यह वह अवसर है जब आध्यात्मिक उन्नति, मन की शांति और सांसारिक सफलता एक साथ मिल सकती है – लेकिन केवल तभी, जब आप सही मुहूर्त और नियमों को जानें।
योगिनी एकादशी को 'पापों का नाश करने वाली एकादशी' कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और जागरण करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मानो साधना की सारी शक्तियाँ एक होकर उसकी रक्षा करती हैं। लेकिन साथ ही इस दिन विडाल योग (बिल्ली योग) भी है – जो संकेत देता है कि लालच, छल और बेईमानी से बचें। वहीं त्रिपुष्कर योग सिद्धियों का द्वार खोलता है।
इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप इस दिन का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं – सही समय, सही दान, सही भोजन और सही संकल्प के साथ। चाहे आप मानसिक शांति चाहते हों, आर्थिक तंगी दूर करनी हो, या आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूना चाहते हों – योगिनी एकादशी आपके लिए स्वर्ण अवसर लेकर आई है।
मोहिनी एकादशी के दिन ये 09 काम भुलकर भी न करें
*01. कांसे या लोहे के बर्तन में भोजन करना और पानी पीना मना है।
*02. मांसाहारी भोजन वर्जित है।
*03. मसूर की दाल न खाएं
*04. चने का साग नहीं खाना चाहिए। साथ ही इस दिन किसी प्रकार के साग खाने से बचना चाहिए।
*05. कोदो का साग भी नहीं खाना चाहिए
*06. मधु (शहद) का सेवन वर्जित है।
*07. दूसरे से मांग कर लाए गए अन्न नहीं खाना चाहिए
*08. व्रत के दिन एक बार भोजन करना चाहिए। दूसरी बार करना सख्त मना है
*09. स्त्री प्रसंग नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य रहना चाहिए।
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवन श्रीकृष्ण से पूछा आप ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत का माहात्म्य हमें सुना दिया।
करके हमें आषाढ़ कृष्ण एकादशी व्रत की कथा सुनाइए। उस एकादशी व्रत का नाम क्या है? इसका माहात्म्य क्या है? हमें विस्तार से बताइए।
श्रीकृष्ण कहा कि धर्मराज युधिष्ठिर आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है।
योगिनी एकादशी व्रत करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह एकादशी पृथ्वी लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। योगिनी एकादशी व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मैं पुराणों में वर्णित योगिनी एकादशी कथा सुनाता हूं। ध्यान देकर सुनो।
योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा
हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तोड़कर तो ले आया परन्तु कामा-वासना से युक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री के संग हास्य-विनोद तथा रमण करने लगा।
दूसरी ओर राजा कुबेर उसकी दोपहर तक राह देखते रहे। अंत में राजा कुबेर ने सेवकों से कहा कि तुम लोग जाकर माली हेम के पास जाकर न आने का कारण पता करो। वह अभी तक फूल लेकर नहीं आया।
राजा कुबेर के शाप से माली हेमा का स्वर्ग से पलायन होकर वह उसी क्षण पृथ्वी पर आ गिरा। पृथ्वी लोक पर आते ही उसके शरीर श्वेत कोढ़ से भर गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अंतर्ध्यान हो गई। मृत्युलोक में आकर माली ने महान दु:ख भोगे, भयानक जंगल में जाकर बिना अन्न और पानी के चारों ओर भटकता रहा।
हेमा माली को देखकर ऋषि मारर्कंडेय ने पूछा कि तुमने ऐसा कौन-सा महापाप किया है, जिसके कारण तुम्हारा यह हालत हो गया है। हेम माली ने सारा वृत्तांत ऋषि मार्कण्डेय को कह सुनाया। सारी बातें सुनकर मार्कण्डेय ऋषि बोले- यह सत्य है तूने मेरे सामने सत्य वचन कहा हैं। इसलिए मैं तेरे उद्धार के लिए एक व्रत बताता हूं।
योगिनी एकादशी की दूसरी व्रतकथा
योगिनी एकादशी व्रत काफी प्रचलित है। पौराणिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ही योगिनी एकादशी व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है।
महाभारत काल की बात है कि एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण से पूछा हमें सारे पापों को नष्ट करने के लिए कौन सा एकादशी व्रत करना होगा। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की मोहिनी एकादशी करने से सारे पाप नष्ट हो जाएंगी
भगवान श्री कृष्ण ने कि योगिनी एकादशी के दिन विधिवत उपवास रखता है। प्रभु की पूजा करता है। उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। वह अपने जीवन काल में तमाम सुख-सुविधाओं और भोग-विलास का आनंद लेता हैं। अंत समय में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी व्रत व पूजा विधि
योगिनी एकादशी के उपवास की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि बेला से ही हो जाती है। व्रती को दशमी तिथि की रात्रि से ही मांसाहारी भोजन का त्याग कर शाकाहारी भोजन खाने चाहिेए। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन जरूर करें। अगर संभव हो सके तो जमीन पर ही सोना चाहिए।
प्रात:काल उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। फिर कुंभस्थापना कर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा कर उनकी पूजा-अर्चना करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान करवाकर नुतन वस्त्र पहनकर भोग लगायें।
पुष्प, मौसमी फल, विभिन्न प्रकार के व्यंजन, धूप, दीप आदि से पूजन कर अंत में आरती उतारें। पूजा खुद भी कर सकते हैं। किसी आचार्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। पूजा के दौरान योगिनी एकादशी की कथा भी जरुर सुननी चाहिये।
एकादशी के दिन गरीब और ब्राह्मणों को यथा शक्ति दान करना बहुत कल्याणकारी होता है। पीपल वृक्ष की पूजा एकादशी के दिन जरूर करनी चाहिये। पीपल के वृक्ष पर भगवान विष्णु का वास रहता है
भगवान कृष्ण ने कहा कि धर्मराज युधिष्ठिर यह योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है। इस व्रत करने से सभी प्रकार के पाप दूर हो जाते हैं और अंत में जातक को स्वर्ग प्राप्त हो जाता है।
1. शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी
07 जुलाई 2029, शनिवार को आषाढ़ कृष्ण एकादशी योगिनी एकादशी व्रत है।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 06 जुलाई 2029 को संध्या 05:11 बजे।
समाप्त: 07 जुलाई 2029 को रात 07:16 बजे। तक
व्रत का मुख्य दिन 07 जुलाई को सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक रहेगा।
त्रिपुष्कर योग शाम 06:20 से 05:06 सुबह तक – इस अवधि में दान, स्नान, जप अति फलदायी।
विडाल योग दोपहर 12:05 से 02:30 तक – इस दौरान भोजन त्याग कर ध्यान-मौन रहना श्रेष्ठ।
व्रत का पारण (समापन) 08 जुलाई को प्रातः 06:12 से 08:45 के बीच करें।
शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है, अतः तिल, काले तिल, उड़द दान से विशेष लाभ।
सुबह 4-6 बजे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान करें।
दान का समय: सुबह 7-8 बजे। गरीबों, गाय, कौवे को भोजन अर्पित करें। यह योग समृद्धि और संकट नाशक माना गया है।
4. वैज्ञानिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, आर्थिक विवेचना
वैज्ञानिक: एकादशी का उपवास पाचन तंत्र को आराम देता है। 24 घंटे का आहार विराम शरीर को डिटॉक्स करता है, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। त्रिपुष्कर योग में वायुमंडलीय आयन संतुलन बेहतर होता है, जिससे मस्तिष्क शांत रहता है।
सामाजिक: यह व्रत परिवार और समाज में आत्म-अनुशासन, सहानुभूति बढ़ाता है। दान-पुण्य की परंपरा गरीबों तक भोजन पहुँचाती है। स्त्रियाँ विशेष रूप से पूरे परिवार के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं।
आध्यात्मिक: योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को प्रिय है। त्रिपुष्कर योग में जप-तप का फल हजार गुना बढ़ जाता है। विडाल योग सांकेतिक है – यह हमें छल-कपट से बचने की शिक्षा देता है।
आर्थिक: अनाज, कपड़ा, बर्तन दान से समाज के निर्धनों की आर्थिक सहायता होती है। व्रत के कारण बाजार में फल, दूध, व्रतिक सामग्री की खरीदारी बढ़ती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
5. अनसुलझे पहलुओं की जानकारी
योगिनी एकादशी से जुड़े कई ऐसे प्रश्न हैं जिनके स्पष्ट उत्तर पुराणों में नहीं मिलते। पहला – क्या यह व्रत सिर्फ स्त्रियों के लिए है? कई जगह इसे "स्त्री व्रत" कहा गया, परंतु महाभारत में युधिष्ठिर ने पुरुष के रूप में इसकी विधि पूछी थी। दूसरा – त्रिपुष्कर योग के ठीक समय पर भी मतभेद हैं। कुछ पंचांग सूर्योदय से पूर्व, कुछ पश्चात का समय देते हैं।
तीसरा – विडाल योग को लेकर भ्रम: क्या इस योग में व्रत रखना निषिद्ध है? कुछ ग्रंथ कहते हैं कि विडाल योग में दिया गया दान व्यर्थ हो जाता है, परंतु एकादशी व्रत को पूज्य मानते हैं। चौथा – कौन से कष्ट वास्तव में दूर होते हैं? इसका प्रमाण अध्यात्म में मिलता है, न कि प्रयोगशाला में। पांचवां – आषाढ़ कृष्ण एकादशी का पारण अगले दिन क्यों नहीं? अन्य एकादशियों से इसका अंतर स्पष्ट नहीं है।
6. पांच प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1: योगिनी एकादशी का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: यह व्रत काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे मानसिक विकारों को नष्ट कर मोक्ष का द्वार खोलता है। साथ ही संतान सुख, आरोग्य और धन प्राप्ति होती है।
प्रश्न 2: त्रिपुष्कर योग क्या है?
उत्तर: जब एक ही दिन रविवार, एकादशी तिथि और पुष्कर नक्षत्र या द्वादशी तिथि एक साथ हो, तो त्रिपुष्कर योग बनता है। 07 जुलाई 2029 को यह सुबह 6:20 से 8:15 तक रहेगा। इस योग में जप-तप, दान, स्नान अत्यंत फलदायी होता है।
प्रश्न 3: विडाल योग में क्या न करें?
उत्तर: विडाल योग का अर्थ है 'बिल्ली योग' – इस समय मीठा बोलकर छल करना, झूठा दिखावा, दूसरों की निंदा, बिना मांगे सलाह देना, और बचे हुए भोजन का दान करना वर्जित है। मौन रहना सबसे उत्तम है।
प्रश्न 4: क्या सिर्फ पानी ले सकते हैं?
उत्तर: हां, निर्जला एकादशी रख सकते हैं। यदि कमजोरी हो तो फलाहार (साबूदाना, मूंगफली, फल, दूध) करें। चावल, गेहूं, मसूर दाल वर्जित है।
प्रश्न 5: यह व्रत किस भगवान को समर्पित है?
उत्तर: यह व्रत भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। इस दिन 'क्षीरसागर शयन' ध्यान करना चाहिए और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना चाहिए।
अस्वीकार (Disclaimer)
इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों, लोक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। योगिनी एकादशी, त्रिपुष्कर योग, विडाल योग और शुभ मुहूर्त से संबंधित समय और तिथियाँ विभिन्न स्रोतों (जैसे दिग्दर्शन पंचांग, काशी पंचांग, ईस्टर्न पंचांग) में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। कृपया अपने स्थानीय पंडित या वैदिक कैलेंडर से सटीक समय की पुष्टि कर लें।
यह ब्लॉग किसी प्रकार का चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सलाह नहीं है। उपवास या व्रत करने से पहले अपने स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखें। गर्भवती महिलाएँ, रोगी, बुजुर्ग एवं बच्चे डॉक्टर या गुरुजन से सलाह लें।
लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक या भौतिक हानि के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे। सभी योग फल और मुहूर्त मान्यता पर आधारित हैं; इनका वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक स्थापित नहीं है। यह ब्लॉग केवल जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी व्रत या अनुष्ठान को करने का अंतिम निर्णय पाठक की व्यक्तिगत आस्था और विवेक पर निर्भर होगा।
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