शारदीय नवरात्रि 2026: मां दुर्गा हाथी पर आयेगी और जायेगी डोली पर
byRanjeet Singh-
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"जानें शारदीय नवरात्रि 2026 में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और प्रस्थान करेगी डोली पर, श्लोक, वैज्ञानिक-सामाजिक प्रभाव और अनसुलझे सवालों के जवाब। पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर"
"शारदीय नवरात्रि 2026: मां दुर्गा के आगमन-प्रस्थान का रहस्य और समग्र प्रभाव"
"आओ पधारो मां, सवारी कर तू हाथी..." - यह पंक्ति सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि शारदीय नवरात्रि के आध्यात्मिक विज्ञान का द्वार खोलती है। शारदीय नवरात्रि 2026, 11 अक्टूबर रविवार से 20 अक्टूबर मंगलवार तक, सनातन संस्कृति का वह पावन पर्व है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं मां दुर्गा के नौ रूपों में प्रकट होती हैं। इस वर्ष मां की सवारी क्या संकेत देती है? उनके आगमन और प्रस्थान का श्लोक क्या है? और यह नवरात्रि हमारे वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक जीवन को कैसे प्रभावित करेगी? आइए, इन रहस्यों को समझते हुए नवरात्रि की गहराई में उतरें।
"मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान: सवारी का रहस्य"
*सनातन धर्मशास्त्रों के अनुसार, देवी दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी वर्ष के अनुसार बदलती है, जो आने वाले समय के लिए संकेत देती है।
*शारदीय नवरात्रि 2026 के लिए:
*आगमन (प्रतिपदा - 11 अक्टूबर 2026): मान्यताओं के अनुसार, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा।
*प्रस्थान (दशमी - 20 अक्टूबर 2026): मां का प्रस्थान पालकी में होगा।
*सवारी का शुभाशुभ फल:
*हाथी पर आगमन शुभ माना जाता है। यह समृद्धि, ऐश्वर्य, शक्ति और ज्ञान का संकेत देता है। हाथी गजलक्ष्मी का वाहन है, अतः इस वर्ष आर्थिक समृद्धि के योग बन सकते हैं। हालांकि, पालकी में प्रस्थान को कुछ मान्यताओं में अशुभ माना जाता है, जो आने वाले समय में चुनौतियां ला सकता है। परंतु यह ध्यान रखें कि यह केवल एक ज्योतिषीय आकलन है, भाग्य निर्माता तो हम स्वयं हैं।
*आगमन और प्रस्थान का श्लोक
*पारंपरिक रूप से नवरात्रि के आरंभ में मां के आगमन के लिए निम्न श्लोक पढ़ा जाता है:
*आगमन श्लोक:
"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
आगच्छ वरदे देवि दिव्यलोकादिह स्थिरा।
सवारीषु विभूषित्वा संतानं देहि मे शुभम्।।"
प्रस्थान (विसर्जन) श्लोक:
"गच्छ पुण्ये गिरौ देवि लोकानुग्रहकारिणि।
पुनरागमनायैव कुरु क्षणमिह स्थितिम्।।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरी।।"
"वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक प्रभाव"
+01. वैज्ञानिक प्रभाव:
·*जलवायु परिवर्तन: नवरात्रि शरद ऋतु के संधिकाल में आती है। इस समय व्रत-उपवास शरीर को मौसमी बीमारियों के लिए तैयार करते हैं।
*आहार विज्ञान: सात्विक आहार पाचन तंत्र को दुरुस्त कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
*02. सामाजिक प्रभाव:
*सामुदायिक सद्भाव: पूजा, गरबा और भंडारे सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।
*सांस्कृतिक पुनर्जागरण: नृत्य, संगीत और पारंपरिक वस्त्रों के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना।
*03. आर्थिक प्रभाव:
*आत्मनिर्भरता की ओर: 'मेक इन इंडिया' और स्थानीय उत्पादों (खादी, मिट्टी के दीए, हस्तशिल्प) को बढ़ावा।
*पर्यटन एवं रोजगार: दुर्गा पूजा पंडाल, मेले और आयोजनों से पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों को गति।
*04. आध्यात्मिक प्रभाव:
*आत्म शोधन का समय: नौ दिन का व्रत, ध्यान और जप मन को शांत कर आंतरिक शक्ति का विकास करते हैं।
*सकारात्मक ऊर्जा का संचार: मंत्रों के कंपन और सामूहिक पूजा का वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव।
"प्रश्नोत्तरी" (FAQ)
प्रश्न *01: क्या सवारी का फल सभी के लिए समान होगा?
*उत्तर:नहीं, यह एक सामान्य संकेत है। व्यक्तिगत कर्म और प्रयास प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न *02: नवरात्रि में कलश स्थापना का सही समय क्या है?
*उत्तर:2026 में 11 अक्टूबर को प्रातः 06:13 बजे से 10:30 बजे तक अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना शुभ रहेगी।
प्रश्न *03: क्या नौ दिनों तक अन्न नहीं खाना चाहिए?
*उत्तर:पूर्ण उपवास स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। फलाहार या एक समय भोजन भी पर्याप्त है। अति से बचें।
प्रश्न *04: दुर्गा सप्तशती का पाठ कब करना चाहिए?
*उत्तर:प्रतिदिन पूजा के बाद या कम से कम नौवें दिन (नवमी) सम्पूर्ण पाठ अवश्य करें।
"अनसुलझे पहलुओं पर विमर्श"
*01. सवारी का सटीक प्रभाव: क्या सवारी का फल वैश्विक स्तर पर होता है या व्यक्तिगत स्तर पर? इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
*02. ऊर्जा का मापन: माना जाता है कि नवरात्रि में पृथ्वी पर दिव्य ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। क्या इस ऊर्जा को वैज्ञानिक उपकरणों से मापा जा सकता है?
*03. मूर्ति विसर्जन और पर्यावरण: पारंपरिक विसर्जन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए
"डिस्क्लेमर"
*यह ब्लॉग सामान्य जानकारी, पारंपरिक मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की ज्योतिषीय भविष्यवाणी या निश्चित फलादेश नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या निर्णय से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें और आवश्यकता हो तो विशेषज्ञ से सलाह लें। लेखक किसी भी प्रकार के हानि-लाभ के लिए उत्तरदायी नहीं है।
आप सभी को शारदीय नवरात्रि 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां दुर्गा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दें।