"वर्ष 2030 को पड़ने वाला मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। कारण 14 जनवरी सुबह 09:28 बजे पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करने के बाद ही मकर संक्रांति मनाया जाता है"।
मकर संक्रांति 2030 का अद्भुत संयोग: सर्वार्थ सिद्धि योग, सूर्य ग्रहण और पुण्यकाल का रहस्य
14 जनवरी 2030 का दिन सोमवार भारतीय सनातन परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। इस दिन के लगभग 03:36 बजे पर बजे सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। हिंदू धर्म में यह पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं बल्कि अंधकार से प्रकाश, आलस्य से कर्म और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।
नीचे दिए गए विषयों पर विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर
*मकर संक्रांति के दिन ही अवतरित हुई थी गंगा
*भगवान विष्णु ने मकर संक्रांति के दिन असुरों का किया था वध
*मकर सक्रांति के दिन माता यशोदा ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए रखी थी व्रत
*पितरों को करें तिल से तर्पण, मिलेगी मुक्ति
*किस प्रदेश में किस नाम से जाना जाता है मकर संक्रांति
*मकर संक्रांति इन देवताओं का करें पूजन
*तिल खाने के औषधीय गुण
*मकर संक्रांति के संबंध में पौराणिक कथा
*गुड़ सेहत के लिए है लाभदायक
*चूड़ा में पाये जाते हैं कार्बोहाइड्रेट
*भगवान भास्कर को खिचड़ी का भोग लगाना शुभ
*मकर संक्रांति के दिन सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा पूरा करती है
*तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई थी
*मकर संक्रांति के दिन कैसे करें पूजा, जानें विधि
*मकर सक्रांति के दिन किस चीजों का करें दान
*मकर सक्रांति के दिन चंद्रमा और सूर्य मकर राशि में
*पूजा और तर्पण करने का शुभ मुहूर्त
*और कुछ ज्यादा जानें मकर सक्रांति के बारे में
*पौष मास में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं
*साल भर में सूर्य 12 राशियों प्रवेश करते हैं
मकर संक्रांति के दिन से क्या होता है
*01.सूर्य को मकर राशि में प्रवेश करने के बाद दिन बड़ा और रात छोटा होने लगता है
*02.उसी प्रकार सूर्य जब कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो दिन बड़ा और रात छोटा होने लगता है
*03.पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार मकर सक्रांति के दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं। शनि देव मकर संक्रांति के देवता है। इसलिए इस दिन को मकर सक्रांति कहा जाता है।
*04.शनि देव को मकर और कुंभ राशि के स्वामी माना जाता है। जिस कारण से यह दिन पिता और पुत्र के अनोखे मिलन को दर्शाता है। कई जगहों पर इस त्यौहार को नई फसल और नई ऋतु के आगमन के तौर पर मनाया जाता है।
*05.मकर संक्रांति के दिन पिता सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने जाते हैं। कहा जाता है कि पिता सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से नाराज चल रहे थे। नाराजगी दूर करने के लिए भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव के घर गए थे।
*06.पौराणिक कथा के अनुसार अगर पिता पुत्र के बीच में किसी प्रकार की नाराजगी हो और अगर पिता अपने बेटे के घर मकर सक्रांति के दिन पहुंच जाएं तो पुत्र का सौभाग्य जाग जाता है।
*07.वर्ष 2029 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा मकर संक्रांति कथा के विषय में महाभारत में भी वर्णन मिलता है। इसी दिन भीष्म पितामह ने प्राण त्यागे थे।
*08.मकर संक्रांति के दिन पितरों के उद्धार के लिए तिल से तर्पण करना शुभ होता है, क्योंकि महाराजा भागीरथ ने भी अपने पितरों के उद्धार के लिए इसी दिन तर्पण किया था। भगवान सूर्य देव सूर्योदय के समय धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
*09.इस दिन भगवान सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाने की परंपरा है। परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन तिल से बने तिलकुट, चूड़ा, गुड़ और खिचड़ी खाने के साथ पतंग उड़ाने का भी विधान है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन प्रयास और गंगासागर में स्नान का विशेष महत्व है।
*10.जब सूर्य देव दक्षिणायन की ओर जाते हैं, अर्थात अशुभ। दक्षिण दिशा को यम का वास या यम के द्वार माना जाता है। नरक के द्वार पहुंचते ही यमदूत मृत आत्मा को लेने आते हैं। उत्तर दिशा स्वर्ग का द्वार माना जाता है। जहां, मृत आत्मा को लेने देवदूत आते हैं।
*11.वर्ष को दो भागों में बांटा गया है, उत्तरायण और दक्षिणायन। मकर संक्रांति के दिन सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा को पूरा करता है और उत्तर की ओर अग्रसर हो जाते हैं। इसलिए इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा की ओर गतिमान हो जाते हैं। दक्षिणायन दिशा को दानव, दुष्ट और दुराचारियों का दिशा कहा जाता है जबकि उत्तरायण दिशा को देवताओं का दिशा माना जाता है। इसी दिशा में स्वर्ग लोक है।
संक्रांति कथा के विषय में महाभारत में भी वर्णन मिलता है। महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार महाभारत युद्ध के महान योद्धा और कौरव सेना के सेनानायक गंगापुत्र भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। संक्रांति की महत्ता को जानते हुए उन्होंने अपनी मृत्यु के लिए इसी दिन को निर्धारित किये थे।
वे जानते थे कि सूर्य दक्षिणायन होने पर व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है और उसे इस मृत्युलोक में पुनः जन्म लेना पड़ता है। महाभारत युद्ध के बाद जब सूर्य उत्तरायण हुआ तभी पितामह ने अपना प्राण त्यागे। वह दिन मकर संक्रांति था।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर राजा भागीरथ के पीछे पीछे कपिल मुनि के आश्रम होते हुए गंगासागर तक पहुंची थी।
मकर सक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। श्रीहरि ने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इस प्रकार यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
यशोदा मां ने श्रीकृष्ण जन्म के बाद, प्राप्ति लिए व्रत रखी थी। उस समय भगवान सूर्य उत्तरायण काल में पदार्पण कर रहे थे और उस दिन मकर संक्रांति थी। तभी से मकर सक्रांति व्रत का प्रचलन हुआ है। कहा जाता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई थी। इसलिए इसका प्रयोग करने से पापों से मुक्ति मिलती है। तिल का उपयोग से शरीर निरोग रहता है और शरीर में गर्मी आती है।
मकर संक्रांति के दिन पितरों को तिल से तर्पण करना काफी शुभ होता है। इसी दिन महाराजा भागीरथ में अपने पितरों के लिए तर्पण किया था। तर्पण विधि पूर्वक करनी चाहिए, क्योंकि भगवान सूर्य सूर्योदय के समय धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस लिए सूर्योदय के समय ही पितरों को तर्पण करनी चाहिए। इसी दिन भगवान सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मकर संक्रांति पर्व अलग-अलग तरह से मनाये जाते हैं। आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में संक्रांति कहा जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में लोग मनाते है। पंजाब और हरियाणा में लोहरी, असम में बिहू। मध्य भारत सहित बिहार और यूपी में मकर संक्रांति के नाम से प्रचलित है।
मकर संक्रांति के दिन भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान गणेश, आदि शक्ति माता और सूर्य आराधना करने का दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मकर सक्रांति के दिन तिल खाने, लगाने और स्नान करने का धार्मिक, अध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। जानें तिल में और कौन-कौन से औषधीय गुण है। तिल में कई तरह के पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कैल्शियम, काम्प्लेक्स बी, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। तिल में मोनो सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है।
यह शरीर में बुरे केलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छा केलेस्ट्रॉल को बनाने में मदद करता है। यह ह्रदय रोग, दिल का दौरा और अथेरोक्लेरोसिस की संभावना को कम करता है। आयुर्वेद में तिल मधुमेह, कफ, पीत कारक, निम्न रक्तचाप में लाभ, स्तनों में दूध उत्पन्न करने वाला, गठिया, मल रोधक और वात नाशक माना जाता है। तिल की तासीर गर्म होता है। इसका सेवन सर्दियों में करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
गुड़ का तासीर गर्म है। गुड़ में लवण, मैग्नेशियम, आयरन, विटामिन ए, बी, लौह तत्व, पोटेशियम, गंधक, फासफोरस और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। गुड़ खाने से मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है।
मकर संक्रांति के दिन तिलकुट और गुड़ के साथ चूड़ा का भी सेवन किया जाता है। चूड़ा में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी, मैंगनीज, फास्फोरस, आयरन, फाइबर, फैटी एसिड आदि तत्व पाए जाते हैं। चूड़ा खाने से पित्त को शांत करता है, यह शरीर को बल देता है।
मकर संक्रांति के दिन अहले सुबह स्नान करने विधान है। इस दिन नदी, सरोवर, कुआं या घर में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद पितरों को तिल मिले जल से तर्पण करना चाहिए। भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शिव, आदिशक्ति माता, शनि देव, और भगवान सूर्य को विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
सुहागन महिलाएं एक थाली में गुड़, तिल से बने लड्डू, चूड़ा और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा रख लें। थाली को रोली और चावल से सजा दें। इसके बाद उस थाली को अपने सास दे दें यदि आपकी अपनी सास नहीं है तो ननंद, जेठानी, या किसी भी ब्राह्मण स्त्री को भी दे सकते हैं।
अगरबत्ती, पान का पत्ता, नारियल, सिक्के, फूल का माला, चावल, रोली, गंगाजल, फूलों का माला, कपूर, इत्र, सूर्य भगवान की तस्वीर, गुड़, तिल, चूड़ा, तिल का तेल, घी, दीया, मौली, चंदन और आम की लकड़ी प्रमुख हैं।
मकर संक्रांति के दिन गर्म वस्त्र, तिल से बने मिठाईयां, खिचड़ी के साथ पैसा आदि दान करने का शनि से त्रस्त प्रकोपों तथा कष्टों से मुक्ति मिलती है। गरीब तथा अपाहिज और मजदूर वर्ग के सभी लोग शनि के प्रतिनिधि माने जाते हैं। इसलिए इस दिन बड़े बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए और उन्हें तिल से बनी मिठाइयों और गर्म वस्त्र उपहार स्वरूप देना चाहिए ऐसा करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
पौष मास, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी तिथि, शनिवार दिन 14 जनवरी 2029 को मकर संक्रांति पड़ रही है। इस दिन सूर्य मकर राशि में रहेंगे। चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। इस दिन नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा, योग हर्षण, ऋतु शिशिर और सूर्योदय सुबह 06:28 बजे पर होगा।
मकर संक्रांति के दिन सुबह 06:30 बजे से लेकर 10:30 बजे तक शुभ मुहूर्त के रूप में चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त रहेगा। इस दौरान पूजा और तर्पण लोग कर सकते हैं। इस दौरान सिर्फ 07:50 बजे से लेकर 09:11 बजे तक काल मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दिन के 11:33 बजे से लेकर के शाम 12:16 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है।
मेष :काले कंबल का दान करना लाभप्रद रहेगा।
वृषभ :श्वेत वस्त्रों का दान संकटों से रक्षा करेगा।
मिथुन : हरे रंग का कंबल दान करें।
कर्क :रंग-बिरंगे नए वस्त्र दान करें।
सिंह : अशुभ प्रभाव कम करने के लिए लाल रंग का कंबल दान करें।
कन्या : हरे, गुलाबी रंग के वस्त्र या हरे फल दान करें।
तुला :श्वेत अनाज का दान करें।
वृश्चिक : खिचड़ी और फलों का दान करें।
धनु : फलों और तिल का दान करना लाभप्रद रहेगा।
मकर : काले तिल और काले कंबल का दान करें।
कुंभ :गायों को हरा चारा खिलाएं। तिल दान करें।
मीन : मूंग की दाल और चावल की खिचड़ी दान करें।
मकर संक्रांति के दिन क्या खाएं क्या ना खाएं
मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ से बने पदार्थ खाना अत्यंत शुभ माना जाता है। तिल शरीर को गर्मी प्रदान करता है जबकि गुड़ पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है। इस दिन खिचड़ी, दही-चूड़ा, तिलकुट, गजक, लड्डू, मूंगफली और मौसमी फल खाने की परंपरा है। कई स्थानों पर उड़द दाल और चावल की खिचड़ी भगवान सूर्य को अर्पित की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचना शुभ माना जाता है। बासी भोजन या अत्यधिक तला-भुना भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि संक्रांति के दिन पवित्र और सरल भोजन करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।
इस दिन भोजन से पहले सूर्य देव को जल अर्पित करना और अन्न का कुछ भाग गौ, पक्षियों या जरूरतमंदों को दान करना पुण्य दायक माना गया है।
मकर संक्रांति के दिन क्या करें क्या ना करें
मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन तिल, गुड़, कंबल, खिचड़ी और अन्न का दान विशेष फलदायी होता है। गंगा स्नान, मंत्र जाप, ध्यान और मौन व्रत रखने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना, गौ सेवा करना और पक्षियों को दाना खिलाना पुण्य दायक माना जाता है। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर इस दिन क्रोध, विवाद, अपशब्द और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। किसी गरीब या बुजुर्ग का अपमान नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि संक्रांति के दिन झूठ बोलना, नशा करना और दूसरों को कष्ट देना अशुभ फल प्रदान करता है।
सूर्य ग्रहण होने के कारण गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने और ग्रहण काल में बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।
मकर संक्रांति के अनसुलझे पहलुओं की जानकारी
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं बल्कि खगोलीय और आध्यात्मिक रहस्यों से जुड़ा उत्सव भी है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कई विद्वानों का मानना है कि पृथ्वी की धुरी और नक्षत्रों की स्थिति के कारण इसकी वास्तविक खगोलीय गणना समय के साथ बदलती रही है।
एक अनसुलझा पहलू यह भी है कि आखिर क्यों इस दिन किए गए दान और जप को कई गुना फलदायी माना गया है। पौराणिक ग्रंथों में इसे देवताओं के जागरण काल की शुरुआत बताया गया है।
कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मौनी अमावस्या और सूर्य ग्रहण का एक साथ होना ऊर्जा परिवर्तन का संकेत देता है। वहीं कई लोग इसे केवल धार्मिक विश्वास मानते हैं।
मकर संक्रांति से जुड़े अनेक रहस्य आज भी शोध का विषय बने हुए हैं, जो इसे केवल त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक विज्ञान का अद्भुत संगम बनाते हैं।
मकर संक्रांति से संबंधित तीन तरह के टोटके
*01. तिल-गुड़ दान टोटका
मकर संक्रांति के दिन काले तिल और गुड़ को गरीबों में बांटने से शनि दोष कम होने और आर्थिक परेशानियां दूर होने की मान्यता है।
*02. सूर्य कृपा टोटका
सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करते समय जल में लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ डालें। ऐसा करने से मान-सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की मान्यता है।
*03. सुख-समृद्धि टोटका
इस दिन घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना और जल रखें। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
मकर संक्रांति से संबंधित पांच प्रश्न और उत्तर
प्रश्न *01: मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।
प्रश्न *02: मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का महत्व क्या है?
उत्तर: तिल और गुड़ को पवित्र तथा स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। यह प्रेम और मधुरता का प्रतीक भी है।
प्रश्न *03: क्या मकर संक्रांति पर दान करना जरूरी है?
उत्तर: धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।
प्रश्न *04: मकर संक्रांति और उत्तरायण का क्या संबंध है?
उत्तर: इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जिसे देवताओं का दिन आरंभ होना माना गया है।
प्रश्न *05: क्या सूर्य ग्रहण के कारण संक्रांति का महत्व बढ़ जाता है?
उत्तर: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण और संक्रांति का संयुक्त प्रभाव आध्यात्मिक ऊर्जा को अधिक प्रभावशाली बना देता है।
