भीमसेन निर्जला सभी 26 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ एकादशी है। इस एकादशी का विशेष महत्व है। यह एकादशी महाभारत काल और बाहुबली भीम कि कहानियों से जुड़ा हुऐ है।
निर्जला एकादशी 2028: बिना जल के व्रत से मिलता है सालभर की एकादशियों का पुण्य*
वर्ष 2028 में निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं, 03 जून 2028 शनिवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में सभी 24 एकादशियों में यह सबसे कठिन और फलदायी मानी गई है। इस दिन अन्न ही नहीं, जल का भी पूर्ण त्याग किया जाता है। मान्यता है कि भीम ने इस एकादशी का व्रत कर सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त किया था, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।
एकादशी तिथि 02 जून 2028 को शाम 07:33 बजे से शुरू होकर 03 जून को शाम 05:26 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 04 जून 2028 को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान और जागरण से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। इस ब्लॉग में जानिए 2028 की निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत के नियम, वैज्ञानिक महत्व और इससे जुड़े अचूक टोटके
जानें भीमसेन निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा
भीमसेन व्यास जी से कहते हैं कि हे ! पिता भ्राता युधिष्ठिर, माता कुंती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सभी एकादशी का व्रत करते हैं। परन्तु महाराज मैं उनसे कहता हूं कि भाई मैं भगवान की शक्ति पूजा आदि तो कर सकता हूं। दान भी दे सकता हूं, परंतु भोजन की बिना नहीं रह सकता।
इस पर व्यास जी कहने लगे कि हे भीमसेन यदि तुम नरक को बुरा और स्वर्ग को अच्छा मानते हो तो प्रति मास की दोनों एकादशियों को अन्न मत खाया करो।
भीम कहने लगे कि हे ! पितामह, मैं तो पहले ही कह चुका हूं कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता। यदि वर्ष भर में कोई एक ही व्रत हो तो वह मैं रख सकता हूं। क्योंकि मेरे पेट में वृक नाम वाली अग्नि है। सो मैं भोजन किए बिना नहीं रह सकता। भोजन करने से वह शांत रहती है। इसलिए पूरा उपवास तो क्या एक समय भी बिना भोजन किए रहना कठिन है।
अतः आप मुझे कोई ऐसी व्रत बताइए जो वर्ष में केवल एक ही करना पड़ें और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए।
व्यास जी कहने लगे कि हे ! पुत्र बड़े-बड़े ऋषियों ने बहुत शास्त्र आदि बनाए हैं। जिनसे बिना धन के थोड़े परिश्रम से ही स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। इस प्रकार शास्त्रों में दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत मुक्ति के लिए रखा जाता है।
व्यास जी के वचन सुनकर भीमसेन नर्क में जाने के नाम से भयभीत हो गए और कांपने लगे कि अब क्या करूं ? मास में दो व्रत तो मैं कर ही नहीं सकता। हां वर्ष में एक व्रत करने का प्रयत्न अवश्य कर सकता हूं। अतः वर्ष में एक दिन व्रत करने से यदि मेरी मुक्ति हो जाए तो ऐसा कोई व्रत बताइए।
यह सुनकर व्यास जी करने लगे वृषभ और मिथुन की संक्रांति के बीच जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। तुम उस एकादशी का व्रत करो। इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है। अचमन में छह मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए। अन्यथा यह मद्यपान के सदृश हो जाता है। इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है।
यदि एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करें तो उसे सारी एकादशियों का व्रत का फल प्राप्त होता है। द्वादशी के सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके ब्राह्मणों का दान करना चाहिए। उसके पश्चात भूखे और सत्य पात्र ब्राह्मण को भोजन करा फिर आपको भोजन कर लेना चाहिए। इसका फल पूरे एक साल की संपूर्ण एकादशियों के बराबर होता है।
महर्षि व्यासजी कहने लगे कि हे ! भीमसेन यह मुझ को स्वयं भगवान ने बताया है। इस एकादशी का पुण्य समस्थ तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जला रहने से सभी पापों से मुक्ति हो जाता है।
जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं। उनकी मृत्यु के समय यमदूत आकर नहीं ले जाते वरन भगवान के पार्षद उसे पुष्पक विमान में बैठा कर स्वर्ग ले जाते हैं। अतः संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का व्रत है। इसलिए पूरे मनोभाव के साथ इस व्रत को करना चाहिए। उस दिन ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और गौ दान करना चाहिए।
इस प्रकार व्यास जी के आज्ञा अनुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया। इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। निर्जला व्रत करने से पूर्व भगवान से प्रार्थना करें कि हे ! भगवान आज मैं निर्जला व्रत करता हूं। दूसरे दिन भोजन करूंगा। मैं इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करूंगा, तो आपकी कृपा मेरे सारे पाप नष्ट हो जाए। इस दिन जल से भरा एक घड़ा वस्त्र से ढंक कर स्वर्ण रखकर दान करना चाहिए।
जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं उनको करोड़ों किलो सोने के दान का फल मिलता है। और जो इस दिन एक यज्ञदिक करते हैं उनका फल तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता है। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य विष्णु लोक को प्राप्त होता है। जो मनुष्य इस दिन अन्न खाते हैं वह चांडाल के समान है। वे अंत में नर्क में जाते हैं। जिसने निर्जला एकादशी का व्रत किया है। वह चाहे ब्राह्मण हत्यारा हो, मद्यपान करता हो, चोरी की हो या गुरु के साथ द्वेष किया हो मगर इस व्रत के प्रभाव से स्वर्ग जाता है।
हे ! कुंती पुत्र जो पुरुष या स्त्री श्रद्धा पूर्वक इस व्रत को करते हैं उन्हें अग्रलिखित कर्म करने चाहिए। प्रथम भगवान का पूजन,, फिर गोदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान और दक्षिणा देना देनी चाहिए। तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए। निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र और जूता आदि का दान भी करना चाहिए। जो मनुष्य भक्ति पूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं उन्हें निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
*निर्जला एकादशी 2028 पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त
निर्जला एकादशी व्रत 03 जून 2028, शनिवार को रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है, इसलिए 02 जून को सात्विक भोजन करें।
*एकादशी तिथि का समय:*
एकादशी तिथि प्रारंभ: 02 जून 2028, शाम 07:33 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 03 जून 2028, शाम 05:26 बजे
*पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 03 जून 2028:*
*01. *प्रातःकाल मुहूर्त:* सुबह 05:23 से 07:07 बजे तक। यह ब्रह्म मुहूर्त के बाद का समय है और विष्णु पूजा के लिए सर्वोत्तम है।
*02. *अभिजीत मुहूर्त:* दोपहर 11:52 से 12:47 बजे तक। इस समय की गई पूजा तुरंत फलदायी होती है।
*03. *संध्या काल मुहूर्त:* शाम 06:48 से 07:12 बजे तक। इस समय तुलसी और शालिग्राम जी के पास दीपक जलाना विशेष लाभकारी है।
*04.*निशिता मुहूर्त:* मध्य रत्रि रात 11:23 बजे से लेकर 12:05 बजे तक रहेगा।
*05.*ब्रह्म मुहूर्त:* 03:35 बजे से लेकर 04:18 बजे तक
*पारणा का समय:* 04 जून 2028 को सुबह 06:41 बजे से 11:44 बजे तक। इस दौरान चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त रहेगा।
ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण कर लें। व्रतधारी को 03 जून की रात जागरण करना चाहिए।
*निर्जला एकादशी पूजा की संपूर्ण विधि स्टेप बाय स्टेप
*01. *संकल्प:* 3 जून 2028 को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें कि आज निर्जल रहकर भगवान विष्णु की पूजा करेंगे।
*02. *कलश स्थापना:* पूजा स्थान पर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की मूर्ति स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश रखें जिस पर आम के पत्ते और नारियल हो।
*03. *षोडशोपचार पूजन:* भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, तुलसी दल, धूप, दीप, फल और पंचामृत अर्पित करें। निर्जला एकादशी पर तुलसी का विशेष महत्व है। बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।
*04. *विष्णु सहस्त्रनाम पाठ:* पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। श्री विष्णु सहस्त्रनाम और गीता के 11वें अध्याय का पाठ करें।
*05. *निर्जल व्रत:* इस दिन पूरे 24 घंटे अन्न और जल का त्याग करें। यदि स्वास्थ्य कारणों से संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं, पर जल भी त्यागना ही वास्तविक व्रत है।
*06. *रात्रि जागरण:* शाम को भगवान के सामने दीपक जलाकर भजन कीर्तन करें। पूरी रात जागकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
*08. *पारण:* 4 जून को शुभ मुहूर्त में तुलसी दल के साथ जल पीकर व्रत खोलें। पहले सात्विक भोजन करें।
*एकादशी के दिन क्या खाएं, क्या न खाएं और क्या करें, क्या न करें (250 शब्द)*
*क्या खाएं:*
*01. यदि पूर्ण निर्जल व्रत संभव न हो तो फलाहार करें। केला, सेब, पपीता ले सकते हैं।
*02. सिंघाड़े या कुट्टू के आटे की रोटी, साबूदाना खिचड़ी, मखाने खा सकते हैं।
*03. दूध, दही, पनीर का सेवन कर सकते हैं।
*04. पारण के समय पहले तुलसी मिश्रित जल लें, फिर सात्विक भोजन करें।
*क्या न खाएं:*
*01. चावल, गेहूं, दाल, प्याज, लहसुन पूरी तरह वर्जित हैं।
*02. मांस, मदिरा, अंडा का सेवन पाप माना जाता है।
*03. इस दिन नमक भी नहीं खाना चाहिए। सेंधा नमक ले सकते हैं।
*04. निर्जला एकादशी पर जल पीना भी वर्जित है।
*क्या करें:*
*01. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
*02. जरूरतमंदों को जल, छाता, सत्तू, आम का दान करें।
*03. पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं पर व्रतधारी स्वयं जल न पिएं।
*04. पूरी रात भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें।
*क्या न करें:*
*01. झूठ बोलना, क्रोध करना, निंदा करना वर्जित है।
*02. दिन में सोना नहीं चाहिए। इससे व्रत का फल नष्ट होता है।
*03. बाल, नाखून काटना और क्षौर कर्म न करें।
*04. किसी का अपमान न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
*निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चारभुजाधारी रूप की पूजा का विधान है। इस दिन विशेष रूप से शेषनाग पर शयन करते हुए श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है। कई मंदिरों में भगवान को शालिग्राम शिला के रूप में पूजते हैं क्योंकि शालिग्राम में स्वयं विष्णु का वास माना जाता है।
पद्म पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के केशव रूप की उपासना करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। केशव का अर्थ है जिनके केश सुंदर हैं और जो ब्रह्मा तथा शिव के भी ईश हैं। भक्त पीले वस्त्र पहनकर भगवान को पीले फूल, पीला चंदन और पीले फल अर्पित करते हैं क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
इस दिन भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी जरूरी है। बिना लक्ष्मी जी के विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है। तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य है क्योंकि तुलसी को भगवान ने वरदान दिया था कि एकादशी पर जो उन्हें तुलसी अर्पित करेगा उसे मोक्ष मिलेगा। भीम ने इसी रूप की पूजा कर सभी एकादशियों का फल पाया था, इसलिए इसे भीमसेन एकादशी कहते हैं।
*निर्जला एकादशी के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक पहलू
*वैज्ञानिक पहलू:* जून का महीना सबसे गर्म होता है। इस समय निर्जल व्रत रखने से शरीर डिटॉक्स होता है। 24 घंटे जल न पीने से ऑटोफैगी की प्रक्रिया तेज होती है जिससे शरीर की पुरानी कोशिकाएं नष्ट होकर नई बनती हैं। यह एक प्राकृतिक इंटरमिटेंट फास्टिंग है जो वजन और शुगर कंट्रोल में मदद करती है। हालांकि हृदय रोगी और डायबिटीज के मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के यह व्रत न करें।
*आध्यात्मिक पहलू:* शास्त्रों में कहा गया है कि साल की 24 एकादशी न कर पाने वाले यदि निर्जला एकादशी कर लें तो उन्हें सभी का पुण्य मिल जाता है। यह व्रत मन को नियंत्रित करना सिखाता है। जल जैसी मूल आवश्यकता का त्याग इंद्रियों पर विजय का प्रतीक है। इससे जन्मों के पाप नष्ट होकर मोक्ष का मार्ग खुलता है।
*सामाजिक पहलू:* इस दिन जल से भरे घड़े, पंखे, छाते, सत्तू और आम का दान किया जाता है। गर्मी में यह दान समाज के गरीब वर्ग के लिए वरदान है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि अपनी कठिन तपस्या का फल दूसरों के साथ बांटना चाहिए। पूरे गांव में एक साथ जागरण से सामुदायिक एकता बढ़ती है।
*आर्थिक पहलू:* इस दिन फलों, तुलसी, पीले फूलों और मिट्टी के घड़ों की मांग बढ़ जाती है। इससे छोटे किसान, कुम्हार और फूल बेचने वालों को रोजगार मिलता है। मंदिरों और तीर्थ स्थानों पर भक्तों की भीड़ से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। दान की परंपरा धन के वितरण में मदद करती है।
*निर्जला एकादशी से जुड़ी अनसुलझी पहेलियां
*01. *भीम का व्रत:* महाभारत में कहा गया है कि भीम को भूख बर्दाश्त नहीं थी, इसलिए व्यास जी ने उन्हें साल में एक बार निर्जला एकादशी करने को कहा। सवाल यह है कि क्या सचमुच एक दिन का व्रत 24 एकादशियों के बराबर फल दे सकता है। इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, यह आस्था का विषय है।
*02. *जल त्याग का नियम:* शास्त्रों में पूर्ण निर्जल व्रत कहा गया है पर आयुर्वेद जीवन के लिए जल को जरूरी मानता है। ऐसे में बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए यह नियम कितना व्यावहारिक है, यह एक पहेली है।
*03. *पारण का समय:* कई पंचांगों में पारण के समय में अंतर मिलता है। 2028 में भी कुछ पंचांग 4 जून को सुबह 8:10 तक पारण बताते हैं तो कुछ 10:30 तक। आम जन के लिए सही समय चुनना कठिन होता है।
*04. *चावल निषेध:* एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते, इसका वैज्ञानिक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। कुछ विद्वान इसे चंद्रमा की स्थिति से जोड़ते हैं।
*निर्जला एकादशी के 3 विशेष टोटके
*01. *धन प्राप्ति टोटका:* निर्जला एकादशी की रात पीपल के पेड़ के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं। 11 बार परिक्रमा करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जपें। फिर एक जल से भरा घड़ा किसी गरीब को दान करें। मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में स्थायी वास करती हैं।
*02. *रोग मुक्ति टोटका:* यदि घर में कोई लंबे समय से बीमार है तो एकादशी के दिन एक नारियल पर रोगी का हाथ लगवाकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। साथ ही शालिग्राम जी पर तुलसी दल चढ़ाकर रोग मुक्ति की प्रार्थना करें। व्रत के अगले दिन वह तुलसी रोगी को खिला दें।
*03. *विवाह बाधा टोटका:* जिन लड़के लड़कियों के विवाह में रुकावट आ रही है, वे निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा कर हल्दी मिला जल चढ़ाएं और 108 बार ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का जाप करें। इससे शीघ्र विवाह के योग बनते हैं
*निर्जला एकादशी से जुड़े 5 प्रश्न और उत्तर
*प्रश्न *01: क्या निर्जला एकादशी पर पानी की एक बूंद भी नहीं पी सकते?*
उत्तर: शास्त्रीय नियम के अनुसार पूर्ण निर्जल व्रत ही सर्वश्रेष्ठ है। पर यदि आप बीमार, बुजुर्ग या गर्भवती हैं तो आचमन के लिए या दवा के साथ एक चम्मच जल ले सकते हैं। स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं। भगवान भाव देखते हैं।
*प्रश्न *02: अगर 3 जून को एकादशी शाम 5:26 बजे खत्म हो रही है तो व्रत कब तक रखें?*
उत्तर: व्रत हमेशा उदया तिथि में रखा जाता है और पारण द्वादशी में किया जाता है। इसलिए 3 जून को पूरा दिन व्रत रखकर 4 जून की सुबह पारण करें, भले ही तिथि 3 जून को शाम में खत्म हो जाए।
*प्रश्न *03: क्या निर्जला एकादशी का व्रत बिना जागरण के पूरा होता है?*
उत्तर: निर्जला एकादशी पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। पद्म पुराण कहता है कि जो जागरण नहीं करता, उसे व्रत का आधा फल ही मिलता है। इसलिए कम से कम मध्य रात्रि तक भजन जरूर करें।
*प्रश्न *04: व्रत में तुलसी क्यों जरूरी है?*
उत्तर: मान्यता है कि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। तुलसी के बिना वे भोग और जल ग्रहण नहीं करते। एकादशी पर तुलसी दल अर्पित करने से हजार गुना फल मिलता है।
*प्रश्न *05: क्या इस दिन टूथपेस्ट कर सकते हैं?*
उत्तर: व्रत में दातुन या उंगली से दांत साफ करने का विधान है। टूथपेस्ट के झाग से मुंह में जल जाने का डर रहता है, जिससे व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए नीम की दातुन सबसे उत्तम है।
*डिस्क्लेमर
इस ब्लॉग में दी गई निर्जला एकादशी 2028 से संबंधित सभी तिथियां, मुहूर्त और समय की जानकारी द्रिक पंचांग और पारंपरिक वैदिक गणनाओं पर आधारित है। हिंदू त्योहारों की तिथियां स्थान और पंचांग परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए 2028 में व्रत रखने से पहले अपने स्थानीय मंदिर के पुजारी या विश्वसनीय पंचांग से तिथि की पुष्टि अवश्य कर लें।
यह लेख केवल धार्मिक आस्था, सामान्य जानकारी और ज्योतिषीय मान्यताओं के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए व्रत नियम, पूजा विधि और टोटके विभिन्न पुराणों और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होना जरूरी नहीं है।
निर्जला एकादशी का व्रत बहुत कठिन होता है जिसमें 24 घंटे तक जल का त्याग किया जाता है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी डॉक्टर की सलाह के बिना यह व्रत न करें। स्वास्थ्य आपकी पहली प्राथमिकता है। यदि पूर्ण निर्जल रहना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं। भगवान विष्णु भाव के भूखे हैं, नियम के नहीं।
