अक्षय तृतीया 2031:अमृत मुहूर्त में करें सिंदूर दान

24 अप्रैल 2031, गुरुवार के दिन अक्षय तृतीया मनाया जाएगा। सनातन पंचांग के अनुसार, यह त्योहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है। पड़ने वाले अक्षय तृतीया के दिन अमृत मुहूर्त में सिंदूर दान करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।


अक्षय तृतीया के दिन हुई थी अनेक घटनाएं 

अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जी का जन्म हुआ था। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुई थी। द्वापर युग की समाप्ति भी इसी दिन हुआ था और त्रेता युग का शुभारंभ हुआ था। वृंदावन के बांके बिहारीजी मंदिर में इसी दिन श्रीविग्रह जी के चरणों के दर्शन होते हैं। नहीं तो सालोंभर उनके चरण वस्त्र से ढ़के रहते हैं। 

बद्रीनाथ का कपाट आज ही के दिन खुलते हैं।  अक्षय तृतीया के दिन महाभारत युद्ध की समाप्त हुई थी। इसी दिन महर्षि परशुराम जी का और  ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म हुआ था। इसी दिन हय ग्रीव का अवतार और बद्रीनाथ धाम का कपाट खुलते हैं। इस दिन विवाह के अनबूझ मुहूर्त रहता है।

अक्षय तृतीया के दिन किए गए 07 काम बदल सकते हैं आपकी किस्मत

अक्षय तृतीया को सनातन धर्म में अनंत शुभ फल देने वाला पर्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म और शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होते। इसलिए इस दिन कुछ विशेष कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

1. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा

इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि का वास होता है।

2. सोना या चांदी खरीदना

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना स्थायी लक्ष्मी प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। इससे आर्थिक उन्नति और शुभता बढ़ती है।

3. जलदान और अन्नदान

गर्मी के मौसम में प्यासों को जल और जरूरतमंदों को अन्न दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

4. नया व्यापार या निवेश शुरू करना

यह दिन स्वयं-सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, इसलिए नया व्यवसाय, दुकान या निवेश शुरू करना बेहद शुभ माना जाता है।

5. तुलसी और आंवला पूजन

तुलसी एवं आंवला भगवान विष्णु को प्रिय माने जाते हैं। इनके पूजन से सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

6. जप और धार्मिक पाठ

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप, गीता पाठ या विष्णु सहस्रनाम का पाठ जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति देता है।

7. गौसेवा और गरीबों की सहायता

गाय को हरा चारा खिलाना और गरीबों की सहायता करना जीवन के कष्टों को कम करने वाला माना गया है।

मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर श्रद्धा से किए गए ये कार्य जीवन में सौभाग्य, सफलता और समृद्धि के नए द्वार खोल सकते हैं।

शुभ मुहूर्त 

अभिजीत मुहूर्त 11:18 बजे से 12:09 बजे तक है। उसी प्रकार विजय मुहूर्त 01:52 बजे से लेकर 02:44 बजे तक रहेगा। चौधड़ीया पंचांग के अनुसार 10:00 बजे से लेकर 03:00 तक चर मुहूर्त,  लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त के रूप में रहेगा।

अक्षय तृतीया पूजा विधि 

अक्षय तृतीया के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

अब दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें और भगवान को चंदन, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल एवं मिठाई अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें तथा विष्णु सहस्रनाम या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। इसके बाद भगवान को खीर, फल और सत्तू का भोग लगाएं।

पूजा पूर्ण होने पर गरीबों को जल, अन्न, वस्त्र, सत्तू या धन का दान करें। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप और दान अक्षय फल प्रदान करता है तथा घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

अक्षय तृतीया पर आंवला वृक्ष के नीचे भोजन क्यों किया जाता है?

सनातन धर्म में अक्षय तृतीया के दिन आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन और पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। यही कारण है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने और उसके नीचे भोजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक निर्धन लेकिन अत्यंत धार्मिक ब्राह्मण दंपति था। वे अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते और आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर साधारण भोजन ग्रहण करते थे। एक बार उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण के वेश में उनके पास पहुंचे। दंपति ने अपनी गरीबी के बावजूद उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया। उनकी निस्वार्थ सेवा और श्रद्धा देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनके घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होगी। धीरे-धीरे उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर गया।

धार्मिक ग्रंथों में आंवला को “अमृत फल” कहा गया है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर इसके नीचे भोजन करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, रोग दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आयुर्वेद में भी आंवला को स्वास्थ्यवर्धक और दीर्घायु प्रदान करने वाला फल माना गया है। इसलिए यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ाव का भी प्रतीक मानी जाती है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार किसी राज्य में एक अमीर वैश्य रहता था। अमीर होने के बाद भी वह गरीब था। एक दिन किसी ब्राह्मण ने उसे अक्षय तृतीया व्रत रखने की सलाह दी। वैश्य ने अक्षय तृतीया व्रत रखा गंगा स्नान किया और अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दिया। 

कुछ ही दिनों के बाद इसका व्यापार बढ़ने लगा और वह अमीर बन गया। 

अगले जन्म में वह कुशावती का राजा बना। वह इतना धनी बन गया कि अक्षय तृतीया के दिन त्रीदेव अर्थात ब्रह्मा विष्णु और महेश ब्राह्मण का भेष धारण कर यज्ञ की शोभा बढ़ाते थे।

अक्षय तृतीया के दिन बिना लग्न, मुहूर्त और गणना के विवाह संपन्न हो सकते हैं। जिसका विवाह किसी कुंडली दोष के कारण नहीं हो रहा है। ऐसे जातक भी इस दिन शादी कर सकते हैं। इस दिन वाहन खरीदना, आभूषण खरीदना, घर और जमीन खरीदना काफी शुभ होता है।

डिस्क्लेमर 

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों, ज्योतिषीय गणनाओं तथा विभिन्न पंचांगों पर आधारित है। अक्षय तृतीया 2031 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, योग एवं धार्मिक महत्व से संबंधित विवरण सामान्य जनमानस की आस्था और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। विभिन्न क्षेत्रों, संप्रदायों और पंचांगों के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या विशेष पूजा से पूर्व अपने स्थानीय पंडित, ज्योतिषाचार्य या विश्वसनीय पंचांग से परामर्श अवश्य करें।

रंजीत के इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है। यहां दी गई सामग्री किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देने या किसी विशेष मत का समर्थन करने के उद्देश्य से प्रकाशित नहीं की गई है। सोना खरीदने, निवेश करने या व्यापार शुरू करने से संबंधित निर्णय पाठक अपने विवेक और आवश्यकता के अनुसार लें। लेखक एवं प्रकाशक किसी भी प्रकार की आर्थिक, धार्मिक या व्यक्तिगत हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। सनातन परंपराओं के प्रति सम्मान और सकारात्मक ज्ञान प्रसार ही इस लेख का मुख्य उद्देश्य है।

1 टिप्पणियाँ

  1. अच्छा है भाई, इसी तरह अपनी रचनात्मकता बनाए रखिए। शुभ प्रभात।

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