Yogini Ekadashi 2027 योगिनी एकादशी : व्रत कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या करें और क्या न करें
byRanjeet Singh-
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"30 जून 2027, बुधवार को योगिनी एकादशी है। जानें इस दिन की दो पौराणिक व्रत कथाएं, सटीक पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या खाएं-क्या न खाएं, और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के अचूक उपाय। इस व्रत से मिलती है सभी पापों से मुक्ति"
"सर्वाव्यापी भगवान विष्णु की अद्भुत छवि, जो अनंत ब्रह्मांड पर शासन करते हैं कि तस्वीर
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"योगिनी एकादशी 2027: संपूर्ण व्रत कथा, विधि और शुभ मुहूर्त से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी"
*30 जून 2027, दिन बुधवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी मनाई जाएगी। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भोग के बाद अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में हम आपको योगिनी एकादशी की दो पौराणिक कथाएं, संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम और कुछ अचूक टोटकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
*योगिनी एकादशी 2027: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
*एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 जून 2027, मंगलवार रात 09:28 बजे से
*एकादशी तिथि समाप्त: 30 जून 2027, बुधवार रात 08:48 बजे तक
*पारण का समय (व्रत तोड़ने का समय): 01 जुलाई 2027, गुरुवार सुबह 05:23 बजे से 08:15 बजे तक (द्वादशी तिथि के भीतर)
*सूर्योदय: 30 जून को सुबह 05:23 बजे
*सूर्यास्त: 30 जून को शाम 07:20 बजे
"योगिनी एकादशी का दिन कैसा रहेगा"?
*30 जून 2027, बुधवार के दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे। इस दिन भरणी इसके बाद कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। दिशाशूल उत्तर दिशा में होगा, अतः उत्तर दिशा की यात्रा से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत एवं पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
"योगिनी एकादशी की पूजा विधि" (स्टेप बाय स्टेप)
*01. दशमी का संकल्प: योगिनी एकादशी के व्रत की शुरुआत दशमी तिथि (28 जून) की रात से ही हो जाती है। इस रात से ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
*02. प्रातः कालीन क्रियाएं: एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 04:02 बजे) में उठें। स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
*03. संकल्प: घर के मंदिर में बैठकर जल, अक्षत, फूल लेकर योगिनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लें।
*04. वेदी सज्जा: एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर एक कलश स्थापित करें और कलश के ऊपर 5 या 7 आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित करें।
*05. भगवान विष्णु की स्थापना: वेदी पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
*06. पूजन: भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल, और मेवे अर्पित करें। धूप, दीप, नैवेद्य से उनकी पूजा करें।
*07. कथा श्रवण: योगिनी एकादशी की कथा का पाठ करें या सुनें। (कथाएं नीचे दी गई हैं)।
*08. आरती एवं भजन: शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
*09. दान-पुण्य: इस दिन गरीबों एवं ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान अवश्य दें। पीपल के वृक्ष की पूजा करना भी शुभ होता है।
*10. पारण: अगले दिन द्वादशी तिथि में सुबह के शुभ मुहूर्त में पूजन के बाद किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देकर ही अपना व्रत तोड़ें।
"योगिनी एकादशी पर क्या खाएं और क्या न खाएं"?
*क्या न खाएं: एकादशी के दिन अनाज, चावल, दाल, प्याज, लहसुन और मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है। साथ ही, किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न करें।
*क्या खाएं: व्रत में फल, मेवे, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, आलू और मखाने आदि का सेवन किया जा सकता है। ध्यान रहे, जो लोग निर्जला व्रत करते हैं, वे केवल जल ग्रहण करते हैं।
"योगिनी एकादशी पर क्या करें और क्या न करें"?
*क्या करें:
*ब्रह्मचर्य का पालन करें।
*सत्य बोलें और दान-धर्म करें।
*भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
*पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
*रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें।
*क्या न करें:
*झूठ न बोलें।
*किसी का अपमान न करें।
*चोरी, कपट जैसे कर्मों से दूर रहें।
*दिन में सोने से बचें।
*क्रोध न करें।
"योगिनी एकादशी की दो पौराणिक कथाएं"
*पहली कथा: हेम माली और कुबेर का शाप
*पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, स्वर्गलोक की अलकापुरी नगरी में कुबेर नामक राजा राज करते थे, जो भगवान शिव के परम भक्त थे। प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के लिए हेम नाम का एक माली राजा कुबेर के लिए फूल लाया करता था।
*एक दिन हेम माली फूल लेकर अपने घर लौटा, जहाँ उसकी अत्यंत सुंदर पत्नी विशालाक्षी ने उसे मोहित कर लिया। पत्नी के सौंदर्य में खोकर वह उसी के साथ रमण करने लगा और भगवान शिव के पूजन के लिए फूल ले जाना भूल गया। दूसरी ओर, राजा कुबेर पूजन का समय बीत जाने पर भी फूलों की प्रतीक्षा करते रहे। जब सेवकों ने जाकर देखा, तो पता चला कि हेम माली अपनी पत्नी के साथ आनंद में मग्न है।
*यह सुनकर राजा कुबेर क्रोधित हो गए और उन्होंने हेम माली को बुलवाया। क्रोध में आकर राजा कुबेर ने हेम माली को शाप दे दिया - "अरे पापी! तूने भोलेनाथ का अपमान किया है, इसलिए तू मृत्युलोक में जाकर श्वेत कुष्ठ (कोढ़) से ग्रसित हो जा और अपनी पत्नी से वियोग का दुःख भोग!"
*राजा के शाप के कारण हेम माली तत्काल स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर आ गया और उसका शरीर कोढ़ से भर गया। उसकी पत्नी भी उससे बिछड़ गई। वह भयंकर जंगल में भटकता रहा, दुःख और पीड़ा से व्याकुल। एक दिन, भटकते-भटकते वह महर्षि मार्कंडेय के आश्रम में जा पहुंचा। उन्होंने हेम माली की दशा देखी और उससे उसके पाप के बारे में पूछा। हेम माली ने सारी घटना सच-सच कह सुनाई।
*महर्षि मार्कंडेय दयालु थे। उन्होंने हेम माली को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। महर्षि के कहे अनुसार हेम माली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके सारे पाप धुल गए, कोढ़ समाप्त हो गया और वह अपने पुराने स्वरूप में लौट आया। अंत में, वह अपनी पत्नी के साथ पुनः मिलकर सुखपूर्वक रहने लगा।
"दूसरी कथा: धर्मराज युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण का संवाद"
*महाभारत काल की बात है, जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, "हे केशव! आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का क्या नाम है और इसका क्या महत्व है? कृपया मुझे इसके विषय में विस्तार से बताइए।"
*भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया, "हे राजन! इस एकादशी का नाम योगिनी एकादशी है। यह तीनों लोकों में पाप नाशिनी के रूप में प्रसिद्ध है। इसके व्रत का माहात्म्य समस्त वेदों और पुराणों में वर्णित है। इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं, चाहे पाप कितने ही गंभीर क्यों न हों।"
*श्रीकृष्ण ने आगे कहा, "हे युधिष्ठिर! इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को इस लोक में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और अंत समय में वह विष्णुधाम को प्राप्त करता है। मैं सच कहता हूं कि योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्यफल प्रदान करता है।"
*यह सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने भी इस व्रत को करने का संकल्प लिया और इस प्रकार योगिनी एकादशी की महिमा सभी दिशाओं में फैल गई।
"योगिनी एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर"
प्रश्न *01: योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा की जाती है?
*उत्तर:योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के "योगेश्वर" रूप की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें शयन करते हुए (योग-निद्रा) रूप में भी पूजा जाता है, क्योंकि इसी दिन से भगवान विष्णु की चार मास की निद्रा (चातुर्मास) की शुरुआत भी मानी जाती है।
प्रश्न *02: योगिनी एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए?
*उत्तर:एकादशी के दिन व्रती को जमीन पर ही सोना चाहिए। पलंग या गद्दे पर सोने से बचना चाहिए। जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोना श्रेयस्कर माना गया है। यह तपस्या और इंद्रिय निग्रह का प्रतीक है।
प्रश्न *03: क्या बिना निर्जल व्रत के भी योगिनी एकादशी का फल मिलता है?
*उत्तर:हां, अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से निर्जल व्रत नहीं कर सकता, तो वह फलाहारी व्रत रख सकता है। महत्व श्रद्धा और भक्ति का है। लेकिन निर्जल व्रत को सर्वोत्तम माना गया है।
"योगिनी एकादशी के अचूक टोटके"
*01. धन प्राप्ति के लिए: एकादशी की रात एक बर्तन में जल भरकर उसमें 11 लौंग डालें और उसे पूजा स्थान पर रख दें। अगले दिन उस जल से पौधों में डाल दें। इससे धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
*02. कर्ज से मुक्ति के लिए: पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
*03. सुखी दांपत्य जीवन के लिए: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के सामने अपने और अपने जीवनसाथी का नाम लेकर एक सूत का धागा बांधें और प्रार्थना करें। इससे पारिवारिक कलह दूर होती है।
*04. विघ्नों को दूर करने के लिए: योगिनी एकादशी के दिन हनुमान जी को चमेली के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं।
"डिस्क्लेमर"
*यह लेख योगिनी एकादशी के बारे में सामान्य जानकारी एवं जनश्रुतियों पर आधारित है। इसमें दी गई कथाएं विभिन्न पुराणों, धार्मिक ग्रंथों एवं सनातन परंपरा से ली गई हैं। शुभ मुहूर्त एवं खगोलीय स्थितियों की जानकारी सामान्य पंचांग के आधार पर दी गई है, जो भौगोलिक स्थिति के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। यह लेख किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या कानूनी सलाह नहीं है।
*व्रत एवं उपवास करते समय अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और किसी गंभीर बीमारी (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप) से पीड़ित व्यक्ति व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं, अतः इन्हें अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार ही अपनाएं।
*लेख का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं लोगों को उनके धार्मिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा। धार्मिक क्रियाकलापों को करने के लिए किसी योग्य पंडित या आचार्य से मार्गदर्शन लेना सर्वोत्तम रहता है।