"Kartik-Chhath-2029"कार्तिक छठ: तिथि, पूजा विधि, पौराणिक कथा और अचूक उपाय

 "जानें 2029 में कार्तिक छठ महापर्व की सही तिथियां (नहाए-खाए, खड़ना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य), पौराणिक कथाएं, व्रत नियम, अचूक टोटके और स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि"

Picture of Kartik Chhath 2019

कैप्शन:“सूर्य की स्वर्णिम किरणों संग आस्था का अर्घ्य — कार्तिक छठ 2029 की पावन संध्या में महिलाएं नदी तट पर भगवान सूर्य को नमन करती हुईं।”

"दिन तिथि विवरण"

*पहला दिन 9 नवंबर, 2029 (शुक्रवार) नहाए-खाए

*दूसरा दिन 10 नवंबर, 2029 (शनिवार) खड़ना/लोहंडा

*तीसरा दिन 11 नवंबर, 2029 (रविवार) संध्या अर्घ्य

*चौथा दिन 12 नवंबर, 2029 (सोमवार) उषा अर्घ्य

"पूजा का मुहूर्त" (2029) समय

*संध्या अर्घ्य 11 नवंबर, 2029 को सूर्यास्त के समय (अनुमानित)

*उषा अर्घ्य 12 नवंबर, 2029 को सूर्योदय के समय (अनुमानित)

*ध्यान दें: सूर्योदय और सूर्यास्त का समय आपके स्थानीय शहर पर निर्भर करेगा। सटिक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग की जाँच करें।)

🌟"कार्तिक छठ की पौराणिक कथाएं" 

*छठ पूजा का महत्व कई प्राचीन कथाओं में निहित है, जो इस पर्व की महानता को दर्शाती हैं।

*01. "राजा प्रियवंद और षष्ठी देवी की कथा" (सर्वाधिक प्रचलित कथा)

*पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा प्रियवंद और उनकी पत्नी मालिनी संतानहीन होने के कारण अत्यंत दुखी थे। इस दुख से मुक्ति पाने के लिए, महर्षि कश्यप ने उनसे पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करने को कहा। यज्ञ के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और नौ माह बाद उन्होंने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया।

*किंतु, वह बालक मृत पैदा हुआ। इस असहनीय दुःख से व्यथित होकर राजा प्रिय वंद पुत्र को लेकर श्मशान घाट पहुंचे और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने का विचार करने लगे। तभी, आकाश से एक तेजस्वी और अद्भुत देवी प्रकट हुईं।

*राजा ने जब उनसे उनका परिचय पूछा, तो देवी ने बताया कि वह ब्रह्मा की मानस कन्या और सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसलिए उनका नाम षष्ठी देवी या छठी मैया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह निःसंतान को संतान देती हैं, और सभी जीवों की रक्षक हैं।

*देवी षष्ठी ने राजा को आश्वस्त किया और उस मृत बालक के शरीर को छूते ही वह जीवित हो उठा। इस चमत्कार से विस्मित होकर राजा और रानी ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को देवी षष्ठी का विधिवत व्रत किया और दूसरों को भी इसका पालन करने के लिए प्रेरित किया। तभी से इस दिन छठी मैया (षष्ठी देवी) और सूर्य देव की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई, जिससे यह पर्व संतान, सुख और आरोग्य का वरदान देने वाला बन गया।

*02. "कर्ण और महाभारत काल का संबंध"

*एक अन्य मान्यता के अनुसार, छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सूर्यपुत्र कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर, सूर्य को अर्घ्य देते थे। यह अर्घ्य दान की पद्धति आज भी छठ में प्रचलित है। सूर्य की कृपा से ही कर्ण एक महान योद्धा बने।

*इसके अलावा, जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने भी छठ का व्रत रखा था। द्रौपदी के व्रत के फल से पांडवों को उनका खोया हुआ राजपाट और सम्मान वापस प्राप्त हुआ था।

*03. "राम-सीता और छठ पूजा"

*एक और पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान राम और माता सीता लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे, तो उन्होंने रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए मुग्दल ऋषि के आश्रम में छह दिनों तक विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा की थी। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को राम और सीता ने सूर्य देव की आराधना कर उन्हें अर्घ्य दिया था। तभी से छठ पर्व का महत्व और बढ़ गया।

🥗"कार्तिक छठ के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं"

*छठ पर्व के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रती और उनके परिवार के लिए खान-पान के कुछ नियम इस प्रकार हैं:

✅"क्या खाएं" (What to Eat)

*नहाए-खाए शुद्ध सात्विक भोजन जैसे लौकी/कद्दू की सब्जी, चना दाल और अरवा चावल। नमक के रूप में केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें।

*खड़ना दिनभर व्रत के बाद शाम को गुड़ की खीर (रसियाव), रोटी/पूरी/पुआ का सेवन करें। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

*संध्या/उषा अर्घ्य व्रत के दौरान कुछ नहीं खाया जाता। व्रत पारण (समाप्ति) के बाद, सबसे पहले ठेकुआ (प्रसाद) खाया जाता है, और फिर सात्विक भोजन किया जाता है।

❌"क्या ना खाएं" (What to Avoid)

*तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा, शराब और तंबाकू का सेवन वर्जित है। व्रत के दिनों में परिवार के सदस्यों को भी इससे दूर रहना चाहिए।

*गरिष्ठ और तला-भुना खाना: व्रत से पहले या व्रत खोलने के बाद भारी, गरिष्ठ या तला-भुना खाना खाने से बचें, क्योंकि इससे पेट खराब होने या प्यास लगने की समस्या हो सकती है।

*अन्य वर्जित पदार्थ: नमक (सेंधा नमक के अतिरिक्त), तेल, मसाला और किसी भी प्रकार के अन्न को पूजा के दौरान ग्रहण नहीं करना चाहिए।

*दही और दूध: कुछ क्षेत्रों में, दही और दूध का सेवन भी छठ पूजा के दौरान वर्जित होता है।

📌"कार्तिक छठ के दिन क्या करें और क्या ना करें"

*छठ व्रत को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

✅"क्या करें" (Do's)

*शुद्धता: घर की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। व्रती को नए वस्त्र पहनने चाहिए।

*ब्रह्मचर्य: व्रत के चारों दिन व्रती और उनके परिवार को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

*सूर्य अर्घ्य: डूबते और उगते सूर्य को नदी या घाट पर खड़े होकर अर्घ्य दें।

*सादगी: व्रत के दिनों में ज़मीन पर चटाई या कम्बल बिछाकर सोएं, पलंग या बिस्तर पर सोना वर्जित है।

*प्रसाद: प्रसाद को अत्यंत शुद्ध और पवित्रता के साथ, नए चूल्हे (लकड़ी या मिट्टी का चूल्हा) पर ही बनाना चाहिए।

❌"क्या ना करें" (Don'ts)

*अपवित्रता: बिना स्नान किए किसी भी पूजा सामग्री को न छुएं।

*क्रोध: छठ के दिनों में किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द कहें।

*जूठन: छठ का प्रसाद बनाते समय या प्रसाद ग्रहण करने से पहले कुछ भी खाना या जूठा करना वर्जित है।

*पशु हानि: छठ घाट पर या घर के आस-पास किसी भी जीव-जंतु को हानि न पहुंचाएं।

*घाट की टोकरी: अर्घ्य देने के लिए कभी भी पुरानी या फटी हुई टोकरी का उपयोग न करें।

*तुलसी: छठ के दौरान तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

*सूर्य देव को जल: स्टील या किसी अन्य धातु के पात्र से सूर्य को जल न दें, इसके लिए केवल तांबे के लोटे का उपयोग करें।

🕉️"पूजा विधि": स्टेप बाय स्टेप

*छठ पूजा चार दिनों तक चलती है, और हर दिन की अपनी विशेष पूजा विधि होती है:

*01. नहाए-खाए (पहला दिन: 9 नवंबर 2029)

*व्रती इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं।

*घर को अच्छी तरह साफ कर शुद्ध किया जाता है।

*व्रती केवल एक बार सात्विक भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण करते हैं।

*इस भोजन के बाद, व्रती अगले दिन खड़ना तक कुछ नहीं खाते।

*02. खड़ना/लोहंडा (दूसरा दिन: 10 नवंबर 2029)

*व्रती दिन भर निर्जला उपवास रखते हैं।

*शाम को, स्नान के बाद, नए चूल्हे पर गुड़ की खीर (रसियाव), पूड़ी, और फल का प्रसाद तैयार किया जाता है।

*सबसे पहले सूर्य देव को भोग लगाकर व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं।

*इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद से, अगले 36 घंटों के लिए निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

*03. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन: 11 नवंबर 2029)

*दिन भर निर्जला उपवास चलता है।

*शाम को, बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना, फल और अन्य प्रसाद सजाया जाता है।

*परिवार के साथ व्रती घाट या नदी के किनारे जाते हैं।

*डूबते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।

*04. उषा अर्घ्य और पारण (चौथा दिन: 12 नवंबर 2029)

*रात भर जागरण करने के बाद, व्रती और परिवार सुबह घाट पर पहुंचते हैं।

*उगते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अंतिम अर्घ्य दिया जाता है।

*अर्घ्य देने के बाद, व्रती घर आकर छठ मैया की पूजा करते हैं।

*व्रती सबसे पहले प्रसाद में से कुछ खाकर (आमतौर पर अदरक और गुड़ का मिश्रण या ठेकुआ) व्रत का पारण (समापन) करते हैं।

❓"कार्तिक छठ से संबंधित प्रश्न और उत्तर"

*प्र. कार्तिक छठ में भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है?

*उ. छठ पर्व में मुख्य रूप से सूर्य देव (भगवान भास्कर) और उनकी बहन छठी मैया (षष्ठी देवी) की पूजा की जाती है। सीधे तौर पर भगवान विष्णु के किसी रूप की पूजा नहीं होती, लेकिन सूर्य देव को ही भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। इसके अलावा, सूर्य देव की दोनों पत्नियां- ऊषा (प्रातःकाल की किरण) और प्रत्यूषा (सायंकाल की किरण) की भी आराधना होती है।

*प्र. कार्तिक छठ के दिन किस पर सोना चाहिए?

*उ. कार्तिक छठ व्रत के दौरान जमीन पर चटाई या कम्बल बिछाकर सोना चाहिए। पलंग या किसी ऊंचे बिस्तर पर सोना वर्जित माना जाता है।

*प्र. कार्तिक छठ में कौन-सा अचूक टोटका संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है?

*उ. संतान प्राप्ति के लिए, व्रती छठ के मुख्य दिन (संध्या अर्घ्य के दिन) अपने घर से छठ घाट तक दंडवत प्रणाम करते हुए जाते हैं और छठी मैया से संतान सुख की कामना करते हैं।

🔮"कार्तिक छठ के अचूक टोटके"

*छठ पूजा को कई विशेष लाभ और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी किया जाता है।

*आर्थिक समृद्धि के लिए: छठ के दौरान चढ़ाए गए गन्ने को, पूजा के बाद घर लाकर किसी साफ स्थान पर रखें। यह उपाय घर में धन और समृद्धि को आकर्षित करता है।

*रोग मुक्ति के लिए: छठ के दिन सूर्य अर्घ्य के समय तांबे के लोटे में जल में लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर अर्घ्य दें। यह सूर्य देव को प्रसन्न करता है और आरोग्य का वरदान देता है।

*व्यवसाय में सफलता के लिए: छठ के प्रसाद में ठेकुआ के अलावा चावल के लड्डू (कसार) को जरूर शामिल करें। पूजा के बाद इन लड्डूओं को व्यापार स्थल पर रखें और बाद में लोगों में बाँट दें।

⚖️"कानूनी अस्वीकरण डिस्क्लेमर" (Disclaimer)

*यह ब्लॉग पोस्ट वर्ष 2029 में आयोजित होने वाली कार्तिक छठ पूजा से संबंधित धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।

*01. धार्मिक विश्वास: इस लेख में दी गई सभी जानकारियां, कथाएं, पूजा विधि, और नियम हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों, प्रचलित लोक कथाओं और क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित हैं। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक या कानूनी रूप से कोई प्रमाणिकता नहीं है।

*02. ज्योतिषीय जानकारी: शुभ मुहूर्त और सूर्योदय/सूर्यास्त का समय अनुमानित है। सटिक समय और स्थानीय पंचांग की जानकारी के लिए आपको अपने स्थानीय पंडित, धार्मिक गुरु या आधिकारिक पंचांग की जांच करनी चाहिए।

*03. स्वास्थ्य और व्रत: छठ व्रत एक अत्यंत कठिन निर्जला व्रत है, जिसमें व्रती को 36 घंटे तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करनी होती है। गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों या किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्रतियों को यह व्रत किसी विशेषज्ञ की देखरेख में या डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए। व्रत के नियमों का पालन करते समय अपने शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

*04. टोटके और उपाय: इस लेख में वर्णित "टोटके" और "उपाय" केवल धार्मिक विश्वास और लोक परंपरा का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। हम आपको सलाह देते हैं कि किसी भी बड़े निर्णय या समस्या के समाधान के लिए केवल अपनी आस्था और विवेक पर ही भरोसा करें।

*हमारा अनुरोध है कि आप सभी धार्मिक नियमों का पालन श्रद्धा और सम्मान के साथ करें।

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