Mohini Ekadashi 2027 मोहिनी एकादशी: व्रत विधि, कथा, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और अचूक उपाय
byRanjeet Singh-
0
"16 मई 2027, वैशाख शुक्ल पक्ष दिन रविवार को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी। जानें इस व्रत की सम्पूर्ण विधि, पौराणिक कथा, क्या करें-क्या न करें, शुभ मुहूर्त और ऐसे अचूक टोटके जो दूर करते हैं सभी पाप और दिलाते हैं धन-समृद्धि"।
"अब मोहिनी एकादशी 2027 में भगवान विष्णु की तस्वीर"
सनातन धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी कहा जाता है। यह व्रत सभी प्रकार के पापों को नष्ट करने वाला और मनुष्य को मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, गौ हत्या, परनिंदा, झूठ बोलना, परस्त्री गमन जैसे महापाप भी धुल जाते हैं और भक्त को भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति होती है।
"आइए, 16 मई 2027 को पड़ने वाली मोहिनी एकादशी की समस्त जानकारी विस्तार से जानते हैं"
*मोहिनी एकादशी 2027: शुभ मुहूर्त एवं दिन का पंचांग
*एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 मई 2027, शनिवार शाम 06:17 बजे से
*एकादशी तिथि समाप्त: 16 मई 2027, रविवार शाम 05:13 बजे तक
*पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 17 मई, दिन सोमवार सुबह 05:04 बजे से 06:43 बजे तक (द्वादशी तिथि के भीतर)
*सूर्योदय: 16 मई को सुबह 05:04 बजे (लगभग)
*सूर्यास्त: 16 मई को शाम 06:19 बजे (लगभग)
"दिन का योग एवं संयोग":
*रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। इस दिन सूर्य की शक्ति प्रबल रहती है, जो आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। एकादशी का व्रत इस ऊर्जा को और बढ़ाकर आध्यात्मिक लाभ प्रदान करेगा।
"मोहिनी एकादशी की पौराणिक कथा"
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस व्रत की कथा अत्यंत पुण्य दायक मानी जाती है और इसके श्रवण मात्र से ही अनेक पापों का नाश होता है। इस कथा का माहात्म्य भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को और उनसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम को सुनाया था।
👑 "कथा का प्रारम्भ: भद्रावती नगरी और धनपाल वैश्य"
प्राचीन काल में, सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक सुंदर नगरी थी, जिस पर द्युतिमान नामक एक धर्मात्मा राजा राज करते थे। उसी नगरी में धनपाल नामक एक अत्यंत धनी, धर्मपरायण और विष्णु भक्त वैश्य रहता था। धनपाल वैश्य ने नगर में अनेक भोजनालय, प्याऊ, कुएं, सरोवर और धर्मशालाएं बनवाकर लोक-कल्याण के कार्य किए थे। उसके पांच पुत्र थे, जिनमें से सबसे बड़ा पुत्र धृष्ट बुद्धि (या कुछ कथाओं में दुर्बुद्धि) था।
धृष्टबुद्धि अपने पिता के विपरीत, अत्यंत दुराचारी, पापी और कुमार्गी था। वह देवताओं तथा पितरों का अनादर करता था। उसकी संगति बुरी थी; वह जुआ खेलता था, पर-स्त्री गमन करता था, मद्यपान (शराब) और माँस का सेवन करता था। इन कुकर्मों में लिप्त रहकर उसने अपने पिता की बहुत सी संपत्ति नष्ट कर दी।
💔 "पिता द्वारा परित्याग और धृष्ट बुद्धि का कष्टमय जीवन"
पुत्र के इन घोर दुष्कर्मों से दुखी होकर, पिता धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया। घर से निकाले जाने के बाद, धृष्ट बुद्धि अपने गहनों और वस्त्रों को बेचकर कुछ दिन तक अपना भरण-पोषण करता रहा। जब उसके पास का सारा धन समाप्त हो गया, तो वह दरिद्र हो गया और उसे भूख-प्यास सताने लगी।
भूख से व्याकुल होकर, वह चोरी और लूटपाट करने लगा। एक बार वह चोरी करते हुए पकड़ा गया, और राजा के सिपाहियों ने उसे पकड़कर कारागार में डाल दिया। वहाँ उसे कठोर दंड दिया गया और अंततः राजा की आज्ञा से उसे राज्य से निकाल दिया गया।
अब धृष्ट बुद्धि अत्यंत दुखी होकर घने जंगल में भटकने लगा। वह वहां के पशु-पक्षियों को मारकर और फल-फूल खाकर अपना जीवन बिताने लगा। रात को किसी वृक्ष के नीचे सो जाता और दिन में घूमता रहता। पाप कर्मों के कारण उसके शरीर में अनेक रोग हो गए और वह बहुत कमजोर हो गया।
🧘♂️ "कौण्डिन्य मुनि से भेंट और उपाय की प्राप्ति"
एक दिन, खाने की तलाश में भटकते हुए, धृष्ट बुद्धि एक पवित्र स्थान पर पहुंचा। यह स्थान कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम था। उस समय वैशाख मास चल रहा था।
जब धृष्ट बुद्धि उस आश्रम के पास पहुंचा, तो उसने देखा कि कौण्डिन्य मुनि गंगा स्नान करके लौट रहे थे। ऋषि के शरीर से गंगाजल के भीगे हुए वस्त्रों की कुछ बूंदें उड़कर धृष्ट बुद्धि के शरीर पर पड़ीं। उन पवित्र जल की बूंदों के स्पर्श मात्र से धृष्ट बुद्धि को कुछ सद्बुद्धि प्राप्त हुई और उसके मन में पश्चात्ताप की भावना जागी।
वह तुरंत ऋषि कौण्डिन्य के समीप गया और हाथ जोड़कर दीन-भाव से कहने लगा:
"हे मुनिवर! मैंने अपने जीवन में अनगिनत महापाप किए हैं। मैं एक महा पापी हूं। मेरे पापों का नाश कैसे होगा? कृपा करके मुझे कोई ऐसा सरल और धन रहित उपाय बताइए, जिससे मेरे सभी पाप धुल जाएं और मेरा उद्धार हो सके। आप तो पतितों को भी पावन करने वाले हैं।"
धृष्ट बुद्धि के दीन वचन सुनकर, मुनि कौण्डिन्य को उस पर दया आ गई। मुनि ने प्रसन्न होकर कहा:
"हे वत्स! तुम ध्यान से सुनो। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी है। यह एकादशी अत्यंत पुण्य दायिनी है। यदि तुम मेरे बताए अनुसार, विधि-विधान से इस मोहिनी एकादशी का व्रत करोगे, तो तुम्हारे अनंत जन्मों के सभी पाप शीघ्र ही नष्ट हो जाएंगे।"
✨ "व्रत का प्रभाव और मोक्ष की प्राप्ति"
ऋषि कौण्डिन्य के उपदेश और सरल उपाय को सुनकर धृष्ट बुद्धि अत्यंत प्रसन्न हुआ। उसने मुनि के बताए अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ किया।
इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप, रोग और कष्ट दूर हो गए। वह पाप रहित होकर शुद्ध हो गया और उसके अंदर सत्कर्मों का उदय हुआ।
अंत में, जब उसकी मृत्यु हुई, तो भगवान विष्णु की कृपा से वह गरुड़ पर सवार होकर विष्णु लोक (बैकुंठ) को चला गया। उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
🌊 "मोहिनी एकादशी के नाम की उत्पत्ति" ("दूसरी कथा")
इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहने के पीछे एक और महत्वपूर्ण पौराणिक कथा है, जो समुद्र मंथन से जुड़ी है:
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। सबसे अंत में अमृत कलश निकला।
अमृत कलश को देखते ही देवताओं और असुरों में उसे पाने के लिए भयंकर संघर्ष छिड़ गया। असुर छल-कपट से अमृत को देवताओं से छीनकर स्वयं ही पीना चाहते थे।
जब अमृत कलश असुरों के पास चला गया और देवगण निराश हो गए, तब देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने एक अत्यंत सुंदर, मन मोहिनी स्त्री का रूप धारण किया, जिसे मोहिनी कहा गया।
मोहिनी रूप में भगवान विष्णु असुरों के पास पहुंचे। मोहिनी के अलौकिक सौंदर्य को देखकर सभी असुर मोहित हो गए और अमृत के कलश को मोहिनी के हाथों में सौंप दिया।
मोहिनी ने अपनी मधुर वाणी और छल से असुरों को विश्वास दिलाया कि वह निष्पक्ष भाव से सभी को अमृत का पान कराएगी, लेकिन पहले देवताओं को।
भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप में केवल देवताओं को ही अमृत पिलाया और असुरों को साधारण जल दिया। इस प्रकार, उन्होंने देवताओं की रक्षा की और उन्हें अमरत्व प्रदान किया।
जिस दिन भगवान विष्णु ने यह मोहिनी अवतार धारण किया था, वह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी थी। इसीलिए इस तिथि को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
💖 "निष्कर्ष"
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि संसार में मोहिनी एकादशी के व्रत से उत्तम कोई व्रत नहीं है। यह व्रत मोह-माया और समस्त पापों का नाश करता है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है या इसकी कथा सुनता है, उसे हजारों गौदान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है और अंत में वह मोक्ष को प्राप्त करता है।
यदि आप मोहिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि या शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो मुझे बताएं!
"मोहिनी एकादशी व्रत की सम्पूर्ण विधि" (Step-by-Step)
*01. दशमी का दिन: व्रत से एक दिन पहले यानी दशमी (15 मई) के दिन सात्विक भोजन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को भगवान में लगाएं।
*02. संकल्प: एकादशी (16 मई) की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें।गवान विष्णु की प्रतिमा या शालिग्राम के सामने जल, अक्षत, फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
*03. पूजन: इस दिन भगवान त्रिविक्रम (भगवान विष्णु के वामन अवतार का विशाल रूप) की पूजा का विशेष विधान है। धूप, दीप, फल, फूल, तुलसी दल, मौसमी फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से भगवान का श्रृंगार करें।
*04. जागरण: अपरा एकादशी की रात्रि जागरण (रात भर जागकर) भगवान के नाम का कीर्तन, भजन या "विष्णु सहस्त्रनाम" का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
*05. दान-पुण्य: अगले दिन द्वादशी (17 मई) को ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और अपनी शक्ति के अनुसार दान-दक्षिणा दें।
*06. पारण: दान के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (समापन) करें।
"मोहिनी एकादशी के दिन क्या करें और क्या न करें"
क्या करें (Do's):
*सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
*दिन भर व्रत रखें और भगवान विष्णु का नाम जपें।
*तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को अवश्य अर्पित करें।
*रात में भजन-कीर्तन करें और जागरण करें।
*दान-पुण्य अवश्य करें, विशेष रूप से अनाज, वस्त्र या धन का दान।
*मन में सद्भावना और पवित्र विचार रखें।
*क्या न करें (Don'ts):
*व्रत में अन्न (चावल, गेहूं, दालें) ग्रहण न करें।
*किसी का दिल न दुखाएं, निंदा या चुगली से बचें।
*क्रोध, झूठ, छल-कपट से दूर रहें।
*इस दिन चावल (धान) का सेवन विशेष रूप से वर्जित माना गया है।
*ब्रह्मचर्य का पालन करें।
"मोहिनी एकादशी के दिन क्या खाएं और क्या न खाएं"
*क्या खाएं (फलाहार):
*फल (केला, सेब, अनार, आम)
*मेवे (बादाम, अखरोट, किशमिश)
*दूध, दही, लस्सी
*साबुदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा
*आलू, शकरकंद, मूंगफली
*नारियल पानी, फलों का रस
*क्या न खाएं:
*सभी प्रकार के अन्न (चावल, गेहूं, मक्का, जौ आदि)
*प्याज, लहसुन
*मांस, मदिरा, अंडा
*मसूर की दाल
"मोहिनी एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की होती है पूजा"?
मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के "त्रिविक्रम" रूप की पूजा का विशेष विधान है। यह भगवान विष्णु के वामन अवतार का ही विशाल रूप है, जब उन्होंने तीनों लोकों को नापने के लिए अपना रूप बढ़ा लिया था। इस रूप की पूजा करने से भक्त को सभी सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और उसके सभी पाप नष्ट होते हैं।
"मोहिनी एकादशी के अचूक टोटके"
*01. धन प्राप्ति के लिए: एकादशी की रात एक तांबे के बर्तन में जल भरकर, उसमें थोड़े सिक्के (सोना-चांदी का भी) डालकर और एक सुपारी रखकर, इसे भगवान विष्णु के चरणों में रख दें। अगले दिन इस जल से पौधों में सिंचाई करें और सिक्कों को अपने लॉकर या तिजोरी में रख लें।
*02. कर्ज से मुक्ति के लिए: तुलसी के 11 पत्तों पर थोड़ा-थोड़ा गुड़ लगाकर भगवान विष्णु को अर्पित करें। फिर इन्हें किसी जलाशय या नदी में प्रवाहित कर दें।
*03. वैवाहिक समस्या के लिए: एकादशी के दिन गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं। इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।
*04. सोना दान: इस दिन सोने (यथाशक्ति, चाहे एक सिक्का ही क्यों न हो) का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और आर्थिक समृद्धि बढ़ती है।
"मोहिनी एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर" (FAQs)
*प्रश्न: क्या मोहिनी एकादशी का व्रत बिना जागरण के पूरा हो सकता है?
उत्तर:जागरण व्रत का विशेष अंग है, लेकिन अगर कोई स्वास्थ्य कारणों से जागरण नहीं कर सकता, तो वह रात में भगवान का नाम जपते-जपते सो सकता है। पूरे विधि-विधान से व्रत करने पर भी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
*प्रश्न: क्या बच्चे और बुजुर्ग यह व्रत रख सकते हैं?
उत्तर:हां, लेकिन उन्हें पूर्ण उपवास की बजाय फलाहार या दूध-फल पर रहकर व्रत करना चाहिए। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
*प्रश्न: मोहिनी एकादशी तिथि दो दिन रहे तो व्रत किस दिन रखें?
उत्तर:सामान्य नियम के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहे, उसी दिन व्रत रखना चाहिए। 2027 में, 16 मई, रविवार के दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि है, इसलिए इसी दिन व्रत रखा जाएगा।
*प्रश्न: मोहिनी एकादशी के दिन किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
उत्तर:"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप या "विष्णु सहस्त्रनाम" का पाठ सर्वोत्तम है।
"मोहिनी एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए"?
एकादशी के दिन भूमि पर सोना बहुत पुण्य दायी माना जाता है। यह इंद्रियों को नियंत्रित करने और मन को शांत रखने में सहायक है। हालांकि, यदि कोई बीमार है या भूमि पर सोने में असमर्थ है, तो वह साधारण बिस्तर पर ही सो सकता है, लेकिन कोशिश करें कि रात्रि जागरण करें।
"डिस्क्लेमर"
यह लेख धार्मिक ग्रंथों, विशेष रूप से पद्म पुराण, और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई जानकारी का उद्देश्य पाठकों को अपरा एकादशी के महत्व, विधि और कथा से अवगत कराना मात्र है। इसे किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक पुष्टि या चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य, उम्र और शारीरिक स्थिति का विशेष ध्यान रखें। गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, बुजुर्ग और बच्चे व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। व्रत के दौरान यदि किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी हो, तो व्रत तोड़ने या हल्का फलाहार लेने में संकोच न करें। भगवान भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं, कठोर कष्ट से नहीं।
तिथि और मुहूर्त संबंधी जानकारी काशी पंचांग या किसी प्रामाणिक ज्योतिषीय स्रोत पर आधारित है, जो स्थानीय भिन्नता के अधीन हो सकती है। किसी भी प्रकार की शंका या विस्तृत जानकारी के लिए किसी योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से संपर्क करना उचित रहेगा।
लेख में बताए गए टोटके सामान्य लोक मान्यताओं पर आधारित हैं और इनके परिणाम व्यक्ति-व्यक्ति पर भिन्न हो सकते हैं। इन्हें करने की पूर्ण जिम्मेदारी पाठक की स्वयं की होगी।