"चैती छठ 2029 पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथा और टोटके
byRanjeet Singh-
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चैती छठ 2029 शुभ मुहूर्त और दिन कैसा रहेगा
*चैती छठ 2029 की मुख्य तिथि 18 अप्रैल से 21 अप्रैल तक है।
*नहाय-खाय: 18 अप्रैल 2029
*खड़ना: 19 अप्रैल 2029
*संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य): 20 अप्रैल 2029 शाम 6:30 से 7:30 तक (सूर्यास्त के समय के आस-पास)
*उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य): 21 अप्रैल 2029 सुबह 5:30 से 6:30 तक (सूर्योदय के समय के आस-पास)
*इस दौरान दिन शुभ रहेगा, स्वास्थ्य, परिवारिक सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होगी। इस पर्व से विशेष रूप से संतान सुख, रोगमुक्ति, और वित्तीय स्थिरता की कामना पूरी होती है।
"चैती छठ की पौराणिक कथा का विस्तार से":
*छठ पूजा की परंपरा वर्ष में दो बार होती है—चैत्र महीने की शुक्ल षष्ठी को चैती छठ और कार्तिक महीने की शुक्ल षष्ठी को कार्तिकी छठ कहा जाता है। इस त्योहार की कहानियां महाभारत, रामायण और पुराणों से जुड़ी हैं।
*महाभारत काल की एक प्रमुख कथा है कि पांडवों ने जुएं में अपना राजपाट हार दिया था, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। उन्होंने सूर्य देवता की पूर्ण श्रद्धा और पूजा की, जिससे भगवान सूर्य ने उन्हें आशीर्वाद दिया और पांडवों को उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिला। इसी कारण छठ व्रत को मनाने की परंपरा आरंभ हुई जो समृद्धि व विजय का प्रतीक है।
*एक अन्य कथा के अनुसार, राजा प्रियवद को संतान सुख की बड़ी इच्छा थी। महर्षि कश्यप ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। राजा की रानी ने खीर ग्रहण की जिसके कारण पुत्र हुआ, पर वह मृत जन्मा। राजा पुत्र के मृत शरीर को लेकर श्मशान जा रहे थे, उसी समय आकाश से एक तेजोमय दिव्य विमान उतरा जिसमें से देवी देवसेना प्रकट हुईं।
*देवी ने कहा कि मैं षष्ठी देवी हूं, मैं सभी बालकों की रक्षक हूं। उन्होंने मृत पुत्र को जीवित किया और राजा से कहा कि वे मेरी पूजा करें। राजा ने श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा की, जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठी माता की पूजा का विधान चला आ रहा है।
*रामायण काल में भी छठ पूजा का उल्लेख मिलता है। जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे तो उन्होंने रावण वध के पापों से मुक्ति के लिए सूर्य देवता की पूजा की। राज्य की स्थिरता के लिए राम और सीता ने छठ व्रत रखा और सूर्य देव को अर्घ्य दिया। महर्षि मुद्गल ने सीता का पवित्री करण किया और नवरात्रि के दौरान छठ पूजा का विधान स्थापित किया।
*महान योद्धा कर्ण जो भगवान सूर्य के परम भक्त थे, प्रतिदिन गंगा के तट पर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे। सूर्य देव की कृपा से उनका योद्धा रूप शक्तिशाली बना। इसलिए उन्हें भी छठ व्रत के प्रथम अनुष्ठान कर्ताओं में गिना जाता है।
*छठ पूजा में सूर्य देव और छठी माता दोनों की पूजा होती है जिन्हें जीवन, समृद्धि, दीर्घायु और संतान सुख की देवी-देवता माना जाता है। कहते हैं कि छठी माता भगवान सूर्य की बहन हैं और दोनों देवताओं की पूजा से परिवार में स्थिरता, सुख-शांति और समृद्धि आती है।
*इस प्रकार, चैती छठ व्रत एक अत्यंत प्राचीन, पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है, जो श्रद्धा, तपस्या और भक्ति के माध्यम से भगवान सूर्य और छठी माता की आराधना करता है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति करता है बल्कि जीवन में सुख, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति का माध्यम भी माना जाता है।
*यह एक चार दिवसीय पर्व है जिसमें नहाय-खाय, खड़ना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान होते हैं, जो भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शुद्धि लाते हैं। छठ पूजा की यह कथा और इतिहास इस पर्व की महत्ता को प्रमाणित करते हैं और भक्तों के विश्वास को दृढ़ करते हैं।
"चैती छठ में क्या खाएं और क्या ना खाएं"
*चैती छठ के दिन व्रती सात्विक भोजन करते हैं। कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं:
*नहाय खाय के दिन शुद्ध और हल्का भोजन करें जैसे अरवा चावल का भात, कद्दू की सब्जी, चना दाल।
*खड़ना के दिन व्रती निर्जला रहते हैं (दिन में पानी नहीं पीते) और शाम को दूध-चावल की खीर बनाकर खाते हैं।
*व्रत के दौरान मांस, मछली, प्याज, लहसुन, आलू, अन्य विषैले, अस्वस्थ और नॉन-वेज खाने से परहेज करें।
*प्रसाद के तौर पर ठेकुआ, फल, नारियल, शकरकंदी, मूली आदि प्रयोग करें।
��."चैती छठ पर क्या करें और क्या ना करें"
*व्रत के दिन पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में स्नान करें।
*पूरी श्रद्धा और शुद्ध मन से सूर्य देव और छठी माताजी की पूजा करें।
*पूजा में गंगाजल, मिट्टी के दीपक, तांबे के लोटे का प्रयोग करें।
*व्रत के दौरान झूठे हाथों से पूजा सामग्री न छुएं।
*पूजा के समय फूल टूटे या खराब न हों।
*व्रत के दौरान सबरी भाव से कड़ी तपस्या करें, कोई झूठ और बुरे कर्म न करें।
*व्रत के दिन सोने के लिए साफ, शुद्ध स्थान चुनें और सूर्य की ओर मुख करके सोएं।
*अत्यधिक आराम या आलस्य से बचें ��.
"चैती छठ के अचूक टोटके"
*छठी मैया की आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।छठ पूजा के समय पुराने कपड़े फेंक दें और नए शुभ वस्त्र पहनें।
*पूजा के दौरान मिट्टी के दीप जलाएं, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
*व्रत के दिन तांबे के लोटे में जल, दूध, चंदन, अक्षत आदि डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
*पूजा के दिन मंत्रों का जाप करें, खासकर सूर्य मंत्र का।
*मनोकामना हेतु संतान प्रसन्नता और धन के लिए छठ टोटकों का नियमित पालन करें ��.
"चैती छठ में भगवान के किस रूप की पूजा होती है"
*चैती छठ में भगवान सूर्य देव और छठी मैया का पूजन होता है। भगवान सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन शक्ति का देवता माना जाता है, और छठी माता संतान सुख, समृद्धि तथा आरोग्य की देवी हैं। छठी माता को मैया के रूप में पूजा जाता है जो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। पूजा में सूर्य देव के डूबते और उगते समय विशेष अर्घ्य दिया जाता है ��.
"चैती छठ के दिन किस पर सोना चाहिए"
*पर्व के दौरान शुद्धता एवं सकारात्मक ऊर्जा महत्वपूर्ण होती है। व्रत के दिन साफ, स्वच्छ जमीन या नए चादर पर, यदि संभव हो तो सूती या प्राकृतिक वस्त्रों पर सूर्य की ओर मुख करके सोना चाहिए। इस दिन गंदे या पुराने सामान पर सोने से व्रत प्रभावित हो सकता है, इसलिए ध्यान रखें कि व्रत के दौरान स्वच्छता बनी रहे �.
"चैती छठ पूजा विधि" (स्टेप बाय स्टेप)
*पहला दिन (नहाय खाय):
*व्रती पवित्र जल में स्नान कर शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें। अरवा चावल, कद्दू की सब्जी, चना दाल का सेवन करें।
*दूसरा दिन (खड़ना): दिन भर निर्जला व्रत रखें। शाम को दूध, गुड़ की खीर बनाएं और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
*तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): डूबते सूर्य को जल, दूध, चंदन, अक्षत से अर्घ्य दें। पूजा सामग्री में फल, ठेकुआ, लड्डू, गन्ना शामिल करें।
*चौथा दिन (उषा अर्घ्य): सूर्योदय के समय पूजा करें और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करें।
*पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करें और छठी माता की आरती अवश्य करें ��.
"चैती छठ से संबंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर इस प्रकार हैं:चैती छठ से जुड़े प्रश्न और उत्तर"
प्रश्न *01: चैती छठ कब मनाया जाता है?
*उत्तर: चैती छठ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से शुरू होकर चार दिनों तक मनाया जाता है। 2029 में यह 18 अप्रैल से 21 अप्रैल तक है। इसका आरंभ नहाय-खाय से होता है और अंत उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।
प्रश्न *02: चैती छठ व्रत क्यों रखा जाता है?
*उत्तर: यह व्रत भगवान सूर्य देव और छठी मैया की पूजा के लिए रखा जाता है। इसे संतान सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के लिए किया जाता है।
प्रश्न *03: छठ पूजा में किन देवताओं की पूजा होती है?
*उत्तर: मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी माता की पूजा होती है। छठी माता को भगवान सूर्य की बहन माना जाता है।
प्रश्न *04: चैती छठ के दिन क्या खाएं और क्या न खाएं?
*उत्तर: व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें, जैसे अरवा चावल, कद्दू की सब्जी, गुड़ की खीर। मांस, मछली, प्याज, लहसुन, और आलू से परहेज करें। खरना के दिन दूध और गुड़ की खीर ग्रहण की जाती है।
प्रश्न *05: छठ पूजा में क्या नियम पालन करना आवश्यक है?
*उत्तर: व्रत के दौरान शुद्धता और संयम बनाए रखना जरूरी है। पूजा सामग्री झूठे हाथ से न छुएं, फूल सही और ताजे हों, और उपवास के दौरान निर्जला रहना आवश्यक होता है।
प्रश्न *06: चैती छठ व्रत कितना समय तक रहता है?
*उत्तर: यह लगभग 36 घंटे का कठोर व्रत होता है, जिसमें निर्जलीय उपवास और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा शामिल है।
प्रश्न *07: चैती छठ के दिन कैसे सोना चाहिए?
*उत्तर: व्रत के दिन साफ-सुथरी जगह, सूर्य की ओर मुख करके सोना शुभ माना जाता है।
प्रश्न *08: चैती छठ के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
*उत्तर: सूर्य देव और छठी माता की विधिपूर्वक पूजा करें, नदी या तालाब में स्नान करें, नकारात्मक विचार और कामों से बचें। पूजा के दौरान झूठे हाथ से पूजन सामग्री ना छुएं और फूल ताजे हों।
प्रश्न *09: छठ पूजा के धन, संतान सुख व स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव माने जाते हैं?
*उत्तर: माना जाता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया छठ व्रत परिवार में सुख, समृद्धि, संतान का स्वास्थ्य और दीर्घायु सुनिश्चित करता है।प्रश्न
*10: क्या छठ पूजा सिर्फ महिलाएं ही करती हैं?
*उत्तर: मुख्य रूप से महिलाएं छठ व्रत रखती हैं लेकिन पुरुष भी पूजा और अर्घ्य देने में सहायक होते हैं।
*ये प्रश्न और उत्तर चैती छठ के त्योहार को समझने में मदद करते हैं और सभी भक्तों के लिए उपयोगी हैं।
"चैती छठ से संबंधित डिस्क्लेमर"
*चैती छठ पूजा हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण व्रत है, जिसका पालन श्रद्धा, विश्वास और शुद्धता से किया जाता है। इस पर्व के दौरान व्रत और पूजा की विधि का अनुसरण करते समय धार्मिक नियमों का सही पालन आवश्यक है। इस ब्लॉग में प्रदत्त जानकारी विभिन्न धार्मिक शास्त्रों, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।
*हालांकि, इन नियमों और कथाओं का तात्पर्य व्यक्तिगत श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपराओं से है, इसलिए इन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परखा न जाए। छठ व्रत के नियमों का पालन करते समय व्यक्तिगत स्वास्थ्य, योग्यता और परिस्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है। किसी भी प्रकार की असुविधा या स्वास्थ्य समस्या होने पर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
*पूजा, व्रत या टोटकों का लाभ धार्मिक आस्था का विषय है, इसलिए इसे पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ करना चाहिए। इस ब्लॉग में उल्लिखित टोटके और उपाय केवल सुझाव हैं, इनका प्रभाव व्यक्ति विशेष के अनुसार भिन्न हो सकता है। छठ पूजा की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, शुद्धता और निष्ठा। अतः इस ब्लॉग में दी गई जानकारी केवल मार्गदर्शन हेतु है, किसी भी विवाद या असुविधा की स्थिति में स्थानीय पंडित या आध्यात्मिक गुरु से परामर्श लेना उत्तम होगा।