Kartik Chhath 2028: कार्तिक छठ पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, नहाय-खाय से पारण तक पूरी जानकारी

"23 अक्टूबर 2028 को कार्तिक छठ है। जानें नहाय-खाय (21 अक्टूबर) से लेकर पारण (24 अक्टूबर) तक का पूरा शेड्यूल, विस्तृत पूजा विधि, पौराणिक व्रत कथा, क्या करें और क्या न करें, अचूक टोटके और ज्योतिषीय भविष्यवाणी। अर्ध्य देने का संपूर्ण मार्गदर्शन"

A picture from Kartik Chhath 2028 showing women offering prayers to Lord Surya on the riverbank.

"पवित्र नदी के तट पर, छठव्रती महिलाएं उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर उनकी उपासना कर रही हैं। यह दृश्य बताता है आस्था की शक्ति और प्रकृति के प्रति हमारा सम्मान"

"कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला छठ पर्व सूर्योपासना का सबसे महत्वपूर्ण और अनूठा त्योहार है। यह पर्व न सिर्फ शारीरिक बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है। इस बार कार्तिक छठ 23 अक्टूबर 2028, सोमवार को है। इस चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत 21 अक्टूबर 2028, शनिवार से होगी। आइए, जानते हैं इस पावन पर्व की संपूर्ण तिथि, विधि, कथा और महत्व के बारे में"

"कार्तिक छठ 2028 का पूरा कैलेंडर" (Chhath Puja 2028 Full Calendar)

*दिन तिथि दिन महत्व

*01.नहाय-खाय 21 अक्टूबर 2028 शनिवार व्रत की शुरुआत, सात्विक भोजन ग्रहण

*02.खड़ना 22 अक्टूबर 2028 रविवार दिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद

*03.संध्या अर्घ्य (छठ) 23 अक्टूबर 2028 सोमवार डूबते सूर्य को अर्घ्य देना

*04.सुबह का अर्घ्य (पारण) 24 अक्टूबर 2028 मंगलवार उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत का पारण

"कार्तिक छठ पूजा की संपूर्ण विधि" (Step-by-Step Puja Vidhi)

*छठ पूजा एक कठिन तपस्या के समान है। इसे बेहद नियमों और श्रद्धा के साथ पूरा किया जाता है।

*चरण 1: नहाय-खाय (21 अक्टूबर)

*सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

*घर की सफाई करके पवित्र हो जाएं।

इस दिन कद्दू की सब्जी, चना दाल और अरवा चावल का सात्विक भोजन बनाया जाता है। इस भोजन को ग्रहण करने के बाद अगले 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।

*चरण 2: खरना (22 अक्टूबर)

*पूरा दिन निर्जला व्रत रखें।

*शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर (चावल की खीर) बनाई जाती है।

*इस खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। इसे बनाने में सामान्य नमक के बजाय सेंधा नमक का use किया जाता है।

*इस प्रसाद को घर के सभी सदस्य ग्रहण कर सकते हैं।

*चरण 3: संध्या अर्घ्य (23 अक्टूबर - मुख्य दिन)

*यह छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है।

*पूरे दिन व्रत रखकर शाम को घाट पर जाया जाता है।

*बांस की टोकरी (दउरा) में ठेकुआ, फल, ईख (गन्ना) आदि सजाए जाते हैं।

*घाट पर जाकर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।

*अर्घ्य देते समय "छठ मैया" के विशेष मंत्रों का उच्चारण और छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।

*पूजा के बाद रात भर छठ व्रत कथा सुनी और सुनाई जाती है।

*चरण 4: सुबह का अर्घ्य और पारण (24 अक्टूबर)

*सुबह सूर्योदय से पहले ही व्रती फिर से घाट पर पहुंचते हैं।

*उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।

*इसके बाद घर आकर छठी मैया की पूजा की जाती है।

*अंत में प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (उपवास तोड़ना) किया जाता है।

"कार्तिक छठ की पौराणिक कथा" 

*छठ पूजा की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़ी है।

*रामायण काल की कथा:

मान्यता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब उन्होंने और माता सीता ने राज्याभिषेक के बाद ब्रह्म मुहूर्त में उगते सूर्य की उपासना की थी। उन्होंने सूर्य देव की आराधना करके अपने राजपाट की सफलता और प्रजा के कल्याण की कामना की थी। इस उपासना में माता सीता ने सूर्य देव को अर्घ्य दिया था। कहा जाता है कि उसी दिन से अयोध्या में छठ पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई और फिर यह पूरे भारत में फैल गई।

*महाभारत काल की कथा:

एक अन्य प्रसिद्ध कथा महाभारत काल से जुड़ी है। जब सबसे पहले कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण सूर्य देव के परम भक्त थे और वे प्रतिदिन घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया करते थे। उनकी इसी तपस्या के कारण उन्हें सूर्य पुत्र कहा जाता था। उनकी इसी साधना को आज छठ के रूप में मनाया जाता है।

*राजा प्रियंवद और रानी मालिनी की कथा:

सबसे लोकप्रिय कथा राजा प्रियंवद और रानी मालिनी की है। राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर रानी को प्रसाद स्वरूप खीर दी। इससे रानी गर्भवती तो हुईं, लेकिन उन्होंने एक मृत बच्चे को जन्म दिया। इससे राजा बहुत दुखी हुए और आत्महत्या करने के लिए दौड़ पड़े। 

तभी आकाश से एक देवी प्रकट हुईं। वे छठी मैया (सूर्य देव की बहन) थीं। उन्होंने राजा से कहा कि वे सृष्टि की मूल प्रकृति का व्रत करें, जिससे उनकी मनोकामना पूरी होगी। 

राजा प्रियंवद और रानी मालिनी ने विधि-विधान से इस व्रत को किया। इसके फलस्वरूप उनके मृत पुत्र जीवित हो उठा। कहा जाता है कि तभी से संतान प्राप्ति और उनके दीर्घायु होने की कामना के लिए छठ व्रत किया जाने लगा।

ये कथाएं इस पर्व की महानता और इसके चमत्कारिक प्रभाव को दर्शाती हैं। यह व्रत न सिर्फ मनोकामना पूर्ति का साधन है, बल्कि आस्था, समर्पण और तपस्या का अनूठा संगम भी है।

"कार्तिक छठ के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं" (What to Eat and Avoid)

*क्या खाएं (प्रसाद के रूप में):

*ठेकुआ: यह छठ का मुख्य प्रसाद है, जो आटे और गुड़ से बनता है।

*गुड़ की खीर: खड़ना के दिन बनाई जाती है।

*ताजे फल: केला, नारियल, सेब, संतरा, अनार आदि।

*मिठाई: लड्डू, चावल के पकवान।

*सब्जियां: हल्दी व अदरक से बनी सब्जियां (नहाय-खाय के दिन)।

*क्या ना खाएं:

*व्रत के दौरान प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित है।

*मांस, मदिरा, अंडा आदि सभी तामसिक पदार्थों से परहेज करें।

*व्रत के दिन नमक और पानी ग्रहण नहीं किया जाता (निर्जला व्रत)।

"कार्तिक छठ के दिन क्या करें और क्या ना करें" (Do's and Don'ts)

*क्या करें:

*सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।

*सूत के कपड़े (जैसे सूती साड़ी या धोती) पहनें।

*प्रसाद और पूजा सामग्री घर पर ही तैयार करें।

*अर्घ्य देते समय पूरा शरीर जल में डूबा होना चाहिए।

*व्रत के दौरान जमीन पर सोना चाहिए।

*क्या ना करें:

*व्रत के दौरान झूठ न बोलें, किसी को बुरा न कहें।

*पूजा के लिए बिना स्नान किए न जाएं।

*किसी भी प्रकार का छल-कपट न करें।

*प्रसाद में किसी भी प्रकार की मिलावट न करें।

"कार्तिक छठ से संबंधित प्रश्न और उत्तर" (FAQs)

*01. कार्तिक छठ के दिन किस भगवान की होती है पूजा?

*छठ पर्व मुख्य रूप से सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया (षष्ठी देवी) की पूजा का पर्व है। षष्ठी देवी को संतानों की रक्षिका माना जाता है।

*02. कार्तिक छठ के दिन किस पर सोना चाहिए?

*व्रत रखने वाले व्रती को जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोना चाहिए। कोमल बिस्तर पर सोना वर्जित माना जाता है। यह तपस्या का एक अंग है।

*03. क्या पुरुष छठ व्रत रख सकते हैं?

*जी हां, बिल्कुल। छठ व्रत कोई लिंग-विशेष व्रत नहीं है। पुरुष भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत रख सकते हैं।

*04. क्या गर्भवती महिलाएं छठ व्रत रख सकती हैं?

*गर्भवती महिलाएं निर्जला व्रत रखने की बजाय फलाहार कर सकती हैं या डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं। उनके लिए घाट पर जाना और लंबे समय तक खड़े रहना कठिन हो सकता है।

"कार्तिक छठ के अचूक टोटके" (Effective Tips for Wishes Fulfillment)

*संतान प्राप्ति के लिए: छठ व्रत करते समय प्रसाद में 6 ठेकुओं का एक पूजा सेट बनाएं और उसे किसी सुहागन महिला को दें।

*धन लाभ के लिए: सूर्य अर्घ्य देते समय जल में एक सुपारी और एक सिक्का डालें। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।

*वैवाहिक जीवन में सुख के लिए: पूजा के बाद सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिछुआ) छठी मैया को अर्पित करें।

*कर्ज से मुक्ति के लिए: अर्घ्य देते समय हाथ में लाल मौली बांधें और पूजा के बाद उसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें।

शुभ मुहूर्त और भविष्यवाणी (Auspicious Muhurat and Astrological Insight)

*संध्या अर्घ्य (23 अक्टूबर 2028):

*सूर्यास्त का समय: लगभग शाम 05:45 बजे (स्थानीय समयानुसार अलग हो सकता है)।

*अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त: सूर्यास्त से ठीक पहले का समय सबसे शुभ माना जाता है।

*सुबह का अर्घ्य (24 अक्टूबर 2028):

*सूर्योदय का समय: लगभग सुबह 06:15 बजे (स्थानीय समयानुसार अलग हो सकता है)।

*अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त: सूर्योदय के तुरंत बाद का समय।

*ज्योतिषीय दृष्टिकोण:

सोमवार के दिन छठ पड़ना बहुत शुभ माना जा रहा है। सोमवार चंद्रमा का दिन है और चंद्रमा मन का कारक है। इस दिन व्रत रखने से मन को शांति और संतुष्टि मिलेगी। सूर्य देव की कृपा से सेहत अच्छी रहेगी और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। मंगलवार को पारण होने से साहस और ऊर्जा का संचार होगा।

"डिस्क्लेमर" Disclaimer 

यह ब्लॉग सदियों से चली आ रही लोक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। यहां दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय, वैज्ञानिक या कानूनी सलाह नहीं है। छठ व्रत एक कठिन तपस्या है, जिसमें लंबे समय तक निर्जला उपवास और शारीरिक श्रम शामिल है।

व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य की स्थिति को अवश्य ध्यान में रखें। यदि आपको कोई चिकित्सकीय समस्या (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गर्भावस्था आदि) है, तो व्रत रखने का निर्णय लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। व्रत के दौरान यदि किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी (चक्कर आना, कमजोरी, डिहाइड्रेशन) महसूस हो, तो तुरंत व्रत तोड़ देना चाहिए। सेहत सबसे बड़ी पूंजी है।

इस ब्लॉग में दिए गए टोटके और उपाय लोक विश्वासों पर आधारित हैं। इनके परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा और व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर करते हैं। इन्हें किसी भी प्रकार की गारंटी के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सामान्य गणना पर आधारित हैं, ये पूर्ण रूप से सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है।

पूजा-पाठ और व्रत-उपवास करने का निर्णय पूर्णतः आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है। इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ जानकारी प्रदान करना है, न कि किसी को व्रत रखने के लिए प्रेरित करना। किसी भी प्रकार की हानि या क्षति के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।

छठ मैया की सभी भक्तों पर कृपा बनी रहे!

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