चैती छठ पूजा 2028: तिथि, पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या करें-न करें, टोटके व संपूर्ण जानकारी
byRanjeet Singh-
0
"जानिए चैती छठ पूजा 2028 की सही तिथि (30 मार्च से 2 अप्रैल), पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या करें-न करें, व्रत नियम, अचूक टोटके और प्रश्नोत्तर की संपूर्ण जानकारी"
🌞 कैप्शन:"आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का संगम — चैती छठ 2028 की पावन संध्या में महिलाएं घाट पर सूप से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हुईं।"
🌞 "चैती छठ पूजा 2028 — सूर्योपासना का पावन पर्व"
🗓 "तिथि अनुसार चारों दिन का विवरण":
*दिन तिथि वार पर्व
*30 मार्च 2028 गुरुवार नहाय-खाय पहला दिन
*31 मार्च 2028 शुक्रवार खड़ना दूसरा दिन
*01 अप्रैल 2028 शनिवार संध्या अर्घ्य तीसरा दिन (मुख्य पूजा)
*02 अप्रैल 2028 रविवार उषा अर्घ्य चौथा दिन (व्रत पारण)
🌻 "चैती छठ 2028 का महत्व"
*चैती छठ व्रत सूर्य उपासना का अत्यंत प्राचीन पर्व है। यह पर्व माता छठी मैया और भगवान भास्कर (सूर्य देव) को समर्पित है। यह व्रत साल में दो बार किया जाता है —
*1️⃣ "कार्तिक मास" ("शीतकालीन छठ")
*2️⃣ "चैत्र मास" ("वसंतकालीन छठ")
*चैती छठ प्रकृति में नई ऊर्जा, नई फसल और नयी उमंग के साथ लोक आस्था का पर्व माना जाता है। इस समय खेतों में लहलहाती फसलें, नदी के घाटों पर उमड़ती भीड़ और व्रतियों की आस्था एक आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत करती है।
🌼 "चैती छठ की पौराणिक कथा"
छठ व्रत की उत्पत्ति और महिमा वेदों, पुराणों और लोककथाओं में विस्तार से वर्णित है। मान्यता है कि इस व्रत की शुरुआत सृष्टि के आरंभ में हुई थी।
🌞 "सृष्टि के आरंभ से जुड़ी कथा"
कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तब मनुष्यों को जीवन देने के साथ उन्होंने उन्हें सूर्योपासना की विधि बताई। सूर्य को जीवन का स्रोत कहा गया — क्योंकि उनसे ही प्रकाश, ऊर्जा और जीवन संभव है। सूर्य की छठी किरण को “छठी मैया” कहा गया। यह शक्ति मातृत्व, शुद्धता और संतान-सुख की अधिष्ठात्री मानी गईं।
🌻 "राजा प्रियव्रत की कथा"
प्राचीन काल में राजा प्रियव्रत की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अनेक यज्ञ, हवन और तप किए परंतु उन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। दुखी होकर उन्होंने अपनी पत्नी मालिनी के साथ संतान प्राप्ति हेतु दीर्घ तपस्या की।
एक दिन ब्रह्मा जी ने प्रकट होकर कहा — “हे प्रियव्रत! तुम सूर्य की छठी किरण की उपासना करो। वे तुम्हें संतान का वर देंगी।”
राजा-रानी ने छठ व्रत विधिपूर्वक किया, और इसके प्रभाव से उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से छठी मैया की पूजा संतान-सुख और परिवार की समृद्धि के लिए की जाती है।
🌞 "महाभारत काल की कथा"
महाभारत के समय कुन्ती पुत्र कर्ण प्रतिदिन सूर्य की उपासना करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने सूर्य की आराधना से अपनी देह में दिव्य तेज और कवच-कुण्डल प्राप्त किए। कर्ण ने गंगा तट पर खड़े होकर जल अर्घ्य देकर सूर्य देव का व्रत किया — वही परंपरा आगे चलकर छठ पूजा के रूप में प्रसिद्ध हुई।
🌾 "सीता माता और छठ पूजा"
एक अन्य कथा के अनुसार, माता सीता ने भी लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर रामराज्य की स्थापना के बाद चैत्र मास की षष्ठी तिथि को छठ व्रत किया था। उन्होंने सरयू नदी के तट पर स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और जनकल्याण की कामना की। तब से चैत्र मास में यह व्रत चैती छठ के रूप में मनाया जाने लगा।
🪔 "चैती छठ पूजा विधि" — "Step by Step"
*01.पहला दिन – नहाय खाय (30 मार्च 2028, गुरुवार)
इस दिन व्रती शुद्ध स्नान कर घर की सफाई करते हैं।
शुद्ध जल में स्नान के बाद अरवा चावल, लौकी (कददू), और चने की दाल से बना भोजन करते हैं।
इस दिन केवल एक बार सात्विक भोजन किया जाता है।
*02.दूसरा दिन – खड़ना (31 मार्च 2028, शुक्रवार)
व्रती पूरे दिन निराहार रहते हैं।
शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद बनता है।
छठी मैया को अर्पित करने के बाद व्रती स्वयं ग्रहण करते हैं।
*03.तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (1 अप्रैल 2028, शनिवार)
दिन भर व्रती निर्जला उपवास रखते हैं।
शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
घाट पर दीपक, बांस की सूप, ठेकुआ, फल, और अन्य प्रसाद सजाया जाता है।
*04.चौथा दिन – उषा अर्घ्य (2 अप्रैल 2028, रविवार)
*प्रातः काल उदय मान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
*इसके बाद व्रती व्रत का पारण करते हैं।
*परिवार में प्रसाद वितरण होता है।
🌞 "चैती छठ के दिन क्या खाएं और क्या न खाएं"
खाएं:
*शुद्ध सात्विक भोजन (अरवा चावल, लौकी, चने की दाल)
*गुड़, गन्ना, नारियल, केला, सेब, ठेकुआ
*शुद्ध घी और गंगाजल से तैयार प्रसाद
*ना खाएं:
*प्याज, लहसुन, मांस, शराब, तम्बाकू
*किसी भी प्रकार का फास्ट फूड या जंक फूड
*बासी भोजन
🌺 "चैती छठ के दिन क्या करें और क्या न करें"
*क्या करें:
*व्रत के दौरान मन, वाणी और आहार की शुद्धता रखें।
*परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सूर्य और छठी मैया का ध्यान करें।
*घाट की सफाई करें और दीपदान करें।
*अर्घ्य देते समय पूर्ण श्रद्धा और मौन भाव रखें।
*क्या न करें:
*व्रत के दौरान क्रोध, झूठ, या अपवित्र विचार न रखें।
*किसी भी जीव को कष्ट न दें।
*अशुद्ध वस्त्र या चमड़े का प्रयोग न करें।
*घर में मांसाहार न पकाएं।
🌿 "चैती छठ के अचूक टोटके"
*1️⃣ यदि घर में आर्थिक संकट हो तो संध्या अर्घ्य में गुड़ और गन्ना चढ़ाएं — समृद्धि आती है।
*2️⃣ संतान-सुख के लिए छठी मैया को नारियल और सिंघाड़े अर्पित करें।
*3️⃣ स्वास्थ्य लाभ हेतु कच्चे दूध से सूर्य को अर्घ्य दें।
*4️⃣ विवाह में विलंब हो तो छठ घाट पर दीपदान करें।
*5️⃣ मनोकामना पूर्ण करने के लिए सूप में पाँच प्रकार के फल और ठेकुआ रखकर अर्घ्य दें।
🌞 "चैती छठ 2028 का शुभ मुहूर्त और दिन का प्रभाव"
*सूर्योदय: 05:30 बजे 02 अप्रैल 2028
*सूर्यास्त: 06:01 बजे 01 अप्रैल 2028
*षष्ठी तिथि आरंभ: 31 मार्च 2028, दोपहर 02:35 बजे
*षष्ठी तिथि समाप्त: 01 अप्रैल 2028, दोपहर 02:13 बजे
*✨ षष्ठी तिथि के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में, इसके बाद मिथुन रहेगा और सूर्य मीन राशि में — यह योग अत्यंत शुभ माना गया है।
*✨ व्रत का प्रभाव संतान-सुख, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्रदान करने वाला रहेगा।
🌞 "चैती छठ में किस भगवान की पूजा होती है"
*इस दिन भगवान सूर्य और उनकी अधिष्ठात्री शक्ति छठी मैया की पूजा की जाती है।
*सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा और आत्मबल बढ़ता है, जबकि छठी मैया परिवार की रक्षा करती हैं।
🌼 "चैती छठ के दिन किस पर सोना चाहिए"
*व्रती को इस दिन भूमि पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर सोना चाहिए। इससे शरीर में सात्विक ऊर्जा प्रवाहित होती है और यह व्रत की पवित्रता बनाए रखता है।
❓ "चैती छठ से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर"
Q1. चैती छठ कब से शुरू होती है?
*👉 30 मार्च 2028, गुरुवार को नहाय-खाय से शुरू होगी।
Q2. चैती छठ कितने दिन का होता है?
*👉 यह चार दिन का पर्व है।
Q3. छठ मैया कौन हैं?
*👉 वे सूर्य की छठी किरण की देवी हैं, जो संतान और समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।
Q4. क्या पुरुष भी छठ व्रत रख सकते हैं?
*👉 हां, यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों रख सकते हैं।
Q5. क्या गर्भवती महिला छठ कर सकती है?
*👉 हां, यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो कर सकती हैं, परंतु डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।
⚠️ "चैती छठ डिस्क्लेमर"
यह लेख धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है, न कि किसी प्रकार की अंधविश्वासी आस्था को बढ़ावा देना। चैती छठ व्रत एक कठिन तप है, जिसे शुद्ध मन, संयम और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले व्यक्ति बिना चिकित्सक की सलाह के निर्जला व्रत न करें। इस ब्लॉग में वर्णित पूजा विधि, कथा, टोटके और उपाय पारंपरिक मान्यताओं से लिए गए हैं, जिनका प्रभाव व्यक्ति-व्यक्ति पर भिन्न हो सकता है।
हम इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी को चिकित्सीय, आर्थिक या कानूनी सलाह के रूप में नहीं लेते। यह सामग्री केवल धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा के उद्देश्य से तैयार की गई है।
यदि आप इस व्रत को करना चाहते हैं तो अपने परिवार के बुजुर्गों या पंडितजी से विधि-विधान की पुष्टि अवश्य करें।