हनुमान जी का विवाह, अमरत्व का रहस्य & रोचक तथ्य | Hanuman Ji Ka Vivah

"हनुमान जी के माता-पिता कौन थे? क्या उनके भाई-बहन थे? उनका ननिहाल कहां था और वहां क्या घटना घटी? सूर्य देव से शिक्षा का रोचक प्रसंग और उन्हें शक्तियां भूल जाने का शाप क्यों मिला? जानिए हनुमान जी के जीवन के इन रोचक पहलुओं के बारे में विस्तार से"

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Picture of Hanuman's childhood form

"यह भी पढ़ें हनुमान जी, पौराणिक कथा, हनुमान जी का बालपन, हनुमान जी के माता पिता, केसरी, अंजना, वायु देव, हनुमान जी का ननिहाल, सूर्य देव गुरु, हनुमान जी का शाप, पवन पुत्र, रामायण"

"हनुमान जी का बालपन, परिवार, शिक्षा और ननिहाल: एक विस्तृत दृष्टिकोण"

*जय बजरंगबली! हनुमान जी भक्ति और शक्ति के अद्भुत संगम हैं। उनका जीवन चमत्कारों, समर्पण और अटूट निष्ठा से भरा पड़ा है। अक्सर भक्तों के मन में उनके बालपन, उनके परिवार और उनकी शिक्षा के बारे में कई प्रश्न उठते हैं। आइए, आज हनुमान जी के जीवन के इन्हीं रहस्यमयी और रोचक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।

"हनुमान जी के माता-पिता और भाई-बहन"

*माता: हनुमान जी की माता का नाम अंजनी (अंजना) था। इसीलिए उन्हें "आंजनेय" भी कहा जाता है। अंजना एक अप्सरा थीं जिन्हें एक शाप के कारण धरती पर मानव रूप में जन्म लेना पड़ा था। वह वानरराज केसरी की पत्नी थीं।

"पिता: हनुमान जी के दो पिता माने जाते हैं"

  *01. कर्मिक पिता: केसरी जी, जो वानरों के राजा और अंजना के पति थे। इस रूप में केसरी जी ने हनुमान का पालन-पोषण किया।

*02. दिव्य पिता: पवन देव (वायु देव)। मान्यता है कि वायु देव ने ही अंजना के गर्भ में प्रवेश किया था, जिससे हनुमान का जन्म हुआ। इसीलिए उन्हें "पवनपुत्र" और "मारुतिनंदन" कहा जाता है। वायु देव ने उन्हें अपना अमरत्व और असीम शक्ति प्रदान की।

 *भाई-बहन: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, केसरी और अंजना का हनुमान जी के अलावा कोई अन्य संतान नहीं थी। इस प्रकार, हनुमान जी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। हालांकि, वायु देव के पुत्र होने के नाते, भीम (महाभारत) को भी उनका सहोदर माना जाता है।

"क्या हनुमान जी का ननिहाल था? ननिहाल की रोचक घटना"

*हां, हनुमान जी का ननिहाल था। उनकी माता अंजना के पिता (हनुमान जी के नाना) कुंजर नाम के एक वानर राजा थे। उनका ननिहाल गिरनार पर्वत (वर्तमान गुजरात) के पास स्थित एक सुंदर वन में था।

"ननिहाल में घटी एक महत्वपूर्ण घटना:"

*बालक हनुमान अत्यंत नटखट और भूखे स्वभाव के थे। एक बार जब वे अपने ननिहाल गए हुए थे, तो उन्हें तीव्र भूख लगी। आकाश में उदय होते सूर्य को वे एक लाल, पका हुआ स्वादिष्ट फल समझ बैठे। अपनी दिव्य शक्तियों से वे उसे पकड़ने के लिए आकाश में उड़ चले।

*यह देखकर सभी देवता घबरा गए। इंद्र देव ने उन्हें रोकने के लिए अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमान जी की ठुड्डी (हनु) पर चोट आई और वे मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। इससे उनका नाम "हनुमान" पड़ा।

*यह घटना जहान हनुमान जी की शक्ति का प्रमाण थी, वहीं उनके ननिहाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पल भी बन गई। इसके बाद ही वायु देव के क्रोधित होने पर देवताओं ने हनुमान को कई वरदान दिए, जिससे उनकी शक्तियां और भी बढ़ गईं।

"हनुमान जी के गुरु और शिक्षा का महान प्रसंग"

*हनुमान जी के प्रमुख गुरु सूर्य देव थे। उनकी शिक्षा का प्रसंग अत्यंत प्रेरणादायक है।

"शिक्षा का आधार और प्रक्रिया":

*हनुमान जी को जब पता चला कि सूर्य देव संसार के सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी (महाग्यानी) हैं, तो उन्होंने उन्हें अपना गुरु बनाने का निश्चय किया। उन्होंने सूर्य देव के समक्ष शिष्य बनने की इच्छा प्रकट की। सूर्य देव ने आरंभ में यह कहकर मना कर दिया कि वे लगातार अपने रथ पर सवार होकर संसार का भ्रमण करते रहते हैं, इसलिए वे एक स्थिर शिक्षण नहीं दे पाएंगे।

*लेकिन हनुमान जी हार मानने वाले नहीं थे। उन्होंने अपने शरीर को इतना विशाल कर लिया कि उन्होंने एक पैर पूर्व दिशा में और दूसरा पश्चिम दिशा में रख दिया और स्वयं को सूर्य देव के रथ के सामने खड़ा कर दिया। उनकी इस अद्भुत लगन और दृढ़ संकल्प (सतत्) से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें अपना शिष्य स्वीकार कर लिया।शिक्षा की 

"अवधि और विधि"

 *हनुमान जी ने 60 घंटों (छः दिन और छः रातों) के अविरल अध्ययन में ही सूर्य देव से समस्त वेद, शास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा विद्या, युद्ध कला और नीतिशास्त्र का ज्ञान प्राप्त कर लिया। वे सूर्य देव के रथ के साथ-साथ उड़ते हुए और उनसे शिक्षा ग्रहण करते रहे। यह प्रक्रिया सूर्य देव के 'अनादि, नित्य और कर्म-साक्षी' होने का प्रतीक है।

"गुरु दक्षिणा"

 *शिक्षा पूर्ण होने पर हनुमान जी ने गुरु दक्षिणा देने का आग्रह किया। सूर्य देव ने इनकार किया और कहा कि उन्हें हनुमान जैसा शिष्य पाकर जो आनंद मिला, वही सबसे बड़ी दक्षिणा है। लेकिन हनुमान के लगातार आग्रह करने पर सूर्य देव ने उन्हें अपने पुत्र सुग्रीव की सेवा करने और उनके मित्र श्री राम का साथ देने का आदेश दिया। इस प्रकार, हनुमान जी ने अपने जीवन का सर्वस्व श्री राम की सेवा में अर्पित कर दिया।

"शक्तियों को भूल जाने का शाप: रामायण का एक निर्णायक मोड़"

*बालपन में हनुमान जी बहुत शरारती थे और साधु-संतों को परेशान करते रहते थे। वे उनकी पूजा-सामग्री छुपा देते या छीन लेते थे। उनके इस व्यवहार से क्रोधित होकर ऋषि-मुनियों ने उन्हें शाप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे। यह शाप इस शर्त पर था कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराएगा, तभी वे उनका उपयोग कर पाएंगे।

*यही शाप रामायण की कथा का एक महत्वपूर्ण मोड़ बना। जब समुद्र लांघने की बात आई, तो हनुमान जी अपनी शक्ति भूल चुके थे। जाम्बवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया, तब जाकर वे लंका पहुंच पाए। माना जाता है कि यदि हनुमान जी को यह शाप नहीं मिला होता, तो वे अकेले ही रावण और उसकी समस्त लंका का विनाश कर सकते थे, और श्री राम के दिव्य लीला का प्रदर्शन अधूरा रह जाता।

"निष्कर्ष"

*हनुमान जीका जीवन केवल बल और भक्ति का ही नहीं, बल्कि जिज्ञासा, दृढ़ संकल्प और विनम्रता का भी अद्भुत उदाहरण है। उनके परिवार, शिक्षा और बाललीलाओं की ये कथाएँ हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति का सदुपयोग हमेशा धर्म और सेवा के लिए होना चाहिए। उनका चरित्र हमें जीवन की every challenge का सामना करने की प्रेरणा देता है।

*हनुमान जी से जुड़े गूढ़ रहस्य: विवाह, अमरत्व और रोचक तथ्य

"क्या हनुमान जी ने विवाह किया था"?

*यह प्रश्न अक्सर भक्तों के मन में उठता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी ने सांसारिक विवाह नहीं किया था। वे आजीवन ब्रह्मचारी रहे और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भगवान राम की भक्ति और सेवा में अर्पित कर दिया। हालांकि, कुछ क्षेत्रीय लोककथाओं (विशेषकर तमिलनाडु में) में उनका विवाह सुवर्चला नामक एक अप्सरा से बताया जाता है। कथा के अनुसार, यह विवाह देवताओं की इच्छा से हुआ था ताकि हनुमान जी का ब्रह्मचर्य बना रहे और सुवर्चला आजीवन तपस्या करती रहीं। परन्तु प्रमुख और व्यापक रूप से मान्य शास्त्रीय ग्रंथों में हनुमान जी को अजर-अमर ब्रह्मचारी के रूप में ही पूजा जाता है।

"हनुमान जी को अमरत्व का वरदान किसने और क्यों दिया"?

*हनुमान जी को अमरत्व का वरदान स्वयं भगवान राम ने दिया था। यह घटना रामायण के उत्तरार्ध से जुड़ी है।

*घटना का विवरण: जब श्री राम का राज्याभिषेक हो गया और सभी की विदाई का समय आया, तो श्री राम सभी भक्तों और सहयोगियों को उपहार और आशीर्वाद दे रहे थे। हनुमान जी ने किसी भौतिक उपहार की इच्छा नहीं की, बल्कि वे तो केवल श्री राम के चरण-कमलों में ही रहना चाहते थे। उनकी इस निःस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान राम ने उन्हें यह वरदान दिया कि "जब तक इस संसार में राम-कथा का वर्णन होता रहेगा, तब तक तुम्हारा अस्तित्व इस पृथ्वी पर बना रहेगा।" इस प्रकार, हनुमान जी को कलयुग सहित सभी युगों में भगवान के भक्तों की रक्षा करने और धर्म की स्थापना के लिए अमर होने का वरदान प्राप्त हुआ। मान्यता है कि वे आज भी इस पृथ्वी पर विचरण करते हैं और राम नाम का जाप करते हैं।

"हनुमान जी के संबंध में पूछे गए प्रश्न और अविश्वसनीय उत्तर" (FAQ)

*01. प्रश्न: हनुमान जी ने सूर्य देव को गुरु क्यों बनाया?

   उत्तर: क्योंकि सूर्य देव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो सर्वव्यापी हैं और प्रत्यक्ष रूप से समस्त विश्व के साक्षी हैं। वे न केवल प्रकाश के देवता हैं बल्कि समस्त ज्ञान के भंडार भी हैं। हनुमान जी ने उन्हें गुरु इसलिए चुना क्योंकि वे एक ऐसे गुरु से शिक्षा लेना चाहते थे जो सदैव सक्रिय और कर्मशील रहते हों।

*02. प्रश्न: हनुमान जी के शरीर का रंग कभी लाल और कभी सुनहरा क्यों दिखाया जाता है?

   उत्तर: लाल रंग उनकी अतुलनीय शक्ति, बल और शौर्य का प्रतीक है। कहा जाता है कि जब वे रावण की लंका जलाकर लौटे, तो उनके सम्पूर्ण शरीर पर घावों के निशान थे और उनसे रक्त टपक रहा था, जिससे उनका रंग लाल दिखाई देता है। वहीं, सुनहरा (केसरिया) रंग उनकी ब्रह्मचर्य की शक्ति, तेज और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।

*03. प्रश्न: क्या हनुमान जी ने महाभारत में भी भूमिका निभाई थी?

   उत्तर: हां! एक रोचक प्रसंग के अनुसार, भीम जब फूलों की सुगंध से आकर्षित होकर उस वृक्ष की ओर गए जहां हनुमान जी पड़े थे, तो हनुमान जी ने अपनी पूंछ रास्ते में रखकर भीम की परीक्षा ली। भीम उसे हटा नहीं सके। इसके बाद हनुमान जी ने अपना विराट रूप दिखाया और भीम को उपदेश दिया। वे अर्जुन के रथ के ऊपर भी विराजमान थे, जिससे उनकी रक्षा हो सके।

"हनुमान जी के बारे में कुछ रोचक जानकारियां "

*पंचमुखी हनुमान: रावण के पुत्र अहिरावण ने श्री राम-लक्ष्मण का अपहरण करके पाताल लोक में छुपा दिया था। उसे वध केवल पांच दिशाओं से एक साथ बुझी हुई दीपक को बुझाकर ही किया जा सकता था। इसके लिए हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया – पूर्व में हनुमान, पश्चिम में नरसिंह, उत्तर में गरुड़, दक्षिण में वराह और ऊपर की ओर हयग्रीव का मुख।

*आयुर्वेद के जनक: हनुमान जी ने सूर्य देव से आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया था और उन्हें इस विद्या का महान ज्ञाता माना जाता है।

*शनि देव के नियंत्रक: ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से शनि देव भी अपने भक्तों को कष्ट नहीं देते। हनुमान जी ने एक बार शनि देव को पकड़कर उनसे अपने भक्तों को पीड़ा न देने का वचन लिया था।

"हनुमान जी के देश-विदेश में स्थित प्रसिद्ध मंदिरों की जानकारी यहां प्रस्तुत है":

"भारत में प्रमुख मंदिर"

*01. बालाजी मंदिर, मेहंदीपुर, राजस्थान

*स्थापना: 18वीं शताब्दी में स्वयं प्रकट हुए

*विशेषता:

*यहां हनुमान जी "बालाजी" के रूप में विराजमान हैं

*मान्यता है कि यहां प्रेतबाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है

*मंदिर में हनुमान जी का बाल रूप है

*02. श्री अन्जनेयर स्वामी मंदिर, नमक्कल, तमिलनाडु

*स्थापना: 5वीं शताब्दी (लगभग 1600 वर्ष पुराना

 *विशेषता:

*हनुमान जी यहां "नमक्कल अन्जनेयर" के नाम से प्रसिद्ध है।

*मूर्ति एक ही पत्थर से निर्मित है

*मंदिर पहाड़ी पर स्थित है

*03. हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश

*स्थापना: प्राचीन काल से

* विशेषता:

  *मान्यता है कि भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को यहाँ जल धारा प्रदान की थी

 *प्राकृतिक जलधारा हनुमान जी की मूर्ति पर गिरती है

*चित्रकूट की पहाड़ियों में स्थित

*04. संकट मोचन मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

*स्थापना: 16वीं शताब्दी

*विशेषता:

*गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित

*मान्यता है कि यहाँ हनुमान जी स्वयं प्रकट हुए थ

*संकटों को दूर करने वाला माना जाता है

*जाखू मंदिर, शिमला, हिमाचल प्रदेश

*स्थापना: प्राचीन काल

 *विशेषता:

*108 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल मूर्ति

*पहाड़ी की चोटी पर स्थित

*कहा जाता है यहां हनुमान जी ने विश्राम किया था

"विदेशों में प्रसिद्ध मंदिर"

*01. कारागंडा हनुमान मंदिर, कजाखस्तान

*स्थापना: 2007 में

*विशेषता:

*मध्य एशिया का सबसे बड़ा हनुमान मंदिर

*भारतीय वास्तुकला से निर्मित

*श्री लक्ष्मण आचार्य द्वारा स्थापित

*राम मंदिर, थाईलैंड

*स्थापना: 18वीं शताब्दी

*विशेषता:

*थाईलैंड में हनुमान को "फरा राम" कहा जाता है

*थाई वास्तुकला में निर्मित

*बैंकॉक में स्थित

*03. त्रिनिदाद और टोबैगो हनुमान मंदिर

*स्थापना: 1987 में 

*विशेषता:

*कैरीबियन क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर

*भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित

*आधुनिक वास्तुकला

*04. नेपाल का हनुमान धोका मंदिर

*स्थापना: 17वीं शताब्दी

 *विशेषता:

*काठमांडू के दरबार स्क्वायर में स्थित

 *नेपाल की ऐतिहासिक धरोहर

*पगड़ी पहने हनुमान जी की मूर्ति

*विशेष तथ्य

*सबसे ऊंची मूर्ति: आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा के पास 135 फीट ऊंची हनुमान मूर्ति

*सबसे प्राचीन: तमिलनाडु का नमक्कल मंदिर (लगभग 1600 वर्ष

*सबसे ऊंचाई पर: हिमाचल प्रदेश का जाखू मंदिर (समुद्र तल से 8048 फीट)

"डिस्क्लेमर" 

*इस ब्लॉग में प्रस्तुत की गई सभी जानकारियां पौराणिक ग्रंथों (जैसे वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास कृत रामचरितमानस, महाभारत) और विभिन्न क्षेत्रीय लोक मान्यताओं, किंवदंतियों एवं शास्त्रीय साहित्य पर आधारित हैं। यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है।

*धार्मिक मान्यताएँ और कथाएँ अलग-अलग स्रोतों और परंपराओं में भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, हनुमान जी के विवाह संबंधी प्रसंग की मान्यता सभी सम्प्रदायों में समान रूप से नहीं है, और यह मुख्यधारा के शास्त्रीय Narration से भिन्न है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी विषय पर गहन जानकारी के लिए मूल पौराणिक ग्रंथों एवं विद्वानों की व्याख्याओं का अध्ययन अवश्य करें।

*ब्लॉग में उल्लेखित तथ्यों, घटनाओं और व्याख्याओं की ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जाता। यह सामग्री किसी भी प्रकार की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं रखती। लेखक की यही कोशिश है कि पाठकों तक हनुमान जी के चरित्र के विभिन्न पहलुओं से संबंधित जानकारी सरल और रोचक भाषा में पहुंच सके।

*किसी भी प्रकार की त्रुटि या चूक के लिए लेखक क्षमा प्रार्थी है। भगवान हनुमान की कृपा सब पर बनी रहे।




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