"Holi 2028: शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाएं, महत्व और वर्जनाएं | Holi Ka Tyohar"

"होली 2028 की पूरी जानकारी पाएं। जानें होलिका दहन का सटीक शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय, रंगों वाली होली का दिन, पौराणिक कथाएं, शुभ-अशुभ कार्य और विशेष सावधानियां। Holi ka shubh muhurat जानने के लिए पढ़ें"।

*साल 2028 की वो होली, जब हर चेहरे पर थी मुस्कान और हवा में थे रंग ही रंग!

*होली 2028, होलिका दहन मुहूर्त, भद्रा कब है, रंगवाली होली, होली की कहानी, होलिका दहन पूजा विधि, होली पर क्या न करें, चौघड़िया मुहूर्त, प्रदोष काल, उदय व्यापिनी पूर्णिमा।

"होली 2028: रंग, उल्लास और आस्था का महापर्व - पूरी जानकारी"

होली भारत के सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व न सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और रिश्तों में प्यार भरने का भी अवसर प्रदान करता है। होली का त्योहार दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन होता है और दूसरे दिन रंगों से सराबोर रंगपंचमी या धुलंडी मनाई जाती है।

यह लेख वर्ष 2028 की होली की सभी महत्वपूर्ण जानकारियों – जैसे शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय, पौराणिक कथाएं, और सावधानियों – से भरपूर है, ताकि आप इस पावन पर्व को सही ढंग से और पूरे उत्साह के साथ मना सकें।

"होली 2028: तिथि और मुहूर्त का महत्व"

होली का त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। 2028 में, होलिका दहन और रंगों वाली होली की तिथियां निम्नलिखित हैं:

*होलिका दहन: शुक्रवार, 10 मार्च, 2028

*रंगवाली होली (धुलंडी): शनिवार, 11 मार्च, 2028

*होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2028

होलिका दहन सिर्फ एक रस्म नहीं है; यह बुराइयों को जलाने और समृद्धि को आमंत्रित करने का एक शुभ कर्म है। इसलिए इसके लिए निर्धारित शुभ मुहूर्त में ही होलिका दहन करना चाहिए। गलत समय पर होलिका जलाना अशुभ माना जाता है।

*होलिका दहन मुहूर्त: शाम 08:54 बजे से रात 10:47 बजे तक

*अवधि: लगभग 02 घंटे तक रहेगा।

होलिका दहन का यह मुहूर्त प्रदोष काल के दौरान पड़ रहा है और साथ ही उदय व्यापिनी पूर्णिमा भी है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। प्रदोष काल का विशेष धार्मिक महत्व है और इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं।

"भद्रा का समय: सबसे महत्वपूर्ण सावधानी"

होलिका दहन करते समय भद्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भद्रा को एक अशुभ समय माना जाता है और इस दौरान होलिका दहन करना वर्जित है। 2028 में होलिका दहन के दिन भद्रा का समय इस प्रकार है:

*भद्रा सुबह 10:20 बजे से लेकर रात 08:27 बजे तक रहेगा।

ध्यान रखें, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त सुबह 10:20 AM से शुरू हो रहा है और की समाप्ति रात 08:27 PM को होगा। इसलिए, भद्रा के समाप्त होने का इंतजार करना चाहिए। भद्रा मुख 08:27 PM पर समाप्त हो जाएगी। भद्रा के समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना उचित रहेगा। इसलिए, 08:27 PM के बाद ही अग्नि प्रज्वलित करें।

"पूर्णिमा तिथि"

*01.पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 10 मार्च, 2028 को सुबह 10:20 बजे

*02.पूर्णिमा तिथि समाप्त: 11 मार्च, 2028 को सुबह 06:35 बजे

*03.होलिका दहन के दिन का पंचांग (10 मार्च 2028)

*04.वार: शुक्रवार

*05. पक्ष: शुक्ल पक्ष

*06.तिथि: पूर्णिमा (उदय व्यापिनी)

*07.सूर्यास्त: लगभग 05:53 PM (स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है)

"होलिका दहन के लिए चौघड़िया मुहूर्त"

चौघड़िया मुहूर्त दिन के विभिन्न कार्यों के लिए शुभ समय निर्धारित करने का एक लोकप्रिय तरीका है। होलिका दहन के दिन शुभ चौघड़िया मुहूर्त इस प्रकार होंगे:

· अमृत चौघड़िया: प्रातः 06:35 AM - 08:05 AM

*01.शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:35 PM - 02:05 PM

*02.लाभ चौघड़िया: दोपहर 02:05 PM - 03:35 PM

*03.चर चौघड़िया: सायं 06:27 PM - 07:57 PM (होलिका दहन मुहूर्त के साथ संपाती)

होलिका दहन की पूजन विधि

*01. होलिका दहन की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। एक स्थान पर लकड़ियां, उपले इकट्ठा किए जाते हैं।

*02. होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा की जाती है। पूजा में रोली, मौली, चावल, फूल, गुलाल, गुड़, सूत का धागा, नारियल, गंगाजल, और नई फसल की बालें (जौ, गेहूं) आदि चढ़ाए जाते हैं।

*03. भक्त प्रह्लाद की मूर्ति या पुतला बनाकर उसे सूत से लपेटकर होलिका के ढेर के पास रखा जाता है।

*04. शुभ मुहूर्त में, सबसे पहले होलिका की पूजा करें। फिर, परिवार के सदस्य होलिका के चारों ओर 3 य 5 बार सूत लपेटते हैं (जो भक्त प्रह्लाद का प्रतीक है)।

*05. फिर भद्रा समाप्त होने के बाद, शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि प्रज्वलित करें।

*06. अग्नि को प्रणाम करें और बुराइयों को जलाने और सुख-समृद्धि की कामना करें।

*07. होलिका दहन के बाद अगले दिन सुबह होलिका की राख को श्रद्धा से ले जाते हैं और इसे शुभ माना जाता है।

होली के दिन क्या न करें: अशुभ कार्य और वर्जनाएं

होली का पर्व हर्षोल्लास का है, लेकिन कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें इस दिन करना अशुभ माना जाता है। होलिका दहन के दिन विशेष रूप से निम्नलिखित शुभ कार्य करने से बचना चाहिए:

*वैवाहिक कार्यक्रम (शादी-विवाह)

*मुंडन संस्कार

*गृह प्रवेश

*नामकरण संस्कार

*अन्नप्राशन

*विद्यारंभ

*उपनयन संस्कार (जनेऊ)

*जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त

ऐसी मान्यता है कि इस दिन ये शुभ कार्य करने से व्यक्ति को जीवन में कठिनाइयों और विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

"होली से जुड़ी पौराणिक कथाएं"

होली का त्योहार कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है, जो इसके महत्व को और गहरा करती हैं।

*01. भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा

यह होली की सबसे प्रसिद्ध कथा है। दैत्यराज हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान मानवता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन वह हर बार बच गया। अंत में, उसने अपनी बहन होलिका से सहायता मांगी। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकती। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर जलती चिता में बैठ गई। लेकिन, भगवान विष्णु की कृपा से वरदान विपरीत हो गया और होलिका जलकर भस्म हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

*02. श्रीकृष्ण और पूतना की कथा

कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के लिए पूतना नामक राक्षसी को गोकुल भेजा। पूतना एक सुंदर स्त्री का रूप धरकर शिशु कृष्ण के पास पहुंची और उन्हें विष बने दूध पिलाने का प्रयास किया। लेकिन बाल कृष्ण ने उसका दूध पीते हुए ही उसका प्राण ले लिया। पूतना के मरने की खुशी में गोकुलवासियों ने रंग और उल्लास मनाया। माना जाता है कि तभी से होली मनाई जाने लगी। ब्रज की होली, जो श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम से जुड़ी है, इसी कथा से प्रेरित है।

*03. शिवजी और कामदेव की कथा

एक बार भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे। इससे देवताओं को चिंता हुई क्योंकि राक्षस तारकासुर का वध only शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता था। देवताओं के अनुरोध पर, कामदेव ने शिवजी की तपस्या भंग करने का प्रयास किया और उन पर प्रेम का बाण चलाया। शिवजी की तपस्या भंग होने पर उन्हें इतना क्रोध आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में, देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया। होली की अग्नि में कामदेव के भस्म होने की याद में भी कुछ स्थानों पर होली जलाई जाती है।

*04. राजा रघु और ढुंढी राक्षसी की कथा

भविष्य पुराण के अनुसार, राजा रघु के राज्य में ढुंढी नाम की एक राक्षसी थी। उसे वरदान प्राप्त था कि उसे न तो देवता, न मनुष्य, न हथियार, न सर्दी और न गर्मी मार सकती है। वह छोटे बच्चों को परेशान करती थी। ऋषियों ने उपाय बताया कि वह गली के बच्चों के शोर और हंसी से डरती है। बच्चों ने शहर के बाहर लकड़ी और गोबर के उपलों का ढेर लगाकर आग जलाई, हंसी-मजाक किया और नाच-गाकर ढुंढी को वहां आकर्षित किया और फिर उसे आग में ढकेल दिया। इस तरह बच्चों के सामूहिक उत्साह ने राक्षसी का अंत कर दिया। यह कथा होली के उत्सव में बच्चों की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है।

"होली मनाने के स्वास्थ्य और पर्यावरण के अनुकूल तरीके"

*प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें: केमिकल युक्त रंग त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। गुलाल, हल्दी, चंदन, और फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें।· पानी की बर्बादी न करें: पानी को व्यर्थ में न बहाएं। बाल्टी में भरकर पानी उड़ेलने के बजाय पिचकारी का इस्तेमाल करें।

*सावधानीपूर्वक ड्राइव करें: होली के दिन सड़कों पर ध्यान रखें। नशे में गाड़ी बिल्कुल न चलाएं।

सहमति का रखें ध्यान: किसी पर जबरदस्ती रंग न डालें। बुजुर्गों और बच्चों के साथ नर्मी से पेश आएं।

"निष्कर्ष"

होली का त्योहार हमें सिखाता है कि बुराइयों और अहंकार को होलिका की अग्नि की तरह जलाकर, प्रह्लाद की भक्ति की तरह अच्छाई को अपनाना चाहिए। यह रंगों का त्योहार है, रिश्तों को और गहरा करने का त्योहार है। वर्ष 2028 में, शुभ मुहूर्त और सावधानियों का ध्यान रखकर, प्राकृतिक रंगों से सजकर, और पौराणिक कथाओं के महत्व को समझकर इस पर्व को मनाएं। आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

"डिस्क्लेमर" 

यह लेख सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसे धार्मिक ग्रंथों, पंचांग, और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में दी गई सभी तिथियां और समय (होलिका दहन मुहूर्त, भद्रा का समय, पूर्णिमा तिथि आदि) खगोलीय गणनाओं पर आधारित हैं और सामान्य रूप से भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं। यह जानकारी शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों से प्रदान की गई है।

पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या कर्मकांड को करने से पहले, अपने स्थानीय और व्यक्तिगत पंचांग, किसी योग्य ज्योतिषी या धार्मिक विद्वान से सलाह अवश्य लें, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर मुहूर्त में थोड़े बहुत अंतर हो सकते हैं। लेखक और वेबसाइट किसी भी तरह की हानि, क्षति, या असुविधा के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे, जो इस लेख में दी गई जानकारी के उपयोग या दुरुपयोग से उत्पन्न हो सकती है।

होली मनाते समय स्थानीय कानूनों और नियमों का पालन करें। पर्यावरण का ध्यान रखें, प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षा का ध्यान रखें। किसी पर जबरदस्ती रंग न डालें और बुजुर्गों व बच्चों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें। होली खुशियों और उल्लास का त्योहार है, इसे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से मनाएं।

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने