दिवाली 2025 के 10 रोचक तथ्य! क्या आप जानते हैं लक्ष्मी पूजा का सही रूप?

दीपावली 20 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार कार्तिक माह कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को है। पढ़ें पौराणिक कथा, 5 अ-प्रकट पहलू, मां लक्ष्मी की पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप) और रोचक भोजन सुझाव।

Know the picture of the hidden aspect of this festival in the divine light of Goddess Lakshmi.

"दीपावली 2025 की तस्वीर"

"दीपावली पर लिखा गया यह ब्लॉग अलग हटकर है। पौराणिक कथा में श्रीराम प्रभु के अयोध्या लौटने की कथा से अलग राजा बलि की कथा को विस्तार दिया गया है। पारंपरिक भोजन की सूची के अलावा क्या करें और क्या ना करें पर प्रकाश डाला गया है"।

*नीचे दिए गए विषयों के संबंध में मेरे ब्लॉग पर पढ़ें विस्तार से 

*01.दीपावली पर क्या खाएं और क्या न खाएं 

*02.राजा बलि और वामन अवतार की कथा

*03.दीपावली पर मां लक्ष्मी का रूप

*04.दिवाली होम डेकोरेशन (हिंदी)

*05.रोचक डिस्क्लेमर

*06.दीपावली का अछूता पहलू: 'सफाई' और आंतरिक शुद्धि

*07.दीपावली की 05 सबसे रोचक जानकारियां 

*08.मां लक्ष्मी की किस रूप की पूजा होती है?

*09.पूजा करने की संपूर्ण विधि (स्टेप बाय स्टेप गाइड)

*10.दीपावली 2025: अ-प्रकट पहलू, द्वितीय कथाएं और अद्भुत जानकारियां 

हम अक्सर दीपावली को केवल दीयों और लक्ष्मी पूजा तक सीमित कर देते हैं, लेकिन इसका एक गहरा और अछूता पहलू है - आंतरिक और बाहरी शुद्धिकरण।

बाहरी सफाई: घरों की सफाई केवल सजावट के लिए नहीं होती, यह नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर निकालने और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए एक पवित्र कर्म है।

आंतरिक शुद्धि: यह त्योहार हमें अपने मन, विचारों और वाणी की 'सफाई' करने का अवसर देता है। पुराने द्वेष, ईर्ष्या और नकारात्मकता को 'विसर्जित' करके नए, सकारात्मक विचारों का 'प्रकाश' प्रज्वलित करना ही दीपावली का सच्चा अर्थ है। यह आत्म-प्रकाश का पर्व है।

दीपावली पर द्वितीय पौराणिक कथा: वामन अवतार और राजा बलि

सबसे प्रसिद्ध कथा राम के अयोध्या लौटने की है, लेकिन एक द्वितीय पौराणिक कथा भी है जो दीपावली से जुड़ी है:

राजा बलि का पाताल लोक गमन: विष्णु पुराण के अनुसार, दीपावली के दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण कर अत्यंत दानवीर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। राजा बलि जब तैयार हुए, तो वामन ने अपने विशाल रूप में एक पग से पृथ्वी, दूसरे से स्वर्ग नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि के सिर पर पैर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया।

वरदान: राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वर्ष में एक दिन वे पृथ्वी लोक पर आकर अपने राज्य को देख सकेंगे। यह दिन नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) से जुड़ा है, और इसी उपलक्ष्य में लोग दीए जलाते हैं और बलि पूजा करते हैं। यह कथा दान की महत्ता और अहंकार के पतन को दर्शाती है।

दीपावली की रोचक जानकारियां 

सिख धर्म: सिखों के लिए यह 'बंदी छोड़ दिवस' है। 1619 में इसी दिन छठे गुरु हरगोबिंद जी 52 राजाओं के साथ ग्वालियर किले से रिहा हुए थे।

जैन धर्म: यह महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

नेपाल में: इसे 'तिहार' या 'यम पंचक' कहते हैं, जिसमें पांच दिन - गाय, कौआ, कुत्ता और भाई-बहन की विशेष पूजा होती है।

बंगाल में: बंगाल और ओडिशा में इस दिन मुख्य रूप से मां काली की पूजा होती है, जिसे काली पूजा कहा जाता है।

दीपावली पर क्या भोजन बनाएं और क्या भोजन ना बनाएं

भोजन क्या बनाएं (सात्विक, शुभ) क्या ना बनाएं (तामसिक, अशुभ)

*मुख्य व्यंजन शुद्ध सात्विक भोजन: दाल, चावल, सब्ज़ियां, पूड़ी, खीर। 

*लहसुन, प्याज़, मांसाहारी भोजन, शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

*मिठाई बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, बर्फी, कलाकंद, घर पर बनी खीर। 

*बासी मिठाई, कृत्रिम रंग वाली मिठाई, अधिक तेल या मसालेदार स्नैक्स।

*विशेष नए अनाज से बना भोजन (यदि संभव हो), सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स)। 

*किसी भी प्रकार का अपवित्र या बासी भोजन।

निष्कर्ष: मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर का भोजन सात्विक, ताजा और शुद्ध होना चाहिए।

दीपावली पर मां लक्ष्मी की किस रूप की होती है पूजा?

दीपावली पर हम मुख्य रूप से मां लक्ष्मी के 'गृहस्थ रूप' की पूजा करते हैं, जिसे धन-धान्य और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है।

विष्णु पत्नी: वह भगवान विष्णु की शक्ति हैं, जो समृद्धि और कल्याण प्रदान करती हैं।

कमल पर विराजमान: उनका यह रूप श्वेत या गुलाबी कमल पर विराजमान होता है, जो शुद्धता और सृजन का प्रतीक है।

चार हाथ: चार हाथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (जीवन के चार पुरुषार्थ) को दर्शाते हैं।

सिक्के: उनके एक हाथ से गिरते हुए सोने के सिक्के निरंतर धन वर्षा और समृद्धि का प्रतीक हैं।

साथ में: उनके साथ भगवान गणेश (बुद्धि और शुभता के देवता) और मां सरस्वती (ज्ञान की देवी) की पूजा अनिवार्य रूप से होती है। यह दर्शाता है कि धन तभी शुभ है जब वह बुद्धि (गणेश) और ज्ञान (सरस्वती) के साथ हो।

पूजा करने की संपूर्ण विधि (स्टेप बाय स्टेप)

यह पूजा विधि अत्यंत शुभ फलदायी मानी जाती है:

*01.तैयारी (शाम से पहले):

*02.घर की सफाई और स्नान करें।

*03.स्वच्छ वस्त्र पहनें (काले रंग के वस्त्र न पहनें)।

*04.पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें।

*05.आसन और चौकी स्थापना:

*06.लाल/पीला वस्त्र बिछाकर चौकी स्थापित करें।

*07.मध्य में: मां लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।

*08.कलश: चावल के ऊपर जल से भरा कलश रखें।

*09.अन्य: बही-खाते, सोना-चांदी, सिक्के आदि रखें।

*10.संकल्प: हाथ में जल, चावल और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें।

*11.गणेश पूजा (प्रथम): सर्वप्रथम गणेश जी का आह्वान, तिलक, फूल और दूर्वा अर्पित करें।

लक्ष्मी पूजा:

*01.मां लक्ष्मी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।

*02.सुगंधित इत्र, वस्त्र, आभूषण, लाल फूल (कमल/गुलाब) अर्पित करें।

*03.रोली, चावल से तिलक करें।

*04.भोग: मिठाई, फल और खील-बताशे का भोग लगाएं।

दीपक और आरती:

*01.घी के दीए जलाएं (कम से कम 11, मुख्य रूप से 5)।

*02."ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें।

*03.आरती गाएं और कपूर जलाएं।

*04.विसर्जन: हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरित करें।

दीपावली के साथ घटित कुछ रोचक घटनाएं (आधुनिक इतिहास)

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बचपन: दीपावली के समय ही उनके घर पर मिट्टी के दीयों का व्यापार होता था, जहां से उन्हें पहली बार अपने काम की अहमियत समझ में आई।

ऐतिहासिक संधि: कई वर्षों पहले, कुछ भारतीय रियासतों ने दीपावली के दिन युद्ध विराम किया था, यह दर्शाते हुए कि त्योहारों का महत्व युद्ध से ऊपर है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह ब्लॉग पोस्ट "दीपावली 2025" के पावन पर्व से संबंधित पारंपरिक, पौराणिक और रोचक जानकारियों को एकत्र कर, पाठकों के ज्ञानवर्धन हेतु प्रस्तुत किया गया है। यहाँ दी गई सभी पूजा विधियां, पौराणिक कथाएं, और खान-पान संबंधी सुझाव सदियों से चली आ रही लोक मान्यताओं, धर्म ग्रंथों तथा ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित हैं।

हमारा उद्देश्य किसी विशेष मत या विचारधारा को थोपना नहीं है। 'द्वितीय कथा', 'अछूते पहलू' और 'रोचक घटनाओं' का समावेश इसलिए किया गया है ताकि आप इस महान पर्व को एक नया और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान कर सकें।

कृपया ध्यान दें:

पूजा विधि: पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और सामग्री प्रत्येक परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है। आपसे अनुरोध है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले, अपने पारिवारिक पुरोहित (पंडित) या अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों से अवश्य परामर्श लें।

स्वास्थ्य: खान-पान से संबंधित सुझाव सामान्य हैं। यदि आपको कोई एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो भोजन के चयन में चिकित्सक की सलाह का पालन करें।

सुरक्षा: दीपावली खुशियों का पर्व है। आतिशबाजी करते समय बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान दें।

हम आशा करते हैं कि यह सामग्री आपके ज्ञान में वृद्धि करेगी और आपकी दीपावली को और अधिक अर्थपूर्ण बनाएगी। इस ब्लॉग का उपयोग केवल व्यक्तिगत और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए किया जाना चाहिए। किसी भी त्रुटि या भिन्नता के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। आपकी आस्था और भक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण है।




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