अन्नपूर्णा जयंती 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व* f

अन्नपूर्णा जयंती 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व*

 24 दिसंबर 2026 दिन गुरुवार को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाएगी। जानें मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग, पूजन विधि, महत्व और दान का शुभ समय।

यह व्रत मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत में लोकप्रिय है। यहां इसकी पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई है।

मां अन्नपूर्णा की दिव्या और भव्य तस्वीर

अन्नपूर्णा जयंती 2026: अन्न और समृद्धि का दिव्य पर्व

वर्ष 2026 में अन्नपूर्णा जयंती का पावन पर्व 24 दिसंबर, गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि 23 दिसंबर को सुबह 10:47 बजे से आरंभ होकर 24 दिसंबर को सुबह 06:57 बजे तक रहेगी। 

शास्त्रों के नियम अनुसार उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए मुख्य व्रत, पूजन और भंडारा 24 दिसंबर को ही किया जाएगा। इस बार यह तिथि और भी विशेष है क्योंकि इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, आडल योग, विडाल योग और अरुद्र दर्शन का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 

माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और दान करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। इस दिन कन्याओं और जरूरतमंदों को भोजन कराना, चावल, गेहूं और वस्त्र दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व, पूजन विधि और जुड़ी मान्यताएं।

पौराणिक कथा

अन्नपूर्णा जयंती की पौराणिक कथा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पर्व देवी अन्नपूर्णा, जो अन्न और समृद्धि की देवी हैं, की पूजा-अर्चना कर और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि देवी अन्नपूर्णा ने सृष्टि में अन्न और भोजन के महत्व को स्थापित किया, जिससे संसार में जीवन बना रहे।

कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने मां पार्वती से कहा कि संसार में सबकुछ माया है, यहां तक कि भोजन भी। इस पर देवी पार्वती को बहुत क्रोध आया और उन्होंने संसार से भोजन गायब करने का निश्चय किया। उनके इस निर्णय से पूरे विश्व में अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई। सभी जीव-जंतु, मनुष्य, और यहां तक कि देवगण भी भूख से पीड़ित होने लगे।

देवताओं ने भोजन के बिना अपनी स्थिति को असहनीय महसूस किया और देवी पार्वती की शरण में आए। उन्हें समझाने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं शिव से आग्रह किया कि वे मां पार्वती से माफी मांगें और उनसे संसार में अन्न की वर्षा करने का निवेदन करें। तब भगवान शिव काशी पहुंचे, जहां देवी पार्वती ने अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट होकर एक रसोईघर बनाया था।

भगवान शिव, साधु के वेश में, भिक्षा मांगने पहुंचे और मां अन्नपूर्णा ने उन्हें अन्न का पात्र भेंट किया। मां अन्नपूर्णा ने शिव से वचन लिया कि अन्न को कभी माया के रूप में नहीं माना जाएगा और इसकी महत्ता सदा बनी रहेगी। भगवान शिव ने यह स्वीकार किया, और संसार में फिर से अन्न की वर्षा होने लगी। इसी तरह से मां अन्नपूर्णा ने संसार को यह संदेश दिया कि अन्न ही जीवन का आधार है और इसके बिना संसार का संतुलन संभव नहीं है।

इस कथा के माध्यम से यह बताया गया है कि भोजन का सम्मान और उसका सही प्रयोग करना आवश्यक है। अन्नपूर्णा जयंती के दिन विशेष पूजा-अर्चना कर, देवी अन्नपूर्णा को प्रसन्न किया जाता है ताकि समाज में सदैव अन्न की प्रचुरता बनी रहे।

पूजा विधि

अन्नपूर्णा जयंती पर देवी अन्नपूर्णा की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन उपासक सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। घर के मंदिर को सजाया जाता है और देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित किया जाता है। इसके बाद निम्नलिखित पूजा विधि अपनाई जाती है:

1. संकल्प: पूजा के आरंभ में संकल्प लें कि आप देवी अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्ति के लिए यह पूजा कर रहे हैं।

2. आवाहित: देवी का आवाहन किया जाता है और उन्हें पंचामृत स्नान कराया जाता है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाई जाती है।

3. पूजन सामग्री: देवी को फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। विशेष रूप से चावल, अनाज, और अन्न से बनी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं।

4. अन्न दान: इस दिन अन्नदान का महत्व है। अन्नपूर्णा जयंती पर जरूरतमंदों को अन्नदान करके देवी की विशेष कृपा पाई जाती है।

5. आरती: अंत में देवी अन्नपूर्णा की आरती की जाती है और परिवार के सभी सदस्य इसमें सम्मिलित होते हैं।

6. प्रसाद वितरण: आरती के पश्चात प्रसाद बांटा जाता है और पूजा समाप्त होती है।

शुभ मुहूर्त

अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:

शुभ मुहूर्त: 24 दिसंबर 2026 गुरुवार, सुबह 06:23 बजे से  07:43 बजे तक शुभ मुहूर्त है। उसी प्रकार दिन के 10:30 बजे से लेकर दोपहर 2:30 बजे तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:23 बजे से लेकर 12:06 बजे तक है। 

इस दौरान, आप शुभ समयानुसार किसी भी समय पूजा कर सकते हैं, परंतु मध्याह्न और सायंकाल का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व और लाभ

अन्न और धन की वृद्धि: अन्नपूर्णा देवी की पूजा से अन्न और धन की वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि माता की कृपा से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

भूख और गरीबी का नाश: देवी अन्नपूर्णा की पूजा से भूख और गरीबी का नाश होता है। इस दिन अन्नदान करने से अनेक पुण्यों की प्राप्ति होती है।

परिवार में सुख-समृद्धि: यह व्रत परिवार में सुख-समृद्धि और शांति को बढ़ाता है। इसे करने से जीवन में धन, भोजन, और आवश्यकताओं की कमी नहीं रहती है। इस प्रकार, अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा कर हम देवी अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं।

*05 यूनिक प्रश्न और उत्तर:

*01. 2026 में अन्नपूर्णा जयंती की तिथि 23 को ही क्यों है?

क्योंकि मार्गशीर्ष पूर्णिमा 23 दिसंबर को सुबह 10:47 से शुरू होकर 24 दिसंबर सुबह तक है। हिंदू धर्म में व्रत उदया तिथि में किए जाते हैं। 23 को सूर्योदय के समय पूर्णिमा होने से मुख्य पूजन इसी दिन होगा।

*02. सर्वार्थ सिद्धि योग इस दिन क्या फल देगा?*  

इस योग में किए गए पूजन, दान और नए कार्य सिद्ध होते हैं। अन्नपूर्णा पूजन के साथ यह योग जुड़ने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि का विशेष फल मिलता है।

*03. आडल और विडाल योग में क्या करना चाहिए?*  

ये दोनों योग तांत्रिक और शक्तिपीठ साधना के लिए उत्तम माने जाते हैं। इस दिन माता को 56 भोग, खीर और पंचमेवा चढ़ाकर देवी सूक्त का पाठ करने से नकारात्मकता दूर होती है।

*04. अरुद्र दर्शन का क्या महत्व है?*  

अरुद्र दर्शन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। अन्नपूर्णा शिव की अर्धांगिनी हैं। इस दर्शन वाले दिन शिव मंदिर में जलाभिषेक और अन्न दान करने से पितृ दोष भी शांत होता है।

*05. इस दिन किन चीजों का दान सर्वोत्तम है?*  

चावल, आटा, दाल, घी, नमक और बर्तन दान करें। सबसे बड़ा दान है किसी भूखे को भोजन कराना। मान्यता है कि इससे माता अन्नपूर्णा जीवनभर रसोई भरी रखती हैं।

*अनसुलझे पहलू:

अन्नपूर्णा जयंती को लेकर कई अनसुलझे प्रश्न आज भी श्रद्धालुओं के मन में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि काशी की अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई में अक्षय पात्र की कथा कितनी ऐतिहासिक है और कितनी प्रतीकात्मक। 

कहा जाता है कि देवी के हाथ का अन्न कभी खत्म नहीं होता, पर इसका वैज्ञानिक आधार क्या है? दूसरा पहलू, आडल-विडाल योग और अरुद्र दर्शन का संयोग हर वर्ष नहीं बनता। 2026 में चार योग एक साथ आने से क्या इसका प्रभाव केवल धार्मिक रहेगा या सामाजिक स्तर पर अन्न सुरक्षा आंदोलनों को भी बल मिलेगा? 

तीसरा, आधुनिक समय में हम अन्न का अपव्यय सबसे ज्यादा करते हैं। ऐसे में व्रत का असली संदेश केवल पूजा तक सीमित न रहकर भोजन बचाने की मुहिम क्यों नहीं बन पाता। चौथा, ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई घर ऐसे हैं जहां दो वक्त का भोजन दुर्लभ है। 

ऐसे में देवी का आशीर्वाद उन तक कैसे पहुंचे। ये सवाल हमें बताते हैं कि पर्व का अर्थ सिर्फ विधि-विधान नहीं, बल्कि अन्न के प्रति सम्मान जगाना भी है।

*डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई तिथि, समय, योग और पूजन विधि विभिन्न पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है। 

वर्ष 2026 में अन्नपूर्णा जयंती की तिथि 23 दिसंबर बताई गई है जो मार्गशीर्ष पूर्णिमा की उदया तिथि पर आधारित है। हालांकि स्थानीय मंदिरों और विद्वानों के निर्णय के अनुसार तिथि में एक दिन का अंतर संभव है। इसलिए व्रत और पूजन से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें। 

लेख में वर्णित सर्वार्थ सिद्धि योग, आडल योग, विडाल योग और अरुद्र दर्शन के फल शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका प्रभाव व्यक्ति की श्रद्धा, कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हम किसी भी प्रकार के चमत्कार, धन लाभ या समस्या समाधान की गारंटी नहीं देते। 

स्वास्थ्य संबंधी व्रत रखने से पहले यदि आपको डायबिटीज, बीपी या कोई अन्य रोग है तो डॉक्टर से सलाह लें। दान और भंडारे के आयोजन में स्थानीय कानूनों और स्वच्छता नियमों का पालन करें। 

इस लेख का उद्देश्य अन्नपूर्णा माता के प्रति श्रद्धा बढ़ाना और अन्न के महत्व को समझाना है। किसी भी धार्मिक कार्य को करने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें। लेख में दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक और प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।


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