आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028 तिथि, पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त और महत्व f

आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028 तिथि, पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त और महत्व

"आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028 23 जून से शुरू। जानें 9 दिन की तिथियां, घटस्थापना, मां शैलपुत्री पूजा, दस महाविद्या साधना, नियम और संपूर्ण जानकारी"  

"आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028: देवी की गुप्त साधना के नौ पावन दिन" 

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र हर साल तंत्र साधकों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2028 में यह पावन पर्व 23 जून 2028, शुक्रवार से शुरू होकर 09 दिनों तक चलेगा। 

पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इस बार घट स्थापना के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और आडल योग का संयोग बन रहा है, जिससे साधना का फल कई गुना बढ़ जाएगा। 

इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं की गुप्त साधना, जप, हवन और देवी स्तुति की जाती है। मनोकामना सिद्धि, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और आत्मबल बढ़ाने के लिए यह समय सबसे उत्तम माना गया है। 

यदि आप श्रद्धा और विधि पूर्वक मां की आराधना करते हैं, तो मां दुर्गा की कृपा से जीवन की हर बाधा दूर होती है। आइए जानते हैं 2028 की आषाढ़ी गुप्त नवरात्र की संपूर्ण जानकारी, तिथियां, पूजा विधि और जरूरी नियम।

सनातन पंचांग और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि व्रत की शुभारंभ 23 जून 2028, दिन शुक्रवार से हो रही है। जिसका समापन 01 जुलाई 2027 दिन शनिवार को होगा।

प्रतिपदा तिथि का आरंभ - 22 जून 2028, दिन गुरुवार के रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा और समाप्ति - 23 जून 2028, रात के 09 बजकर 51 मिनट पर होगा।

कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त

23 जून दिन गुरुवार को प्रतिपदा तिथि है। इस दिन कलश अर्थात घट स्थापना करना जरूरी होता है, अगर आप गुप्त नवरात्रा व्रत कर रहे हैं तो ? कब करें कलश स्थापन। 

अभिजीत मुहूर्त: दिन के 11:51 बजे से लेकर 12:15 बजे तक रहेगा। घट स्थापना के लिए सुबह 5:00 से लेकर दिन के 10:00 बजे तक है। इस दौरान चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त रहेगा।

गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की तस्वीर

*आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028 - 9 दिनों की तिथि, दिनांक और दिन की संपूर्ण जानकारी*

वर्ष 2028 में आषाढ़ी गुप्त नवरात्र *23 जून 2028, शुक्रवार* से शुरू होकर *1 जुलाई 2028, शनिवार* तक चलेगी। इन 09 दिनों में मां दुर्गा के 09 रूपों और दस महाविद्याओं की गुप्त साधना की जाती है।

दिन-वार पूजा विवरण

*01. पहला दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा  

*दिनांक: 23 जून 2028, शुक्रवार  

*पूजा: घटस्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा  

*विशेष: इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और आडल योग है। कलश स्थापना, जौ बोना और संकल्प लिया जाता है।

*02. दूसरा दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया  

*दिनांक: 24 जून 2028, शनिवार  

*पूजा: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना  

*विशेष: तप, संयम और ज्ञान की देवी। इस दिन दूध, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं।

*03. तीसरा दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल तृतीया  

*दिनांक: 25 जून 2028, रविवार  

*पूजा*: मां चंद्रघंटा की पूजा  

*विशेष: शौर्य और साहस देने वाली देवी। लाल फूल और दूध से बनी मिठाई का भोग प्रिय है।

*04. चौथा दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी  

*दिनांक: 26 जून 2028, सोमवार  

*पूजा: मां कुष्मांडा की पूजा  

*विशेष: ब्रह्मांड की रचयिता। इस दिन मालपुआ या कद्दू का प्रसाद चढ़ाएं।

*05. पांचवां दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल पंचमी  

*दिनांक: 27 जून 2028, मंगलवार  

*पूजा: मां स्कंदमाता की पूजा  

*विशेष: संतान सुख और मोक्ष देने वाली। केले का भोग लगाना शुभ है।

*06. छठा दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल षष्ठी  

*दिनांक: 28 जून 2028, बुधवार  

*पूजा: मां कात्यायनी की पूजा  

*विशेष: विवाह और मनोकामना पूर्ति की देवी। शहद का भोग लगाएं।

*07. सातवां दिन*  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल सप्तमी  

*दिनांक: 29 जून 2028, गुरुवार  

*पूजा*: मां कालरात्रि की पूजा  

*विशेष: नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं। गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग।

*08. आठवां दिन*  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल अष्टमी  

*दिनांक: 30 जून 2028, शुक्रवार  

*पूजा: मां महागौरी की पूजा  

*विशेष: कन्या पूजन का मुख्य दिन। 9 कन्याओं को भोजन कराकर उपहार दें।

*09. नौवां दिन  

*तिथि: आषाढ़ शुक्ल नवमी  

*दिनांक: 1 जुलाई 2028, शनिवार  

*पूजा: मां सिद्धिदात्री की पूजा और हवन  

*विशेष: सभी सिद्धियों की देवी। इस दिन हवन, पूर्णाहुति और घट विसर्जन किया जाता है। व्रत का पारण करें।

*जरूरी बातें*  

*01. तिथियां सूर्योदय के अनुसार मानी जाएंगी, इसलिए स्थानीय पंचांग से एक बार समय जरूर मिला लें।  

*02. हर दिन सुबह-शाम दुर्गा सप्तशती का पाठ और "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का 108 बार जप करें।  

*03. 9 दिनों तक सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

नौ दिनों तक मां की पूजा की संपूर्ण विधि स्टेप बाय स्टेप

*01. संकल्प और शुद्धि*: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। हाथ में अक्षत और जल लेकर व्रत और साधना का संकल्प लें।  

*02. घटस्थापना*: मिट्टी की वेदी पर जौ बोएं। कलश में जल, सिक्का, सुपारी, दूर्वा डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते और ऊपर नारियल रखें। कलश को वेदी के बीच स्थापित करें।  

*03. देवी आवाहन*: मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। धूप, दीप, अक्षत, पुष्प, सिंदूर, नैवेद्य अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करें।  

*04. प्रतिदिन की पूजा*: हर दिन सुबह-शाम माँ के उस स्वरूप की पूजा करें जो उस तिथि का है। लाल फूल, चुनरी, मिष्ठान चढ़ाएं। 108 बार "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का जप करें।  

*05. गुप्त साधना*: रात में एकांत में बैठकर दस महाविद्याओं के मंत्रों का जप करें। तंत्र साधक विशेष यंत्र पर पूजा करते हैं।  

*06. कन्या पूजन और हवन*: अष्टमी या नवमी को 9 कन्याओं को भोजन कराएं, उपहार दें। अंतिम दिन हवन करके पूर्णाहुति दें।  

*07. विसर्जन*: नौवें दिन घट का जल पीपल या तुलसी में डालें। जौ को प्रसाद रूप में बांटें। क्षमा प्रार्थना करके पूजा समाप्त करें।  

नियम: नौ दिन ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन और झूठ, क्रोध से बचें।

साधक भुलकर भी न करें ये 12 काम

*01.गुप्त नवरात्र के दौरान मांसाहारी भोजन, लहसुन, प्याज को पूरी तरह त्याग करें।

*02.दस दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए कुश के आसन पर या कंबल पर शयन करना चाहिए।

*03.हर दिन निर्जल या फलाहार उपवास रखना चाहिए।

*04.गुप्त नवरात्र के दौरान नौ दिन तक व्रत रखने वाले तंत्र-मंत्र साधकों को काले कपड़े पहनने वर्जित है।

*05.गुप्त नवरात्र के दौरान मां भगवती की पूजा करने वाले भक्तों को चमड़े से बने वस्तुओं से अपने आप को दूर रखना चाहिए।

*06.इस दौरान बाल और दाढ़ी नहीं कटवाने चाहिए। साथ ही बच्चों का मुंडन संस्कार भी इस दौरान करना सख्त मना है।

*07.नवरात्र पूजन के बाद गुरुजन और माता पिता का आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए।

*08.तंत्र, मंत्र, जाप की साधना किसी अनुभवी या गुरु के सानिध्य में करना चाहिए।

*09.शराब पीना और व्रत रखकर झूठ बोलना सख्त मना है।

*10.नवरात्र के दौरान अनाज या उससे बना खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए।

*11.अगर आप गुप्त नवरात्र व्रत कर रहे हैं और अपने घर में अखंड ज्योति जलाते हैं। ऐसी स्थिति में घर को ताला बंद कर कहीं नहीं जाएं। किसी न किसी व्यक्ति को घर में जरूर रखें। अखंड ज्योत को अकेला छोड़कर जाने से मां भगवती रूठ जाती है।

*12.नवरात्रि के दिनों में जो भी व्यक्ति आपके द्वार पर याचक बनकर आता है, तो वैसे व्यक्ति को कुछ न कुछ दान देकर भेजें।

अगर आप कई तरह के दुःखों से ग्रस्त हैं और आप चाहते है कि माता भगवती की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि आ जाए तो गुप्त नवरात्र की मंत्र साधना जरूर करें। मंत्र साधना बहुत ही सावधानी से करनी चाहिए।

क्या है उपाय

*01.यदि पति पत्नी के बीच आपसी मतभेद है और उसे दूर करना है, तो करें इस मंत्र का जाप। यह मंत्र आपके आपसी मतभेदों को दूर करने का कार्य करेगा।

सब नार करहि परस्पर प्रीति चलहि स्वधर्म नीरत श्रुति नीति।

इस मंत्र के जप करते समय आपको घी की 108 बार आहुति देनी पड़ती है। प्रातःकाल 21बार इस मंत्र का जप करने के बाद, आपको लाभ मिलेगा।

*02.बच्चों को बुरी नजरों से दूर करें यह मंत्र

यदि आप अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाना या रक्षा करना चाहते हैं। तो गुप्त नवरात्र के दौरान आपको हनुमान चालिसा के श्लोकों का जप और पाठ करना चाहिए। साथ ही अपने बाएं पैर से बच्चे के माथे पर सिंदूर का टीका लगाना चाहिए।

*03.मंत्र का जाप करें मिलेगा रोजगार

अगर आप बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश कर रहे है। तो ऐसे जातकों को भैरव बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना करने चाहिए। यह पूजा आपको नौकरी प्राप्ति में निश्चित रूप से सहयोग करेगा।

*04.आर्थिक लाभ पाए राम प्रभु के नाम से

आर्थिक लाभ के चाहते है, तो गुप्त नवरात्र के 9 दिनों तक पीपल पेड़ के पत्ते पर राम प्रभु का नाम लिखें और उन्हें हनुमान मंदिर में समर्पित कर दें। ऐसा इससे आपके आर्थिक स्थिति में सुधार होने की पूरी संभावना है।

*05.स्वस्थ्य जीवन जीने का है यह मंत्र

स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए गुप्त नवरात्र के दौरान 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप करें। यह आपकी अनेक बीमारियों को दूर कर स्वस्थ्य होने में सहायता करता है। आपका परिवार भी स्वस्थ्य रहेगा। यह मंत्र है

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा श्यामा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।

*06.शादी के बाधा को दूर करेगा यह मंत्र

यदि किसी व्यक्ति को शादी में कोई समस्या उत्पन्न हो रही है। तो वैसे व्यक्ति मंदिर में जाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा के समक्ष खड़े होकर पूरे मनोयोग से प्रार्थना करें और नीचे लिखे मंत्र का 5 बार जाप करें।

ॐ शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंशनाय, पुरुषार्थ चतुष्ठाय लभाय च पति म देहि कुरु कुरु स्वहा।

गुप्त नवरात्र के दौरान दस महादेवी की दस महाविद्याओं की होती है पूजा

प्रथम दिवस मां काली

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा करने का विधान है। पूजा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके करें। साथ ही काली हकीक माला से जप करना श्रेष्ठ रहेगा।

इस दिन मां काली के साथ भगवान कृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति की किस्मत चमक जाएगी। शनि के प्रकोप भी खत्म हो जाएगा।

नवरात्रि के पहले दिन मां काली को समर्पित हैं। वहीं बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है और अंत के तीन दिन मां सरस्वती के नाम समर्पित हैं। मां काली की पूजा में इन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।

मंत्र- क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा। ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा।

दूसरे दिन मां तारा की पूजा

दूसरे दिन मां तारा की पूजा होती है। मां तारा की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और संतानों की प्राप्ति होती है। इस दिन स्फटिक और नीले रंग की माला से जप करने चाहिए। पूजा करने का मंत्र है।

मंत्र- ऊँ ह्रीं स्त्रीं हूं फट।

तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी की होती है पूजा

गुप्त नवरात्र के तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी पूजा होती है। मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा करने से साधक के व्यक्तित्व में निखरे और रूप में सुंदरता आ जाती है। इस दिन बुध ग्रह के लिए भी पूजा की जाती है. इस दिन रूद्राक्ष की माला से इन मंत्रों की जप करना चाहिए।

मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरी

चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की होती है पूजा

गुप्त नवरात्र के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी पूजा की जाती है। मां भुवनेश्वरी मोक्षदायिनी है। इस दिन मां भुवनेश्वरी के साथ ही विष्णु भगवान की पूजा करना काफी शुभ और मंगलकारी होगा।चंद्र ग्रह से संबंधी अगर किसी व्यक्ति को परेशानी है, तो वैसे व्यक्ति यह पूजा अवश्य करें। मां भुनेश्वरी की मंत्र

मंत्र- ह्रीं भुवनेश्वरीय ह्रीं नम:। ऊं ऐं ह्रीं श्रीं नम:

पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता की होती है पूजा

गुप्त नवरात्रि के पांचवे दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा होती है। इस दिन पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और रोगों का नाश होता है। इस दिन रूद्राक्ष माला से मंत्र का जप करना चाहिए। किसी को अगर वशीकरण मंत्र को सिद्धि प्राप्त करना है, तो नीचे लिखे मंत्र का जप करना चाहिए।

राहू ग्रह से संबंधी किसी भी परेशानी से छुटकारा भी मंत्र जप से मिल जाता है। इस दिन मां को पलाश के फूल जरूर चढ़ाने चाहिए।

मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा।

छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी पूजा होती है

गुप्त नवरात्र के छठे दिन महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन मां त्रिपुर भैरवी पूजा नजर दोष व भूत प्रेत संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए करनी चाहिए। 

मूंगे की माला से जप करें। मां के साथ बालभद्र की पूजा करना श्रेष्ठ और फलदाई होगा। इस दिन जन्मकुंडली में लगन में अगर कोई दोष है तो मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से दूर हो जाता है। मंत्र- ऊँ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा।

सप्तमी तिथि को मां धूमावती की पूजा की जाती है

गुप्त नवरात्र के सातवें दिन महाविद्यामां धूमावती की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करने से द्ररिता का नाश होता है। इस दिन हकीक की माला से जप करें। मंत्र- धूं धूं धूमावती दैव्ये स्वाहा।

आठवें दिन बगलामुखी मां की पूजा होती है

गुप्त नवरात्र के आठवें दिन महाविद्या मां बगलामुखी की पूजा करने का विधान है। मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना करने से कोर्ट-कचहरी संबंधित मामले और नौकरी संबंधी परेशानी दूर हो जाती है।

इस दिन पीले कपड़े धारण कर हल्दी से बने माला से जप करना है। अगर आप की कुंडली में मंगल संबंधी कोई परेशानी है तो मा बगलामुखी की पूजा करने से जल्द ठीक हो जाएगा। इस मंत्र का करें जाप।

मंत्र है ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊं स्वाहा।

नौवें दिन मां मतांगी की पूजा की जाती है

गुप्त नवरात्र के नौवें दिन महाविद्या मां मतांगी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान धरती की ओर मुख करके पूजा करें। मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुंह करके करनी चाहिए। इस दिन पूजा करने से प्रेम संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। बुद्धि और विवेक में वृद्धि के लिए मां मातंगी कि पूजा की जाती है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा।

दसमें दिन मां कमला की पूजा करें

गुप्त नवरात्र के दसवें दिन मां कमला की जाती है। मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुख करके करनी चाहिए। दरअसल गुप्त नवरात्रि के नौंवे दिन दो देवियों की पूजा होती है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं कमला ह्रीं क्रीं स्वाहा देवी के ‘नवार्ण मंत्र’, ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ अथवा ‘दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र’ से का पाठ करना चाहिए ।

मां दुर्गा है शक्ति के प्रतीक जानें कैसे

मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि मां दुर्गा इस मायावी जगत में शक्ति का संचार करती हैं।

मां की आराधना के लिए साल में दो बार बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन किया जाता है, जो लगातार नौ दिनों तक उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। 09 दिनों तक मनाये जाने वाले इस शक्ति पर्व को नवरात्र कहा जाता है।

इन दो नवरात्र को चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन साल में दो बार नवरात्र ऐसे भी आते हैं जिनमें मां दुर्गा की नौ रुपों की जगह दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।

यह साधना और पूजन चैत्र और शारदीय नवरात्र से कठिन होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस साधना और पूजन के परिणाम बड़े आश्चर्यचकित करने वाले होते हैं। तंत्र विद्या में विश्वास रखने वाले तांत्रिकों के लिए दोनों गुप्त नवरात्र बहुत ही खास माने जाते हैं। कारण इस दौरान मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाती है। इसलिये इसे गुप्त नवरात्र भी कहा जाता है।

कब मनाये जातें हैं गुप्त नवरात्र

चैत्र माह और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो सभी लोग जानते हैं। जिसे चैत्र और शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है।

जबकि दूसरी ओर गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं। गुप्त नवरात्र की अधिक जानकारी अधिकतर वैसे लोगों को होती है जो तंत्र और मंत्र की साधना करना चाहते हैं। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र मनाये जाते हैं।

गुप्त नवरात्र के संबंध में क्या है पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों से मिलती है। कथा के अनुसार एक समय की बात है। ऋषि श्रृंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे।

उसी समय भीड़ में से एक महिला हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि ऋषिवर मेरे पति दुष्टकर्मी हैं। दुष्ट पति के कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य, व्रत, उपवास आदि अनुष्ठान नहीं कर पाती हूं। मैं मां दुर्गा की शरण में जाना चाहती हूं।

लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां दुर्गा की कृपा नहीं मिल पा रही है। कृपा करके मेरा मार्गदर्शन करें। ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है।

महिला ने सुनाई ऋषि को अपना दुखड़ा

ऋषि ने आगे कहा कि लोग इन दिनों नवरात्र से भलि भांति परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं। इन दिनों नवरात्र में 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन सुखमय हो जायेगा।

ऋषि के वचन को सुनकर महिला ने गुप्त नवरात्र करने का संकल्प लिया। ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की। उक्त महिला की श्रद्धा व भक्ति से मां दुर्गा प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हो गया। महिला का घर खुशियों से भर गया।

क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि

गुप्त नवरात्र के पूजा की विधि के संबंध में कहना है कि इसका भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत करने का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा तिथि को घट स्थापना करना चाहिए। इसके बाद प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है।

दूसरी ओर तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की मंत्र साधना करते हैं। इन दस महाविद्याओं के तहत मां काली, भुनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, माता छिन्नमस्ता, माता ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मां मातंगी और माता कमला देवी की पूजा होती है।

तंत्र मंत्र की साधना करें प्रशिक्षित संतों से

सभी साधकों से अनुरोध है कि तंत्र-मंत्र की साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के दिशा-निर्देश या अपने गुरु के देख रेख में ही करें। अगर मंत्र साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रभाव प्रतिकूल पड़ने से साधक महासंकट में पड़ सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य डा. राजेश उपाध्याय का कहना है कि नवरात्र साल में चार बार आती हैं। इसकी शुरुआत माघ महीने से होती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में प्रथम नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक रहती है। इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है।

दूसरी नवरात्र चैत्र महीने में चैत्र शुक्ला पक्ष प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक रहती हैं। इसे बसंत नवरात्र कहते हैं।

तीसरा नवरात्र आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक रहती हैं। इसे गुप्त नवरात्र कहते हैं।

चौथी नवरात्र अश्वनी माह के शुक्ला पक्ष के प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक रहती है। इसे शारदीय नवरात्र कहते हैं।

गुप्त नवरात्र में होती मंत्र सिद्धी और मां दुर्गा की साधना

ज्योतिषाचार्यो का कहना है कि माघ माह और आषाढ़ माह में जो नवरात्रि आती हैं। उसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्र में विशेष रूप से मंत्र साधना एवं उपासना की जाती है।

तंत्र-मंत्र और यंत्र, के साधना और सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र का दिन विशेष मना जाता है। व्यवसाय में वृद्धि करना है, रोजगार में प्रगति करना है या रोग निवारण सहित अन्य मनोकामनाओं के पूर्ति हेतु गुप्त नवरात्र में साधना की जा सकती है।

गौरतलब है कि चैत्र नवरात्रि एवं शारदीय नवरात्र को सार्वजनिक रूप में मनाया जाता है। लेकिन गुप्त नवरात्र को सामान्य जन विशेष रूप से नहीं जानते हैं। लेकिन मंत्र-तंत्र साधना में गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व है। अनेक प्रकार से रात्रि में उनकी साधना की जाती है जिससे सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।

तंत्र मंत्र की साधना करें रात्रि में

तंत्र-मंत्र और शक्ति साधना के दृष्टि से गुप्त नवरात्रों के दिनों को बहुत सिद्धिदायी माना जाता हैं। मां वैष्णो देवी, पराम्बा देवी और कामाख्या देवी का अहम् पर्व माना जाता है। हिंगलाज देवी की सिद्धि के लिए भी इस समय को महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार दस महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए ऋषि विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ ने बहुत प्रयास किए परंतु उन्हें सिद्धियां प्राप्त नहीं हुई। अनंत काल की गणना करने और ध्यान की स्थिति में रहने पर दोनों ऋषियों को ज्ञान हुआ कि केवल गुप्त नवरात्रों में शक्ति के अनेक स्वरूपों को सिद्ध किया जा सकता है।

गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की होती है मंत्र साधना

गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अदुतिय शक्तियों के मालिक बन गए। अपने सिद्धियों के बल पर उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी।

मेघनाथ ने किया था गुप्त नवरात्र

इसी प्रकार रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की साधना की थी। गुरु शुक्राचार्य ने मेघनाद को सुझाव दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुल देवी मां निकुम्बाला कि साधना करके वह विश्व विजेता बनाने वाली शक्तियों का अधिकारी बन सकता है।

मेघनाद ने ऐसा ही किया और कुल देवी से शक्तियां हासिल कर राम, रावण युद्ध के समय केवल मेघनाद ने ही भगवान राम सहित लक्ष्मण जी को नागपाश में बांध कर मृत्यु के समकक्ष पहुंचा दिया था।

ऐसी मान्यता है कि यदि नास्तिक भी संयोगवस गुप्त नवरात्र के समय मंत्र साधना कर ले तो उसका भी फल सफलता के रूप में अवश्य ही मिलता है ।

घरों में भी कर सकते हैं तंत्र-मंत्र साधना

गुप्त नवरात्र की यही महिमा है। यदि आप मंत्र साधना और शक्ति साधना करना चाहते हैं। काम-काज की उलझनों के कारण साधना के नियमों का पालन सही ढंग से नहीं कर पाते तो, यह अवसर आपके लिए है। माता की कृपा पाने के लिए। गुप्त नवरात्रों में साधना के लिए आवश्यक न्यूनतम नियमों का पालन करते हुए मां दुर्गा शक्ति की मंत्र साधना करने चाहिए।

गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना करने से मनुष्य के सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गुप्त नवरात्र के संबंध में यह भी कहा जाता है कि इस कालखंड में की गई तंत्र मंत्र साधना निश्चित रूप से फलवती होती है। 

गुप्त नवरात्र के समय की जाने वाली तंत्र मंत्र साधना को गुप्त बनाए रखना बहुत ही जरूरी है। अपना मंत्र और देवी का स्वरुप गुप्त बनाए रखें । गुप्त नवरात्र में तंत्र मंत्र साधना का काम आसानी से घरों में ही किया जा सकता है।

मंत्र साधना का उचित समय गुप्त नवरात्र

महाविद्याओं की साधना के लिए यह सबसे अच्छा समय होता है गुप्त नवरात्र। गुप्त नवरात्र में चामत्कारिक शक्तियां प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ समय होता है। धार्मिक और पौराणिक नजर से हम सभी जानते हैं कि नवरात्र देवी दुर्गा की स्तुति और शक्ति साधना की शुभ घड़ी है।

क्या है वैज्ञानिक कारण

गुप्त नवरात्र में तंत्र मंत्र और शक्ति साधना के पीछे छुपा संसारिक पक्ष ऐसा है कि नवरात्र के समय मौसम में बदलाव का होता है।

आयुर्वेद के अनुसार इस बदलाव से जहां शरीर में कफ, पित्त और वात में दोष पैदा हो जाते हैं। बाहरी वातावरण में रोगाणु और जीवाणु जो अनेक बीमारियों का कारक हैं। सुखी और स्वस्थ्य जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।

नवरात्र के विशेष दिनों में देवी दुर्गा की उपासना करने से खान-पान, रहन-सहन पर असर पड़ता है। देव पूजन करते समय अपनाए गए संयम और

अनुशासन तन और मन को शक्ति प्रदान करने के साथ ही ऊर्जा देने का काम भी करता हैं। जिससे फलस्वरूप मनुष्य निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है।

गुप्त नवरात्र में शिव और दुर्गा की करें पूजन

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना की जाती है।

मां दुर्गा शक्ति और तंत्र मंत्र साधना की साक्षात देवी है। दुर्गा शक्ति में विनाश का भाव भी जुड़ा है। यह दमन या अंत करता है। शरीर के शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग आदि विकारों का ये सभी हमारे जीवन में अड़चनें पैदा करने हैं और हमारे सुख-चैन छीन लेते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

इन्हीं सभी कारणों को खत्म करने के लिए मां दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का अनुष्ठान किया जाता है। देवी उपासना के विशेष काल में मंत्र जाप करने से शत्रु, रोग, दरिद्रता, भय और बाधा दूर करने वाला माना गया है। सभी नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है गुप्त नवरात्र।

नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते।

देवी पुराण में क्या है वर्णन

देवी पुराण में कहा गया है कि एक वर्ष में चार बार नवरात्र मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों तक सारा परिवेश श्रद्धा व भक्ति, धार्मिक संगीत के रंग से रंग जाता है। गुप्त नवरात्र धार्मिक आस्था के साथ नवरात्र भक्तों को आपसी एकता, सौहार्द, भाईचारे के प्रेम सूत्र में बांधकर उनमें सद्भावना जागृत करता है।

शक्ति ग्रंथो में गुप्त नवरात्रों का बड़ा ही माहात्म्य बताया गया है । मनुष्य के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई व्रत और त्योहार नहीं हैं।

अपनी वर्चस्व, लंबी आयु, आरोग्य जीवन और धन संपदा प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक तरह के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं।

इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

दुर्गावरिवस्या ग्रंथ में लिखा है माघ नवरात्र का वर्णन

दुर्गावरिवस्या नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में आषाढ़ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं, जबकि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना और आराधना करने वाले व्यक्ति को सभी तरह के सुख और समृद्धि प्राप्त होते हैं।

शिव संहिता में मिलता है गुप्त नवरात्र का वर्णन

शिवसंहिता ग्रंथ के अनुसार यह नवरात्र भगवान शिव और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए श्रेष्ठ दिन हैं। गुप्त नवरात्रों के दौरान साधना समय में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान और मंत्रों का जाप करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं खत्म होने लगती हैं।

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

देवी भागवत पुराण में 10 विद्यायों का है उल्लेख

देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं। शारदीय नवरात्र और बसंती नवरात्र में जिस प्रकार देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की मंत्र साधना की जाती है।

गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखता है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियमों के पालन करने के साथ ही व्रत और साधना भी करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

इन देवियों की करें पूजा होगा लाभ ही लाभ

गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या अर्थात तंत्र साधना करने के लिए मां काली, मां तारा देवी, माता त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मां मातंगी और माता कमला देवी की पूजा विधि विधान और पूरी निष्ठा से करते हैं।

श्री राम प्रभु ने की थी मां की आराधना

मान्यता है कि नवरात्र में महाशक्ति की पूजा कर श्रीराम ने अपनी खोई हुई शक्ति पाई थी। इसलिए इस समय आदिशक्ति की आराधना पर विशेष बल दिया जाता है।

नए ब्लॉग से संबंधित अनसुलझे पहलू

गुप्त नवरात्र को लेकर कई सवाल आज भी लोगों के मन में हैं। पहला, इसे "गुप्त" क्यों कहा जाता है। मान्यता है कि इन दिनों की साधना तांत्रिक और गुप्त रूप से की जाती है ताकि सिद्धि में बाधा न आए। 

दूसरा, क्या सामान्य गृहस्थ भी दस महाविद्याओं की साधना कर सकते हैं। विद्वानों का मत है कि बिना गुरु के उग्र साधना नहीं करनी चाहिए, केवल सामान्य दुर्गा पूजा और जप ही करें। 

तीसरा, घटस्थापना के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग कितना जरूरी है। शुभ योग में किया गया काम सिद्ध होता है, पर श्रद्धा सबसे बड़ी है। 

चौथा, गुप्त नवरात्र में मांसाहार और तामसिक भोजन वर्जित क्यों है। कहा जाता है कि देवी की ऊर्जा सात्विक है, इसलिए शरीर और मन को शुद्ध रखना जरूरी है। 

पांचवां, क्या इन नौ दिनों में यात्रा करना अशुभ है। शास्त्रों में ऐसा कोई स्पष्ट निषेध नहीं है, पर साधना में एकाग्रता भंग न हो इसलिए घर पर रहना बेहतर माना जाता है।

ब्लॉग से संबंधित 5 प्रश्न और उत्तर

*प्रश्न *01: आषाढ़ी गुप्त नवरात्र 2028 कब से शुरू होगी*  

उत्तर: 23 जून 2028, शुक्रवार से प्रतिपदा तिथि के साथ शुरू होकर 1 जुलाई 2028, शनिवार को नवमी पर समाप्त होगी।

*प्रश्न *02: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है*  

उत्तर: 23 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग और आडल योग बन रहा है। सुबह सूर्योदय के बाद 2 घंटे के भीतर घटस्थापना करना सबसे शुभ माना जाता है। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग देखें।

*प्रश्न *03: क्या गुप्त नवरात्र में व्रत रखना जरूरी है*  

उत्तर: जरूरी नहीं है। आप फलाहार व्रत, एक समय भोजन या सिर्फ सात्विक भोजन करके भी पूजा कर सकते हैं। मुख्य है मन की शुद्धता और नियमित जप।

*प्रश्न *04: दस महाविद्याओं की साधना कौन कर सकता है*  

उत्तर: यह साधना विशेषकर तंत्र मार्ग के साधकों के लिए है। सामान्य भक्त माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ और नाम जप करें।

*प्रश्न *05: गुप्त नवरात्र में कौन से काम नहीं करने चाहिए*  

उत्तर: नशा, मांस, झूठ, क्रोध, निंदा और तामसिक कार्य से बचें। बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करें।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। 2028 की तिथियां और मुहूर्त पंचांग के अनुसार दिए गए हैं, पर अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार 1 दिन का अंतर हो सकता है। 

पूजा विधि, मंत्र जप और तंत्र साधना से पहले किसी योग्य विद्वान, गुरु या पंडित से परामर्श अवश्य लें। दस महाविद्याओं की गुप्त साधना बिना गुरु के करना उचित नहीं माना जाता। लेख में दिए गए उपायों को अपनाने से पहले अपनी श्रद्धा और सुविधा अनुसार निर्णय लें। 

हमारा उद्देश्य किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होने पर व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें। लेख में दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे। माँ की कृपा सभी पर बनी रहे।



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