08 अक्टूबर 2029 दिन सोमवार को घटस्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू होगी और समापन 16 अक्टूबर 2029 दिन मंगलवार को विजयदशमी (दशहरा) के साथ समाप्त होगा।
शारदीय नवरात्र 2029 का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:
• 8 अक्टूबर 2029 (प्रतिपदा): मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना | रंग: सफ़ेद
• 9 अक्टूबर 2029 (द्वितीया): चंद्र दर्शन, मां ब्रह्मचारिणी पूजा | रंग: लाल
• 10 अक्टूबर 2029 (तृतीया): सिंदूर तृतीया, मां चंद्रघंटा पूजा | रंग: गहरा नीला
• 11 अक्टूबर 2029 (चतुर्थी): मां कूष्मांडा पूजा, उपंग ललिता व्रत | रंग: पीला
• 12 अक्टूबर 2029 (पञ्चमी): स्कंदमाता पूजा, कात्यायनी पूजा | रंग: हरा
• 13 अक्टूबर 2029 (सप्तमी): सरस्वती आवाहन, कालरात्रि पूजा | रंग: स्लेटी (ग्रे)
• 14 अक्टूबर 2029 (अष्टमी): दुर्गा अष्टमी, सरस्वती पूजा, महागौरी पूजा, संधि पूजा (शुरुआत: 04:04 AM, 15 अक्टूबर - समाप्ति: 04:52 AM, 15 अक्टूबर) | रंग: नारंगी
• 15 अक्टूबर 2029 (नवमी): महानवमी, आयुध पूजा, नवमी हवन, सिद्धिदात्री पूजा | रंग: मोर वाला हरा (पीकॉक ग्रीन)
• 16 अक्टूबर 2029 (दशमी): नवरात्र पारणा, दुर्गा विसर्जन, विजयदशमी (दशहरा) |रग: गुलाबी
सुख-समृद्धि का द्वार खोलेगी शारदीय नवरात्र की कलश स्थापना, इस विधि से करें शक्ति का आवाहन
शारदीय नवरात्र सनातन धर्म में शक्ति उपासना का सबसे पावन पर्व है, जो वर्ष 2029 में 8 अक्टूबर, सोमवार से शुरू हो रहा है। इस नौ दिवसीय उत्सव के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है, जिसे देवी दुर्गा के आवाहन का सबसे मुख्य अनुष्ठान माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, कलश को ब्रह्मांड, त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और साक्षात नवग्रहों का प्रतीक माना गया है। सही मुहूर्त और विधि-विधान से की गई कलश स्थापना घर में सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करती है। वर्ष 2029 में माता का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से प्रचुर वर्षा, अच्छी फसल और देश में संपन्नता का अत्यंत शुभ संकेत है।
इस वर्ष अमृत चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त के दुर्लभ संयोग में घटस्थापना करना भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहेगा। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, जिसकी शुरुआत प्रतिपदा तिथि को पूर्ण श्रद्धा के साथ अखंड ज्योति और कलश की स्थापना से होती है।
कैसा रहेगा दिन (ज्योतिषीय गणना)
• तिथि: अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (यह तिथि 8 अक्टूबर को रात 08:55 बजे तक रहेगी, इसलिए पूरा दिन पूजा के लिए शुद्ध है)।
राशि स्थिति: सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में ही संचरण करेंगे।
माता का आगमन: वर्ष 2029 में मां दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है, जिसे बेहद शुभ, सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का सूचक माना जाता है।
कलश स्थापना के मुख्य सटीक शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के लिए दो मुख्य और सर्वश्रेष्ठ समय उपलब्ध हैं:
1. घटस्थापना मुख्य मुहूर्त (प्रातःकाल):
समय: सुबह 06:18 AM से सुबह 09:01 AM तक
• अवधि: 2 घंटे 44 मिनट
• विशेष: शास्त्रों के अनुसार देवी पूजन की शुरुआत के लिए यह प्रातःकाल का समय सर्वोत्तम माना गया है।
2. अभिजीत मुहूर्त (दोपहर):
• समय: दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
• अवधि: 47 मिनट
• विशेष: यदि आप सुबह किसी कारणवश कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो इस स्वतः सिद्ध मुहूर्त में बिना किसी हिचकिचाहट के स्थापना कर सकते हैं।
चौघड़िया के अनुसार शुभ और अशुभ समय (दिन का भाग)
सोमवार के दिन का चौघड़िया चक्र और राहुकाल इस प्रकार रहेगा, जिससे आप वर्जित समय से बच सकें:
मुहूर्त का प्रकार समय अंतराल फल और निर्देश
अमृत चौघड़िया: (शुभ) सुबह 06:18 बजे से 07:46 बजे तक कलश स्थापना के लिए अति उत्तम।
काल चौघड़िया: (अशुभ) सुबह 07:46 बजे से 09:14 बजे तक इसमें शुभ कार्य वर्जित हैं।
शुभ चौघड़िया: (शुभ) सुबह 09:14 बजे से 10:41 बजे तक सामान्य पूजा-पाठ के लिए उपयुक्त।
रोग चौघड़िया: (अशुभ) सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक इस दौरान कलश स्थापना न करें।
उद्वेग चौघड़िया: (अशुभ) दोपहर 12:09 बजे से दोपहर 01:37 बजे तक मानसिक अशांति कारक, स्थापना न करें।
राहुकाल: (महा अशुभ) दोपहर 07:46 बजे से 09:14 बजे के बीच राहुकाल में भूलकर भी कलश स्थापित न करें।
निष्कर्ष: यदि आपको चौघड़िया के अनुसार सबसे सटीक समय चुनना है, तो सुबह 06:18 बजे से 07:46 बजे (अमृत बेला) के बीच या फिर दोपहर में 11:45 बजे से 12:32 बजे (अभिजीत मुहूर्त) के बीच कलश स्थापना संपन्न करें।
कलश स्थापना में लगने वाली पूजा सामग्री
शारदीय नवरात्र 08 अक्टूबर दिन सोमवार को कलश स्थापना के साथ 09 दिनों का महा महोत्सव का शुभारंभ हो जाएगा। कलश स्थापना करने के लिए पूजा सामग्री की जरूरत पड़ती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि होने के कारण मां शैलपुत्री की पूजा भी की जाती है।
कलश स्थापना करने के पूर्व इन सामग्रियों का खरीदारी कर लेनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए जटा वाला नारियल, गाय का गोबर, दूध, दही, पान, सुपारी, रोली, मिट्टी का कलश, सिंदूर, लाल कपड़ा, फूल, उड़हुल फूल का माला, अक्षत, हवन के लिए सूखी लकड़ी, कपूर, जौ, मेवा, मधु, गंगाजल, अगरबत्ती, दीया, गुड़, इत्र, आम का पत्ता, रूई, दूर्वा, सलाई, गुड़, हल्दी, मिठाई और मौसमी फल होना जरूरी है।
नवरात्रि आत्मवल को प्रबल बनाता है
कहा जाता है कि नवरात्रि अपने अंदर शिवा और शक्ति को एकीकार करने का अनुष्ठान है। नवरात्रि आत्मवल प्रबल करने का अवसर प्रदान करता है। नवरात्रि में नौ रूपों में देवी भक्तों के बीच आती है। मन और तन के शोधन का महत्व समझा जाती है।
मां दुर्गा ही काली, लक्ष्मी व सरस्वती है
हमारे वेद पुराण और ऋषि-मनियों ने शिवा और शक्ति को सृष्टि की उत्पति का कारक मानते हैं। महादेवी का नाम देकर इस जगत की आदिशक्ति, जगत का सृजन, पालन और नाश करने वाली शक्ति कहा जाता है। सर्वमान्य है कि यह शक्ति जिसे दुर्गा, काली, सरस्वती और लक्ष्मी आदि नामों से जाना जाता है। यह एक ही शक्ति के बदले हुए रूप और स्वरूप हैं। नवरात्रि के दिन मां शक्ति की नौ रूपों की पूजा प्रत्येक दिन की जाती है।
घट (कलश) स्थापना कैसे करें, जाने संपूर्ण विधि
कलश में गंगाजल भरकर, एक सिक्का, दूर्वा, सुपारी और हल्दी की एक गांठ डाल दें। कलश और ढक्कन के बीच आम के पल्ला (पत्ता) स्थापित करें, लाल वस्त्र में नारियल को लपेट कर उस स्थान पर रख दें।
चावल अर्थात अक्षत से अष्टदल बनाकर उसपर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। मां को लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ानी चाहिए। कलश स्थापना के साथ अखंड दीप प्रज्ज्वलित करें, जो 9 दिनों तक जलेगी।
मां शैलपुत्री का करें पूजन
पहला दिन होने के कारण शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके जाप करें। फूल और चावल मां शक्ति के चरणों में अर्पित करें। मां का भोग शुद्ध घी से बनाएं साथ में मौसमी फल भी प्रसाद के रूप में रखें और मां पर चढ़ाएं। इसके बाद मां आदिशक्ति को ध्यान कर दुर्गा सप्तशती पाठ करें।
कलश के चारों ओर करें जौ की बुआई
कलश स्थापना मिट्टी और बालू के ऊपर करनी चाहिए। मिट्टी और बालू में जौ मिलाकर रखें। 9 दिनों तक सुबह और शाम पूजा के उपरांत शुद्ध जल का छिड़काव उस पर करते रहे। नित्य प्रतिदिन जौ का पौधा बढ़ता जाएगा। माना जाता है कि सृष्टि में सबसे पहले अनाज के रूप में जौ उत्पन हुआ था।
जौ सृष्टि का पहला अनाज
इस अनाज को सृष्टि के उत्पत्ति के साथ देखा जाता है। मान्यता है कि जौ के पौधों को विजयादशमी के दिन उखाड़ कर अपने प्रियजनों के बीच वितरण कर देनी चाहिए।
पौधा वितरण करने से परिजनों के यहां सुख समृद्धि और शांति आती है। इसे लोग अपने दाहिने कान पर रखते हैं। जौ का पौधा अगर खिला हुआ है और स्वस्थ्य है। खिले पौधे को देखने के बाद ऐसा प्रतित होता है कि आपके घर में सुख समृद्धि और प्रियजनों को कष्ट निवारण होगा। इसे मां का संकेतिक घोतक माना जाता है।
जौ को सुखना अथाह संकट
उसी प्रकार अगर आपका बोया हुआ जौ मुरझा गया हो या ठीक से जन्म नहीं ले पाया है, तो इसका मतलब है आपका परिवार संकट में घिर सकता है। और पहाड़ के सामान दुख आपको और आपके परिवार को बर्बाद कर सकते हैं।
दुर्गा सप्तशती पाठ करने वाले लोग रहें ब्रह्मचर्य
नवरात्रा का व्रत रखकर कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती पाठ करने वाले लोग 10 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करें। सादा भोजन करें और नमक के जगह सेंधा नमक का प्रयोग करें। रोजाना दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लोगों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
डिसक्लेमर
इस लेख में दी गई सारी जानकारी हमने विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं से ली गई है। शुभ और अशुभ मुहूर्त पंचांग से लिया गया है। सटीकता या विश्वसनीयता की पूरी गारंटी हम नहीं लेते है। हमारा उद्देश्य महज आपतक धार्मिक सूचना पहुंचाना है। पढ़ने वाले सिर्फ धार्मिक सूचना समझकर पढ़ें। इसके अलावा, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं पढ़ने वाले की होगी।
1. आर्थिक तंगी दूर करने का उपाय (लौंग और कपूर का टोटका):
नवरात्र के नौ दिनों तक रोज शाम को चांदी या मिट्टी के पात्र में थोड़ा सा कपूर जलाकर उस पर दो साबुत फूल वाली लौंग रखें। इस जलती हुई लौंग-कपूर की लौ से पूरे घर में आरती घुमाएं। यह टोटका घर की नकारात्मक ऊर्जा को तुरंत सोख लेता है और अटके हुए धन की प्राप्ति के मार्ग खोलता है।
2. गृह क्लेश और मानसिक शांति के लिए (मुख्य द्वार का उपाय):
घटस्थापना के दिन मुख्य दरवाजे पर ताजे आम या अशोक के पत्तों का बंदनवार (तोरण) लगाएं। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ कुमकुम से 'स्वास्तिक' का चिन्ह बनाएं। यह उपाय बाहरी नकारात्मक शक्तियों को घर में प्रवेश करने से रोकता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ाता है।
3. नौकरी और व्यापार में तरक्की के लिए (कनकधारा उपाय):
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के पास ही एक साफ लाल कपड़े पर 'गोमती चक्र' और 'कौड़ियां' रखें। मां दुर्गा के साथ इनकी भी रोली और अक्षत से पूजा करें। नवरात्र समाप्त होने के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या कार्यस्थल की दराज में रख दें। इससे व्यापार में वृद्धि होती है।
पांच यूनिक प्रश्न और सटीक उत्तर
प्रश्न 1: कलश स्थापना में मिट्टी के पात्र में 'जौ' (यव) क्यों बोए जाते हैं, और इसका पूजा से क्या संबंध है?
उत्तर: सृष्टि के निर्माण के समय ब्रह्मा जी की शक्ति से जो सबसे पहली फसल उत्पन्न हुई थी, वह 'जौ' थी। इसलिए जौ को सृष्टि की पहली शुद्ध फसल माना जाता है। कलश स्थापना के समय जौ बोना इस बात का प्रतीक है कि हम प्रकृति और अन्न के रूप में ईश्वर का सम्मान कर रहे हैं। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान जौ जितने अच्छे और हरे-भरे उगते हैं, घर में उतनी ही अधिक सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
प्रश्न 2: घटस्थापना के समय कलश के मुख पर कलावा (मौली) बांधने और उसके अंदर सिक्का व दूर्वा डालने का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण क्या है?
उत्तर: आध्यात्मिक रूप से कलश के मुख पर बंधा कलावा त्रिदेवों की रक्षा का प्रतीक है। कलश के अंदर डाला जाने वाला तांबे या चांदी का सिक्का समृद्धि का और दूर्वा (घास) अमरता व कभी न नष्ट होने वाली उन्नति की कामना को दर्शाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, पानी में तांबा, सिक्का और दूर्वा डालने से जल शुद्ध, कीटाणुमुक्त और ऊर्जा से भरपूर हो जाता है, जो नौ दिनों तक वातावरण को पवित्र रखता है।
प्रश्न 3: यदि प्रातःकाल के मुख्य मुहूर्त में कलश स्थापना छूट जाए, तो क्या दिन में किसी भी समय स्थापना की जा सकती है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, मुख्य मुहूर्त छूटने पर कभी भी राहुकाल, रोग या उद्वेग चौघड़िया जैसे अशुभ समय में स्थापना नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में 'अभिजीत मुहूर्त' (दोपहर लगभग 11:45 से 12:32 बजे) सबसे उत्तम विकल्प होता है। अभिजीत मुहूर्त को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है, जिसमें बिना किसी पंचांग दोष के सभी मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
प्रश्न 4: कलश के ऊपर रखे जाने वाले नारियल का मुख किस दिशा में होना चाहिए और क्यों?
उत्तर: कलश पर रखे नारियल का मुख हमेशा पूजा करने वाले व्यक्ति की ओर (सामने की तरफ) होना चाहिए। शास्त्रों के नियम 'अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय' के अनुसार नारियल का मुख नीचे होने से शत्रु बढ़ते हैं, ऊपर होने से रोग बढ़ते हैं और पीछे होने से धन का नाश होता है। साधक की तरफ मुख होने से धन और आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 5: वर्ष 2029 में मां दुर्गा का वाहन 'हाथी' है, इसका आम जनमानस के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: जब नवरात्र सोमवार से शुरू होते हैं, तो मां दुर्गा का वाहन हाथी (गज) होता है। गज सवारी का ज्योतिषीय फल बेहद शुभ माना जाता है। यह दर्शाता है कि आने वाले समय में देश में सुख-शांति बढ़ेगी, कृषि क्षेत्र में भारी उन्नति होगी, अच्छी वर्षा के योग बनेंगे और लोगों के जीवन से आर्थिक मंदी व भौतिक कष्टों का नाश होगा।
सामान्य डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई शारदीय नवरात्र 2029 की तिथियां, कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त, चौघड़िया, राहुकाल और ज्योतिषीय गणनाएं द्रिक पंचांग (Drik Panchang) और स्थापित सनातन ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
चूंकि भौगोलिक स्थिति, रेखांश (Longitude) और अक्षांश (Latitude) के बदलने से अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के समय में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है, इसलिए किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान या सटीक संकल्प से पहले अपने स्थानीय पुरोहित, ज्योतिषी या विश्वसनीय क्षेत्रीय पंचांग से परामर्श अवश्य कर लें। यह सामग्री केवल आपकी सामान्य जानकारी और धार्मिक जागरूकता के लिए तैयार की गई है।
टोटके एवं उपायों का डिस्क्लेमर:
इस सामग्री में प्रस्तुत किए गए टोटके, उपाय और पारंपरिक विधियां लोक मान्यताओं, सदियों पुरानी परंपराओं और लाल किताब या ज्योतिषीय प्रथाओं पर आधारित हैं। इन उपायों का कोई भी वैज्ञानिक या प्रामाणिक चिकित्सकीय आधार नहीं है।
इन टोटकों के प्रभाव या परिणामों की कोई तार्किक या निश्चित गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि ज्योतिषीय उपाय व्यक्ति की श्रद्धा, कुंडली के ग्रहों की स्थिति और व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर करते हैं।
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