अनंत चतुर्दशी 2027: 14 सितंबर को महायोग में विष्णु पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और अचूक उपाय f

अनंत चतुर्दशी 2027: 14 सितंबर को महायोग में विष्णु पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और अचूक उपाय

 अनंत चतुर्दशी 14 सितंबर 2027 दिन मंगलवार को मनाया जायेगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को है।

विशेष महत्व: इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है और 14 गांठों वाला 'अनंत सूत्र' (धागा) बांधा जाता है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन होता है और इसी दिन भगवान गणेश का विसर्जन किया जाता है 

भगवान विष्णु की अनंत रूपों की तस्वीर

 अनंत चतुर्दशी 2027: महायोगों के शुभ संयोग में होगी श्रीहरि की उपासना और गणेश विसर्जन

​वर्ष 2027 में अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व 14 सितंबर, मंगलवार को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाला यह दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और अनंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु के 'अनंत' रूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु अपने जीवन के समस्त संकटों के नाश और सुख-समृद्धि की कामना के साथ इस दिन 14 गांठों वाला पवित्र 'अनंत सूत्र' (धागा) अपनी भुजा पर धारण करते हैं।

​यह तिथि केवल श्रीहरि की साधना ही नहीं, बल्कि 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव के भावुक समापन का भी प्रतीक है। इसी दिन 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों के साथ गणेश विसर्जन किया जाता है और बप्पा को अगले वर्ष पुनः आने के निमंत्रण के साथ विदाई दी जाती है।

​वर्ष 2027 की अनंत चतुर्दशी आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास और मंगलकारी रहने वाली है, क्योंकि इस दिन रवि योग, विडाल योग और आडल योग जैसे अत्यंत शुभ व शक्तिशाली योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इन पावन योगों में की गई पूजा, व्रत और विसर्जन से भक्तों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

अनंत सूत्र में क्यों बांधे जाते हैं 14 गांठ

अनंत सूत्र में बांधे जाने वाले 14 गांठ, 14 लोकों का प्रतीक है। अनंत सूत्र में 14 लोक समाहित है। इस ब्रह्मड में 14 लोक है। पृथ्वी से ऊपर 7 लोक और पृथ्वी के अंदर 7 लोक स्थित है। मान्यत है कि 14 लोकों का मालिक भगवान अनंत अर्थात विष्णु है। इसलिए अनंत सूत्र बांधने से 14 लोकों का पुण्य मिलता है।

जानें कौन-कौन लोक है

पृथ्वी के ऊपर भूलोक, भुव लोक, स्वर्ग लोक, गह लोक, जन लोक, तपो लोक, और ब्रह्मलोक स्थित है।

 पृथ्वी के नीचे अतल लोक, वितल लोक, सतल लोक, रसातल लोक, तलातल लोक, महातल लोक और पाताल लोक स्थित है।

उत्पन्न एकादशी के पंचांग के अनुसार कैसा रहेगा 

अनंत चतुर्दशी के दिन नक्षत्र धनिष्ठा 08:58 बजे तक रहेगा इसके बाद शतभिषा  शुरू हो जाएगा। इस प्रकार योग सुकर्मा 08:36 बजे तक रहेगा इसके बाद धृति योग शुरू होकर जाएगा।

अनंत चतुर्दशी के दिन अमृत कल सुबह 03:34 से शुरू होकर दूसरे दिन सुबह 05:21 तक रहेगा इस प्रकार रवि योग सुबह 08:58 से शुरू होकर दूसरे दिन 05:32 तक रहेगा।

पूजा करने का शुभ मुहूर्त 


अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन सुबह से लेकर दोपहर तक करने का विधान है इस दौरान कौन-कौन से मुहूर्त रहेंगे। जानकारी इस प्रकार है। 

चर मुहूर्त सुबह 08:36 बजे से लेकर 10:08 बजे तक, लाभ मुहूर्त 10:08 बजे से लेकर 11:41 बजे तक, अमृत मुहूर्त 11:41 बजे से लेकर 01:31 बजे तक अभिजीत मुहूर्त 11:16 बजे से लेकर 12:05 बजे तक और विजय मुहूर्त 01:44 बजे से लेकर 02:33 बजे तक रहेगा। संध्या के समय गोधूलि मुहूर्त शाम 05:50 बजे से लेकर 06:14 बजे तक रहेगा।

पूजा सामग्री

विग्रह एवं चित्र: भगवान विष्णु एवं श्री गणेश की मूर्ति या तस्वीर।

कलश सामग्री: तांबे/पीतल का कलश, नारियल, आम के पत्ते, जल, गंगाजल, सुपारी और सिक्का।

मुख्य सूत्र: 14 गांठों वाला रेशमी या सूती 'अनंत सूत्र'।

पूजा पत्र-पुष्प: तुलसी दल, शमी के पत्ते, दूर्वा, पीले पुष्प, केले का पत्ता और पान-सुपारी।

शृंगार व तिलक: रोली, कुमकुम, हल्दी, पीला चंदन, अक्षत (अखंडित चावल) और अष्टगंध।

धूप-दीप: देसी घी, रुई की बत्ती, दीपक, धूपबत्ती, कपूर और माचिस।

नैवेद्य व फल: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), मौसम के फल (केला, सेब), खीर, पूरी, मोदक और लड्डू।

अन्य: पीला वस्त्र, चौकी, हवन सामग्री और आचमनी।

पूजा करने की विधि (स्टेप बाय स्टेप)

स्नान एवं संकल्प: प्रातःकाल स्नानादि करके पीले वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर अनंत व्रत एवं श्रीहरि विष्णु की पूजा का संकल्प लें।

चौकी व कलश स्थापना: पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। विष्णु जी व गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पास में जल, आम के पत्ते और नारियल से कलश स्थापित करें।

अनंत सूत्र संस्कार: सूती या रेशमी धागे को हल्दी से रँगकर उसमें 14 गांठें लगाएं। इस अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के सामने स्थापित करें।

गणेश व विष्णु पूजन: सर्वप्रथम गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाएं। फिर भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराकर रोली, चंदन, अक्षत, तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें।

अनंत सूत्र की पूजा: अनंत धागे पर कुमकुम, अक्षत और पुष्प चढ़ाकर 'ॐ अनंताय नमः' मंत्र का जाप करें।

अनंत सूत्र धारण: पूजा के बाद पुरुषों को अपने दाहिने हाथ की कलाई पर तथा महिलाओं को अपने बाएं हाथ की कलाई पर यह धागा बांधना चाहिए।

कथा श्रवण: हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर अनंत चतुर्दशी की पौराणिक व्रत कथा ध्यानपूर्वक सुनें या पढ़ें।

गणेश विसर्जन: यदि गणेश प्रतिमा स्थापित की है, तो उत्तर-पूजा कर विधिवत् 'गणपति बाप्पा मोरया' के साथ जल में विसर्जित करें।

आरती व क्षमा प्रार्थना: विष्णु जी और गणेश जी की आरती गाएं तथा पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगकर प्रसाद वितरण करें।

इस दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं

क्या खाएं:

सत्त्वगुणी आहार: व्रत रखने वाले जातक दूध, दही, पंचामृत और ताजे फलों (केला, सेब) का सेवन करें।

फलाहारी व्यंजन: साबूदाना, मखाने, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खाई जा सकती हैं।

सात्विक भोजन (पारण हेतु): संध्या पूजा और अनंत सूत्र धारण करने के पश्चात सेंधा नमक से बना सात्विक भोजन, खीर या मीठी पूरी का सेवन करें।

क्या ना खाएं:

तामसिक पदार्थ: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अत्यधिक मसालेदार भोजन का पूर्ण त्याग करें।

साधारण नमक: व्रत के दौरान साधारण समुद्री नमक का सेवन न करें।

वर्जित अनाज व सब्जियां: चावल (पूजा से पूर्व), मसूर की दाल, बैंगन, चने का साग और बासी भोजन खाने से बचें।

अनंत चतुर्दशी के पौराणिक कथा 

पांडवा और कौरव के संबंधित एक कथा है पांडवों ने जुए में अपने समस्त राज पाठ हार जाने के बाद 12 वर्ष के वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास काट रहे थे। इस दौरान उन्हें अपार दुख और कष्ट का सामना करना पड़ रहा था। कष्ट निवारण करने का उपाय भगवान श्रीकृष्ण से युधिष्ठिर ने पूछा।

 भगवान कृष्ण ने कहा कि जुआ खेलने के कारण मां लक्ष्मी तुम लोगों से दुष्ट हो गई है। इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए अनंत चतुर्दशी के दिन तुम सभी भाई मिलकर भगवान विष्णु का व्रत करो और 14 गांठ वाले अनंत सूत्र अपने बाहों में बांधों। इससे तुम्हारा सारा कष्ट दूर हो जाएगा और तुम्हें खोया हुआ राज पाठ फिर से मिल जाएगा। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से इस संबंध में एक कथा सुनाई जो नीचे दिया गया है।

ब्राह्मण कन्या सुशीला की कथा

अनंत चतुर्दशी की कथा महाभारत से जुड़ा हुआ है। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताएं कि प्राचीन काल में तपस्वी ब्राह्मण रहता था। उसका नाम सुमंत और पत्नी का नाम दीक्षा थी। दीक्षा को सुशीला नाम की एक पुत्री हुईं। सुशीला के बड़े होते होते दीक्षा की मृत्यु हो गई। सुमंत ने पत्नी दीक्षा की मृत्यु के बाद कर्कशा नाम की स्त्री से विवाह कर लिया। कुछ समय बाद अपनी पुत्री का विवाह ब्राम्हण सुमंत ने अपनी पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से कर दिया। विवाह के बाद सुमंत की पत्नी कर्कशा ने अपने दामाद को पत्थर और ईट विदाई में दी।

  पति पत्नी को चलते-चलते हुए शाम हो गई। दोनों एक नदी के किनारे पहुंच गए। रात्रि विश्राम के लिए दोनों वहीं ठहर गए। ऋषि की पत्नी सुशीला ने देखी कुछ महिलाएं पूजा पाठ कर रही है। सुशीला भी जाकर महिलाओं के साथ मिलकर भगवान अनंत की पूजा-अर्चना की। पूजा के उपरांत 14 गांठ वाला अनंत सूत्र अपना पति को दिया। पति ने उसे अस्वीकार करते हुए अनंत को फेंक दिया।

 इसके बाद सुशीला के पति अत्यंत गरीब हो गया। जब सुशीला ने अनंत सूत्र को फेंकने के बाद भगवान अनंत को रूठने की बात अपने पति को बताई। पति-पत्नी ने 14 वर्षों तक अनंत भगवान की पूजा करने के उपरांत एक बार फिर से धन-धान्य से घर भर गया। भगवान अनंत की कृपा से पति-पत्नी आराम से जीवन व्यतीत करने लगे।

अनंत चतुर्दशी के दिन कब के पारण

अनंत चतुर्दशी का व्रत दिन भर का होता है। बहुत से लोग शाम को सूर्यास्त के बाद अन्न या फल ग्रहण कर लेते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो 24 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं। वैसे लोग सुबह 4:28 के बाद पारण कर सकते हैं। क्योंकि 4:28 के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगा। दिन भर  उपवास रखने वाले लोग शाम के 6:00 बजे सूर्यास्त के बाद फल या अन्न ले सकते हैं।

अन्न ग्रहण करने के पूर्व ऐसे करें संकल्प

पारण करने के पूर्व व्रतधारी स्त्री और पुरुष सबसे पहले स्नान करें। हो सके तो गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। उसके बाद नए वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का पूजा करें। पूजा के उपरांत हाथ जोड़कर पूजा के दौरान हुई गलती के लिए भगवान से क्षमा मांगे। इसके बाद आरती कर घर में स्थित बड़े बुजुर्गों का चरण स्पर्श करें। भोजन करने के पहले गाय के लिए ग्रस जरूर निकालें।

वैज्ञानिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक विवेचना

आध्यात्मिक विवेचना: अनंत चतुर्दशी का पर्व ब्रह्म के 'अनंत' स्वरूप का ध्यान कराता है। 14 गांठें चौदह लोकों की सुरक्षा का प्रतीक हैं। गणेश विसर्जन यह आध्यात्मिक संदेश देता है कि जो माटी से बना है, उसे अंततः प्रकृति में ही लीन होना है।

वैज्ञानिक विवेचना: इस दौरान उपयोग होने वाले तुलसी, हल्दी और शमी पत्र प्राकृतिक एंटी-सेप्टिक हैं। कलाई पर 14 गांठों वाला धागा बाँधने से एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर हल्का दबाव पड़ता है, जो शरीर के ऊर्जा प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।

सामाजिक विवेचना: सामूहिक गणेश विसर्जन और पूजा का आयोजन जाति, वर्ग और संप्रदाय से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, भ्रातृत्व और सामुदायिक सामंजस्य को सुदृढ़ करता है।

आर्थिक विवेचना: यह पर्व स्थानीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा संबल देता है। मूर्तिकारों, फूल-फल विक्रेताओं, पूजा-सामग्री व्यापारियों और लोक कलाकारों के लिए यह समय आजीविका का मुख्य आधार बनता है।

तीन विशेष टोटके

धन वृद्धि और कर्ज़ मुक्ति हेतु:

अनंत चतुर्दशी के दिन 14 गांठों वाले अनंत धागे को हल्दी और कुमकुम से पूजकर भगवान विष्णु के चरणों में रखें। पूजा के बाद इस धागे को एक पीले रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन स्थान पर रख दें। यह रुका हुआ धन वापस लाने में मदद करता है।

गृह क्लेश व नकारात्मकता निवारण:

गणेश विसर्जन के समय उपयोग किए गए जल में 14 शमी के पत्ते और थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं। इस जल को पूरे घर में छिड़कें। यह उपाय वास्तु दोष और परिवार में व्याप्त मानसिक तनाव व क्लेश को समाप्त करता है।

व्यापारिक बाधा दूर करने हेतु:

इस दिन 14 साबुत हल्दी की गांठें, 14 कौड़ियां और 14 पीली सरसों के दाने एक पीले कपड़े में बांधें। 'ॐ अनंताय नमः' का जाप करते हुए इसे अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर लटका दें।

अनसुलझे पहलू

14 गांठों और 14 लोकों का रहस्य: पौराणिक मान्यताओं में 14 गांठें भूः, भुवः, स्वः से लेकर सत्यम् तक के 14 भुवनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। गूढ़ रहस्य यह है कि यह धागा मानव शरीर की 14 प्रमुख नाड़ियों के स्पंदन को नियंत्रित करने वाला यंत्र माना जाता है।

कौंडिन्य मुनि का अहंकार और ऊर्जा चक्र: कथा में महर्षि कौंडिन्य द्वारा अनंत सूत्र को अग्नि में फेंकने पर उनका सर्वस्व नष्ट हो गया था। यह प्रसंग इस अनसुलझे पहलू को रेखांकित करता है कि जब मनुष्य प्राकृतिक और दैवीय ऊर्जा नियमों का अनादर करता है, तो उसका पतन निश्चित होता है।

समुद्र मंथन का गुप्त संबंध: परंपराओं के अनुसार, इसी तिथि को शेषनाग ने मंदराचल पर्वत को थामने के लिए अपनी अनंत शक्तियों को जागृत किया था। यह दिन ब्रह्मांडीय संतुलन के नवीनीकरण का प्रतीक है।

पांच यूनिक प्रश्न और उत्तर

प्रश्न. 1: क्या 14 गांठों वाले अनंत सूत्र को पूरे एक वर्ष तक पहने रखना अनिवार्य है?

उत्तर: सामान्यतः इसे 14 दिनों तक पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन कई साधक इसे अगली अनंत चतुर्दशी (पूरे एक वर्ष) तक धारण करते हैं।

प्रश्न. 2: यदि अनंत सूत्र अचानक टूट जाए तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: सूत्र टूटने पर घबराएं नहीं। इसे किसी पवित्र नदी या जलस्रोत में प्रवाहित कर दें और भगवान विष्णु से क्षमा याचना करते हुए नया सूत्र धारण कर लें।

प्रश्न. 3: गणेश विसर्जन और अनंत पूजा एक ही दिन होने का दार्शनिक कारण क्या है?

उत्तर: गणेश जी 'बुद्धि' के प्रतीक हैं और विष्णु जी 'संसार के रक्षक'। यह संयोग सिखाता है कि बुद्धि के अहंकार का विसर्जन करके ही अनंत परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न. 4: क्या महिलाएं पीरियड्स (रजस्वला) के दौरान यह सूत्र बांध सकती हैं?

उत्तर: नहीं, इस अवधि में पूजा न करें। पूजा समाप्त होने के बाद परिवार का कोई अन्य सदस्य उनके लिए पूजित सूत्र लाकर उनकी बाईं कलाई पर बाँध सकता है।

प्रश्न. 5: यदि कोई व्यक्ति व्रत न रख सके, तो क्या वह केवल सूत्र धारण कर सकता है?

उत्तर: हां, स्वास्थ्य कारणों से व्रत न रख पाने पर निष्ठापूर्वक विष्णु पूजन और कथा श्रवण करके भी अनंत सूत्र धारण किया जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) एवं टोटका संबंधी दिशानिर्देश

यह सामग्री केवल धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं, लोक परंपराओं और शैक्षणिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें दी गई सभी जानकारियां पारंपरिक आस्था और जनश्रुतियों पर आधारित हैं।

टोटके व उपायों के संबंध में:

इस लेख में प्रस्तुत किए गए टोटके, उपाय या धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह से पारंपरिक श्रद्धा और विश्वास पर आधारित हैं। हम इन उपायों के माध्यम से किसी भी प्रकार के 100% सटीक परिणाम, चमत्कार या व्यक्तिगत समस्याओं के पूर्ण समाधान की कोई वैज्ञानिक या कानूनी गारंटी नहीं देते हैं। इन उपायों को प्रयोग में लाना या न लाना पूरी तरह से पाठक का व्यक्तिगत विवेक और स्व-निर्णय है।

चिकित्सीय व वित्तीय परामर्श:

इस लेख में उल्लिखित व्रत, उपवास के नियम, और आहार संबंधी निर्देश किसी भी प्रकार से योग्य चिकित्सक (Doctor) या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को व्रत या खान-पान में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

उत्तरदायित्व की सीमा:

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