करवाचौथ 18 अक्टूबर 2027 को, सर्वार्थ सिद्धि योग में सुहागिन देखें पति का चेहरा f

करवाचौथ 18 अक्टूबर 2027 को, सर्वार्थ सिद्धि योग में सुहागिन देखें पति का चेहरा

लाल साड़ी में महिला करवा चौथ की थाली पकड़कर चलनी से पति को देख रही है

वर्ष 2027 में करवा चौथ 18 अक्टूबर, सोमवार को मनाया

पति पत्नी की अटूट प्रेम की व्रत करवा चौथ 18 अक्टूबर 2027 दिन सोमवार को मनाया जाएगा। सुहागिनी अपने पति के दीर्घायु के लिए करवा चौथ व्रत रखती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सूर्य तुला राशि में चंद्रमा वृष राशि में रहेंगे और नक्षत्र कृतिका के बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा। 

निर्जला व्रत के अंत में चंद्रोदय के बाद छलनी में पति का चेहरा देखकर अन्न ग्रहण करती है। अधिकांश महिलाएं करवा चौथ व्रत अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती है। शास्त्रों में चंद्रमा को आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है। इसलिए करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना करती है। 

सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखे जाने वाले व्रत करवाचौथ को पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश और राजस्थान का प्रमुख पर्व माना जाता है। करवा चौथ व्रत सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। 

यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। करवाचौथ के दिन हर महिला बड़ी ही श्रद्धा भाव से और निर्जला व्रत रखकर शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश के साथ चंद्रमा की भी पूजा करती है। 

कुंवारी कन्याएं भी मनवांछित वर के लिए करवाचौथ की व्रत रखती हैं। करवाचौथ का पवित्र व्रत प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखने का विधान है। इस वर्ष करवाचौथ व्रत 04 नवंबर दिन बुधवार को पड़ रहा है।

करवा चौथ के मौके पर सुहागन महिलाएं भारतीय परिधान पहनी हुई चलनी से चांद को निहारती हुई की मनमोहक तस्वीर

चंद्रोदय रात 07:07 मिनट पर

कार्तिक माह, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाला सुहागिनों का व्रत करवाचौथ 18 अक्टूबर दिन सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन रात 07:07 बजे पर चंद्रोदय होगा। व्रतधारी महिलाएं 07:07 के बाद अर्थात चंद्रोदय के बाद अपने पति का चेहरा छलनी में देखकर भगवान चंद्रदेव को अर्घ्य देगी। इसके बाद पति भोजन का निवाला पत्नी को खिलाएंगे। 

करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं सोलहो सिंगार कर सबसे पहले भगवान भोलेनाथ माता पर्वती कार्तिकेय गणेश और चंद्रमा की पूजा करने के उपरांत पति से निवाला खाने के बाद व्रत को तोड़ती

पांच सुहागिन महिलाएं करवा चौथ पर चलनी से चंद्रमा को देख रही हैं

व्रती क्यों देखती है छलनी से पति का चेहरा

करवा चौथ की रात व्रती महिलाएं छलनी से अपने पति और चांद का चेहरा देखती है। छल से बचने के लिए छलनी से अपने पति का चेहरा देखने का विधान है। इस संबंध में एक पौराणिक कथा है। सात भाइयों के बीच एक करवा नाम की महिला थी। भाइयों की प्यारी बहना की शादी हुई। 

शादी के साल करवा अपनी नइहर में करवा चौथ का व्रत कर रही थी। निर्जला व्रत रखने के कारण करवा भूख से व्याकुल हो गई। अपनी लाडली बहन की व्याकुलता देखकर छोटे भाई ने थोड़ी दूर पर एक पेड़ के आड़ में आग जलाकर सामने छलनी रखकर अपनी बहन को दिखाता है कि देखो चंद्रोदय हो गया। बहन को जलती हुई अग्नि चांद जैसा दिखा। 

बहन ने चांद देखकर अपना व्रत तोड़ दी। भगवान चंद्रमा को बड़ा क्रोध हुआ और उसी वक्त पति को भयंकर रोग हो गया। पति को रोगी देखकर करवा दुखी हो गई। करवा अपनी पति का तन, मन और धन से सेवा करने लगी। पति का रोग के कारण उसका सब कुछ बिक गया। वह निर्धन हो गई। घर की बड़े बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि तुमने भगवान चंद्रमा से छल करके बिना उदय के ही निवाला ग्रहण कर लिया था, इसलिए तुम्हारे पति को भयंकर रोग हो गया है। 

आने वाले वर्ष में विधि विधान से करवाचौथ का व्रत करो। करवा ने आने वाले वर्ष में करवाचौथ के दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान चंद्रमा, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का पूजा अर्चना की। पूजा अर्चना से खुश होकर भगवान चंद्रमा ने उनके पति को फिर से चंगा कर दिया। इसलिए व्रत की हुई महिलाएं छलनी से चांद और अपने पति का चेहरा देखने के बाद ही भोजन ग्रहण करती है। यही परंपरा आज तक चलते आ रहा है।

दो महिलाएं करवा चौथ पर चलनी से कोट पैंट पहने पति को देख रही हैं

 सुहागन महिलाएं देख रही है चांद और पति का चेहरा

 *करवा चौथ व्रत: क्या करें, क्या न करें | क्या खाएं, क्या न खाएं*

*क्या करें:*

1. सूर्योदय से पहले सरगी खाएं। सास द्वारा दी गई सरगी शुभ मानी जाती है।

2. सुबह स्नान करके लाल, पीले या सुहाग के रंग के वस्त्र पहनें। सोलह श्रृंगार करें।

3. दिनभर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की पूजा करें। करवा चौथ व्रत कथा सुनें।

4. शाम को सामूहिक रूप से पूजा करें। करवा, दीपक, चलनी से विधि पूरी करें।

5. चंद्र दर्शन के बाद छलनी से पति और चंद्र को देखें, अर्घ्य दें। पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ें।

6. बड़ों का आशीर्वाद लें और मन शांत रखें।

*क्या न करें:*

1. दिन में सोएं नहीं। इससे व्रत खंडित माना जाता है।

2. किसी का अपमान, गुस्सा या निंदा न करें। झूठ न बोलें।

3. काले, सफेद या नीले कपड़े न पहनें।

4. कैंची, सुई, चाकू का इस्तेमाल न करें।

5. गर्भवती, बीमार महिलाएं बिना डॉक्टर सलाह निर्जला व्रत न करें।

*क्या खाएं:*

सरगी में फल, मेवे, मिठाई, फेणी, दूध, जूस लें। व्रत खोलने के बाद हल्का भोजन जैसे फल, दही, सेंधा नमक वाली खिचड़ी खाएं। खूब पानी पिएं।

*क्या न खाएं:*

व्रत के दौरान अन्न, नमक, तला-भुना न खाएं। सरगी में तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज न लें। व्रत खोलने के बाद तुरंत भारी, मसालेदार या तैलीय भोजन से बचें।

नई चलनी का करें उपयोग

करवा चौथ की रात छलनी से चांद और पति का चेहरा देखने का विधान है। व्रतधारी महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखती है। धर्म शास्त्र के अनुसार नई छलनी से ही इस विधि का पूर्णाहुति करनी चाहिए। 

पुरानी छावनी का उपयोग करने से महिलाओं के जीवन में अथाह दुख, संकट और रोग आदि रोग से ग्रस्त हो जाती हैं। इसलिए इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि छलनी नई होनी चाहिए।

करवा चौथ की पूजा थाली में कलश रोली अक्षत दही रखी हुई महिला

जाने पूजा करने का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ के दिन व्रतधारी महिलाओं को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए। 

करवा चौथ 2027, सोमवार 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि 18 अक्टूबर को शाम 05:51 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को शाम 04:42 बजे समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:59 से 07:14 बजे तक रहेगा और चंद्रोदय रात 07:07 बजे के लगभग संभावित है। 

करवा चौथ पर ग्रुप में खड़ी सुहागिन महिलाएं हाथ में पूजा की थाल लिए हुए

*करवा चौथ पर किन देवताओं की पूजा होती है*

करवा चौथ के दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और चंद्र देव की पूजा की जाती है। 

*1. भगवान गणेश*: व्रत की शुरुआत गणेश जी की पूजा से होती है। इन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। सुहागिनें व्रत निर्विघ्न पूरा हो, इसके लिए गणेश जी से प्रार्थना करती हैं।

*2. माता पार्वती*: करवा माता के रूप में गौरी की पूजा होती है। इन्हें अखंड सौभाग्य की देवी माना जाता है। महिलाएं पति की लंबी उम्र और अटूट रिश्ते के लिए माता पार्वती से आशीर्वाद मांगती हैं।

*3. भगवान शिव*: माता पार्वती के साथ शिव जी की भी पूजा की जाती है। शिव-पार्वती को आदर्श दंपत्ति माना जाता है, इसलिए दांपत्य सुख के लिए इनका पूजन जरूरी है।

*4. चंद्र देव*: व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देकर किया जाता है। चंद्रमा को आयु, सुख और शीतलता का कारक माना जाता है। छलनी से चंद्र और पति का मुख देखकर महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। 

इस तरह करवा चौथ का व्रत गणेश जी, शिव-पार्वती और चंद्र देव की कृपा से सफल माना जाता है।

भगवान शिव माता पार्वती गणेश और कार्तिकेय की तस्वीर करवा चौथ

आइए जाने कैसे करें करवा चौथ की पूजा

व्रतधारी महिलाओं को सूर्योदय से पहले स्‍नान कर के व्रत रखने का संकल्‍प लेना चाहिए। इसके बाद करवाचौथ का निर्जल व्रत शुरु हो जायेगा। माता पार्वती, भोलेनाथ शिव व भगवान गणेश का ध्‍यान पूरे दिन अपने मन में करते रहना चाहिए। 

आठ पूरियों की ठेकुआ और हलुआ बनाएं। अन्य पकवान भी बनाएं। गिली मिट्टी से मां गौरी और गणेश का प्रतिमा बनाएं और मां गौरी की गोद में  गणेश को स्थापित करें। भगवान गणेश को गोद में लिए माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विधि विधान से स्थापित कर उन्‍हें लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। 

फिर उनके सामने जल से भरा कलश रखें। गौरी गणेश के स्‍वरूपों सहित भोलेनाथ, भगवान कार्तिकेय और भगवान चंद्रमा की पूजा करें। इसके बाद करवाचौथ की कथा सुनें। कथा सुनने के बाद आपको अपने घर के सभी वृद्धा लोगों का चरण स्‍पर्श कर लेना चाहिये। रात्रि बेला छननी से चंद्र दर्शन करें। चन्द्रमा को अर्घ्य दें। पति के पैरों को छूकर उनका आर्शिवाद लें। फिर पति देव के हाथों निवाला ग्रहण करें।

राजस्थान में है चौथ माता के मंदिर
देश के विभिन्न भागों में चौथ माता की मंदिर स्थित है परंतु राजस्थान में चौथ माता का मंदिर सबसे प्राचीन और ख्यातिप्राप्त है। राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिला के बरावाड़ा गांव में चौथ माता का मंदिर स्थित है। मंदिर का निर्माण महाराजा भीम सिंह चौहान ने की थी।

*डिस्क्लेमर* 

यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यता और पंचांग गणना पर आधारित है। तिथि, मुहूर्त और चंद्रोदय का समय स्थान-विशेष के अनुसार बदल सकता है। कृपया अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से सटीक समय की पुष्टि अवश्य कर लें।

करवा चौथ सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला रखा जाता है और चंद्र दर्शन व अर्घ्य के बाद ही तोड़ा जाता है। कुंवारी कन्याएं भी मनपसंद जीवनसाथी के लिए यह व्रत रख सकती हैं। 

गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति, बुजुर्ग या किसी भी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त लोग बिना डॉक्टर की सलाह के निर्जला व्रत न रखें। व्रत आपकी आस्था का विषय है, स्वास्थ्य सर्वोपरि है। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, किसी भी धार्मिक या चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।



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