विश्वकर्मा पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथा और वो अनसुलझे रहस्य जो आप नहीं जानते!


विश्वकर्मा पूजा. 17 सितंबर 2026, दिन गुरुवार को शिल्पकार और विश्व के प्रथम इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की जयंती अर्थात जन्मदिन है। हर साल कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा के दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुछ समय के लिए कन्या राशि में इसके बाद सिंह राशि में चले जाएंगे। दिन गुरुवार पड़ने के कारण अमावस्या तिथि है और पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र है।

दिव्य संयोगों का महासंगम: विश्वकर्मा पूजा 2026 पर बरसेगी देव-शिल्पी की विशेष कृपा!

आधुनिक युग में जब हम गगनचुंबी इमारतों, अत्याधुनिक मशीनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बात करते हैं, तो हमारे मन में तकनीक के प्रति सम्मान जाग उठता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ब्रह्मांड के सबसे पहले और परम इंजीनियर कौन हैं? वो हैं 'देव-शिल्पी' भगवान विश्वकर्मा। वर्ष 2026 में विश्वकर्मा पूजा का यह पावन पर्व गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को बेहद खास और दुर्लभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा।

आमतौर पर सनातनी त्योहार चंद्र कैलेंडर के अनुसार बदलते रहते हैं, लेकिन विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर को ही मनाई जाती है। इसका कारण इसका सौर पंचांग और कन्या संक्रांति से जुड़ा होना है। इसी दिन सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर अपनी मित्र राशि कन्या में प्रवेश करते हैं, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

साल 2026 की विश्वकर्मा पूजा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इस दिन अंतरिक्ष में ग्रहों की स्थिति एक साथ चार बड़े शुभ योगों का निर्माण कर रही है—सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आडल योग और विडाल योग। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसे महासंयोग में की गई पूजा-अर्चना और नए व्यापार या मशीनरी की शुरुआत न केवल व्यापार में चार चांद लगाती है, बल्कि दरिद्रता को हमेशा के लिए दूर कर देती है। 

यदि आप भी अपने कार्यक्षेत्र, फैक्ट्री, दुकान या वाहनों की उन्नति चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। इस लेख में हम इस पावन दिन के धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं के साथ-साथ कुछ ऐसे अनसुलझे रहस्यों और चमत्कारी टोटकों की चर्चा करेंगे, जो आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे। चलिए, इस ज्ञानवर्धक यात्रा की शुरुआत करते हैं!

धार्मिक मान्यताओं के तहत निर्माण केे देवता भगवान विश्वकर्मा के जन्मदिन को विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। विश्वकर्मा पूजा कारोबारियों, कामगारों और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के लिए विशेष महत्व रखती है।

भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा  हो रही है। इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। धर्म शास्त्रों में ऐस मान्यता है कि विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से निर्माण कार्य में लगे कामगारों को सालों भर किसी भी प्रकार की घटना और दुर्घटना नहीं घटती है। 

साथ ही कारोबारियों को कारोबार में वृद्धि होती है। धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा करनी चाहिए।  विश्वकर्मा् पूजा के दिन उद्योगों में स्थित मशीनों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विश्वकर्मा पूजा करने से खूब तरक्की होती है।

यह पूजा विशेष तौर पर सभी बुनकर, शिल्पकारों और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों द्वारा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो कामगार है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि होती है। धन-धान्य और सुख-समृद्धि की इच्छा रखने वालों के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना मंगलदायी है।

विश्वकर्मा पूजा से संबंधित अनसुलझे पहलू 

भगवान विश्वकर्मा और उनकी कला से जुड़े कई ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं जो आज के आधुनिक वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं। सबसे बड़ा रहस्य 'द्वारका नगरी' का निर्माण है। समुद्र के भीतर डूबी इस नगरी के अवशेष बताते हैं कि हजारों साल पहले भी ऐसी तकनीक मौजूद थी जो पानी के भीतर पत्थरों को जोड़कर विशाल महल बना सकती थी, जिसे आज हम 'अंडरवाटर इंजीनियरिंग' कहते हैं।

दूसरा रहस्य रावण की 'स्वर्ण लंका' का है। प्राचीन काल में बिना किसी आधुनिक मापन यंत्र या क्रेन के, केवल सोने जैसी भारी धातु से पूरी नगरी का निर्माण और उसकी वास्तुकला (Architecture) कैसे संभव हुई? इसके अलावा, पुरी के जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियां जानबूझकर अधूरी छोड़ी गईं या इसके पीछे कोई गुप्त खगोलीय गणना थी, यह आज भी रहस्य है। 

कुछ विद्वानों का मानना है कि विश्वकर्मा जी ने इन मूर्तियों में एक गुप्त ऊर्जा कोड छुपाया था। ये पहलू दर्शाते हैं कि प्राचीन भारतीय विज्ञान और शिल्प कला केवल पौराणिक कहानियां नहीं थीं, बल्कि एक उन्नत और उच्च स्तरीय तकनीक थी, जिसके रहस्यों को पूरी तरह सुलझाना आज भी बाकी है।

​व्यापार और नौकरी में उन्नति के लिए 3 अचूक टोटके 

  • टोटका 1 (व्यापार वृद्धि के लिए): पूजा के समय एक तांबे का सिक्का और थोड़ी सी साबुत हल्दी भगवान विश्वकर्मा के चरणों में रखें। पूजा के बाद इसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या दुकान के गल्ले में रख दें। धन का प्रवाह तेजी से बढ़ेगा।
  • टोटका 2 (मशीनों की खराबी रोकने के लिए): यदि आपकी फैक्ट्री या दुकान की मशीनें बार-बार खराब होती हैं, तो इस दिन काले तिल और सरसों के तेल का एक दीपक जलाकर मशीनों के पास रखें और 'ओम शिल्पि महाभाग नमः' का 21 बार जाप करें।

  • टोटका 3 (रोजगार और तरक्की के लिए): सफेद सूती धागे को केसर से रंग लें। इसे भगवान विश्वकर्मा को अर्पित करने के बाद अपने दाहिने हाथ की कलाई पर या अपने मुख्य कार्य-औजार पर बांध लें। नौकरी में प्रमोशन के रास्ते खुलेंगे।

भगवान विश्वकर्मा की पौराणिक कथा 

पौराणिक ग्रंथों और हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला वास्तुकार और इंजीनियर माना गया है। वे ब्रह्मा जी के पुत्र 'वास्तु' की पत्नी 'अंगिरसी' की संतान हैं। कथा के अनुसार, जब इस संसार की रचना हो रही थी, तब पूरी सृष्टि को एक व्यवस्थित और सुंदर रूप देने का कार्य ब्रह्मा जी ने भगवान विश्वकर्मा को सौंपा था।

भगवान विश्वकर्मा की कलात्मकता और वास्तुकला की शक्ति अद्वितीय थी। उन्होंने ही देवताओं के राजा इंद्र के लिए अभेद्य 'इंद्रपुरी', भगवान कृष्ण की समुद्र के बीच स्थित अलौकिक 'द्वारका नगरी', महाकाल की 'शिव नगरी काशी' और त्रेतायुग में रावण की भव्य 'स्वर्ण लंका' का निर्माण किया था। लंका के निर्माण के पीछे एक बड़ी रोचक कथा है। महादेव ने माता पार्वती के लिए एक महल बनाने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद विश्वकर्मा जी ने सोने का एक अद्भुत महल तैयार किया। इसकी भव्यता देखकर रावण (जो उस समय परम ज्ञानी ब्राह्मण था) मंत्रमुग्ध हो गया और उसने गृह प्रवेश की पूजा के बदले दक्षिणा में वही महल मांग लिया। शिवजी ने मुस्कुराते हुए उसे वह महल दान कर दिया।

इसके अलावा, देवताओं के पास जितने भी दिव्य और विनाशकारी अस्त्र-शस्त्र थे, वे सब विश्वकर्मा जी की ही देन हैं। भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड और इंद्र का वज्र—इन सभी का निर्माण देव-शिल्पी ने ही किया था। जगन्नाथ पुरी के मंदिर में स्थित भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की काष्ठ (लकड़ी) की अधूरी मूर्तियों के पीछे भी विश्वकर्मा जी की ही कथा है। उन्होंने राजा जनक के सामने शर्त रखी थी कि वे बंद कमरे में मूर्तियां बनाएंगे और कोई दरवाजा नहीं खोलेगा। लेकिन राजा ने उत्सुकतावश दरवाजा खोल दिया, जिससे मूर्तियां अधूरी रह गईं, जिन्हें आज भी उसी रूप में पूजा जाता है। यह कथा हमें सिखाती है कि धीरज और कर्म के प्रति निष्ठा ही सबसे बड़ी पूजा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: विश्वकर्मा पूजा हमेशा 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है?

उत्तर: यह त्योहार सौर कैलेंडर पर आधारित है। इस दिन सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं (कन्या संक्रांति), जो अमूमन हर साल 17 सितंबर को ही होती है।

प्रश्न 2: क्या कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करने वाले भी यह पूजा कर सकते हैं?

उत्तर: जी बिल्कुल! आज के युग में कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल ही मुख्य औजार हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डिजिटल क्रिएटर्स को इस दिन अपने गैजेट्स की पूजा जरूर करनी चाहिए।

प्रश्न 3: विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

उत्तर: 17 सितंबर 2026 को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश सुबह से ही हो जाएगा, इसलिए सुबह का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम है।

प्रश्न 4: इस दिन कौन से चार शुभ योग बन रहे हैं?

उत्तर: साल 2026 में इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आडल योग और विडाल योग का दुर्लभ संगम हो रहा है।

प्रश्न 5: क्या इस दिन कार या बाइक की पूजा करना जरूरी है?

उत्तर: हां, वाहन भी यंत्र का हिस्सा हैं। इस दिन वाहनों की पूजा करने से दुर्घटनाओं से रक्षा होती है और वाहन सुचारू रूप से चलता है। 

पूजा करने का शुभ मुहूर्त

भगवान विश्वकर्मा की पूजा शुभ मुहूर्त में करें। संभव हो तो अभिजीत मुहूर्त या अमृत योग में करें। गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:15 बजे से लेकर 12:04 बजे के बीच एवं विजय मुहूर्त दिन के 01:42 बजे से लेकर 02:31 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ योग मुहूर्त और चर योग मुहूर्त भी है। शुभ योग मुहूर्त सुबह 05:32 से लेकर 07:04 तक और शाम 04:15 से लेकर कर 05:47 तक रहेगा। चर योग मुहूर्त 10:08 बजे से लेकर 11:40 बजे तक रहेगा। इस समय भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना काफी फलदायक और शुभकारी होगा। भ

विश्वकर्मा पूजा में लगने वाले सामग्रियों की सूची

गवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए जरूरी सामानों की सूची दी गई है। अक्षत, मिट्टी का कलशा, नारियल, गुु़ड, गंगाजल, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, गोबर, आम का पत्ता, पान का पत्ता, दही, रोली, लाल सूती कपड़े, सुपारी,रक्षा सूत्र, मिठाई, मौसमी फल आदि की व्यवस्था कर लें।

कल कारखानों में कैसे करें पूजा 

इसके बाद कामगारों, कारखाना चलाने वाले मालिकों को स्नान करके नए वस्त्र पहन के पूजा के आसन पर बैठना चाहिए। मिट्टी या धातु के कलश को अष्टदल की बनी रंगोली पर मंत्र उच्चारण के साथ रखें। इसके बाद स्वयं या पुजारी के माध्यम से विधि विधान से भगवान विश्वकर्मा्मा पूजा अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद हवन केे उपरांत आरती कर भक्तोंं केे बीच महाप्रसाद का वितरण करनी चाहिए। उसी रात ्जागरण करना काफी फलदाई और उन्नति परक होगा।

विश्वकर्मा पूजा के बहुआयामी पहलू 

वैज्ञानिक पहलू: यह त्योहार विशुद्ध रूप से तकनीक, विज्ञान और मानव निर्मित उपकरणों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। यह हमें सिखाता है कि मशीनें केवल निर्जीव वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय ऊर्जा का विस्तार हैं। मशीनों की सर्विसिंग और सफाई का वैज्ञानिक नियम इस दिन धार्मिक रूप से पूरा हो जाता है।

आध्यात्मिक पहलू: अध्यात्म के दृष्टिकोण से, विश्वकर्मा पूजा कर्मयोग का साक्षात उदाहरण है। यह संदेश देता है कि सृजन (Creation) ही ईश्वर का रूप है और जब हम पूरी ईमानदारी से कुछ नया बनाते हैं, तो हम ईश्वरीय चेतना से जुड़ जाते हैं।

सामाजिक पहलू: यह पर्व समाज के श्रमिक वर्ग, शिल्पकारों, इंजीनियरों और उद्योगपतियों को एक सूत्र में बांधता है। इस दिन मालिक और मजदूर मिलकर पूजा करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा मिलता है।

आर्थिक पहलू: भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई (MSME), फैक्ट्रियों और छोटे व्यवसायों का बड़ा योगदान है। इस दिन नए निवेश, नए सौदों और नई मशीनों की शुरुआत से व्यापार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

विश्वकर्मा पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप 

  • स्टेप 1 (स्वच्छता और संकल्प): पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। अपनी दुकान या कारखाने की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़कें।
  • स्टेप 2 (चौकी की स्थापना): एक साफ चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमा भी रखें।
  • स्टेप 3 (औजारों को सजाना): चौकी के पास अपने व्यापार से जुड़े मुख्य औजार, कंप्यूटर या बही-खाते रखें। उन पर रोली और हल्दी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
  • स्टेप 4 (कलश स्थापना और पूजन): एक तांबे के कलश में जल, सुपारी, सिक्का डालकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखकर स्थापित करें। दीप और धूप जलाएं।
  • स्टेप 5 (मंत्र और आरती): भगवान विश्वकर्मा को फूल, फल, मिठाई और बूंदी का भोग लगाएं। इसके बाद ओम आधार शक्तपे नमः और ओम कुमयी नमः मंत्र का जाप करें। अंत में कपूर से आरती करें और सभी मशीनों पर रक्षासूत्र (कलावा) बांधें। 

  • ​विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करें और क्या ना करें 

  • क्या करें:

    • औजारों की सफाई: सुबह जल्दी उठकर अपनी दुकान, फैक्ट्री, कंप्यूटर, गाड़ी या जिन भी औजारों से आप आजीविका कमाते हैं, उनकी साफ-सफाई करें।
    • औजारों का इस्तेमाल: पूजा के दिन अपने मुख्य औजारों या मशीनों का उपयोग करने से बचें। इस दिन उन्हें आराम देने का विधान है।
    • यंत्रों का पूजन: इस दिन सभी मशीनों और हथियारों पर तिलक लगाएं, कलावा बांधें और अक्षत-फूल चढ़ाकर उनकी पूजा करें।
    • कारीगरों का सम्मान: अपने अधीन काम करने वाले मजदूरों, कारीगरों और ड्राइवरों को उपहार या बोनस देकर उनका सम्मान करें।

    *​क्या ना करें:

    • अपमान से बचें: किसी भी लोहे, तांबे या तकनीकी उपकरण को पैर न लगाएं और न ही कबाड़ को इधर-उधर फेंकें।
    1. कलह और लालच: कार्यक्षेत्र में किसी कर्मचारी से विवाद न करें और न ही किसी के साथ धोखाधड़ी का विचार मन में लाएं 

      पूजा के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं 

      *​क्या खाएं:

      1. सात्विक भोजन: विश्वकर्मा पूजा के दिन पूरी तरह से सात्विक और शुद्ध भोजन करना चाहिए। भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग उत्तम माना जाता है।
      2. खीर और बूंदी का प्रसाद: भगवान विश्वकर्मा को बूंदी के लड्डू, फल और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद इस प्रसाद को स्वयं ग्रहण करें और दूसरों में बांटें।
      3. खिचड़ी का भोग: कई क्षेत्रों में इस दिन विशेष रूप से बनी खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है, जो सुपाच्य और सात्विक होती है।

      *​क्या ना करें:

      1. तामसिक भोजन से दूरी: इस दिन भूलकर भी मांस, मछली, अंडा या शराब का सेवन न करें। विशेषकर कार्यस्थल या दुकान पर ऐसा करना भारी नुकसान दे सकता है।
      2. लहसुन और प्याज का त्याग: पूजा के दिन घर और दुकान में बनने वाले भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग बिल्कुल न करें।
      3. बासी भोजन: इस दिन बासी या किसी दूसरे के घर का जूठा भोजन खाने से बचना चाहिए।व्यापार और नौकरी में उन्नति के लिए 

      1. डिस्क्लेमर 

      1. महत्वपूर्ण सूचना: इस ब्लॉग में दी गई विश्वकर्मा पूजा 2026 से संबंधित सभी जानकारियां, तिथियां, शुभ योग, पौराणिक कथाएं और पूजा विधियां पारंपरिक मान्यताओं, हिंदू पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित लोक कथाओं पर आधारित हैं। इस लेख का उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना, उनका ज्ञानवर्धन करना और त्योहार के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करना है।
      2. लेख में बताए गए ज्योतिषीय योग (जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग आदि) और उपाय/टोटके सदियों से चली आ रही मान्यताओं पर आधारित हैं। हम (ब्लॉग और लेखक) इन उपायों के सौ प्रतिशत सटीक होने या किसी भी प्रकार के चमत्कारी परिणाम का कोई दावा या गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी टोटके या ज्योतिषीय उपाय को आजमाने से पहले अपनी व्यक्तिगत कुंडली, ग्रह दशा और विवेक का इस्तेमाल करें या किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
        इसके अतिरिक्त, मशीनों, वाहनों और उपकरणों की सुरक्षा के लिए इस धार्मिक पूजा के साथ-साथ उनके नियमित तकनीकी रखरखाव (Technical Maintenance) और सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है। केवल धार्मिक अनुष्ठान को ही मशीनी सुरक्षा का एकमात्र विकल्प न मानें। यह ब्लॉग किसी भी तरह की अंधविश्वास जनित गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी के उपयोग से होने वाले लाभ या हानि के लिए ब्लॉग या उसका लेखक उत्तरदायी नहीं होगा।

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