"100 वर्षों बाद" मौनी अमावस्या 2027 (शनिवार): कैसे बना शुभ संयोग? जानें पूर्ण पूजा विधि और ज्योतिषीय प्रभाव

मौनी अमावस्या 2027 गंगा घाट पर ध्यानमग्न साधु, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल, दान-पुण्य और विष्णु-लक्ष्मी की दिव्य आशीर्वाद वर्षा का डिजिटल चित्रण
कैप्शन:"मौनी अमावस्या 2027 पर गंगा घाट में ध्यानमग्न साधु, पीपल पूजन, दान-पुण्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का दिव्य संगम – मौन, साधना और अमृत काल की आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित दृश्य"

100 वर्षों बाद कैसे बना मौनी अमावस्या 2027 का दुर्लभ संयोग?

मौनी अमावस्या का शनिवार के दिन पड़ना अपने-आप में विशेष माना जाता है, लेकिन 06 फरवरी 2027 में इसका महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल अमावस्या नहीं, बल्कि कई ज्योतिषीय संयोगों का संगम है। लगभग 100 वर्षों के अंतराल का उल्लेख इसलिए किया जाता है क्योंकि अमावस्या का शनिवार पर आना, साथ ही उसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल का मिलना अत्यंत दुर्लभ संयोजन माना जाता है।

ज्योतिषीय गणना कैसे बनाती है यह संयोग?

अमावस्या तिथि चंद्रमा और सूर्य की युति से बनती है।
शनिवार शनि ग्रह का दिन है, जो कर्म, तप, संयम और न्याय का प्रतीक है।

जब चंद्रमा (मन) और सूर्य (आत्मा) की युति शनि के प्रभाव वाले दिन होती है, तो यह आत्मचिंतन और कर्म शुद्धि का विशेष अवसर बनता है।

यदि उसी समय शुभ नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि जैसे योग बन जाएं, तो यह संयोग अत्यंत फलदायी माना जाता है।
ऐसे बहुस्तरीय योग बार-बार नहीं बनते, क्योंकि तिथि, वार, नक्षत्र और योग का एक साथ सामंजस्य खगोलीय गणना पर निर्भर करता है। पंचांग के अनुसार यह संयोजन लंबे अंतराल के बाद पुनः निर्मित हो रहा है, इसलिए इसे “दुर्लभ” कहा जा रहा है।

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि

शनि का दिन होने से यह अमावस्या विशेष रूप से कर्म शुद्धि, पितृ तर्पण और मौन साधना के लिए प्रभावशाली मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत, गंगा स्नान और दान करने से शनि दोष शांति और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
इसी कारण मौनी अमावस्या 2027 को केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के संगम का विशेष अवसर माना जा रहा है।

मौनी अमावस्या 2027: तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

06 फरवरी 2027, शनिवार के दिन माघ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन पड़ने वाली अमावस्या को 'मौनी अमावस्या' के नाम से जाना जाता है, जो सनातन (हिंदू) धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी गई है। इस वर्ष इस पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। 

मौनी अमावस्या का दिन मौन रहकर तपस्या करने, पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने के लिए समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया ध्यान और जप-तप साधक को मोक्ष की ओर ले जाता है। इस ब्लॉग में रंजीत आपको मौनी अमावस्या के महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत काल की विशेषता, तथा इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

मौनी अमावस्या का महत्व 

मौनी अमावस्या का सनातन (हिंदू) धर्म में आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है। यह पर्व माघ महीने की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। 'मौनी' शब्द 'मौन' से बना है, जिसका अर्थ है चुप रहना। इस दिन मौन व्रत रखने का विशेष विधान है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मौन रहकर मन को संयमित करने से आत्म-चिंतन और साधना में गहराई आती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन महर्षि मनु का जन्म हुआ था, जिनसे संपूर्ण मानव जाति की उत्पत्ति मानी जाती है। पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान का इस दिन विशेष महत्व है। ऐसा विश्वास है कि मौनी अमावस्या पर किया गया स्नान, दान, तर्पण और पिंडदान पितरों को प्रसन्न करता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दिन आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

माघ माह कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन मौनी अमावस्या क्यों मनाया जाता है? 

मौनी अमावस्या माघ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इसके पीछे कई पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। सबसे प्रमुख मान्यता यह है कि इसी दिन ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और संपूर्ण मानव सभ्यता के आदि पुरुष 'महर्षि मनु' का जन्म हुआ था। 'मौनी' शब्द 'मनु' से ही संबंधित माना जाता है, इसलिए यह दिन उनकी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि महर्षि मनु ने इसी दिन कठोर तपस्या और मौन व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें सृष्टि के रहस्यों का ज्ञान हुआ।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस दिन 'मन्वंतर' का आरंभ भी हुआ था। माघ मास की अमावस्या का सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के अनुसार भी विशेष खगोलीय महत्व है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि (मकर राशि) में होते हैं, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। इसी कारण इस दिन मौन रहकर साधना करने और पवित्र नदियों में स्नान करने से मन को असीम शांति और आत्मबल मिलता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया मौन व्रत वाणी की देवी माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय होता है और इससे व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है।

सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल का क्या महत्व है? 


06 फरवरी 2027 दिन शनिवार को मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इस दिन को और भी अधिक शुभ और फलदायी बना देता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग का अर्थ है वह योग जिसमें किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं। यह योग प्रत्येक रविवार को सूर्योदय से प्रारंभ होकर विशिष्ट मुहूर्त तक रहता है। जब यह योग किसी शुभ तिथि जैसे अमावस्या पर बनता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस योग में कोई भी नया कार्य, पूजा-पाठ, या व्यवसायिक कार्य आरंभ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अमृत काल को दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस समय आकाश में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस काल में किया गया दान, स्नान, ध्यान और जप अक्षय फल देने वाला होता है। ऐसा विश्वास है कि इस दौरान किए गए कार्यों में कभी असफलता नहीं मिलती। मौनी अमावस्या पर इन दोनों शुभ योगों में पवित्र नदी में स्नान और पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या करें और क्या नहीं करना चाहिए? 

क्या करें:

*प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यह संभव न हो तो घर में पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करें।
*इस दिन यथासंभव मौन व्रत रखें। यह संभव न हो तो कम से कम बोलें और वाणी को संयमित रखें।
*भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
*पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। गरीबों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करें।
*पीपल के पेड़ की जल से सिंचाई करें और उसके नीचे दीपक जलाएं।

क्या न करें:

*इस दिन क्रोध, झूठ और कटु वचन बोलने से बचें।
*मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज आदि तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
*किसी भी प्रकार का शारीरिक संबंध बनाना वर्जित माना गया है।
*बाल, नाखून आदि न काटें।
*रात्रि में सोने से बचें, जागरण करने का विशेष महत्व है।

मौनी अमावस्या के दिन क्या खाएं और क्या न खाएं 

क्या खाएं:

इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। यदि व्रत नहीं रख सकते तो सात्विक भोजन ग्रहण करें। फलाहार, दूध, दही, साबूदाना खीर, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का भोजन, आलू, शकरकंद आदि का सेवन कर सकते हैं। शाम को केवल फल लेना चाहिए।

क्या न खाएं:

मांस,मछली, अंडा, प्याज, लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल वर्जित है। अन्न (चावल, गेहूं) और दालों का सेवन न करें। शराब आदि नशीले पदार्थों से दूर रहें।

मौनी अमावस्या के दिन पूजा कैसे करें (स्टेप बाय स्टेप) 

*01. स्नान एवं संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। स्नान के पानी में गंगाजल और तिल मिला लें। स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और पूजा करने का संकल्प लें।

*02. पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। एक चौकी या पाटे पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

*03. देवता स्थापना: कलश स्थापना करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को पास में स्थापित करें।

*04. ध्यान एवं आवाहन: भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनका आवाहन करें। यंत्रों का उच्चारण करते हुए उन्हें पुष्प अर्पित करें।

*05. पंचोपचार पूजा: भगवान को गंध (चंदन), पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। तिलक लगाएं और मौली बांधें।

*06. मंत्र जाप: भगवान विष्णु के मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का कम से कम 108 बार जाप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।

*07. पितरों का तर्पण: तिल और जल मिलाकर पितरों के निमित्त तर्पण करें। उनकी तृप्ति के लिए दूर्वा और जल अर्पित करें।

*08. दान-पुण्य: अंत में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, छाता, जूते आदि का दान करें।

*09. पीपल पूजन: पीपल के पेड़ की सात, नौ या ग्यारह बार परिक्रमा करें और उसे जल अर्पित करें। पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

*10. आरती: अंत में भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की आरती करें।

मौनी अमावस्या के दिन कैसा रहेगा पंचांग (शुभ मुहूर्त सहित) 


06 फरवरी 2027, शनिवार के दिन मौनी अमावस्या का पंचांग और शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:

*तिथि: माघ, कृष्ण पक्ष अमावस्या - 05 फरवरी 2027 दिन शुक्रवार को शाम 06:40 बजे प्रारंभ होकर 06 फरवरी 2027 दिन शनिवार को रात 08:45 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 06 फरवरी को ही मौनी अमावस्या मनाई जाएगी।

*वार: शनिवार (शनिवार का दिन पितरों और शनि देव को समर्पित होने से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है)।

*योग: सर्वार्थ सिद्धि योग - यह शुभ योग दिनभर रहेगा, जो सभी कार्यों में सफलता दिलाता है।

*अमृत काल: सुबह 09:41 से 11:30 बजे तक। (यह समय पूजा-पाठ और ध्यान के लिए सर्वोत्तम रहेगा)।

*सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:23 बजे से लेकर रात 09:19 बजे तक रहेगा।

स्नान-दान मुहूर्त: प्रातः काल सूर्योदय से लेकर दोपहर 12:00 बजे तक स्नान-दान का विशेष मुहूर्त रहेगा।

मौनी अमावस्या का शास्त्रीय महत्व 

शास्त्रों में मौनी अमावस्या का अत्यंत उच्च स्थान बताया गया है। पद्म पुराण, भविष्य पुराण और स्कंद पुराण सहित कई धर्मग्रंथों में इस पर्व की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में आने वाली यह अमावस्या मोक्षदायिनी है। इस दिन मौन रहने का विधान केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभदायक माना गया है। मौन रहने से मन की चंचलता समाप्त होती है और ऊर्जा का संरक्षण होता है, जिससे साधना गहरी होती है।

शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और पिंडदान अक्षय फल देने वाला होता है। यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला था, इसलिए यह दिन धरती के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

मौनी अमावस्या के दिन कौन से विशेष उपाय करने चाहिए? 

मौनी अमावस्या के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं:

*01. गंगा स्नान एवं दान: यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान अवश्य करें। स्नान के बाद काले तिल, जौ, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

*02. पीपल की पूजा: प्रतिदिन की तरह इस दिन भी पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है।

*03. मौन व्रत: इस दिन मौन व्रत रखना अत्यंत फलदायी होता है। कम से कम सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन रहने का प्रयास करें।

*04. ग्रह दोष निवारण: शनि और पितृ दोष से पीड़ित जातकों को इस दिन पीपल में जल चढ़ाकर 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।

*05. मंत्र सिद्धि: सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत काल में किसी भी मंत्र का जाप करने से वह मंत्र जल्दी सिद्ध होता है।

मौनी अमावस्या से संबंधित टोटके 


*01. धन प्राप्ति के लिए: मौनी अमावस्या के दिन एक चांदी का शंख घर लाएं। उसे गंगाजल से धोकर घर के मंदिर में स्थापित करें और रोजाना इसकी पूजा करें। ऐसा करने से घर में कभी धन की कमी नहीं होती।

*02. संतान सुख के लिए: इस दिन सफेद वस्त्र धारण करके पीपल के पेड़ में 7 धागे बांधें और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें।

*03. कर्ज से मुक्ति के लिए: सुबह स्नान के बाद किसी मंदिर या पवित्र स्थान पर लाल फूल चढ़ाएं और कर्ज मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।

*04. आरोग्य लाभ के लिए: सूर्योदय से पूर्व गाय के घी का दीपक जलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

मौनी अमावस्या का वैज्ञानिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक विवेचना - 200 शब्द

*वैज्ञानिक दृष्टिकोण: माघ मास में पृथ्वी सूर्य की विशिष्ट स्थिति में होती है, जिससे जल में अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मौन रहने से मानसिक शांति मिलती है और मस्तिष्क की एकाग्रता शक्ति विकसित होती है।

*धार्मिक दृष्टिकोण: धार्मिक मान्यता है कि इस दिन महर्षि मनु का जन्म हुआ था। पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।

*आध्यात्मिक दृष्टिकोण: मौन व्रत आत्म-चिंतन और साधना का मार्ग प्रशस्त करता है। यह दिन मन को संयमित करके अन्तरात्मा को जानने का अवसर देता है। ध्यान और मंत्र जाप से आत्मिक शक्ति का संचार होता है।

*सामाजिक दृष्टिकोण: यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन सभी वर्ग के लोग पवित्र नदियों पर एकत्रित होते हैं। दान-पुण्य की परंपरा समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करती है और सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं।

*आर्थिक दृष्टिकोण: इस पर्व पर दान-दक्षिणा, वस्त्र, अन्न आदि के दान से धन का पुनर्वितरण होता है। तीर्थ स्थलों पर मेले लगने से स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

मौनी अमावस्या से संबंधित पांच प्रश्नोत्तर 

प्रश्न *01: मौनी अमावस्या और सामान्य अमावस्या में क्या अंतर है?

उत्तर: सामान्य अमावस्या हर माह आती है, जबकि मौनी अमावस्या विशेष रूप से माघ मास की अमावस्या को कहा जाता है। इसका विशेष महत्व महर्षि मनु की जयंती से जुड़ा है। अन्य अमावस्या की तुलना में मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का विधान है, जो इसे विशिष्ट बनाता है। शास्त्रों में इसे सभी अमावस्या में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

प्रश्न *02: क्या मौनी अमावस्या पर मौन रहना अनिवार्य है?

उत्तर: मौन रहना अनिवार्य नहीं है, परंतु अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। 'मौनी' शब्द ही मौन से जुड़ा है, इसलिए यदि संभव हो तो कुछ समय या पूरा दिन मौन रहने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि पूरा दिन मौन रहना संभव न हो तो प्रातः काल कुछ घंटे मौन रहकर ध्यान और जप करना चाहिए।

प्रश्न *03: मौनी अमावस्या पर किस देवता की पूजा का विधान है?

उत्तर: मौनी अमावस्या पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा का विधान है। भगवान विष्णु के साथ उनके अवतारों की भी पूजा की जाती है। साथ ही, पितरों का तर्पण और पिंडदान करना भी आवश्यक माना गया है। पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है क्योंकि इसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है।

प्रश्न *04: क्या इस दिन ग्रहण भी लगता है?

उत्तर: अमावस्या का संबंध चंद्रमा से है, लेकिन प्रत्येक अमावस्या को सूर्य ग्रहण नहीं लगता। जब अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं और पृथ्वी की छाया सूर्य पर पड़ती है, तब सूर्य ग्रहण होता है। 6 फरवरी 2027 की मौनी अमावस्या पर कोई ग्रहण नहीं है।

प्रश्न *05: क्या महिलाएं मौनी अमावस्या का व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हां, महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं। हालांकि, पारंपरिक रूप से यह व्रत पुरुषों द्वारा अधिक रखा जाता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से महिलाओं के लिए भी यह व्रत उतना ही फलदायी है। महिलाएं स्नान-दान, पूजा-पाठ और मौन व्रत रख सकती हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए भी यह व्रत रख सकती हैं।

मौनी अमावस्या के अनसुलझे पहलू 

मौनी अमावस्या से जुड़े कुछ अनसुलझे पहलू आज भी विद्वानों और शोधार्थियों के लिए जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं:

महर्षि मनु का रहस्य: महर्षि मनु को सृष्टि का आदि पुरुष माना जाता है, लेकिन उनके वास्तविक अस्तित्व, काल और उनके द्वारा रचित मनुस्मृति के मूल रूप को लेकर आज भी मतभेद हैं। उनका मौन से क्या संबंध था, इस पर स्पष्ट व्याख्या का अभाव है।

मौन की अवधारणा: मौन व्रत को इतना महत्व क्यों दिया गया, इसके पीछे गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य हैं। क्या केवल वाणी पर संयम मौन है या मन के विचारों का मौन भी आवश्यक है, यह आज भी चिंतन का विषय है।

तिथि का रहस्य: कुछ वर्षों में माघ अमावस्या और मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। पंचांगों में भिन्नता के कारण क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग दिन यह पर्व मनाए जाने के उदाहरण मिलते हैं।

वैज्ञानिक आधार: आधुनिक विज्ञान अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं कर पाया है कि इस विशेष दिन नदियों के जल में वास्तव में कोई विशेष ऊर्जा का संचार होता है या नहीं। यह आस्था और अनुभूति का विषय बना हुआ है।

डिस्क्लेमर 

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस ब्लॉग पोस्ट में दी गई सभी जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। इसे सामान्य जानकारी एवं धार्मिक आस्था के प्रसारण के उद्देश्य से लिखा गया है। लेखक एवं इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी विशेष धार्मिक आस्था, संप्रदाय या मान्यता को बढ़ावा देना नहीं है, अपितु सनातन परंपरा की जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।

मौनी अमावस्या से संबंधित तिथियां, मुहूर्त एवं योग सामान्य पंचांग गणना पर आधारित हैं। कृपया कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत करने से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य कर लें, क्योंकि विभिन्न पंचांगों में तिथियों में मामूली अंतर हो सकता है।

बताए गए उपायों एवं टोटकों को अपनाने से पूर्व अपनी समझ और विवेक का प्रयोग करें। ये धार्मिक आस्था पर आधारित हैं, इनके वैज्ञानिक परीक्षण का दावा नहीं किया जाता। किसी भी प्रकार की आर्थिक, शारीरिक या मानसिक समस्या के लिए कृपया योग्य विशेषज्ञों से संपर्क करें।

इस जानकारी के उपयोग से होने वाली किसी भी हानि, क्षति या अप्रिय परिणाम के लिए लेखक एवं प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे। आपका धार्मिक अनुष्ठान आपकी आस्था और विश्वास पर निर्भर करता है।


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