"100 वर्षों के बाद चंद्र ग्रहण" का दुर्लभ संयोग: होलिका दहन 2026, जानें मुहूर्त और राशिफल

 

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कैप्शन: "नवरात्रि सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है बल्कि अंदर की शुद्धि की एक यात्रा है। यह कॉन्सेप्चुअल इमेज (तस्वीर) नौ अंदर के दरवाज़े, चक्र, साइंस, स्पिरिचुअलिटी और सोशल तालमेल को दिखाती है"।

03 मार्च 2026, दिन मंगलवार को 100 वर्षों के बाद होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग। जानिए सटीक मुहूर्त, राशियों पर प्रभाव, सावधानियां, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व विस्तार से।

होली 2026: चंद्र ग्रहण और होलिका दहन का दुर्लभ संयोग, जानिए तिथि, मुहूर्त और राशि प्रभाव

जब अग्नि और आकाश एक साथ संकेत दें, तो समझ लीजिए कि समय साधारण नहीं — असाधारण है। Holika Dahan 2026 केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व नहीं रहेगा, बल्कि यह खगोलीय इतिहास का भी साक्षी बनेगा। इसी पावन संध्या पर Lunar Eclipse 2026 का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब अग्नि की लपटें धरती पर प्रज्वलित होंगी और आकाश में चंद्रमा पृथ्वी की छाया से आच्छादित होगा।

साथ ही एक दुर्लभ खगोलीय और धार्मिक संयोग बनेगा, जिससे लोगों के मन में उत्सुकता और जिज्ञासा दोनों पैदा कर दी है। आखिर यह संयोग कितने साल बाद बना है? क्या ग्रहण के कारण होलिका दहन का मुहूर्त प्रभावित होगा? इस दिन किन राशियों को लाभ होगा और किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए? 

धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से इस घटना का क्या महत्व है? आइए, "रंजीत" आपको इस ब्लॉग के माध्यम से इस विषय से जुड़ी हर एक सटीक और महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से प्रदान करते हैं, ताकि आप इस पर्व को पूरी श्रद्धा और जागरूकता के साथ मना सकें।

धार्मिक दृष्टि से यह समय साधना, मंत्र जाप और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, जबकि ज्योतिषीय रूप से यह कई राशियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। क्या यह संयोग शुभ संकेत देता है या सतर्कता का संदेश? ग्रहण काल में होलिका दहन के नियम क्या होंगे? किन उपायों से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है?

यह लेख आपको तिथि, मुहूर्त, धार्मिक महत्व, राशि प्रभाव और आवश्यक सावधानियों की संपूर्ण, प्रमाणिक और सरल जानकारी देगा — ताकि आप इस दुर्लभ दिव्य संगम को सही समझ के साथ अनुभव कर सकें।

साल 2026 का होली का त्योहार इतिहास में एक विशेष स्थान रखने वाला है। इस वर्ष, फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च, दिन मंगलवार को होलिका दहन है, और इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। यह 

1. होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का संयोग कितने वर्षों के बाद बन रहा है, जानें विस्तार से?

होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का संयोग बहुत दुर्लभ माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस प्रकार का संयोग बनने में लगभग 100 से अधिक वर्षों का समय लग सकता है, लेकिन यह अवधि हमेशा नियत नहीं होती। यह एक खगोलीय घटना है जो विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है। होलिका दहन सदैव फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है, और चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही लगता है . ऐसे में, जब पूर्णिमा की तिथि पर चंद्र ग्रहण पड़ता है, तो यह अद्भुत संयोग बनता है।

साल 2026 में यह संयोग इसलिए भी खास है क्योंकि यह पूर्णिमा कई वर्षों बाद इस तरह आ रही है कि ग्रहण काल और होलिका दहन का मुहूर्त एक-दूसरे को स्पर्श कर रहे हैं, लेकिन दोनों का काल अलग-अलग है। आखिरी बार ऐसा कोई दुर्लभ संयोग 1997 या उसके आसपास देखने को मिला था। इस लिहाज से, 2026 में होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का यह संयोग लगभग तीन दशकों के बाद बन रहा है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है  .

पिछले 200 सालों में प्रमुख चंद्र ग्रहण (1800–2025)

वैज्ञानिक और खगोलीय रिकॉर्ड के अनुसार लाखों चंद्र ग्रहण हुए हैं, लेकिन नीचे वह सूची है जिनके रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या जो विशेष रूप से प्रसिद्ध/दर्शनीय रहे हैं: इंटर नेट श्रोत्र।

19वीं सदी (1800-1900)

वर्ष                  तारीख                  प्रकार

 1824           26 जून                पूर्ण ग्रहण

1855।           15 दिसंबर           आंशिक/पूर्ण

1878।          28 जनवरी              पूर्ण ग्रहण

*(इन ग्रहणों का विवरण NASA और विशिष्ट खगोलीय कैटलॉग में दर्ज है। पूरा डेटा हजारों पन्नों में उपलब्ध है लेकिन प्रमुख तिथियों का यह सारांश है।)eclipse.gsfc.nasa.gov

2. होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर क्या पड़ेगा?

03 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा। चूंकि चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। खासतौर पर कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक शांति बनाए रखने की आवश्यकता है। आइए, अन्य राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक नजर डालते हैं:

· मेष: मानसिक तनाव से बचें। परिवार के साथ समय बिताएं और उनके सहयोग से समस्याओं का समाधान करें। नए कार्य की शुरुआत ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें।

· वृष: करियर में अस्थिरता के आसार हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से वाद-विवाद से बचें। ग्रहण के बाद सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

· मिथुन: आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप कठिन से कठिन काम को करने में सक्षम होंगे। विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। व्यापार में लाभ के योग हैं .

· कर्क: इस राशि के जातकों को यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता है। पुराने रोग परेशान कर सकते हैं, सेहत का ख्याल रखें।

· सिंह: लाभकारी प्रभाव। सिंह राशि के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी। नौकरी और व्यापार में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे .

· कन्या: दांपत्य जीवन में कुछ तनाव आ सकता है। व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखें। ग्रहण के बाद पति-पत्नी के बीच मधुरता बढ़ेगी।

· तुला: संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। बेरोजगारों को नौकरी के अवसर मिल सकते हैं।

· वृश्चिक: घर-परिवार में किसी पुराने विवाद के निपटारे के योग हैं। संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। मानसिक शांति मिलेगी।

· धनु: बेहद लाभकारी प्रभाव। धनु राशि के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से मजबूत रहेगा। नए आय के स्रोत खुलेंगे और वाहन-संपत्ति जैसी प्राप्ति हो सकती है .

· मकर: शुभ प्रभाव। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नया ऑफर मिल सकता है। आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और धन का प्रवाह बढ़ेगा .

· कुंभ: चंद्रमा आपकी राशि में ग्रहण ग्रस्त होगा, इसलिए मानसिक रूप से थोड़ा अस्थिर रह सकते हैं। निर्णय लेने से पहले दस बार सोचें। सेहत का ध्यान रखें।

· मीन: खर्चे बढ़ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है। अटके हुए काम पूरे होंगे, लेकिन धन के लेन-देन में सतर्कता बरतें .

3. चंद्र ग्रहण का समय और दृश्यता क्या होगी?

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 03 मार्च को लगेगा। यह एक खण्डग्रास चंद्र ग्रहण (आंशिक) होगा, जिसमें चंद्रमा का कुछ भाग पृथ्वी की छाया से ढका रहेगा .

· ग्रहण प्रारंभ (स्पर्श काल): 03 मार्च 2026, दोपहर 03:21 बजे .

· ग्रहण मध्य: शाम 05:54 बजे .

· ग्रहण समाप्त (मोक्ष काल): शाम 06:46 बजे .

दृश्यता:

यह ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। चूंकि ग्रहण समाप्ति का समय शाम 6:46 बजे है, इसलिए सूर्यास्त के बाद जब चंद्रमा उदित होगा, तब लोग इसे देख सकेंगे। इस दौरान चंद्रमा थोड़ा धुंधला नजर आएगा . यह ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी देखा जा सकेगा .

4. होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव होगा?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का कोई प्रत्यक्ष नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका कारण है समय का अंतर। चंद्र ग्रहण शाम 06:46 बजे समाप्त हो रहा है, जबकि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 06:46 बजे से प्रारंभ हो रहा है . ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

लेकिन इस बार ग्रहण समाप्त होने के साथ ही मुहूर्त शुरू हो रहा है। इसलिए ग्रहण का प्रभाव त्योहार पर नहीं पड़ेगा और होलिका दहन पूरी तरह से ग्रहण के प्रभाव से मुक्त रहेगा . हालांकि, ग्रहण के कारण सूतक काल लगेगा, जिसका अर्थ है कि सुबह से ही मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके ही होलिका दहन की तैयारी की जाएगी .

5. होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

होलिका दहन की सही तिथि और मुहूर्त को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है, लेकिन पंचांग के अनुसार स्थिति स्पष्ट है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 05:07 बजे तक है . उदया तिथि के आधार पर, होलिका दहन 03 मार्च 2026, मंगलवार को किया जाएगा।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त:

· मुहूर्त प्रारंभ: 03 मार्च, शाम 06:46 बजे .

· मुहूर्त समाप्त: रात 08:50 बजे तक .

इस दौरान भद्रा का साया नहीं है और ग्रहण भी समाप्त हो चुका होगा, जिससे यह पूजा के लिए अत्यंत शुभ समय है। होलिका दहन की पूजा में गेहूं की बालियां, गुड़, नारियल, रोली, मौली और चने चढ़ाने का विधान है। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करनी चाहिए .

6. चंद्र ग्रहण के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 09 घंटे पूर्व से लग जाता है, जो 3 मार्च को सुबह से ही प्रभावी हो जाएगा . इस दौरान निम्न बातों का ध्यान रखें:

1. भोजन न करें: सूतक काल में पका हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस समय वातावरण में हानिकारक किरणें होती हैं, इसलिए भोजन को ढककर रखने या उसमें तुलसी के पत्ते डालने की सलाह दी जाती है .

2. पूजा-पाठ न करें: मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता। हालांकि, मानसिक जप और ध्यान करना शुभ माना गया है। 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जप कर सकते हैं .

3. गर्भवती महिलाएं विशेष ध्यान रखें: गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए और घर के अंदर ही रहना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इससे अजन्मे शिशु पर प्रभाव पड़ता है।

4. ग्रहण समाप्ति पर स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे शरीर से पवित्र स्नान अवश्य करें। इसके बाद ही होलिका दहन की तैयारी करें और भोजन ग्रहण करें .

7. होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का धार्मिक, अध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक महत्व

· धार्मिक महत्व: होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के अहंकार का नाश इस पर्व की मूल कथा है . वहीं, चंद्र ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, राहु नामक राक्षस द्वारा चंद्रमा पर आक्रमण को इसका कारण माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य और मंत्र जाप का विशेष महत्व है .

· अध्यात्मिक महत्व: होलिका की अग्नि केवल लकड़ियां ही नहीं, बल्कि हमारे मन के विकारों—क्रोध, लोभ, अहंकार—को जलाने का प्रतीक है . ग्रहण का समय आत्मचिंतन और साधना के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान वातावरण में ऊर्जा का स्तर बदलता है, जो ध्यान और मंत्र जाप को अधिक प्रभावशाली बनाता है .

· सामाजिक महत्व: होली भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। होलिका दहन के आसपास पूरा गांव या मोहल्ला एकत्रित होता है, आपसी मतभेद भुलाकर एकता का परिचय देता है .

· आर्थिक महत्व: होली के आसपास कृषि क्षेत्र में नई फसल (रबी) आने का समय होता है। होलिका में गेहूं की बालियां अर्पित करना अच्छी फसल के लिए धन्यवाद ज्ञापन है। साथ ही, यह पर्व व्यापार और बाजार को भी गति प्रदान करता है .

· वैज्ञानिक महत्व: विज्ञान की दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है . होलिका दहन के समय जलने वाली लकड़ियां और प्राकृतिक चीजें वातावरण में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करती हैं, जो ऋतु परिवर्तन के समय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यह पर्यावरण शुद्धि का एक वैज्ञानिक तरीका भी है

ब्लॉग से संबंधित पांच महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: क्या होलिका दहन वाले दिन चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा और इसका हमारी पूजा-पद्धति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: हां, चंद्र ग्रहण का सूतक काल पूर्ण रूप से मान्य होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पूर्व लग जाता है। 3 मार्च 2026 को ग्रहण दोपहर 3:21 बजे शुरू हो रहा है, इसलिए सूतक काल सुबह 6:21 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे, देवी-देवताओं की मूर्तियों का स्पर्श वर्जित रहेगा और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाएगा। हालांकि, होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:46 बजे से शुरू हो रहा है, जो ग्रहण समाप्ति के ठीक बाद है। इसलिए सूतक काल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाएगा। ग्रहण समाप्ति पर स्नान करने के बाद ही पूजा-पाठ और होलिका दहन का विधान है, इसलिए शास्त्र सम्मत तरीके से ही यह पर्व मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: क्या इस दुर्लभ संयोग का कोई विशेष खगोलीय महत्व है और यह ग्रहण किस प्रकार का होगा?

उत्तर: 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण खण्डग्रास चंद्र ग्रहण (आंशिक) होगा। खगोलीय दृष्टि से यह एक अद्भुत घटना है, जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक हिस्से को ढक लेगी। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 95% भाग पृथ्वी की छाया से ढका रहेगा, जिससे चंद्रमा लालिमा लिए हुए दिखाई देगा। इसे 'ब्लड मून' भी कहा जाता है। विशेष बात यह है कि यह ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दृश्य होगा, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है। होलिका दहन के दिन यह खगोलीय घटना होना वास्तव में दुर्लभ है, क्योंकि अगली बार ऐसा संयोग 2040 के दशक में ही देखने को मिलेगा।

प्रश्न 3: चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी क्यों बरतनी चाहिए और क्या वैज्ञानिक दृष्टि से इसका कोई औचित्य है?

उत्तर: गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण काल में सावधानी बरतने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण हैं। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु को प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, ग्रहण के समय सूर्य से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें और अवरक्त किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं। इन किरणों का सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु के विकास पर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे ग्रहण काल में घर के अंदर ही रहें, तीखी वस्तुओं (जैसे चाकू, कैंची) का उपयोग न करें और ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना भी शुद्धि का प्रतीक माना गया है।

प्रश्न 4: होलिका दहन के दिन ग्रहण होने से क्या हमें होलिका की पूजन सामग्री में कोई बदलाव करना चाहिए?

उत्तर: इस विशेष संयोग में पूजन सामग्री में किसी विशेष बदलाव की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कुछ अतिरिक्त सावधानियां बरतनी चाहिए। चूंकि ग्रहण काल में पूजा वर्जित है, इसलिए होलिका दहन की सभी तैयारियां ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें। पूजन सामग्री जैसे गेहूं की बालियां, नारियल, गुड़, रोली, मौली, चने और फूल पहले से तैयार रखें, लेकिन उन्हें ग्रहण काल में खुला न रखें। ग्रहण समाप्ति पर स्नान करने के बाद ही पूजन सामग्री को स्पर्श करें। कुछ ज्योतिषाचार्य ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए होलिका में सफेद वस्तुओं का दान करने की सलाह देते हैं। होलिका दहन के बाद ग्रहण दोष की शांति के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देना भी लाभकारी माना गया है।

प्रश्न 5: क्या इस दिन चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन की राख (भभूत) का महत्व कम हो जाता है या अधिक बढ़ जाता है?

उत्तर: ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन होलिका दहन से प्राप्त राख (भभूत) का महत्व सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। ग्रहण के बाद की गई पूजा और अग्नि में विशेष ऊर्जा का संचार माना जाता है। चूंकि यह अग्नि ग्रहण काल समाप्त होने के बाद प्रज्वलित होगी, इसलिए इसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है। इस राख को तिलक लगाने से ग्रहण दोष से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है। कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दुर्लभ संयोग में प्राप्त होलिका की राख में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने की विशेष शक्ति होती है। इसलिए इस राख को संभाल कर रखना चाहिए और पूरे वर्ष इसका उपयोग करना चाहिए।

ब्लॉग के अनसुलझे पहलुओं की जानकारी

होलिका दहन और चंद्र ग्रहण के इस दुर्लभ संयोग से जुड़े कुछ ऐसे पहलू हैं, जिन पर अभी भी विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों में मतभेद है। पहला अनसुलझा पहलू तिथि को लेकर है। कुछ पंचांगों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को मानी जा रही है, जबकि अधिकांश प्रमुख पंचांग 3 मार्च को ही होलिका दहन का संकेत दे रहे हैं। यह अंतर स्थानीय गणनाओं और उदया तिथि की मान्यता के कारण है। दूसरा अनसुलझा पहलू ग्रहण की दृश्यता से जुड़ा है। 

हालांकि ग्रहण शाम 3:21 बजे शुरू हो रहा है, लेकिन भारत में चंद्रोदय शाम 6:00 बजे के आसपास होगा, ऐसे में लोग ग्रहण के प्रारंभिक चरण को नहीं देख पाएंगे। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू राशि प्रभाव को लेकर है। चूंकि यह ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है, लेकिन कुछ ज्योतिषीय गणनाओं में राशि परिवर्तन की संभावना भी व्यक्त की जा रही है, जिससे कुछ राशियों के प्रभाव में मामूली अंतर आ सकता है। साथ ही, ग्रहण के बाद होलिका दहन का सटीक मुहूर्त स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है, जिसके लिए स्थानीय पंडित से परामर्श आवश्यक है।

ब्लॉग से संबंधित डिस्क्लेमर

अस्वीकरण: यह ब्लॉग केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई सभी जानकारी, तिथियां, मुहूर्त और राशिफल विभिन्न प्रामाणिक ज्योतिषीय ग्रंथों, पंचांगों और विद्वानों की मान्यताओं के आधार पर संकलित की गई हैं। 

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इस ब्लॉग में दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान या अप्रिय परिणाम के लिए ब्लॉग लेखक या प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे। ग्रहण और होलिका दहन से संबंधित धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं, और इनका पालन करना पूरी तरह से आपकी अपनी श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है। कृपया सभी धार्मिक अनुष्ठान सुरक्षा और सावधानी के साथ संपन्न करें।


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