क्या है भगवान राम के जन्म का रहस्य: जानें वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विश्लेषण

"भगवान श्रीराम के जन्म के गूढ़ रहस्य को जानें। चैत्र नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र में हुए जन्म की खगोलीय महत्ता, सामाजिक प्रभाव और विद्वानों में चल रही चर्चा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी"

"Scientific depiction of the astronomical positions of the planets at the time of Lord Rama's birth, showing the Sun, Mars, Saturn, Jupiter and Venus in their exalted signs"

<वाल्मीकि रामायण में वर्णित भगवान राम के जन्म समय ग्रहों की खगोलीय स्थिति का कलात्मक व वैज्ञानिक चित्रण>

*भगवान राम के जन्म का आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य"

*सनातन धर्म के सबसे प्रतिष्ठित और पूज्य देवताओं में से एक, भगवान श्रीराम का जन्म सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य है। अयोध्या के सूर्यवंशी राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर जन्मे राम, विष्णु भगवान के सातवें अवतार माने जाते हैं। 

*लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनके जन्म के पीछे का असली रहस्य क्या है? क्यों विष्णु जी को मानव रूप में अवतार लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यह ब्लॉग आपको भगवान राम के जन्म के उस गूढ़ पहलू तक ले जाएगा, जो अक्सर चर्चा से दूर रह जाता है। हम जानेंगे धार्मिक ग्रंथों में वर्णित उस दैवीय योजना को, जिसके तहत रावण जैसे अहंकारी और अधर्मी असुर का विनाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए स्वयं भगवान को धरती पर आना पड़ा। 

*साथ ही, हम राम के जन्म की खगोलीय गणना, उनके जीवनकाल के रोचक तथ्य और उनके जन्म से जुड़े कम चर्चित प्रसंगों पर भी प्रकाश डालेंगे। यह यात्रा है उस पावन रहस्य को समझने की, जिसने भारतीय संस्कृति, आदर्श और मर्यादा की नींव रखी।

'नीचे दिए गए विषयों पर विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर' 

*01.भगवान राम का जन्म का रहस्य क्या है?

*02.श्रीराम जन्म के पीछे की क्या है कथा?

*03.भगवान राम कितने वर्ष तक पृथ्वी पर रहे? 

*04.भगवान राम का जन्म पृथ्वी पर क्यों हुआ था? 

*05.भगवान राम का गुप्त नाम क्या है? 

*06.सीता माता राम जी को क्या कहकर बुलाती थीं? 

*07.पहले कौन आया, कृष्ण या राम? 

*08.भगवान राम के जन्म का रहस्य: एक रोचक और गूढ़ अध्ययन?

*09.भगवान राम के जन्म की वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक विवेचना?

*10.ब्लॉक से संबंधित प्रश्न और उसका उत्तर जानें?

*11.अनसूलझे पहलुओं की जानकारी प्राप्त करें?

"भगवान राम के जन्म का रहस्य क्या है"?

*भगवान राम के जन्म का रहस्य कई स्तरों पर विद्यमान है – पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और खगोलीय। पौराणिक स्तर पर, राम का जन्म विष्णु के अवतार के रूप में एक दैवीय योजना का हिस्सा था। रावण ने अपने घोर तप से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई देवता, दानव या यक्ष नहीं मार सकता। अहंकार में चूर रावण ने मनुष्य को तुच्छ समझते हुए उसे वरदान से बाहर रखा। इसी अवसर का लाभ उठाने और धर्म की रक्षा रक्षा करने के लिए विष्णु ने मनुष्य रूप में जन्म लेने का निर्णय किया। यही कारण है कि राम ने अपने मानवीय जीवन में सभी सीमाओं का पालन किया, फिर भी वे दिव्य शक्तियों के स्वामी थे।

*आध्यात्मिक दृष्टि से, राम का जन्म 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के आदर्श को स्थापित करने के लिए था। उन्होंने जीवन के हर भूमिका – पुत्र, पति, भाई, मित्र और राजा में एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनका जन्म हमें सिखाता है कि दैवीय शक्ति भी मानवीय मर्यादाओं में बंधकर धर्म का पालन कर सकती है।

*ऐतिहासिक और खगोलीय आधार पर, राम के जन्म की तिथि पर विद्वानों में मतभेद हैं, लेकिन अधिकांश प्राचीन गणनाओं में उनका जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मानी जाती हैं, जिसे राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, उस समय पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न था, जो एक आदर्श राजा के गुणों का प्रतीक है। 

*इस प्रकार, राम का जन्म एक सामान्य राजकुमार के जन्म से कहीं अधिक, एक सुनियोजित दैवीय घटना थी, जिसका उद्देश्य धरती से अधर्म का नाश और आदर्श जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना करना था। यह रहस्य हमें बताता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म की रक्षा के लिए दिव्य शक्ति को किसी न किसी रूप में अवतरित होना पड़ता है।

"श्री राम जन्म के पीछे की क्या है कथा"?

*श्री राम के जन्म की कथा वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस में विस्तार से वर्णित है। राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने ऋषि श्रृंगी की सलाह पर पुत्रकामेष्ठि यज्ञ करवाया। यज्ञ की समाप्ति पर अग्निदेव ने दशरथ को एक दिव्य खीर (पायस) प्रदान किया और कहा कि इसे अपनी पत्नियों को खिला दें। राजा दशरथ ने उस खीर को तीनों रानियों – कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांट दिया।

*इस दिव्य प्रसाद के फलस्वरूप, चैत्र शुक्ल नवमी के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में सबसे पहले रानी कौशल्या के घर श्री राम का जन्म हुआ। उनके बाद कैकेयी के यहां भरत और सुमित्रा के यहां लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ। कहा जाता है कि राम अवतार के समय संपूर्ण अयोध्या नगरी आनंद और उल्लास से भर गई, प्रकृति ने अपना शृंगार किया और देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की। यह कथा सिर्फ एक राजकुमार के जन्म की नहीं, बल्कि धर्म के रक्षक के पृथ्वी पर आगमन की पावन गाथा है, जिसने आगे चलकर रावण जैसे अत्याचारी का अंत कर धरती को पाप से मुक्त किया।

"भगवान राम कितने वर्ष तक पृथ्वी पर रहे"?

*भगवान राम के पृथ्वी पर रहने की अवधि के बारे में विभिन्न ग्रंथों और विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, उन्होंने लगभग 11,000 वर्षों तक पृथ्वी पर शासन किया, जिसे 'रामराज्य' के नाम से जाना जाता है। हालांकि, उनके मानव जीवनकाल की गणना करें तो वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास जाते समय राम की आयु 25 वर्ष थी। उन्होंने 14 वर्ष का वनवास पूरा किया और फिर अयोध्या लौटकर राज्याभिषेक हुआ। इस हिसाब से राजा बनने के समय उनकी आयु लगभग 39 वर्ष रही होगी। 

*कुछ मान्यताओं में उनके पृथ्वी पर रहने की कुल अवधि 110 वर्ष बताई जाती है। यह संख्या भी प्रतीकात्मक है, जो दीर्घायु और आदर्श शासन की अवधि को दर्शाती है। अंततः, जब धर्म का पालन करते हुए उन्होंने एक श्राप के कारण लक्ष्मण को परित्याग दिया, तब उन्होंने सरयू नदी में जल समाधि लेकर अपने दिव्य विष्णु रूप में वापस लौट लिया। इस प्रकार, उनका जीवनकाल मात्र वर्षों की संख्या नहीं, बल्कि मर्यादा और आदर्शों की एक जीवंत मिसाल है।

"भगवान राम का जन्म पृथ्वी पर क्यों हुआ था"?

*भगवान राम का जन्म पृथ्वी पर मुख्यतः चार प्रमुख उद्देश्यों से हुआ था:

*01. रावण के अत्याचार का अंत: सबसे प्रमुख कारण था लंकापति रावण का वध करना। रावण ने अपने तप से अद्भुत शक्तियां प्राप्त कर ली थीं, लेकिन वह अहंकारी और अधर्मी हो गया था। उसके अत्याचार से देवता, ऋषि-मुनि और पृथ्वीवासी त्राहि-त्राहि कर रहे थे। चूंकि रावण के वरदान में मनुष्य को छूट थी, इसलिए विष्णु ने मानव रूप में अवतार लेकर उसका विनाश किया।

*02. धर्म की स्थापना: त्रेता युग में धर्म की डगमगाती स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए राम का आगमन हुआ। उन्होंने 'रामराज्य' की स्थापना कर यह प्रमाणित किया कि एक आदर्श समाज और शासन व्यवस्था कैसी होनी चाहिए, जहां न्याय, प्रेम और कर्तव्य परायणता सर्वोपरि हों।

*03. मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श प्रस्तुत करना: राम ने जीवन के हर रिश्ते और कर्तव्य में एक उच्चतम मानदंड (मर्यादा) स्थापित किया। एक आदर्श पुत्र, वफादार पति, स्नेही भाई, न्यायप्रिय राजा और कर्तव्य परायण मनुष्य के रूप में उन्होंने जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह मानवता के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

*04. देवताओं की प्रार्थना का उत्तर: रावण के अत्याचार से पीड़ित देवताओं ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की, जिन्होंने विष्णु से रक्षा की गुहार लगाई। इस प्रकार राम का अवतार देवताओं की करुण पुकार का सीधा उत्तर था, जिसने न सिर्फ राक्षसों का अंत किया, बल्कि ब्रह्मांड में संतुलन भी बहाल किया।

"A comprehensive digital artwork depicting the scientific and mythological analysis of the birth of Lord Shri Ram, combining astronomical calculations, ancient manuscripts and modern technology"

"यह तस्वीर वाल्मीकि रामायण में वर्णित ग्रहों की स्थिति (10 जनवरी, 5114 ईसा पूर्व), प्राचीन पांडुलिपियों के शोध, और रामराज्य के आधुनिक संदर्भों को एक ही फ्रेम में दर्शाती है"

"भगवान राम का गुप्त नाम क्या है"?

*धार्मिक ग्रंथों में भगवान राम के कई नामों का उल्लेख है, जैसे रघुनाथ, राघव, सीतापति आदि। लेकिन एक 'गुप्त नाम' जिसका विशेष रूप से जिक्र मिलता है, वह है "कालान्तक"। इस नाम का अर्थ है 'काल (मृत्यु) का भी अंत करने वाला'। यह नाम उनकी दिव्य शक्ति और मृत्यु पर विजय का प्रतीक है। इसके अलावा, कुछ परंपराओं में उनके गुप्त मंत्रों में प्रयुक्त नामों को भी गुप्त नाम माना जाता है। 

*लेकिन 'कालान्तक' नाम उनके भयानक राक्षसों का विनाश करने वाले और भक्तों को मृत्यु के भय से मुक्त करने वाले स्वरूप को दर्शाता है। यह नाम इस बात का द्योतक है कि राम सिर्फ एक राजा नहीं, बल्कि समस्त बुराइयों और नकारात्मक शक्तियों का अंत करने वाले परम देवता हैं।

"सीता जी राम जी को क्या कहकर बुलाती थीं"?

*वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में सीता जी द्वारा श्री राम को संबोधित करने के कई मधुर और आदर सूचक शब्द मिलते हैं। सीता जी प्रायः राम जी को "आर्यपुत्र" कहकर संबोधित करती थीं। 'आर्य' का अर्थ है 'श्रेष्ठ' या 'सज्जन' और 'पुत्र' का अर्थ यहां 'संतान' नहीं, बल्कि 'सद्गुणों से युक्त व्यक्ति' है। इस प्रकार 'आर्यपुत्र' का अर्थ हुआ 'श्रेष्ठ गुणों वाले महान व्यक्ति'। 

*यह संबोधन उनके प्रति सीता जी के गहरे सम्मान, प्रेम और श्रद्धा को दर्शाता है। इसके अलावा वे उन्हें "प्राणनाथ", "स्वामी", "रघुकुल नायक" आदि नामों से भी पुकारती थीं। 'आर्यपुत्र' शब्द विशेष रूप से उनकी विनम्रता और पति के प्रति आदर्श भावना को प्रकट करता है।

"पहले कौन आया, कृष्ण या राम"?

*सनातन धर्म की मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, भगवान राम का अवतार, भगवान कृष्ण के अवतार से पहले हुआ था। राम विष्णु जी के सातवें अवतार हैं, जबकि कृष्ण आठवें अवतार हैं। राम का अवतार त्रेता युग में हुआ था, जबकि कृष्ण का अवतार द्वापर युग के अंत में हुआ। युग चक्र के अनुसार सतयुग, त्रेता, द्वापर और फिर कलियुग आता है। 

*इस हिसाब से त्रेता युग, द्वापर युग से पहले का युग है। रामायण में वर्णित घटनाएं त्रेता युग की हैं और महाभारत, जिसमें कृष्ण केंद्रीय पात्र हैं, की घटनाएं द्वापर युग के अंत की हैं। इस प्रकार, कालक्रम के अनुसार राम का अवतार कृष्ण से पहले हुआ। हालांकि, दोनों ही विष्णु के अवतार हैं और उनका उद्देश्य अपने-अपने युग में अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करना था।

🔬 "भगवान राम के जन्म की वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक विवेचना"

*भगवान राम के जन्म का रहस्य विभिन्न दृष्टिकोणों से देखने पर ही पूर्णतः समझा जा सकता है।

*01. वैज्ञानिक/खगोलीय दृष्टिकोण

*पौराणिक ग्रंथोंके अनुसार, राम का जन्म एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ खगोलीय संयोग में हुआ था। यह जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ, जिस दिन पुनर्वसु नक्षत्र था और कर्क लग्न का उदय हो रहा था। इस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति और शुक्र ग्रह सभी अपने-अपने उच्च स्थानों पर विराजमान थे। ज्योतिष शास्त्र में इसे एक आदर्श राजा के गुणों वाला योग माना जाता है, जो राम के 'मर्यादा पुरुषोत्तम' और आदर्श शासक बनने का एक प्रकार से 'वैज्ञानिक' आधार प्रस्तुत करता है।

*02. सामाजिक दृष्टिकोण

*सामाजिक संदर्भ में,राम का जन्म एक आदर्श पुरुष एवं शासक के आगमन का प्रतीक है। उनका जीवन समाज के लिए धर्म, कर्तव्य, मर्यादा और संबंधों के मापदंड स्थापित करता है। उन्होंने एक पुत्र, पति, भाई और राजा के रूप में आदर्श प्रस्तुत किया, जिसने भारतीय सामाजिक मूल्यों की नींव को हज़ारों वर्षों तक आकार दिया है। 'रामराज्य' की अवधारणा एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना है जो न्याय, समृद्धि और नैतिकता पर आधारित है।

*03. आर्थिक दृष्टिकोण

*आर्थिक परिप्रेक्ष्य में,राम के जन्म और उनके शासन 'रामराज्य' को एक समृद्ध और न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के रूप में चित्रित किया गया है। मान्यता है कि उनके शासनकाल में प्रजा धन-धान्य से परिपूर्ण थी और कोई भी दरिद्र या अभावग्रस्त नहीं था। राजा दशरथ द्वारा पुत्रों के जन्म पर ब्राह्मणों, याचकों और प्रजा को खुले हाथों से धन-धान्य, गौ एवं रत्न आदि दान में दिए जाने का उल्लेख इसी समृद्धि का संकेत देता है। रामराज्य की अवधारणा एक ऐसी कल्याणकारी अर्थव्यवस्था का आदर्श है जहां धन का न्यायपूर्ण वितरण हो।

*04. आध्यात्मिक दृष्टिकोण

*आध्यात्मिक स्तर पर,राम का जन्म कोई साधारण मानव जन्म नहीं, बल्कि भगवान विष्णु का सातवां अवतार होने के नाते एक दैवीय योजना का हिस्सा था। उनके अवतार का प्रमुख कारण रावण जैसे अत्याचारी असुर का विनाश कर धर्म की पुनर्स्थापना करना था। रावण ने ब्रह्मा जी से वरदान पाया था कि उसका वध कोई देवता, दानव या यक्ष नहीं कर सकता, इसलिए विष्णु ने मनुष्य रूप में अवतार लिया। इस प्रकार, राम का जन्म अधर्म पर धर्म की विजय और लोक कल्याण हेतु एक पूर्वनियोजित दिव्य घटना थी।

❓ "ब्लॉग से संबंधित प्रश्नोत्तर" (FAQ)

*प्रश्न: क्या भगवान राम का जन्म एक सामान्य मानव की तरह हुआ था?

*उत्तर:नहीं, धार्मिक मान्यता के अनुसार उनका जन्म एक दैवीय प्रक्रिया से हुआ था। राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया, जिसके फलस्वरूप अग्निदेव ने उन्हें एक दिव्य खीर (पायस) प्रदान की। इस प्रसाद को तीनों रानियों ने ग्रहण किया, जिसके बाद राम आदि चार पुत्रों का जन्म हुआ। इस प्रकार, यह जन्म एक दिव्य अवतार था।

*प्रश्न: राम के जन्म की तिथि और समय के बारे में सटीक जानकारी क्या है?

*उत्तर:शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, राम का जन्म चैत्र मास (हिंदू कैलेंडर का पहला माह) के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ। इस दिन को 'राम नवमी' के रूप में मनाया जाता है। जन्म का सटीक समय वह था जब पुनर्वसु नक्षत्र था और कर्क लग्न का उदय हो रहा था।

*प्रश्न: क्या राम विष्णु के एकमात्र अवतार थे? उनका स्थान क्या है?

*उत्तर:राम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। विष्णु के दस प्रमुख अवतार (दशावतार) हैं, जिनमें राम का स्थान सातवां है। वे 'मर्यादा पुरुषोत्तम' (आदर्श पुरुष) के रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं और विशेष रूप से वैष्णव परंपरा में उनकी पूजा की जाती है।

*प्रश्न: राम के अवतार लेने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

*उत्तर:प्रमुख उद्देश्य लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करना था। रावण ने तपस्या से ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था जिससे देवता भी उसका वध नहीं कर सकते थे, लेकिन उसने मनुष्यों को तुच्छ समझकर उनसे सुरक्षा का वर नहीं माँगा था। इसलिए धर्म की रक्षा के लिए विष्णु को मनुष्य रूप में अवतार लेना पड़ा।

🔮 "अनसुलझे पहलू एवं विद्वत समाज में चर्चा"

*राम कथा से जुड़े कुछ ऐसे पहलू हैं जो आज भी चर्चा, शोध और विवाद का विषय बने हुए हैं।

*01. उत्तरकांड की प्रामाणिकता: मूल वाल्मीकि रामायण के केवल छह कांड (बाल से लंका कांड तक) ही प्रामाणिक माने जाते हैं। उत्तरकांड (जिसमें सीता के वनवास, लव-कुश की कथा आदि है) को बाद की रचना माना जाता है। कई विद्वानों का मत है कि यह भाग मूल रामायण रचना के बहुत बाद में जोड़ा गया एक प्रक्षिप्त (इंटरपोलेटेड) अंश है। फादर कामिल बुल्के जैसे शोधकर्ताओं ने भी इसी मत की पुष्टि की है।

*02. सीता परित्याग का प्रश्न: उत्तरकांड में वर्णित सीता के परित्याग की घटना पर बहुत विवाद है। कई लोग मानते हैं कि राम के आदर्श चरित्र के अनुरूप वे ऐसा कदापि नहीं कर सकते थे। कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि सीता परित्याग की कथा बौद्ध काल के दौरान समाज की कुछ मजबूरियों के कारण जोड़ी गई हो सकती है। यह विषय अभी भी पौराणिक शोध का एक सक्रिय क्षेत्र है।

*03. ऐतिहासिकता का प्रश्न: राम के ऐतिहासिक व्यक्ति होने के प्रमाणों को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है। जबकि श्रद्धालु उन्हें एक पूर्ण ऐतिहासिक देवपुरुष मानते हैं, आधुनिक ऐतिहासिक विधियों के आधार पर उनके जीवन काल और घटनाओं को पूर्णतः प्रमाणित कर पाना एक चुनौती बना हुआ है।

"डिस्क्लेमर" (अस्वीकरण)

*यह ब्लॉग पोस्ट "भगवान राम का जन्म रहस्य: एक रोचक और गूढ़ अध्ययन" शैक्षिक, सूचनात्मक और चिंतन के उद्देश्य से लिखा गया है। यह लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों (जैसे वाल्मीकि रामायण, श्री रामचरितमानस), पौराणिक स्रोतों, ज्योतिषीय विश्लेषण, विद्वानों के मतों और सामाजिक मान्यताओं पर आधारित एक समग्र विवेचना प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।

*लेख में वर्णित जानकारी, तथ्य, तिथियां एवं व्याख्याएं विभिन्न स्रोतों से संकलित हैं। विभिन्न परंपराओं, संप्रदायों और विद्वानों के बीच इन विषयों पर भिन्न-भिन्न मत एवं मान्यताएं प्रचलित हैं। लेख में किसी एक विशिष्ट मत को प्रमाणिक घोषित करने का कोई इरादा नहीं है।

*यह लेख किसी भी प्रकार की धार्मिक भावनाओं को आहत करने अथवा किसी विश्वास पर प्रश्न खड़े करने के उद्देश्य से नहीं है। इसे विषय के प्रति जिज्ञासा रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए एक संदर्भ सामग्री के रूप में देखा जाना चाहिए।

*पाठकों से अनुरोध है कि किसी विशेष धार्मिक मान्यता या व्यवहार से संबंधित निर्णय लेने से पूर्व, उचित धार्मिक ग्रंथों, विद्वानों या अपनी परंपरा के जानकार व्यक्तियों से परामर्श अवश्य लें। ब्लॉग लेखक अथवा इस वेबसाइट का कोई भी संबद्ध व्यक्ति लेख में दी गई किसी भी जानकारी के उपयोग, गलत व्याख्या या निर्भरता से उत्पन्न किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

*लेख में उल्लिखित ऐतिहासिक तिथियां, खगोलीय गणनाएं एवं विद्वत समाज में चल रही चर्चाएं निरंतर शोध के विषय हैं और भविष्य में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। पाठकगण इन्हें इसी संदर्भ में समझें।






एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने