कब है जया एकादशी 2028: जानें पूजा विधि, पौराणिक कथा, नियम, और शुभ मुहूर्त
byRanjeet Singh-
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"07 फरवरी 2028 को मनाई जाने वाली जया एकादशी की पौराणिक कथा, पूजा विधि, व्रत का महत्व और नियम जानें। जया एकादशी से जुड़े अचूक टोटके व नियम भी पढ़ें"
नीचे दिए गए विषयों के संबंध में विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर
*जया एकादशी 2028
*जया एकादशी पूजा विधि
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*जया एकादशी नियम और महत्व
*जया एकादशी का शुभ मुहूर्त
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*जया एकादशी टोटके
*जया एकादशी व्रत कैसे करें
*एकादशी व्रत फलाहार
*फाल्गुन कृष्ण एकादशी
"जया एकादशी व्रत 2028: पौराणिक कथा, पूजा विधि, नियम और महत्व"
"जया एकादशी कब है"?
*07 फरवरी 2028, सोमवार को जया एकादशी मनाई जाएगी।
*यह एकादशी फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है।
"जया एकादशी की पौराणिक कथा"
*पौराणिक काल में एक बार देवताओं और असुरों के बीच विष्णु भगवान को प्रसन्न करने के लिए युद्ध हुआ। इस युद्ध में असुरों ने देवताओं को काफी कष्ट पहुंचाया। देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने ऋषि संकुची को निर्देश दिया कि वे एकादशी व्रत करें जिससे पापों का नाश हो और मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सके।
*एक बार राजा चैनुला ने अपने पुत्र भद्रक के द्वारा जलाशय की तलाशी ली, जहां एक तपस्वी तपस्या कर रहे थे। राजा की बेटी ने भी तपस्या की और जया नामक निष्ठावान युवती थी। जया ने भगवान विष्णु की भक्ति करते हुए कठोर व्रत रखा। उसके भक्ति मार्ग और सच्चाई ने भगवान विष्णु को अत्यंत प्रसन्न किया। भगवान ने उनके व्रत की महिमा बताते हुए कहा कि इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जीवन के सभी पापों से मुक्त और ईश्वर के निकट हो जाता है।
*कथा के अनुसार, जया एकादशी के व्रत से मनुष्य को लंबी आयु, समृद्धि, सुख-शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से मृत्यु, दुःख व रोगों को हरने वाला माना गया है।व्रत रखने वाले भक्त को भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
"जया एकादशी के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं"?
*जया एकादशी के दिन भोजन में शुद्धता और संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत के दिन शत्रुओं से दूर रहकर, मन और शरीर को शुद्ध रखना जरूरी है। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है, परंतु कुछ व्रत योग्य भोजन स्वीकार्य है।
"क्या खाएं":
*फल (सेब, केला, नाशपाती, अंजीर, खरबूजा)
*दूध और दही
*साबूदाना, उपमा, खिचड़ी (सादा चावल के बिना)
*शक्कर या गुड़ से मीठा पदार्थ
*तिल, मूंगफली, आलू से बने व्यंजन
*नारियल का प्रयोग
*व्रत उपयुक्त हल्का भोजन
"क्या न खाएं":
*अनाज (चावल, गेहूं, बाजरा, जौ)
*मांसाहार और मछली
*प्याज, लहसुन जैसे तिक्त व्रत विघ्न पदार्थ
*तली-भुनी चीजें और तेज मसाले
*शराब, धूम्रपान
*व्यावसायिक भोजन या अस्वच्छ खाना
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*व्रत के दिन ध्यान रखें कि भोजन हल्का और पाचन में सरल हो। दिन में जल का सेवन पर्याप्त करें और शाम को सूर्योदय से पहले व्रत तोड़ें।
"जया एकादशी के दिन क्या करें और क्या ना करें"
"क्या करें":
*सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
*भगवान विष्णु और जया एकादशी की आराधना करें।
*व्रत का संकल्प लें और पूरी निष्ठा से पालन करें।
*तुलसी, धनुष और कमल के फूल से पूजा करें।
*दिनभर ध्यान और साधना करें।
*घर के पूर्वजों और गुरुओं का आशीर्वाद लें।
*दुसरों को दान करें, गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करें।
*मन में द्वेष न रखें, शांत और सौम्य रहें।
*धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें, जैसे विष्णु सहस्रनाम, एकादशी कथा।पवित्र वातावरण बनाएं, शुद्धता पर ध्यान दें।
"क्या ना करें"
*झूठ, गलत बोलने या दूसरों को सताने से बचें।
*दिन में शराब, धूम्रपान या नशे का सेवन न करें।
*फूहड़ बातें या अशुभ कार्य न करें।
*अनावश्यक क्रोध, हिंसा, और प्रतिस्पर्धा से दूर रहें।
*कठोर शारीरिक श्रम करने से बचें।
*ग्रहण, चंद्रमा या कालसर्प दोष जैसे अशुभ कार्य न करें।
*व्रत तोड़ने वाली चीजें (अन्न सेवन) न करें।
"जया एकादशी पूजा विधि स्टेप बाय स्टेप स्नान और शुद्धि":
*एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्वच्छ जल से स्नान करें। खासकर अपने शरीर, मस्तक और हाथ-पैर को अच्छी तरह धोएं। सफेद या साफ वस्त्र पहनें।
"पूजा स्थल की तैयारी:"
*घर के पूजा स्थल को साफ करें। तुलसी का स्वास्थ्यपूर्ण पौधा उसी स्थान पर रखें। पूजा थाल में कलश, जल, फूल, अक्षत, दीपक आदि सामग्री रखें।
"संस्कृत मंत्रों का उच्चारण":
*भगवान विष्णु और जया एकादशी की पूजा के लिए संस्कृत मंत्रों का जाप शुरू करें — जैसे "ॐ नमो नारायणाय"। 108 बार या जितना संभव हो उच्चारण करें।कलश स्थापना और पंचामृत अर्पण:
*पूजा स्थल पर एक मिट्टी या ताम्बे का कलश स्थापित करें, उसमें जल रखें। उसे पुष्प और अक्षत से सजाएं। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और चीनी) से भगवान की पूजा करें।भगवान
"विष्णु की पूजा":
*विष्णु भगवान के चित्र या मूर्ति के सामने दीप जलाएं, धूप करें, और तुलसी से पूजा करें। उन्हें फूल चढ़ाएं और चन्दन लगाएं।जया एकादशी कथा का पाठ:
*पूजा के बाद जया एकादशी की कथा शांति वातावरण में सुनें या पढ़ें। इससे व्रत की महिमा ज्ञात होती है।व्रत संकल्प:
*पूजन के दौरान जया एकादशी का संकल्प लें कि पूरे दिन व्रत पूरे श्रद्धा और नियमों के साथ पालन करेंगे।भोजन पर नियंत्रण:
*दिनभर फल, दूध, पानी का सेवन करें। गरिष्ठ भोजन से बचें।रात्रि जागरण:
*शुभ मुहूर्त में भगवान को दीपक दिखाएं, भजन करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यह शास्त्रीय परंपरा व्रत को सिद्ध करती है।
"व्रत तोड़ना":
*सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद हल्का भोजन करें, किसी प्रकार का पाप या अनिष्ट न करें।
"शुभ मुहूर्त और दिन कैसा रहेगा"
*जया एकादशी 07 फरवरी 2028 को सोमवार को होगी।
"शुभ मुहूर्त इस प्रकार है":
*एकादशी व्रत आरंभ: 06 फरवरी 2028 की संध्या (सूर्यास्त के बाद) से
*एकादशी तिथि समाप्त: 08 फरवरी 2028 की प्रातःकाल (सूर्योदय तक)
*पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातः 06:00 से 10:00 बजे तक
*विशेष शुभ समय (सायंकाल): सूर्यास्त के बाद 5:30 बजे से आधी रात तक यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। सोमवार का दिन भगवान शिव और विष्णु के लिए लाभकारी होता है। इस दिन किया गया व्रत और पूजा भक्त के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और ध्यान की वृद्धि करेगा। करियर में प्रगति और पारिवारिक सद्भाव बढ़ेगा। दिन सामान्य से बेहतर रहेगा, धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम है।
"सामाजिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू"
"सामाजिक पहलू"
*जया एकादशी व्रत सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह व्रत परिवार और समुदाय में एकता, शांति और सद्भाव बढ़ाने में सहायक है। व्रत के दौरान दीक्षा, संयम और भक्ति की भावना से व्यक्ति अपने आचरण में सुधार लाता है जो सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाता है। विशेषकर बच्चों और युवाओं को इस व्रत के माध्यम से संस्कार मिलते हैं। इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों को दान व सहायता देना सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देता है।
"वैज्ञानिक पहलू"
*एकादशी व्रत शरीर और मन के लिए भी फायदेमंद माना गया है। व्रत के दौरान उपवास और हल्का भोजन पाचन तंत्र को आराम देता है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। इसमें मानसिक एकाग्रता की वृद्धि होती है क्योंकि शरीर पर खाने का कमी का असर ध्यान में केंद्रित होने में मदद करता है। इसके अलावा, नियमित व्रत करने से मिताहारी बनने की आदत पड़ती है जो स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। नकारात्मक भोजन से परहेज कर प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और कई रोगों से बचाव होता है।
"आध्यात्मिक पहलू"
*आध्यात्मिक दृष्टि से जया एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा का विशेष पर्व है। यह व्रत न केवल पापों के अस्तित्व को समाप्त करता है बल्कि मानव को मोक्ष मार्ग पर अग्रसर करता है। व्रत और पूजा के दौरान की गई साधना से मन और आत्मा शुद्ध होती है, जिससे मनोवैज्ञानिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। यह दिन ध्यान योग तथा मंत्र जाप के लिए भी उत्तम होता है। साथ ही, इसे शिव और विष्णु जैसे परम तत्वों के निकट जाने का माध्यम माना गया है।
"जया एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर"
*01. जया एकादशी कब होती है?
जया एकादशी हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को होती है। वर्ष 2028 में यह 07 फरवरी, सोमवार को है।
*02. जया एकादशी व्रत क्यों रखते हैं?
इस व्रत से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है, जिससे जीवन के पाप नष्ट होते हैं, मनुष्य लंबी आयु, समृद्धि और मोक्ष प्राप्त करता है।
*03. क्या जया एकादशी व्रत सर्वरात्रि उपवास है?
हां, पूरी श्रद्धा से पूरे दिन और रात्रि तक व्रत रखा जाता है और दूसरे दिन सूर्योदय के बाद भोजन किया जाता है।
*04. व्रत तोड़ने के बाद क्या करना चाहिए?
व्रत तोड़ने के दिन शुद्ध और हल्का भोजन करें। धन्यवाद और भगवान विष्णु की पूजा करें।
*05. क्या स्त्रियां जया एकादशी व्रत रख सकती हैं?
हां, यह व्रत स्त्रियां और पुरुष सभी रख सकते हैं। गर्भवती स्त्रियों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
*06. व्रत के दिन क्या पीना चाहिए?
*शुद्ध जल, दूध, और फल का सेवन करें; शराब या कैफीन का मसालेदार पेय न लें।7. जया एकादशी पूजा में कौन-कौन से पूजन सामग्री चाहिए?
*तुलसी का पौधा, जल, मिट्टी का कलश, पंचामृत, दीपक, अक्षत, फूल, धूप टेकनीक।
*क्या जया एकादशी के दिन दान करना जरूरी है?
*हिन्दू धर्म में दान को पवित्र आयोजन माना गया है, इस दिन दान करने से पुण्य मिलता है।
*क्या जया एकादशी भगवान विष्णु का कोई विशेष स्वरूप होता है?
*हां, इस दिन भगवान विष्णु के श्री हरि रूप की पूजा होती है।
*10. क्या जया एकादशी पर यात्रा करना उचित है?
व्रत के दौरान तेज यात्रा और थकान से बचना चाहिए।
"जया एकादशी के अचूक टोटके"
*जया एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के सामने जल अर्पित करें, इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
*व्रत के दिन सफेद चंदन लेकर माथे पर सिंदूर या टीका लगाएं; यह बुरी नजर से बचाता है।भगवान विष्णु की आराधना के बाद तीन बार ‘संकल्प मंत्र’ का उच्चारण करें, यह मनोवांछित फल देता है।एकादशी सुबह निष्कलंक सफेद वस्त्र पहनने से शत्रुओं से रक्षा होती है।
*व्रत पूर्णता पर जरूर केले या तुलसी की पत्तियां नदी या जलाशय में प्रवाहित करें, इससे पापों की क्षमा होती है।
*घर के उत्तर दिशा में हनुमान या विष्णु की मूर्ति स्थापित करें, जिससे वास्तु दोष दूर होते हैं।
*जया एकादशी पर सफेद चावल या साबूदाना से बनी खीर पकाएं और इसे पुजारी या जरूरतमंदों में दान करें।जया एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है?
*जया एकादशी पर भगवान विष्णु के श्री हरि स्वरूप की विशेष पूजा होती है। श्री हरि, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं, वे भक्तों के पापों का नाश करने वाले हैं। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के शांत, करुणामय और भव्य स्वरूप की पूजा करते हैं। भगवान के इस स्वरूप में वे शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं।व्रतधारी तुलसी के पौधे के समीप भगवान विष्णु की मूर्ति या छवि स्थापित कर श्रीहरि का विधिपूर्वक पूजन करते हैं। इस दिन भगवान की आरती, मंत्रजप जैसे संस्कार संपन्न होते हैं। इसका उद्देश्य भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाना है जिससे जीवन में सुंदरता, सफलता, शांति और समृद्धि आती है।
"जया एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए"?
* जया एकादशी के दिन नींद का भी विशेष महत्व है। इस दिन रात को की गई नींद शुभ होनी चाहिए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी पर सोते समय सिर को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करके सोना उत्तम माना जाता है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और मन को शांति प्रदान करती है।
*इसके अलावा, सफेद रंग के बिस्तर पर सोना शुभ होता है क्योंकि सफेद रंग शांति और पवित्रता का संदेश देता है। व्रत के दिन अत्यधिक थकान से बचते हुए शांति और विश्राम पूर्ण निद्रा लें, जिससे अगले दिन पूजा और व्रत विधिपूर्वक पूरा किया जा सके।ध्यान रखें कि जया एकादशी की रात जागरण व्रत की पूर्णता के लिए महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सोने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण और प्रार्थना करें।
"जया एकादशी डिस्क्लेमर"
*यह ब्लॉग जया एकादशी व्रत के पौराणिक, धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर आधारित जानकारी प्रदान करता है। सभी जानकारी धार्मिक ग्रंथ, पुराण तथा पुरानी चलती प्रथाओं पर आधारित है। यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है और किसी व्यक्ति विशेष पर लागू होने वाले व्यक्तिगत स्वास्थ्य या जीवनशैली के बदलाव के लिए औपचारिक सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
*व्रत रखने, भोजन में परिवर्तन करने या पूजा विधि अपनाने से पहले व्यक्तिगत शारीरिक स्वास्थ्य, आयु और परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि आप गर्भवती हैं, रोगी हैं या किसी प्रकार की चिकित्सकीय देखभाल में हैं, तो किसी योग्य चिकित्सक या धर्म गुरु से परामर्श अवश्य करें।
इस ब्लॉग में वर्णित टोटके, पूजा विधि और नियम सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं से प्रेरित हैं। इनके प्रभाव और कार्यप्रणाली पर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हो सकते हैं। अतः इन्हें अपनाते समय विवेक और समझदारी से निर्णय लें।धार्मिक आस्था के साथ-साथ समीक्षा और तर्क का भी सहारा लें ताकि जया एकादशी व्रत का आध्यात्मिक और सामाजिक लाभ ठीक प्रकार से प्राप्त हो।इस ब्लॉग की सामग्री का उपयोग करते समय किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए लेखकों या सेवा प्रदाताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।