Kamika Ekadashi 2027 कामिका एकादशी की तिथि, पूजा विधि, कथा और अचूक टोटके,

"कामिका एकादशी 2027 कब है? क्या कामिका एकादशी 29 जुलाई को है या 30 जुलाई को है। 29 जुलाई दिन गुरुवार को कामिका एकादशी है जबकि 30 जुलाई दिन शुक्रवार को गौण कामिका एकादशी है। वैष्णवी लोग 29 जलाई को कामिका एकादशी व्रत रखें और 30 जुलाई को पारण करें"

Kamika Ekadashi 2027: Picture of Lord Vishnu

"कामिका एकादशी 2027: ब्रह्मांड के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा से पाएं समस्त पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि"।

"जानिए सावन कृष्ण पक्ष एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, अचूक टोटके और व्रत के नियम। ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति और धन प्राप्ति के उपाय"

*सावन (श्रावण) माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। यह चातुर्मास की पहली एकादशी होती है और इसका व्रत करने से मनुष्य को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। 2027 में यह शुभ एकादशी गुरुवार, 29 जुलाई को मनाई जाएगी।

*इस ब्लॉग में, हम आपको कामिका एकादशी की पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और धन-संपत्ति से जुड़े अचूक उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

📅 "कामिका एकादशी 2027: तिथि, शुभ मुहूर्त और योग"

*साल 2027 में कामिका एकादशी का व्रत 29 जुलाई, गुरुवार को रखा जाएगा।

*विवरण तिथि/समय (जगह के अनुसार परिवर्तन होता है)

*एकादशी तिथि प्रारम्भ 29 जुलाई 2027, सुबह 07:33 बजे

*एकादशी तिथि समाप्त 30 जुलाई 2027, सुबह 05:12 बजे

*कामिका एकादशी व्रत 29 जुलाई 2027, गुरुवार

*पारण (व्रत खोलने का) समय 30 जुलाई 2027 दिन शुक्रवार को सूर्योदय के बाद। सूर्योदय सुबह 05:15 बजे पर होगा।

*द्वादशी तिथि समाप्त 30 जुलाई 2027, देर रात 02:18 बजे पर होगा।

"शुभ योग" (कैसा रहेगा यह दिन)

*कामिका एकादशी के दिन कई शुभ योगों का निर्माण होगा, जो इस व्रत के महत्व को और अधिक बढ़ा देंगे। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत फलदायी रहेगा। इन शुभ योगों में किया गया पूजन और दान-पुण्य आपके जीवन में सुख-समृद्धि और धन-धान्य लेकर आएगा।

*विशेष: पंचांग भेद के कारण स्थानीय समय में थोड़ा अंतर संभव है। व्रत का संकल्प लेने से पहले अपने स्थानीय पंडित से परामर्श अवश्य करें।

📜 "कामिका एकादशी की पौराणिक कथा"

*प्राचीन समय की बात है, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम, महत्व और कथा बताने का अनुरोध किया।

*भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, "हे युधिष्ठिर! तीनों लोकों के हित के लिए एक बार स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को इस एकादशी का माहात्म्य बताया था, वही कथा मैं तुमसे कहता हूँ।"

"ब्रह्माजी ने नारद मुनि से कहा":

"श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। इस व्रत के केवल श्रवण मात्र से ही वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस दिन शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु के श्रीहरि, गदाधर, श्रीधर, कृष्ण, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से उनकी पूजा करने का विधान है। उनके पूजन से जो फल मिलता है, वह गंगा, काशी, नैमिषारण्य, पुष्कर, प्रयागराज और हरिद्वार में स्नान से भी नहीं मिलता।"

"जो फल सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण पर कुरुक्षेत्र, काशी और प्रयागराज में स्नान करने, तथा पृथ्वी, समुद्र, नदी और वन सहित दान करने से भी नहीं मिलता, वह सब केवल कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पूजन से प्राप्त होता है।"

"पौराणिक कथा": ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति

*इस एकादशी के पीछे एक अत्यंत कल्याणकारी पौराणिक कथा प्रचलित है:

*प्राचीन काल में एक गांव में एक वीर और दयालु क्षत्रिय रहता था। एक दिन किसी बात पर उसका एक ब्राह्मण युवक से विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि हाथापाई में उस वीर क्षत्रिय के हाथों अनजाने में उस ब्राह्मण युवक की मृत्यु हो गई।

*ब्राह्मण की मृत्यु से क्षत्रिय को ब्रह्महत्या का महापाप लग गया। वह अत्यंत दुखी और भयभीत होकर प्रायश्चित की तलाश में भटकने लगा।

*जब उस क्षत्रिय ने मृतक ब्राह्मण के क्रिया-कर्म में हिस्सा लेना चाहा, तो गाँव के पंडितों ने उसे रोक दिया। उन्होंने कहा, "तुम पर ब्रह्महत्या का दोष लग गया है। इस महापाप के कारण हम तुम्हारे घर भोजन ग्रहण नहीं कर सकते। तुम्हें पहले इस पाप से मुक्ति पानी होगी।"

*हताश होकर क्षत्रिय ने ब्राह्मणों से पूछा, "इस महापाप से मुक्ति पाने का उपाय क्या है?"

*सभी ब्राह्मणों ने एक मत से कहा, "हे वीर! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी आती है। तुम इस एकादशी का व्रत भक्तिभाव और श्रद्धापूर्वक करो। विधि-विधान से भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन करो और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा के साथ उनका आशीर्वाद प्राप्त करो। इस व्रत के प्रभाव से ही तुम्हें ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिल सकती है।"

*ब्राह्मणों के वचनों को सुनकर क्षत्रिय ने उसी क्षण कामिका एकादशी व्रत का संकल्प लिया। उसने दशमी तिथि को एक ही बार सात्विक भोजन किया और एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी में स्नान किया। उसने पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की प्रतिमा का पूजन किया और रातभर जागृत रहकर भगवान श्रीहरि के विभिन्न नामों का जाप करता रहा।

*व्रत के दौरान एक रात, क्षत्रिय सो रहा था कि तभी उसे स्वप्न में भगवान विष्णु के दर्शन हुए। भगवान ने उससे कहा, "हे भक्त! तुम्हारे शुद्ध भक्तिभाव और विधि-विधान से किए गए कामिका एकादशी व्रत से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। तुम्हें ब्रह्महत्या के महापाप से मुक्ति का वरदान देता हूँ। अब तुम निर्भीक होकर जीवन व्यतीत करो।"

*भगवान के वरदान से क्षत्रिय का मन शांत हो गया। जब वह उठा, तो उसने पाया कि उसके ऊपर लगा ब्रह्महत्या का कलंक पूरी तरह से मिट चुका है। ब्राह्मणों ने भी उसे अब शुद्ध मानकर स्वीकार कर लिया।

"निष्कर्ष":

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा, "हे धर्मराज! जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक इस कामिका एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिल जाती है और वे अंत में विष्णु लोक को प्राप्त होते हैं। पापों से भयभीत रहने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अवश्य करना चाहिए। इस एकादशी से बढ़कर पापों के नाश का अन्य कोई उपाय नहीं है।"

🌺 "पूजा विधि" (स्टेप बाय स्टेप)

*कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के वासुदेव स्वरूप की पूजा की जाती है।

*व्रत संकल्प: दशमी तिथि की रात्रि को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (पीले रंग के उत्तम) धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

*प्रतिमा स्नान (पंचामृत): भगवान विष्णु (या लड्डू गोपाल) की प्रतिमा को पहले गंगाजल से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से। इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद/मधु और गुड़) से स्नान कराएं। अंत में फिर से शुद्ध जल से स्नान कराकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।

*श्रृंगार और पूजन: भगवान को गंध (चंदन), तुलसी पत्ता (अत्यंत आवश्यक), पीले पुष्प (जैसे गेंदा या कनेर), अरवा चावल के अक्षत (साबुत चावल, टूटे नहीं) और इंद्र जौ (यदि उपलब्ध हो) अर्पित करें।

*दीप और धूप: धूप, घी का दीप, इत्र, और चंदन आदि सुगंधित पदार्थों से भगवान विष्णु की आरती उतारें।

*नैवेद्य और भोग: नैवेद्य (भोग) में मक्खन-मिश्री और तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। एकादशी के नियमों के अनुसार केवल फलहार का भोग लगाएं।

*मंत्र जाप और पाठ: व्रती को दिनभर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए।

*रात्रि जागरण: रात्रि में भगवान के समीप बैठकर भजन-कीर्तन और जागरण करें। मंदिर में घी या तेल का दीपक अवश्य जलाएं।

*क्षमा याचना और नमस्कार: अंत में, अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करते हुए भगवान को नमस्कार करें।

*पारण: द्वादशी (अगले दिन) के दिन शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। इसके बाद तुलसी दल युक्त जल पीकर और चावल से बने खाद्य पदार्थों का भोग लगाकर स्वयं व्रत का पारण (समापन) करें।

"क्या करें (Do's) क्या न करें" (Don'ts)

*भगवान विष्णु (वासुदेव स्वरूप) की पूजा करें। चावल और चावल से बनी किसी भी चीज का सेवन न करें। (व्रत के दूसरे दिन पारण में इसका उपयोग करें)।

*पूरे दिन तुलसी दल का उपयोग करें (फलाहार और पीने के पानी में)। एकादशी के दिन नमक का सेवन पूर्णतया वर्जित है।

*दान-पुण्य करें, विशेषकर पीले वस्त्र, फल और अन्न का दान। दशमी तिथि की रात से लेकर द्वादशी के पारण तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।

*रात्रि में जागरण करें और भगवान के समक्ष घी/तेल का दीपक जलाएं। मसूर दाल, बैंगन, गोभी, लहसुन और प्याज का सेवन न करें।

*विष्णु सहस्त्रनाम और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें। अपशब्द बोलने, क्रोध करने, या किसी का अपमान करने से बचें।

*फलाहार में टूटे चावल का उपयोग न करें, न ही पूजा में अक्षत के रूप में। व्रत के दिन सोना (दिन में) या अधिक आलस्य करना वर्जित है।

*अष्ट धातु की प्रतिमा का पूजन करना अत्यंत शुभ फल देता है। व्रत के नियमों का उल्लंघन न करें।

"कामिका एकादशी: क्या खाएं और क्या ना खाएं"

*क्या खाएं (फलाहार) क्या ना खाएं (वर्जित)

*फल (केला, सेब, संतरा आदि) चावल (किसी भी रूप में, टूटे या साबुत)

*दूध और दूध से बने उत्पाद (दही, पनीर, छाछ) नमक (सामान्य नमक, केवल सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं)

*ड्राई फ्रूट्स (मेवे) दालें (मसूर दाल आदि) और अनाज (गेहूं, जौ)

*सेंधा नमक से बने आलू या साबूदाने के व्यंजन मसाले (हल्दी, धनिया, गरम मसाले)

*शकरकंद या कंदमूल लहसुन, प्याज, बैंगन, गोभी

*तुलसी दल युक्त जल पान, तम्बाकू, मदिरा का सेवन

🌟 "कामिका एकादशी के अचूक टोटके" (धन-समृद्धि के लिए)

*पुराणों में कामिका एकादशी के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त के घर में धन-धान्य की वर्षा करते हैं:

*तुलसी की विशेष पूजा: कामिका एकादशी पर तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। तुलसी को सींचने से मनुष्य की सभी यातनाएं नष्ट होती हैं। विष्णु भगवान के पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पण करें।

*अष्ट धातु पूजन: यदि संभव हो, तो कामिका एकादशी के दिन अष्ट धातु से बने भगवान विष्णु की प्रतिमा का पूजन करने से अनन्त फल प्राप्त होता है और धन का आगमन होता है।

*पीले रंग का दान: भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है। इस दिन किसी गरीब या ब्राह्मण को पीले वस्त्र, पीले फल (केला, आम) और पीली मिठाई का दान करें। इससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

*दीपक दान और जागरण: कामिका एकादशी की रात को भगवान के मंदिर में या अपने घर में एक बड़ा दीपक अवश्य जलाएं और रातभर जागरण करें। मान्यता है कि इससे पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं और साधक सूर्य लोक को प्राप्त करता है। यह धन, यश और वैभव में वृद्धि करता है।

*पीपल के पेड़ की पूजा: पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। एकादशी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और शाम को दीपक जलाएं।

*मक्खन-मिश्री का भोग: भगवान श्रीहरि को मक्खन-मिश्री का भोग लगाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

🤔 "कामिका एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर"

"Q1: कामिका एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है?

*A1: कामिका एकादशी में मुख्य रूप से भगवान विष्णु के वासुदेव स्वरूप (शंख, चक्र, गदाधारी) और उनके श्रीहरि, गदाधर, श्रीधर, कृष्ण, माधव आदि नामों की पूजा की जाती है।

*Q2: कामिका एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए?

*A2: एकादशी व्रत के दिन दिन में सोना (विश्राम करना) वर्जित माना जाता है। रात्रि में भी भगवान के समीप जागरण करना उत्तम माना गया है। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, तो भी दिन में सोने से बचें।

*Q3: कामिका एकादशी व्रत करने से क्या फल मिलता है?

*A3: इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत ब्रह्महत्या, भ्रूण हत्या आदि समस्त पापों को नष्ट करने वाला है। इसका माहात्म्य सुनने या पढ़ने मात्र से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

*Q4: क्या एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

*A4: नहीं, एकादशी के दिन चावल व चावल से बनी किसी भी चीज के खाना पूर्णतया वर्जित होता है। चावल का प्रयोग केवल व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण के समय ही करना चाहिए।

⚖️ "डिस्क्लेमर अस्वीकरण" (Disclaimer)

*यह ब्लॉग पोस्ट कामिका एकादशी व्रत के संबंध में धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न धर्मग्रंथों, सनातन धर्म के विद्वान पंडितों और आचार्यों के विचारों पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य हिन्दू धर्म के पर्व-त्योहारों से संबंधित जन-जागरूकता और सूचना प्रदान करना है।

*हम (ब्लॉग लेखक/प्लेटफॉर्म) यहाँ वर्णित घटनाओं, कथाओं, टोटकों या उपायों की सत्यता, प्रभाव शीलता या पूर्ण सटीकता की कोई गारंटी नहीं लेते हैं। ज्योतिषीय और धार्मिक गणनाएं स्थान (लोकेशन) और समय के आधार पर भिन्न हो सकती हैं। जैसे कि शुभ मुहूर्त और पारण का समय आपके शहर/क्षेत्र के स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है।

*पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी व्रत, पूजा विधि या टोटके का पालन करने से पहले अपने परिवार की परंपराओं, स्थानीय पंडित या धार्मिक गुरु से अवश्य परामर्श करें। यह लेख किसी भी प्रकार की धार्मिक बाध्यता, अंधविश्वास या व्यक्तिगत परिणामों के लिए कोई दावा नहीं करता है। 

*किसी भी निर्णय या कार्य के परिणाम के लिए केवल आप ही जिम्मेदार होंगे। हमारा उद्देश्य केवल श्रद्धा और भक्ति के साथ ज्ञान का प्रसार करना है। इस जानकारी को केवल सामान्य धार्मिक और पौराणिक ज्ञान के संदर्भ में ही लिया जाना चाहिए।

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