मकर संक्रांति 2027: 14 नहीं 15 जनवरी को क्यों? अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और महापुण्यकाल का चमत्कारी रहस्य

 

मकर संक्रांति 2027 की दिव्य तस्वीर जिसमें सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश, अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग तथा गंगा तट पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान-दान दर्शाया गया है।
कैप्शन:“मकर संक्रांति 2027: 15 जनवरी को अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में Surya देव का मकर राशि में प्रवेश — स्नान, दान और साधना के लिए अत्यंत शुभ अवसर।”

Makar Sankranti 2027: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का शुभ मुहूर्त, पुण्यकाल, अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और दान का सही समय जानें। क्यों 14 नहीं 15 जनवरी को मनेगा

नीचे दिए गए विषयों पर विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर 

*01. 2027 में मकर संक्रांति 14 की जगह 15 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी?

*02. मकर संक्रांति 2027 पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का समय?

*03. 15 जनवरी 2027 मकर संक्रांति पुण्यकाल महा पुण्यकाल दान मुहूर्त कब है सटीक जानकारी?

*04. शुक्रवार को पड़ने वाली मकर संक्रांति 2027 का धार्मिक महत्व?

*05. मकर संक्रांति 2027 पर किन उपायों से पितृ दोष से मिलती है मुक्ति?

*06.ब्लॉग से संबंधित अनसुलझे पहलुओं की जानकारी?

*07.ब्लॉक से संबंधित प्रश्न और उसका सटीक उत्तर? 

*08.आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और धार्मिक पहलुओं की विवेचना? 

अचुक टोटके विस्तार से पढ़ें?

*09.रोचक डिस्क्लेमर भी पढ़ें?

मकर संक्रांति 2027: 15 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी? जानें अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दिव्य संयोग

साल 2027 की मकर संक्रांति इस बार एक विशेष ज्योतिषीय कारण से चर्चा में है। परंपरागत रूप से जहां लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति मानते आए हैं, वहीं इस बार पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कारण स्पष्ट है—14 जनवरी की रात लगभग 9:00 बजे Surya देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 

चूंकि संक्रांति रात्रि में घटित हो रही है, इसलिए शास्त्रीय नियमों के अनुसार उसका पुण्यकाल अगले दिन अर्थात 15 जनवरी को मान्य होगा। यही कारण है कि स्नान, दान और जप का श्रेष्ठ फल 15 जनवरी को प्राप्त होगा। विशेष बात यह है कि इस दिन अमृत काल, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे दुर्लभ शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जो इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक दृष्टि से असाधारण बना रहे हैं।

कितने वर्षों बाद बन रहा है यह दुर्लभ संयोग? जानें सच्चाई

ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग वर्ष में कई बार बनते हैं। उदाहरण के लिए, सामान्यतः एक वर्ष में सर्वार्थ सिद्धि योग 100 से अधिक बार और अमृत सिद्धि योग लगभग 20–30 बार बन सकता है। इसलिए केवल इन योगों का बनना अपने आप में “सैकड़ों वर्षों में एक बार” जैसी घटना नहीं है।

लेकिन विशेष बात यह है कि मकर संक्रांति जैसे महापर्व के दिन, जब Surya देव धनु से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण आरंभ करते हैं, उसी दिन इन दोनों सिद्धि योगों का एक साथ पड़ना अत्यंत दुर्लभ संयोजन माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए तीन स्तरों का सटीक मेल आवश्यक होता है—

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति)

विशेष वार (यहां शुक्रवार)

विशिष्ट नक्षत्र संयोजन जिससे दोनों सिद्धि योग बनें

यह त्रिस्तरीय खगोलीय संयोग हर वर्ष संभव नहीं होता। पंचांग गणना के अनुसार ऐसा संयोजन सामान्यतः कई दशकों के अंतराल में ही बनता है। पिछली बार इसी प्रकार का संयुक्त प्रभाव लगभग 20–30 वर्ष पूर्व अलग वार-नक्षत्र संयोजन में देखा गया था, जबकि समान स्तर का पूर्ण संयोग उससे भी अधिक लंबे अंतराल पर बनता है।

इसलिए 15 जनवरी 2027 की मकर संक्रांति को “दुर्लभ और अत्यंत फलदायी” कहा जा रहा है — क्योंकि यहां केवल योग नहीं, बल्कि पर्व + उत्तरायण + सिद्धि योगों का संयुक्त प्रभाव उपस्थित है।

सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग मकर संक्रांति 2027 पर कितने वर्षों बाद बन रहे हैं? क्यों माने जाते हैं अत्यंत सिद्धिदायक?

मकर संक्रांति 2027 केवल सूर्य के उत्तरायण होने के कारण ही विशेष नहीं है, बल्कि इस दिन दो अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग—सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग—का संगम भी बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार ऐसे योगों का मकर संक्रांति के दिन एक साथ पड़ना बहुत कम देखने को मिलता है। चूंकि संक्रांति स्वयं सूर्य के राशि परिवर्तन का महापर्व है और इस बार यह शुक्रवार को पड़ रही है, इसलिए ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति विशेष फलदायक बन रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से कहा जाए तो इस प्रकार का संयोग लगभग कई वर्षों बाद बनता है, क्योंकि इसके लिए वार, नक्षत्र और तिथि का विशिष्ट मेल आवश्यक होता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग वह योग है जिसमें किया गया प्रत्येक शुभ कार्य सिद्धि को प्राप्त करता है। नाम के अनुसार—“सर्व + अर्थ + सिद्धि”—अर्थात सभी प्रकार के कार्यों की सफलता। इस योग में नया व्यवसाय आरंभ करना, गृह प्रवेश, धन निवेश, वाहन खरीद, या किसी आध्यात्मिक संकल्प की शुरुआत अत्यंत शुभ मानी जाती है।

वहीं अमृत सिद्धि योग को और भी प्रभावशाली माना जाता है। यह योग उस समय बनता है जब विशेष वार और नक्षत्र का मेल होता है। मान्यता है कि इस योग में किया गया कार्य स्थायी और दीर्घकालिक फल देता है, जैसे अमृत अमरत्व प्रदान करता है। यदि इस दिन Surya देव की उपासना, तिल दान, गंगा स्नान, जप-तप या दान किया जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

वर्ष 2027 का मकर संक्रांति क्यों है खास जानें पूरी गहराई से 

जब मकर संक्रांति जैसा उत्तरायण का आरंभ पर्व इन दोनों सिद्धि योगों के साथ आता है, तब यह केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक सफलता का द्वार बन जाता है। इसलिए 15 जनवरी 2027 का दिन साधना, दान और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम और दुर्लभ अवसर माना जा रहा है।

बात का सटीक ज्योतिषीय आंकड़ा निकालना कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का मकर संक्रांति के साथ संगम “कितने वर्षों बाद” बन रहा है, पंचांग तथा ग्रह-नक्षत्र की विस्तृत गणना पर आधारित होता है, जो मानक कैलेंडर डेटा में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं रहता है।

फिलहाल उपलब्ध स्रोतों के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग बार-बार नहीं बनता और कई ज्योतिष ब्लॉग तथा पंचांग बनाने वाले इस इस विषय पर विशेष और कम ध्यान दिए। इसे एक संयोग मानते थे, लेकिन इसका आख़िरी बार कब और कितने वर्षों पहले हुआ था—यह केवल विस्तृत पंचांग गणना करके ही सटीक बताया जा सकता है। 

ज्योतिषीय परंपरा की क्या है राय

कुछ जगह ऐसा उल्लेख मिलता है कि कई सदियों (300 वर्ष या उससे अधिक) तक इस तरह के योग का संयोजन नहीं बनता, अर्थात अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योगों का मकर संक्रांति जैसे महत्वपूर्ण दिन पर बनना कहीं-कहीं “सैकड़ों वर्षों में एक बार” जैसा दुर्लभ समझा जाता है। लेकिन ये अनुमान ज्योतिषीय परंपरा आधारित कहानियों पर आधारित होते हैं, न कि अति सटीक पंचांग गणना पर। 

पर जब यह योग मकर संक्रांति जैसे विशेष दिन के साथ जुड़ता है (जैसे सूर्य का राशि परिवर्तन + वार + नक्षत्र का शुभ मेल), उसे बहुत दुर्लभ माना जाता है; 

बहुत से ज्योतिषकारों और पंचांग लेखक कहते हैं कि ऐसे योग पहले लगभग सैकड़ों वर्षों से इतने विशिष्ट रूप से नहीं बने थे, इसलिए यह संयोग विशेष और दुर्लभ माना जा रहा है। 

 “ज्योतिषियों के अनुसार इस बार अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का मकर संक्रांति जैसे दिन पर उत्पन्न होना सैकड़ों वर्षों में एक दुर्लभ संयोग है—यह पारंपरिक पंचांग गणनाओं में बहुत कम देखने को मिलता है।” 

मकर संक्रांति 2027: 14 जनवरी की जगह 15 जनवरी को क्यों? जानें तारीख, योग और महत्व

मकर संक्रांति का पवित्र पर्व (सनातन) हिंदू धर्म में अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा (सनातन)हिंदू त्योहार है, जो हमेशा जनवरी माह के 14 तारीख को ही पड़ता है। लेकिन साल 2027 में इस तारीख को लेकर एक खास समीकरण बन रहा है। आम धारणा के विपरीत, 2027 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को नहीं, बल्कि 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी . आइए, इसके पीछे के ज्योतिषीय गणित और साल के पहले बड़े पर्व के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

2027 में 14 जनवरी की जगह 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति क्यों मनाई जाएगी?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है, क्योंकि सालों से हम 14 जनवरी को यह पर्व मनाते आ रहे हैं। इसका सीधा संबंध सूर्य की गति और पुण्यकाल की गणना के नियमों से है।

मकर संक्रांति वह खगोलीय क्षण है जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। वर्ष 2027 में यह प्रवेश 14 जनवरी की रात्रि में हो रहा है। विभिन्न पंचांगों के अनुसार, संक्रांति का सटीक क्षण 14 जनवरी को रात्रि 08:59 बजे के आसपास है .

अब यहां पर पुण्यकाल का सिद्धांत लागू होता है। शास्त्रों में स्नान-दान आदि धार्मिक क्रियाएं संक्रांति के पुण्यकाल में करने का विधान है। पुण्यकाल वह समय होता है जो संक्रांति के क्षण से लेकर अगले सूर्योदय के बाद 16 घंटे (40 घड़ी) तक माना जाता है । चूंकि 2027 में संक्रांति रात्रि में हो रही है, इसलिए उस समय स्नान-दान करना उचित नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में अगले दिन यानी 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर पूरे दिन को पुण्यकाल के रूप में मनाया जाता है । यही कारण है कि अगले 54 वर्षों तक मकर संक्रांति मुख्य रूप से 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी ।

15 जनवरी 2027 को बनने वाला "अमृत काल" क्या है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?

मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल के साथ-साथ कुछ विशिष्ट योग भी बनते हैं, जिनमें अमृत काल सबसे प्रमुख है। अमृत काल वह शुभ समय होता है जिसमें कोई भी कार्य करना अमृत प्राप्ति के समान फलदायी माना जाता है। 15 जनवरी 2027 को प्रातः काल सुबह 9:00 बजे से लेकर 10:30 बजे तक रहेगा। यह दुर्लभ योग बन रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमृत काल में किया गया स्नान, दान, जप-तप सामान्य दिनों की तुलना में सौ गुना अधिक फलदायी होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता और जातक को सुख-समृद्धि प्रदान करता है । "माघे मासे महादेवरू यो दास्यति घृतकम्बलम" की कहावत के अनुसार, इस दिन घी और कम्बल का दान विशेष रूप से मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है ।

सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग मकर संक्रांति पर कितने वर्षों बाद बन रहे हैं?

ज्योतिषीय दृष्टि से 15 जनवरी 2027 का दिन अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत है। इस दिन मकर संक्रांति के पुण्यकाल के साथ-साथ दो महत्वपूर्ण योग 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' एक साथ बन रहे हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग तब बनता है जब सूर्य मकर राशि में हों और यह रविवार को छोड़कर सप्ताह के अन्य किसी भी शुभ दिन में पड़ता है। यह योग अपने नाम के अनुसार ही सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला माना जाता है। वहीं अमृत सिद्धि योग आध्यात्मिक उन्नति और सुखद परिणाम देने वाला होता है। ऐसा संयोग कई वर्षों बाद बन रहा है, जो इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य (जैसे नया व्यवसाय शुरू करना, गृह प्रवेश आदि) को अटल और सफल बनाता है। ऐसे योगों में माना जाता है कि प्रकृति स्वयं आपके कार्यों में सहायता करती है और हर कार्य में सफलता मिलती है।

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक प्रभाव क्या होगा?

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। यही वह दिन है जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, यानी दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ना शुरू करते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि (यम लोक) कहा गया है । इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जो प्रकाश और सकारात्मकता के बढ़ने का प्रतीक है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, जब सूर्य मकर राशि (जिसके स्वामी शनि हैं) में प्रवेश करते हैं, तो सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। सूर्य आत्मा, प्रतिष्ठा और नेतृत्व के कारक हैं। उनके इस गोचर से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर होता है। विशेष रूप से मेष, सिंह, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय काफी हद तक लाभकारी सिद्ध हो सकता है ।

मकर संक्रांति 2027 का पुण्यकाल, महा और पुण्यकाल और दान का श्रेष्ठ समय क्या रहेगा?

स्नान-दान का सही समय जानना बेहद जरूरी है, ताकि इस पर्व का पूर्ण लाभ मिल सके। 2027 में यह समय इस प्रकार रहेगा:

*संक्रांति क्षण: 14 जनवरी 2027, रात्रि 08:59 बजे 

*पुण्यकाल: 15 जनवरी 2027, प्रातः 07:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक (लगभग 5 घंटे) अभिजीत मुहूर्त 11:33 बजे से लेकर 12:16 बजे तक रहेगा।

*महा पुण्यकाल: 15 जनवरी 2027, प्रातः 07:15 बजे से 09:15 बजे तक (लगभग 2 घंटे) इस दौरान चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत मुहूर्त का योग रहेगा।

शास्त्रों के अनुसार, महा पुण्यकाल स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम समय होता है। इसलिए 15 जनवरी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर इसी अवधि में दान-पुण्य करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन साधारण नदी भी गंगा के समान पवित्र हो जाती है ।

क्या शुक्रवार को पड़ने वाली मकर संक्रांति का विशेष महत्व है?

2027 में मकर संक्रांति शुक्रवार के दिन पड़ रही है, जो इस पर्व के महत्व को और बढ़ा देता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित है, जो धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं। जब सूर्य (प्रतिष्ठा और शक्ति के कारक) मकर राशि में प्रवेश करते हैं और वह दिन लक्ष्मी का हो, तो यह संयोग भौतिक सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ऐसे में भक्तों को चाहिए कि वे सूर्य देव के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी विधिवत पूजा करें। तिल और गुड़ से बने पदार्थों के साथ-साथ सफेद वस्त्र, चावल और मखाना जैसी वस्तुओं का दान करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, खासकर तुला और वृषभ राशि वालों के लिए जो लक्ष्मी के विशेष स्थान हैं ।

मकर संक्रांति 2027 पर किन उपायों से जीवन में सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है?

मकर संक्रांति का दिन उपायों के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है। कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपायों से आप जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं और पितृ दोष से भी मुक्ति पा सकते हैं:

*तिल का दान (पितृ दोष निवारण): मकर संक्रांति पर तिल (सफेद या काले) का दान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा स्नान के बाद काले तिल से तर्पण करना और गरीबों को तिल के लड्डू दान करना पितृ दोष को कम करता है ।

*गाय को चारा खिलाएं: इस दिन गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाने से ग्रह दोष कम होते हैं और घर में सुख-शांति आती है।

*खिचड़ी दान: उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को खिलाना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। खासकर कन्या राशि वालों के लिए यह उपाय विशेष फलदायी है ।

*राशि के अनुसार दान: अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं का दान करना भी श्रेष्ठ होता है। जैसे मेष राशि वालों के लिए लाल मसूर दाल, सिंह राशि वालों के लिए गुड़-चिक्की, और मकर राशि वालों के लिए कंबल दान विशेष लाभकारी है ।

निष्कर्ष:

मकर संक्रांति2027 का यह पर्व दुर्लभ योगों, विशेष पुण्यकाल और शुक्रवार के संयोग के कारण ऐतिहासिक होने वाला है। 15 जनवरी को स्नान-दान और जप का पूर्ण लाभ उठाने के लिए सही समय पर धार्मिक क्रियाकलाप करना न भूलें।

ब्लॉग से संबंधित वैज्ञानिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और आर्थिक विवेचन 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: मकर संक्रांति सूर्य के मकर रेखा पर भ्रमण का खगोलीय क्षण है, जो ऋतु परिवर्तन का सूचक है। उत्तरायण से दिन बड़े होने लगते हैं, जिससे ऊर्जा संतुलन बनता है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य: यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जहां सभी वर्ग एक साथ तिल-गुड़ बांटकर मिठास घोलते हैं। खिचड़ी का सामूहिक भोज जातिगत भेदभाव मिटाता है। आध्यात्मिक धरातल: सूर्य का उत्तरायण होना आत्मा के परमात्मा की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है। यह साधना और मोक्ष का काल माना जाता है। धार्मिक महत्व: पौराणिक कथाओं के अनुसार भीष्म पितामह ने इसी दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर त्यागा था। आर्थिक आयाम: नई फसल आने से किसानों की आय बढ़ती है, तिल-गुड़, खिचड़ी, कंबल जैसे उत्पादों की बिक्री से बाजार गतिशील होता है और गरीबों में धन का पुनर्वितरण होता है।

ब्लॉग से संबंधित अनसुलझे पहलुओं की जानकारी

मकर संक्रांति से जुड़े कुछ पहलू आज भी चर्चा और शोध के विषय हैं:

*01. पुण्यकाल बनाम सूर्य दर्शन: यदि संक्रांति रात में है, तो अगले दिन स्नान का फल मिलता है, लेकिन सूर्य को अर्घ्य देने का सही समय क्या है? क्या सूर्योदय से पहले का स्नान प्रभावी है?

*02. तिथि क्रम: क्या 2027 में संक्रांति का पुण्यकाल केवल एक दिन है या 14 जनवरी रात्रि में भी कुछ विशेष क्रियाएं फलदायी हैं?

*03. वैज्ञानिक आधार: क्या उत्तरायण का वैज्ञानिक महत्व केवल ऋतु परिवर्तन तक सीमित है या इसका मानव मस्तिष्क पर भी कोई प्रभाव पड़ता है?

*04. सर्वार्थ सिद्धि योग: क्या यह योग केवल ज्योतिषीय संयोग है या इसका भौतिक विज्ञान से कोई संबंध स्थापित किया जा सकता है?

मकर-संक्रांति पर अजमाने वाले टोटके

मकर संक्रांति को केवल पर्व नहीं, बल्कि सूर्य के उत्तरायण होने का आध्यात्मिक संक्रमण माना जाता है। Makar Sankranti के दिन Surya की उपासना, दान और संकल्प विशेष फलदायी माने जाते हैं।

नीचे पांच ऐसे पारंपरिक और जीवन में व्यवहारिक रूप से लागू होने वाले उपाय (टोटके) दिए जा रहे हैं, जिन्हें लोग सकारात्मक संकल्प के साथ करते हैं:

*01.आर्थिक उन्नति के लिए “तिल-गुड़ दान उपाय”

सुबह स्नान के बाद काले तिल और गुड़ मिलाकर 07 या 11 जरूरतमंद लोगों को दान करें।
मान्यता: इससे धन संबंधी अड़चनें कम होती हैं और आय के नए स्रोत खुलते हैं।
जीवन में लागू कैसे करें? – इस दिन “नकारात्मकता छोड़कर मधुरता अपनाने” का संकल्प लें।

*02.करियर सफलता के लिए सूर्य अर्घ्य उपाय

तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” 11 बार बोलें।
मान्यता: आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।
व्यावहारिक लाभ: सुबह की धूप मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा देती है।

*03.घर की सुख-शांति के लिए खिचड़ी दान

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाकर गाय या गरीब व्यक्ति को दान करें।
मान्यता: गृह कलह कम होता है।
जीवन में लागू: परिवार के साथ भोजन करें, मनमुटाव समाप्त करें।

*04.पितृ शांति और बाधा निवारण उपाय

बहते जल में काले तिल प्रवाहित करें और पूर्वजों को स्मरण करें।
मान्यता: पितृ दोष और रुकावटें कम होती हैं।
व्यावहारिक अर्थ: अपने पूर्वजों के संस्कारों को सम्मान देना।

*05.मनोकामना सिद्धि के लिए उड़द दीप उपाय

संध्या समय तिल के तेल का दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार पर रखें।
मान्यता: नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
जीवन में लागू: घर में प्रकाश और सकारात्मक संवाद बढ़ाएँ।

 महत्वपूर्ण बात

ये उपाय आस्था और सकारात्मक सोच पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य अंधविश्वास नहीं, बल्कि दान, अनुशासन, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

ब्लॉग से संबंधित पांच प्रश्न और उत्तर 

प्रश्न *01: मकर संक्रांति का दूसरा नाम क्या है और यह खिचड़ी से कैसे जुड़ा है?

उत्तर:मकर संक्रांति को 'उत्तरायण', 'खिचड़ी पर्व' और 'पोंगल' के नाम से भी जाना जाता है। नई फसल के चावल और उड़द की दाल से बनी खिचड़ी इस दिन विशेष रूप से बनाई और दान की जाती है, इसलिए इसे खिचड़ी पर्व कहते हैं।

प्रश्न *02: 2027 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों नहीं मनाई जाएगी?

उत्तर:क्योंकि 2027 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात्रि 8:59 बजे हो रहा है। चूंकि रात्रि में स्नान-दान वर्जित है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

प्रश्न *03: मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का दान क्यों किया जाता है?

उत्तर:तिल पितृ तृप्ति और गुड़ मिठास का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार तिल-गुड़ का दान करने से ग्रह दोष दूर होते हैं, पितरों को शांति मिलती है और जीवन में मिठास आती है।

प्रश्न *04: 'अमृत काल' में स्नान-दान करने का क्या महत्व है?

उत्तर:अमृत काल में किया गया स्नान-दान सामान्य दिनों की तुलना में सौ गुना अधिक फलदायी माना गया है। यह समय देवताओं के अमृत पान के काल के समान पवित्र होता है।

प्रश्न *05: सर्वार्थ सिद्धि योग कब बनता है और इसका क्या लाभ है?

उत्तर:सर्वार्थ सिद्धि योग तब बनता है जब सूर्य मकर राशि में हों और रविवार को छोड़कर किसी अन्य शुभ दिन में पड़ता हो। इस योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य बिना किसी बाधा के सफल होता है।

"डिस्क्लेमर" 

अस्वीकरण:

यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी, धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। यहां दी गई सभी सूचनाएं विभिन्न पंचांगों, धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित मान्यताओं के संकलन पर आधारित हैं। 'दी इंडियन वायर' या इस ब्लॉग के लेखक किसी विशेष पंचांग की गणना, किसी विशेष तिथि या समय की शत-प्रतिशत सटीकता, या बताए गए उपायों के परिणाम की पुष्टि नहीं करते हैं।

खगोलीय गणनाओं में विभिन्न पंचांग पद्धतियों (सूर्य सिद्धांत, ध्रुव सिद्धांत आदि) के आधार पर कुछ मिनटों या घंटों का अंतर संभव है। इसलिए पुण्यकाल या महा पुण्य काल का निर्धारण किसी मान्यता प्राप्त ज्योतिषी या स्थानीय पंचांग से अवश्य कर लें।

इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी विशेष धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करना नहीं है। दी गई ज्योतिषीय भविष्यवाणियां या उपाय सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं हो सकते हैं और प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। यह ब्लॉग किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक या चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।

किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या दान-पुण्य को करने से पूर्व कृपया अपने कुल गुरु या स्थानीय पंडित से संपर्क अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक इस ब्लॉग में दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाली किसी भी हानि, लाभ, या समस्या के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। आपका धार्मिक कृत्य आपकी अपनी आस्था और विश्वास पर आधारित है।



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