कब है सूर्य ग्रहण 2026:तिथि, समय, प्रभाव, सावधानियां | पूरी जानकारी हिंदी में


एक मैदान में वलयाकार सूर्य ग्रहण के नीचे बैठा परिवार। बाईं ओर वैज्ञानिक टेलीस्कोप के साथ और दाईं ओर बुजुर्ग व्यक्ति ध्यान मुद्रा में।

17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार के सूर्य ग्रहण की पूरी जानकारी पाएं। जानें तिथि, समय, कहां दिखेगा, वलयाकार ग्रहण क्या है, सभी राशियों पर प्रभाव, क्या करें और क्या न करें। वैज्ञानिक और ज्योतिषीय विश्लेषण।

नीचे दिए गए विषयों पर विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर 

*01. सूर्य ग्रहण 2026

*02. 17 फरवरी सूर्य ग्रहण

*03. वलयाकार सूर्य ग्रहण

*04. सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा

*05. ग्रहण का सूतक काल

*06. सूर्य ग्रहण राशि पर प्रभाव

*07. सूर्य ग्रहण में क्या करें

*08. सूर्य ग्रहण का समय

*09. सूर्य ग्रहण का प्रकार

2026 का अद्भुत खगोलीय नज़ारा: सूर्य ग्रहण का पूरा विवरण और जानकारी

खगोल विज्ञान और ज्योतिष की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना वर्ष 2026 में घटित होने जा रही है। 17 फरवरी 2026 को होने वाला यह सूर्य ग्रहण पूरे विश्व के खगोल प्रेमियों के लिए एक बेहद खास घटना है। चंद्रमा जब सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को पूर्ण या आंशिक रूप से ढक लेता है, तो इस दुर्लभ खगोलीय घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं। यह ब्लॉग आपको इस ग्रहण से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी – सही तिथि, समय, दृश्यता के क्षेत्र, ग्रहण का प्रकार, ज्योतिषीय प्रभाव और सावधानियों के बारे में विस्तार से बताएगा। आइए, इस अद्भुत खगोलीय नज़ारे को समझने की शुरुआत करते हैं।

सूर्य ग्रहण 2026 कब है?

17 फरवरी 2026, मंगलवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण घटित होगा। यह ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को इस प्रकार ढक लेगा कि सूर्य का केवल बाहरी किनारा ही एक अग्नि वलय (रिंग ऑफ फायर) के रूप में दिखाई देगा। यह घटना मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के देशों से स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी। ग्रहण की अवधि कुछ ही मिनटों की होगी, लेकिन इसका खगोलीय और ज्योतिषीय महत्व काफी अधिक है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर के बाद के समय में घटित होगा, हालाँकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोल विज्ञान में यह घटना चंद्रमा की परिक्रमा और पृथ्वी के सापेक्ष उसकी स्थिति का एक आश्चर्यजनक उदाहरण प्रस्तुत करेगी।

सूर्य ग्रहण का समय क्या होगा?

17 फरवरी 2026 को होने वाले सूर्य ग्रहण का समय सार्वभौमिक समयानुसार (यूटीसी) प्रातः लगभग 08:56 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। इस दौरान वलयाकार ग्रहण की अधिकतम अवधि लगभग 02 मिनट 20 सेकंड की होगी। भारतीय मानक समय (आईएसटी) के अनुसार, यह समय दोपहर लगभग 02:26 बजे से शुरू होकर शाम 05:48 बजे तक रहेगा। ग्रहण का सर्वाधिक प्रभावशाली चरण (ग्रेटेस्ट इक्लिप्स) दोपहर लगभग 04:07 बजे आईएसटी पर होगा। ध्यान रहे, यह समय सटीक खगोलीय गणना पर आधारित है और इसमें मामूली अंतर संभव है।

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17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण एक अनोखी खगोलीय घटना होगी, जिसे "रिंग ऑफ फायर" कहा जाता है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को लगभग 96% ढक लेगा और सूर्य का बाहरी वातावरण दिखाई देगा। यह ग्रहण अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और आसपास के महासागरों में दिखाई देगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा ¹ ² ³।

इस सूर्य ग्रहण की कुछ विशेषताएं हैं:

 *वलयाकार सूर्य ग्रहण: यह ग्रहण वलयाकार होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा।

 *रिंग ऑफ फायर: ग्रहण के दौरान सूर्य का बाहरी वातावरण दिखाई देगा, जिसे "रिंग ऑफ फायर" कहा जाता है।

*2 मिनट 20 सेकंड का समय: ग्रहण का वलयाकार चरण लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा।

 *चीनी चंद्र नव वर्ष: यह ग्रहण चीनी चंद्र नव वर्ष के दिन होगा।

क्या सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा? क्यों नहीं दिखाई देगा

नहीं, 17 फरवरी 2026 को होने वाला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि ग्रहण की छाया पथ (पेनम्ब्रा और अम्ब्रा) पृथ्वी पर केवल विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से ही गुजरती है, और इस बार यह पथ भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजरेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में ही दृश्यमान होगा, जैसे दक्षिणी अमेरिका का कुछ भाग, अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका और दक्षिणी अफ्रीका का एक छोटा सा हिस्सा। चूंकि भारत उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र से बहुत दूर है, इसलिए यहां से इसे देख पाना संभव नहीं होगा। खगोलीय घटनाएं दुनिया के सभी हिस्सों में एक साथ नहीं देखी जा सकतीं, यह उनकी प्रकृति पर निर्भर करता है। हालांकि, भारत के जिज्ञासु दर्शक आधुनिक तकनीक के माध्यम से विभिन्न वेबसाइटों और स्पेस एजेंसियों के लाइव स्ट्रीम के जरिए इस घटना का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।

सूर्य ग्रहण कहां दिखाई देगा? और क्यों दिखाई देगा

17 फरवरी 2026 का वलयाकार सूर्य ग्रहण विश्व के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में ही दिखाई देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिणी अमेरिका (अर्जेंटीना और चिली के कुछ हिस्सों में), दक्षिणी अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका और कुछ हद तक दक्षिणी अफ्रीका के दक्षिणी-पश्चिमी तटीय इलाकों में देखा जा सकेगा। इन क्षेत्रों में दिखाई देने का कारण ग्रहण पथ (Path of Annularity) है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है, तो वह पृथ्वी की सतह पर अपनी छाया डालता है। यह छाया एक संकरी पट्टी के रूप में पृथ्वी पर पड़ती है, जिसे ग्रहण पथ कहते हैं। केवल वही स्थान जो इस संकरी पट्टी के अंतर्गत आते हैं, पूर्ण या वलयाकार ग्रहण देख पाते हैं। इस बार यह पथ उपर्युक्त दक्षिणी क्षेत्रों से ही गुजरेगा, इसीलिए वहाँ से यह अद्भुत नज़ारा दिखेगा।

सूर्य ग्रहण का प्रकार क्या होगा?

17 फरवरी 2026 को होने वाला सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा। सूर्य ग्रहण मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: पूर्ण, आंशिक और वलयाकार। वलयाकार ग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अंडाकार कक्षा में सबसे दूर (अपोजी) की स्थिति में होता है। इस स्थिति में चंद्रमा का आकार सूर्य के संपूर्ण डिस्क को ढकने के लिए पर्याप्त बड़ा नहीं होता। परिणामस्वरूप, चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक देता है, लेकिन सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकदार वलय या 'रिंग ऑफ फायर' की तरह चारों ओर दिखाई देता रहता है। यह नज़ारा अत्यंत मनोरम और दुर्लभ होता है। इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के लगभग 97% हिस्से को ढक देगा, जिससे एक सुनहरी अग्नि वलय बनेगी। यह आगामी वर्षों में होने वाले सबसे खूबसूरत वलयाकार ग्रहणों में से एक माना जा रहा है।

सूर्य ग्रहण का प्रभाव किन-किन राशियों पर होगा?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सभी राशियों पर कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता है, क्योंकि यह घटना राशि चक्र में किसी विशिष्ट बिंदु पर घटित होती है। 17 फरवरी 2026 का ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में हो रहा है। इसलिए इसका सबसे प्रबल प्रभाव कुंभ राशि वालों पर पड़ेगा। हालांकि, अन्य राशियों पर भी इसके अलग-अलग प्रभाव देखे जा सकते हैं। यहां एक संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

· मेष, सिंह, धनु: इन राशियों पर ग्रहण का शुभ प्रभाव पड़ सकता है। नए अवसर मिलने की संभावना है।

· वृष, कन्या, मकर: इन राशियों को थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य और वित्त पर ध्यान दें।

· मिथुन, तुला, कुंभ: इन राशियों पर ग्रहण का मध्यम प्रभाव पड़ेगा। कुंभ राशि वालों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

· कर्क, वृश्चिक, मीन: इन राशियों पर ग्रहण का प्रभाव व्यक्तिगत जीवन और भावनात्मक पक्ष पर पड़ सकता है। संबंधों में संवाद बनाए रखें।

ध्यान दें: यह जानकारी सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। व्यक्तिगत प्रभाव जानने के लिए जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है। ग्रहण एक खगोलीय घटना है और इसे डर या अंधविश्वास के स्थान पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए?

ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन वैज्ञानिक सुरक्षा और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना उचित है:

1. वैज्ञानिक सुरक्षा: यदि आप ग्रहण देखने वाले क्षेत्र में हैं, तो कभी भी नग्न आंखों से सीधे सूर्य को न देखें। इससे आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान हो सकता है। हमेशा आईएसओ प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लासेस या टेलीस्कोप पर लगे सोलर फिल्टर का ही उपयोग करें।

2. आध्यात्मिक दृष्टिकोण: कई परंपराओं में ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान या प्रार्थना करने की सलाह दी जाती है। इस समय को आत्मचिंतन के लिए उपयोग किया जा सकता है।

3. स्वच्छता: ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करना और ताजे, शुद्ध भोजन का सेवन करना एक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है।

4. दान-पुण्य: पारंपरिक रूप से ग्रहण के बाद दान करने को शुभ माना गया है।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जिनमें वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों ही दृष्टिकोण शामिल हैं:

1. सूर्य को सीधे न देखें (सबसे महत्वपूर्ण): साधारण सनग्लास, एक्स-रे शीट, काले चश्मे या पानी में प्रतिबिंब देखकर ग्रहण न देखें। ये सभी तरीके खतरनाक हैं और आँखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

2. भोजन पकाना या खाना: कई भारतीय परंपराओं में ग्रहण की अवधि में भोजन पकाने या ग्रहण लगने के बाद बने भोजन को खाने से मना किया जाता है। मान्यता है कि इस समय हानिकारक विकिरण बढ़ जाते हैं, हालांकि इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। फिर भी, सावधानी के तौर पर इसका पालन किया जा सकता है।

3. महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत: ज्योतिष के अनुसार ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई नया कार्य, व्यापारिक समझौता या शुभ संस्कार नहीं किए जाते।

4. गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहना: परंपराओं में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहने और कोई सिलाई-कढ़ाई आदि का काम न करने की सलाह दी जाती है, ताकि तनाव से बचा जा सके।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल क्या होगा?

सूतक काल एक पारंपरिक अवधारणा है जो ग्रहण शुरू होने के कुछ समय पहले से लेकर ग्रहण समाप्ति तक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान सूक्ष्म स्तर पर नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं। चूंकि यह सूर्य ग्रहण है, इसका सूतक काल ग्रहण शुरू होने के 12 घंटे पहले से लागू हो है, परन्तु भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। आधुनिक दृष्टिकोण से, यह समय शांतिपूर्वक प्रतीक्षा करने और आत्मिक चिंतन के लिए उपयोग किया जा सकता है।

सूर्य ग्रहण: एक बहुआयामी दृष्टिकोण

सूर्य ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला एक बहुआयामी विषय है।

वैज्ञानिक पहलू: वैज्ञानिक दृष्टि से, यह चंद्रमा द्वारा सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध करने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह खगोलविदों के लिए सूर्य के बाह्य वातावरण (कोरोना) का अध्ययन करने, पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने और भौतिकी के सिद्धांतों की पुष्टि करने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।

सामाजिक पहलू: सामाजिक स्तर पर, ग्रहण लोगों को एक साथ लाता है। यह शैक्षिक जागरूकता फैलाने, सामुदायिक देखने के कार्यक्रम आयोजित करने और विज्ञान में रुचि जगाने का माध्यम बनता है। सदियों पुरानी सांस्कृतिक मान्यताएं और कथाएं भी इसके सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं।

आध्यात्मिक पहलू: आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में ग्रहण को अक्सर एक महत्वपूर्ण संकेत या परिवर्तन के समय के रूप में देखा जाता है। कई संस्कृतियों में इसे पापों के प्रायश्चित, मंत्र साधना और आत्मचिंतन का काल माना जाता है, जो मनुष्य को ब्रह्मांड से जोड़ता है।

आर्थिक पहलू: आर्थिक दृष्टि से, ग्रहण 'खगोल पर्यटन' को बढ़ावा देता है, जिससे होटल, यात्रा और स्थानीय व्यवसायों को लाभ होता है। विशेष सोलर व्यूइंग ग्लास, टेलीस्कोप और साहित्य की बिक्री बढ़ जाती है। मीडिया कवरेज और लाइव स्ट्रीमिंग के अधिकार भी आर्थिक गतिविधि उत्पन्न करते हैं।

सूर्य ग्रहण से जुड़े सामान्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

प्रश्न: क्या सूर्य ग्रहण के दौरान खाना बनाना या खाना सचमुच हानिकारक है?

उत्तर:वैज्ञानिक रूप से, ग्रहण के कारण भोजन में कोई विषैला परिवर्तन नहीं होता। यह मान्यता पुराने समय में स्वच्छता और संदूषण से बचने के सरल उपाय के रूप में उपजी हो सकती है, क्योंकि ग्रहण के समय अंधेरे में बैक्टीरिया पनप सकते थे। आज, रेफ्रिजरेशन है, इसलिए भोजन सुरक्षित रहता है। हालाँकि, लोग पारंपरिक आस्था का सम्मान कर सकते हैं।

प्रश्न: ग्रहण को 'नग्न आंखों' से न देखने की चेतावनी क्यों दी जाती है?

उत्तर:सूर्य की तीव्र किरणें (अल्ट्रावायलेट और इन्फ्रारेड) आंखों के रेटिना की कोशिकाओं को जला सकती हैं, जिससे स्थायी अंधापन या दृष्टि हानि हो सकती है। ग्रहण के दौरान सूर्य की चमक कम लगती है, लेकिन हानिकारक विकिरण अभी भी मौजूद रहते हैं। इसीलिए आईएसओ प्रमाणित विशेष चश्मों का ही उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न: क्या सूर्य ग्रहण का प्रभाव ज्योतिष में वैज्ञानिक है?

उत्तर:ज्योतिष एक प्राचीन विद्या है जो ग्रहों की स्थिति और मानव जीवन के बीच संबंध मानती है, जबकि आधुनिक विज्ञान प्रयोग और प्रमाण पर आधारित है। ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्तिगत आस्था का विषय है, जबकि ग्रहण का खगोलीय घटना होना एक वैज्ञानिक तथ्य है। दोनों को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझना चाहिए।

सूर्य ग्रहण: कुछ अनसुलझे प्रश्न और रहस्य

ग्रहण के बारे में हमारा ज्ञान व्यापक है, फिर भी कुछ पहलू शोध का विषय बने हुए हैं। एक प्रमुख पहेली "कोरोना मास इजेक्शन" (सीएमई) की भविष्यवाणी से जुड़ी है। सूर्य ग्रहण के दौरान कोरोना का सीधा अवलोकन होता है, लेकिन वैज्ञानिक अभी भी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि कोरोना का तापमान सूर्य की सतह से हजारों गुना अधिक क्यों है? ग्रहण इस रहस्य को सुलझाने में मदद कर सकता है।

एक और अनसुलझा विषय ग्रहण का पृथ्वी के वायुमंडल और जीवों पर सूक्ष्म प्रभाव है। कुछ अध्ययनों में ग्रहण के दौरान पशु-पक्षियों की असामान्य व्यवहारिक प्रतिक्रियाओं, तापमान में अचानक गिरावट और वायुमंडलीय तरंगों के पैटर्न में बदलाव का उल्लेख मिलता है, लेकिन इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर और शोध की आवश्यकता है। ये रहस्य ही ग्रहण को वैज्ञानिकों के लिए इतना आकर्षक बनाते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)

इस ब्लॉग में प्रदान की गई सभी जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। खगोलीय घटनाओं से संबंधित सभी तिथियां, समय और तकनीकी विवरण प्रामाणिक खगोलीय स्रोतों (जैसे NASA, ISRO) पर आधारित हैं, लेकिन इनमें मामूली अंतर संभव है।

इस ब्लॉग में वर्णित ज्योतिषीय विश्लेषण, प्रभाव और सुझाव पारंपरिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित हैं। इन्हें किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव जानने के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह लें।

सूर्य ग्रहण देखने संबंधी सुरक्षा निर्देशों का पालन अवश्य करें। लेखक या वेबसाइट किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति, आर्थिक हानि या निर्णय के परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी कार्य या निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।



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