आमलकी एकादशी 2028: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, नियम और महत्व

"जानें आमलकी एकादशी 07 मार्च 2028 के शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, पौराणिक कथा, व्रत नियम, क्या खाएं-क्या ना खाएं, और भगवान विष्णु की पूजा का तरीका"

Amalaki Ekadashi 2028: The Many Forms of Lord Vishnu

नीचे दिए गए विषयों के संबंध में विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर 

*आमलकी एकादशी 07 मार्च 2028 दिन मंगलवार को है।

*आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त और कैसा रहेगा दिन ?

*पूजा विधि स्टेप बाय स्टेप जानें संपूर्ण?

*आमलकी एकादशी के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं ?

*आमलकी एकादशी के दिन क्या करें और क्या ना करें?

*आमलकी एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की होती है पूजा?

*आमलकी एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए ?

*आमलकी एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर? 

*आमलकी एकादशी के अचूक टोटके?

*सामाजिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं की जानकारी ?

 इस ब्लॉग की सभी सूचनाएं भारतीय पंचांग के अनुसार 07 मार्च 2028 मंगलवार को आने वाली आमलकी एकादशी पर आधारित हैं। आमलकी एकादशी, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है और यह आमला (आंवला) के पवित्र वृक्ष की पूजा और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति की परंपरा के लिए मनाई जाती है। 

🌿 आमलकी एकादशी 2028 

आमलकी एकादशी सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाता है। यह व्रत आमले (आंवला/आमला) के पेड़ की पूजा तथा भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित है। आमला को आयुर्वेद की दृष्टि से अत्यंत पौष्टिक और रोग-प्रतिरोधक माना जाता है, इसलिए इस दिन यह वृक्ष विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है। आमलकी एकादशी शिवरात्रि और होली के बीच आती है, जिससे यह वसंत ऋतु के आगमन का शुभ अवसर भी बन जाती है। 

आस्था के अनुसार इस दिन का पूजन और व्रत रखने से जीवन में समृद्धि, सुख-शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु के प्रेम और कृपा की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु पूरे मन से व्रत रखते हैं और आमला वृक्ष के सामने विशेष पूजा करते हैं। इस दिन का व्रत शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों रूप से शुद्धि का साधन माना जाता है, तथा इसे करने वाले को पापों से मुक्ति, मन की एकाग्रता तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

⏱️ आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त और दिन का सटिक विवरण 

आमलकी एकादशी 07 मार्च 2028 मंगलवार को है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 06 मार्च की रात के 11:00 बजे से प्रारम्भ होकर 07 मार्च की रात्रि 08:29 बजे तक रहेगी। व्रत का पालन उसी दिन किया जाता है जब तिथि सुबह सूर्योदय तक विद्यमान रहती है। पारण (व्रत तोड़ना) 08 मार्च 2028 की सुबह, द्वादशी तिथि के प्रारम्भ होने के पश्चात किया जाता है (आज्ञाकाल में) ताकि व्रत का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो। 

दिन के शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी उठकर पूजा) सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान विशेष मंत्र जाप और ध्यान करना अत्यंत फलदायी है। दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और आमला वृक्ष के समक्ष श्रद्धापूर्वक व्रत का पालन करने से आत्मा की शुद्धि होती है और विष्णु प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा व्रत के दिन तुलसी चढ़ाना, पंचामृत से अभिषेक करना, दीप-धूप आदि की व्यवस्था करना भी शुभ माना जाता है। 

🙏 आमलकी एकादशी पूजा विधि – Step by Step 

🔹 तैयारी (पूर्व संध्या)

1. व्रत से एक दिन पहले (दशमी) संध्या समय में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।

2. घर में पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और आमला वृक्ष (या उसका फल/टहनी) की स्थापना करें।

3. तुलसी, लाल कपड़ा, धूप-दीप, अक्षत, फूल, फल, पंचामृत तथा नैवेद्य की व्यवस्था कर लें।

🔹 सुबह – पूजा प्रारंभ

4. ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्वच्छ स्नान करें और पूजा स्थल पर बैठें।

5. पूजा को शुभांक देने के लिए गाय, गरीब या ब्राह्मण को दान देना उत्तम माना जाता है।

6. सर्वप्रथम भगवान गणेश जी को धूप-दीप अर्पित कर वंदन करें।

7. उसके बाद भगवान विष्णु की स्थापना करें और उनके समक्ष आमला वृक्ष (या फल) को सजाएं।

🔹 मंत्र जाप और भक्ति

8. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

9. भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद-शक्कर) से अभिषेक करें और फिर तुलसी पत्र, फूल तथा प्रसाद अर्पित करें।

10. आमले की पूजा करते समय उसका फल/पेड़ के चारों ओर दीप जलाएं और भक्ति गीत/कीर्तन करें।

🔹 कथा पाठ और ध्यान

11. आमलकी एकादशी कथा का पाठ करें अथवा किसी पंडित/कथा वाचक से कथा सुने।

12. व्रत के दौरान ध्यान, जप, भजन-कीर्तन तथा भगवद् नाम का स्मरण करना अत्यंत फलदायी है।

🔹 दिनभर व्रत पालन

13. दिनभर सात्विक भोजन (फलाहार या फलाहार सहित) का सेवन करें यदि पूर्ण व्रत नहीं रखते हैं।

14. किसी भी प्रकार के तामसिक आहार, मांस, लहसुन-प्याज़ आदि का सेवन न करें।

🔹 संध्या-पूजा और पारण

15. रात को फिर से भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और आरती करें।

16. अगले दिन द्वादशी तिथि प्रारंभ होने के बाद सुबह पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

> टिप: व्रत के समय रोगियों, वृद्धों या गर्भवती महिलाओं को फलाहार या डाक्टर के निर्देशानुसार व्रत पालन करना चाहिए।

📖 आमलकी एकादशी की पौराणिक कथा

यह कथा आमलकी एकादशी से जुड़े पौराणिक प्रसंग है।राजा वसुरथ/बहेलिया की कथा, भगवान विष्णु की महिमा आदि पर आधारित होती है।

प्राचीन काल की बात है। वैदिश नगर में राजा चंद्रहास नामक एक धर्मात्मा, न्यायप्रिय और भगवान विष्णु के परम भक्त राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी, कोई भूखा नहीं था और अधर्म का नाम-निशान तक नहीं था। राजा स्वयं प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करते और विशेष रूप से एकादशी व्रत का पालन करते थे।

राजा के राज्य में एक गरीब बहेलिया (शिकारी) रहता था। वह अत्यंत निर्धन था, जीवनयापन के लिए शिकार करता था, लेकिन उसका हृदय निर्दयी नहीं था। परिस्थितियों ने उसे शिकारी बना दिया था। एक दिन फाल्गुन शुक्ल एकादशी को वह जंगल में शिकार के लिए गया।

दिनभर उसे कोई शिकार नहीं मिला। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह जंगल में भटकता रहा। संयोगवश वह एक विशाल आंवले (आमलकी) के वृक्ष के पास पहुंचा। उस वृक्ष के नीचे कुछ ब्राह्मण भगवान विष्णु की पूजा कर रहे थे और आमलकी एकादशी का व्रत रखे हुए थे।

बहेलिया थककर उसी वृक्ष के नीचे बैठ गया। भूख के कारण वह कुछ खा नहीं पाया और अनजाने में उसका एकादशी का उपवास हो गया। रात होने पर उसे ठंड लगी, तो उसने वृक्ष से गिरे कुछ सूखे पत्तों को इकट्ठा किया। पत्ते गिराते समय कुछ पत्ते पूजा स्थल पर भी गिर गए।

उस अनजाने कर्म से ही उसने भगवान विष्णु की पूजा कर ली।

रातभर वह वहीं जागता रहा। जागरण, उपवास और आमलकी वृक्ष के सान्निध्य से उसे एकादशी का पूर्ण फल प्राप्त हो गया।

कुछ समय बाद बहेलिया की मृत्यु हो गई। यमदूत उसे लेने आए, लेकिन तभी विष्णुदूत प्रकट हुए। उन्होंने यमदूतों को रोका और कहा—

> “इस जीव ने आमलकी एकादशी का व्रत किया है, इसे बैकुंठ का अधिकारी समझो।”

बहेलिया को दिव्य विमान में बैठाकर भगवान विष्णु के धाम ले जाया गया। यह देखकर यमदूत भी आश्चर्यचकित रह गए।

उधर राजा चंद्रहास को स्वप्न में भगवान विष्णु ने दर्शन दिए और कहा—

> “हे राजन! आमलकी एकादशी का फल अनंत है। जो श्रद्धा से या अनजाने में भी यह व्रत करता है, वह मोक्ष को प्राप्त करता है।”

अगले दिन राजा ने पूरे राज्य में आमलकी एकादशी का महत्व घोषित कराया। तब से यह व्रत लोक में प्रसिद्ध हो गया।

👉 शिक्षा:

यह कथा सिखाती है कि भगवान भाव के भूखे हैं, विधि के नहीं। श्रद्धा, जागरण और संयम से किया गया व्रत जीवन को मोक्ष की ओर ले जाता है।

🍽️ आमलकी एकादशी के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं 

✅ क्या खाएं

फल, विशेषकर आंवला (आमला), केला, सेब, अनार।

कुट्टू के आटे से बने पकवान, साबूदाना खिचड़ी, शकरकंद।

दूध, दही, घी जैसे दूध उत्पाद (स्वादानुसार सेवन)।

नारियल, मेवे और हल्का सात्विक भोजन।

यदि निर्जला व्रत नहीं रखते तो स्वयं की क्षमता अनुसार फलाहार रखें। 

❌ क्या न खाएं

अनाज (चावल, गेहूं, दालें) और भारी मसालेदार भोजन।

मांस, मछली, अंडा, लहसुन-प्याज़।

शराब, धूम्रपान या तामसिक आहार।

कैफीनयुक्त चाय-कॉफी और अत्यधिक तला-भुना भोजन।

एकादशी के दिन रात्रि में भारी भोजन से परहेज करना उत्तम। 

🧘 क्या करें और क्या ना करें 

🟢 क्या करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान व पूजन करें।

भगवान विष्णु का जाप, भजन-कीर्तन तथा आमला वृक्ष पूजा करें।

दान-पुण्य, ब्राह्मणों को भोजन, गरीबों को दान करना।

तुलसी के साथ धूप-दीप करना तथा कथा/मंत्र जाप में समय बिताएं।

🔴 क्या ना करें

झूठ बोलना, क्रोध करना, वाद-विवाद में लिप्त होना।

अनिष्ट विचारों, आलस्य और आलसी व्यवहार का पालन करना।

तामसिक आहार, शराब या नशे का सेवन करना।

काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसी वृत्तियों को बढ़ावा देना।

🌟 भगवान विष्णु का कौन-सा रूप पूजनीय 

आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शार्वाण/वासुदेव रूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि विष्णु ही संहारक और पालनकर्ता देवता हैं। आमला वृक्ष में भगवान विष्णु के निवास और लक्ष्मी जी की अनुकंपा का विशेष मान होता है। आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा से भक्त की आत्मा को शुद्धि, स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। 

🛏️ एकादशी पर किस पर सोना चाहिए 

एकादशी के दिन रात में सादा, स्वच्छ और सात्विक जगह पर सोना चाहिए। बिस्तर हल्का और पीले/सफेद रंग का हो तो और बेहतर माना जाता है क्योंकि विष्णु भक्ति तथा आध्यात्मिक ध्यान के लिए शांति-पूर्ण वातावरण जरूरी होता है। रात में जागरण करके भजन-कीर्तन एवं कथा सुनना अत्यंत फलदायी होता है, इसके बाद ध्यानपूर्वक सोना चाहिए। 

❓ आमलकी एकादशी – प्रश्न और उत्तर 

Q1. आमलकी एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?

उत्तर: भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और स्वास्थ्य-समृद्धि के लिए। 

Q2. क्या आंवले का व्रत सबसे कठिन होता है?

उत्तर: निर्जला व्रत कठिन लेकिन फलदायी, फलाहार व्रत सरल विकल्प। 

🔮 आमलकी एकादशी के अचूक टोटके 

(यह अनुभाग बाद में विस्तृत रूप से तैयार किया जा सकता है।)

एकादशी

🔮 आमलकी एकादशी के अचूक टोटके 

🌿 1. धन वृद्धि हेतु

आमलकी एकादशी के दिन 11 आंवले भगवान विष्णु को अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

🌿 2. रोग मुक्ति के लिए

आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर दीपक जलाएं और जल में आंवला डालकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।

🌿 3. संतान सुख हेतु

इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और पीपल के नीचे दीपदान करें।

🌿 4. ग्रह बाधा निवारण

आमलकी एकादशी पर तुलसी के पौधे में कच्चा दूध अर्पित करें।

🌿 5. मोक्ष प्राप्ति हेतु

निर्जला या फलाहार व्रत रखें और रात्रि जागरण करें।

🌱 आमलकी एकादशी: सामाजिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू 

🔹 सामाजिक दृष्टि से

आमलकी एकादशी समाज में संयम, दान और सेवा की भावना को बढ़ाती है। इस दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र और फल दान करने की परंपरा है।

🔹 वैज्ञानिक दृष्टि से

आंवला विटामिन-C, एंटीऑक्सीडेंट और रोग-प्रतिरोधक तत्वों से भरपूर है। उपवास से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और डिटॉक्स प्रक्रिया होती है।

🔹 आध्यात्मिक दृष्टि से

एकादशी मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने का अभ्यास है। आमलकी वृक्ष को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र माना गया है। इस दिन ध्यान और मंत्र जाप से आत्मिक शुद्धि होती है

⚖️ आमलकी एकादशी से संबंधित डिस्क्लेमर 

यह ब्लॉग हिंदू धर्म, शास्त्रों, पुराणों, धार्मिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य धार्मिक-सांस्कृतिक ज्ञान प्रदान करना है। व्रत, पूजा विधि, तिथि एवं मुहूर्त स्थानीय पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

यहां दिए गए टोटके, उपाय और धार्मिक विश्वास आस्था पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक या चिकित्सीय सलाह के रूप में न लें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, वृद्धावस्था या विशेष परिस्थिति में व्रत रखने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत, शारीरिक, मानसिक या आर्थिक हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।



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