"जानिए पापांकुशा एकादशी 2027 की तिथि (11 अक्टूबर, सोमवार), पौराणिक कथा, पूजा विधि, क्या करें- क्या न करें, अचूक टोटके, भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना, शुभ मुहूर्त, वैज्ञानिक पहलू और प्रश्नोत्तर"
कैप्शन:✨ “पापांकुशा एकादशी 2027 – भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का शुभ पर्व।” 🌸
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🌿 "पापांकुशा एकादशी 2027: पापों से मुक्ति दिलाने वाला महाव्रत"
🪔 "तिथि और दिनांक, शुभ मुहूर्त और दिन कैसा रहेगा" (11 अक्टूबर 2027)
*वर्ष 2027 में पापांकुशा एकादशी सोमवार, 11 अक्टूबर 2027 को मनाई जाएगी। यह एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
"एकादशी तिथि का शुभारंभ"
*10 अक्टूबर 2027 दिन रविवार सुबह 11:40 से एकादशी तिथि प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर 2027 दिन सोमवार दोपहर 2:08 पर समाप्त हो जाएगी।
*तिथि: एकादशी
*दिन: सोमवार
"नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र इसके बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा।
*योग: शूल योग इसके बाद गण्ड योग रहेगा।
*सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे
"शुभ मुहूर्त"
*अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:08 बजे से लेकर 11:55 बजे तक, विजय मुहूर्त दिन के 01:29 बजे से लेकर 02:16 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 05:24 बजे से लेकर 05:48 बजे तक निशिता मुहूर्त रात 11:08 बजे से लेकर 11:57 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:02 बजें से लेकर 04:51 बजे तक रहेगा।
*पारण (व्रत खोलने) का समय: 12 अक्टूबर 2027, द्वादशी तिथि, दिन मंगलवार प्रातः 05:40 बजे से लेकर 07:08 बजे तक अमृत मुहूर्त रहेगा। इस दौरान पारण करना काफी शुभ होगा।
*दिन का फल: धन लाभ, धार्मिक कार्यों की सिद्धि, यात्रा के लिए शुभ रहेगा।
🌞 "पापांकुशा एकादशी का महत्व"
*पापांकुशा एकादशी व्रत का वर्णन पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। जो भक्त सच्चे मन से इस व्रत को करते हैं, उन्हें जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
📖 "पौराणिक कथा"
*एक समय भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर महाराज से कहा – “हे राजन! आश्विन शुक्ल एकादशी का नाम ‘पापांकुशा एकादशी’ है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को न केवल पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि स्वर्ग लोक और परम पद की प्राप्ति भी होती है।”
*प्राचीन समय में विंध्याचल पर्वत के दक्षिण में पापराज नामक एक शिकारी रहता था। वह नित्य हिंसक पशुओं का वध करता था, चोरी करता था, और अपने परिवार का पालन इसी से करता था। वह किसी देवता या ब्राह्मण का आदर नहीं करता था। जीवनभर पापों में लिप्त रहने के बाद जब मृत्यु समीप आई तो उसके हृदय में भय व्याप्त हो गया। यमदूत उसे लेने आए तो वह भयभीत होकर बोला – “हे देवताओं! अब मैं क्या करूं?”
*तभी आकाशवाणी हुई – “हे पापराज! यदि तू अब भी पश्चाताप करता है तो विंध्याचल पर्वत पर स्थित भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की शरण में जा और पापांकुशा एकादशी का व्रत कर।”
*वह तुरंत पर्वत पर गया, वहां उसने ब्राह्मणों के साथ भगवान विष्णु का पूजन किया, एकादशी व्रत रखा और द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को दान देकर जल ग्रहण किया। इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए। मृत्यु के पश्चात उसे गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।
*भगवान श्रीकृष्ण ने आगे कहा — “हे युधिष्ठिर! जो मनुष्य पापांकुशा एकादशी का व्रत करता है, उसे नर्क के दर्शन नहीं होते। जो कोई इस एकादशी का महात्म्य सुनता या पढ़ता है, वह भी पापों से मुक्त होता है।”
🪔 "पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि" (Step-by-Step)
*01. प्रातःकाल स्नान करें: सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
*02. संकल्प लें: भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें — “मैं आज पापांकुशा एकादशी व्रत रखकर प्रभु की कृपा प्राप्त करूंगा।”
*03. घट स्थापना करें: पीत वस्त्र पर कलश स्थापित करें, उस पर नारियल रखें।
*04. भगवान विष्णु का पूजन करें: तुलसी दल, पीला फूल, धूप, दीप और पंचामृत से भगवान पद्मनाभ विष्णु का पूजन करें।
*05. एकादशी कथा का श्रवण करें: पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
*06. व्रत का पालन करें: दिनभर उपवास रखें, केवल फलाहार करें।
*07. कीर्तन और भजन करें: श्री हरि नाम का जप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
*08. द्वादशी को पारण करें: अगले दिन प्रातः ब्राह्मणों को भोजन कराएं और फिर स्वयं भोजन करें।
🍎 "क्या खाएं और क्या न खाएं" (Do’s & Don’ts in Food)
✅ खाएं:
*01.फल (केला, सेब, अनार, पपीता)
*02.साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा
*03.दूध, दही, मखाना, नारियल जल
*04.सेंधा नमक से बने व्यंजन
❌ न खाएं:
*01.अन्न, दाल, चावल, गेहूं, मसाले
*02.प्याज, लहसुन, मांस, मछली, शराब
*03.तामसिक भोजन और तैलीय पदार्थ
🙏 "पापांकुशा एकादशी के दिन क्या करें और क्या न करें"
✔️* करें:
*01.भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा करें।
*02.श्री हरि नाम का जाप करें।
*03.जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और दान दें।
*04.घर में दीप जलाएं और तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं।
❌ *न करें:
*01.क्रोध, झूठ, निंदा, अपशब्द और हिंसा से बचें।
*02.बिस्तर पर न सोएं — जमीन पर चटाई या कुशासन पर सोएं।
*03.बाल और नाखून न काटें।
*04.किसी का अपमान न करें
🪶 "पापांकुशा एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है"
*इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की विशेष पूजा होती है। वे कमल नाभि से ब्रह्मा की उत्पत्ति करने वाले हैं। इस रूप की उपासना से सृष्टि की शुद्धि, मन की स्थिरता और पापों का नाश होता है।
🛏️ "इस दिन किस पर सोना चाहिए"
*पापांकुशा एकादशी की रात्रि में भूमि पर शयन करना श्रेष्ठ माना गया है। कुशा या आसन बिछाकर सोने से व्रत का पुण्य दोगुना होता है।
🔮 "पापांकुशा एकादशी के अचूक टोटके"
*01. इस दिन तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं — पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
*02. पीले पुष्पों से विष्णु की आराधना करें — धन वृद्धि होती है।
*03. गरीबों को खिचड़ी और वस्त्र दान करें — पाप नष्ट होते हैं।
*04. श्रीहरि नाम का 108 बार जाप करें — मानसिक शांति मिलती है।
*05. सोने से पहले “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें — भय नष्ट होता है।
🌍 "सामाजिक, धार्मिक और वैज्ञानिक पहलू"
🕉️ "धार्मिक पहलू":
*यह व्रत मनुष्य के अंदर की नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करता है। भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और समर्पण से आत्मिक शुद्धि होती है।
🫱 "सामाजिक पहलू":
*एकादशी व्रत लोगों में संयम, दया, दान और सेवा भाव जाग्रत करता है। समाज में सदाचार और प्रेम का संदेश देता है।
🧠 "वैज्ञानिक पहलू:"
*एकादशी का उपवास शरीर को डिटॉक्स करता है, पाचन तंत्र को विश्राम देता है और मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है। यह दिन मन-शरीर संतुलन के लिए वैज्ञानिक रूप से लाभकारी है।
📜 "पापांकुशा एकादशी से जुड़े प्रश्नोत्तर"
*Q1. पापांकुशा एकादशी का व्रत कौन कर सकता है?
👉 *कोई भी स्त्री, पुरुष, ब्राह्मण, गृहस्थ या विद्यार्थी इस व्रत को रख सकता है।
*Q2. क्या इस दिन पूर्ण उपवास आवश्यक है?
👉 *नहीं, फलाहार भी किया जा सकता है। लेकिन श्रद्धा शुद्ध होनी चाहिए।
*Q3. व्रत खोलने का सही समय क्या है?
👉 *द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करना चाहिए।
*Q4. इस व्रत से क्या लाभ होता है?
👉 *पापों से मुक्ति, धन-संपदा, और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
*Q5. क्या पापांकुशा एकादशी की कथा सुनना भी पुण्य देता है?
👉 *हां, कथा का श्रवण या पाठ करने मात्र से ही अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं
⚠️ "डिस्क्लेमर"
*यह ब्लॉग केवल धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें वर्णित पूजा-विधि, कथा, मुहूर्त, और टोटके प्राचीन ग्रंथों, पुराणों और लोकमान्य परंपराओं पर आधारित हैं। इनका पालन व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था और श्रद्धा पर निर्भर करता है।
*लेखक या वेबसाइट किसी भी प्रकार के दावे, भविष्यवाणी या चमत्कार की गारंटी नहीं देती।
*व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य की स्थिति, चिकित्सीय सलाह और पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखें।
*यह जानकारी पाठकों को भारतीय संस्कृति, धर्म और सनातन परंपरा से जोड़ने का प्रयास है।
*धार्मिक ग्रंथों में उल्लिखित विधि-विधान का उद्देश्य आत्मिक और सामाजिक उत्थान है, न कि किसी प्रकार का अंधविश्वास बढ़ाना।
*सभी पाठकों से अनुरोध है कि व्रत करते समय श्रद्धा, स्वच्छता और संतुलित आहार का ध्यान रखें, क्योंकि शुद्ध मन ही सच्ची पूजा का आधार है।