"जानें 26 सितंबर 2027 दिन रविवार को इंदिरा एकादशी की तिथि, पौराणिक कथा, स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि, क्या खाएं और क्या न खाएं। पितृ मोक्ष के लिए करें ये अचूक उपाय"
"कैप्शन:"भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप का दर्शन – इंदिरा एकादशी 2027 पर पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का महाव्रत।"
"मोक्ष दिलाने वाला महाव्रत"
*26 सितंबर 2027, रविवार के दिन पड़ रही इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एकमात्र एकादशी है, जिसका महत्व पितरों को मोक्ष दिलाने और उन्हें सद्गति प्रदान करने के लिए सर्वोपरि माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु के प्रति समर्पण और पितृ ऋण चुकाने का एक महान अवसर है।
"विवरण समय/स्थिति"
*एकादशी तिथि आरंभ 25 सितंबर 2027, दिन रविवार रात ( 7:45 बजे से)
*एकादशी तिथि समाप्त 26 सितंबर 2027, दिन सोमवार शाम 04:55 बजे से शुरू
*पारण (व्रत खोलने) का समय 27 सितंबर 2027, प्रातः दिन मंगलवार को सूर्योदय के बाद।
*योग शिवा योग के बाद सीद्धि योग
"नक्षत्र पुष्य" (तेज और बल का प्रतीक, शुभ)
दिन का हाल रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन एकादशी होने से व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। पुष्य नक्षत्र होने के कारण यह दिन पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहेगा।
📖 "इंदिरा एकादशी की पूजा विधि" (स्टेप बाय स्टेप)
*यह पूजा विधि दशमी से द्वादशी तक तीन दिनों की है:
*01. दशमी तिथि (व्रत से एक दिन पहले)
*शुद्धि: प्रातः स्नान के बाद घर की साफ-सफाई करें।
*तर्पण: दोपहर में नदी, सरोवर या घर पर ही जल, तिल और कुश से पितरों का विधि-विधान से तर्पण करें।
*भोजन: एक बार सात्विक भोजन करें (मांस, लहसुन, प्याज, दाल, चावल वर्जित)।
*शयन: रात्रि में भूमि पर शयन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
*02. एकादशी तिथि (व्रत का दिन)
*संकल्प: प्रातःकाल उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
*स्थापना: एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप या मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें।
*पूजा:
*घी का दीपक जलाएं।
*भगवान को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
*पीले चंदन, पीले फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग - जैसे खीर या फल) अर्पित करें।
*नैवेद्य में तुलसी दल अवश्य रखें।
*कथा श्रवण: इंदिरा एकादशी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
*मंत्र जाप: रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें।
*पितृ पूजा: भगवान विष्णु के सामने अपने पितरों का ध्यान करें और एक दीपक उनके नाम से भी जलाएं। अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
*जागरण: रात्रि में जागरण और भजन-कीर्तन करें।
*03. द्वादशी तिथि (पारण का दिन)
*समापन: प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की पुन: पूजा करें।
*दान: ब्राह्मणों, गरीबों को भोजन कराएं, वस्त्र और दक्षिणा दें।
*पारण: शुभ मुहूर्त में तुलसी दल युक्त जल या एक दाना अन्न ग्रहण करके व्रत का पारण करें। पारण किए बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।
🗓️ "शुभ मुहूर्त और दिन का हाल" (26 सितंबर 2027, रविवार
✨ "इंदिरा एकादशी: क्या करें और क्या ना करें"
✅ "क्या करें" (Do's) ❌ "क्या ना करें" (Don'ts)
*पूजा: भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा करें। चावल: किसी भी रूप में चावल का सेवन न करें।
*संकल्प: प्रातः उठकर स्नान के बाद व्रत का विधिवत संकल्प लें। तुलसी तोड़ना: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें (एक दिन पहले तोड़कर रखें)।
*तर्पण: दशमी तिथि और एकादशी के दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान करें। झूठ/क्रोध: झूठ बोलना, किसी से विवाद करना या क्रोध करना सख्त मना है।
*दान: ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें। निंदा/चुगली: किसी की बुराई या चुगली न करें। मन को शुद्ध रखें।
*मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। दिन में सोना: एकादशी के दिन दिन में नहीं सोना चाहिए।
*रात्रि जागरण: रात्रि में जागरण करके भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन और कथा श्रवण करें। अशुद्ध भोजन: दशमी और द्वादशी को भी तामसिक या अशुद्ध भोजन न करें।
🍽️ "इंदिरा एकादशी: क्या खाएं और क्या ना खाएं"
*एकादशी का व्रत सात्विक और संयमित जीवन शैली को अपनाने का दिन है।
✅ "क्या खाएं" (Fasting Food) ❌ क्या ना खाएं (Strictly Avoid)
*फल: सभी प्रकार के फल (केला, सेब, अंगूर, अनार आदि)। अन्न/अनाज: चावल (सबसे महत्वपूर्ण), गेहूं, जौ, दालें (मसूर की दाल विशेष रूप से)।
*कंद-मूल: आलू, शकरकंद, अरबी, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा। मसाले: हींग, मेथी दाना, राई, हल्दी, धनिया पाउडर (यदि व्रत के लिए अलग से न हो)।
*डेयरी उत्पाद: दूध, दही, छाछ, पनीर (शुद्ध घर का बना)। नमक: सामान्य आयोडीन युक्त नमक (केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें)।
*अन्य: साबूदाना, मखाना (कम घी में भुना हुआ), सेंधा नमक, काली मिर्च, अदरक। अशुद्ध भोजन: लहसुन, प्याज, बैंगन, गाजर, गोभी, शलजम।
*पेय: जल, फलों का रस, चाय (बिना दूध या फलाहार के)। पान/तंबाकू/नशा: किसी भी प्रकार का नशा या पान खाना वर्जित है।
🔱 "भगवान विष्णु का स्वरूप"
*इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा की जाती है। चूंकि यह एकादशी पितृपक्ष में आती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों के निमित्त भी पूजा और तर्पण किया जाता है। भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले भोग का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
🛏️ "इंदिरा एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए"?
*एकादशी व्रत के नियमों के अनुसार, व्रत के एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि की रात्रि को और व्रत के दिन एकादशी की रात्रि को व्रती को भूमि पर शयन (सोना) करना चाहिए। भूमि पर सोना सादगी, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो तो बिस्तर पर भी सोया जा सकता है, लेकिन यह सात्विक और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए होना चाहिए।
📜 "पौराणिक कथा"
*सत्ययुग की बात है। महिष्मति नाम की एक सुंदर नगरी थी, जहां इन्द्र सेन नाम के एक प्रतापी राजा राज करते थे। राजा इन्द्र सेन अत्यंत धर्मपरायण, सत्यनिष्ठ और अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान की भांति करने वाले थे। उनके राज्य में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी और प्रजा सुख-शांति से रहती थी।
*एक दिन देवर्षि नारद मुनि आकाश मार्ग से राजा इन्द्रसेन की सभा में पधारे। राजा ने नारद जी का भव्य स्वागत किया और उन्हें उचित आसन प्रदान किया। नारद जी ने राजा को बताया कि वे यमलोक से आ रहे हैं और उन्होंने वहां राजा के पिता को देखा है। राजा के पिता ने अपने जीवनकाल में किसी एकादशी व्रत का भंग कर दिया था, जिसके कारण उन्हें यमलोक में दुख भोगना पड़ रहा है।
*यमलोक में राजा के पिता ने देवर्षि नारद के माध्यम से राजा इन्द्र सेन को यह संदेश भेजा कि "हे पुत्र! किसी पूर्वजन्म के पाप कर्मों के कारण मुझे यमलोक में कष्ट भोगना पड़ रहा है। तुम शीघ्र ही इंदिरा एकादशी का व्रत करो और उस व्रत का पुण्य मुझे दान कर दो, ताकि मुझे मोक्ष की प्राप्ति हो।"
*राजा इन्द्र सेन यह सुनकर अत्यंत दुखी हुए। उन्होंने नारद मुनि से हाथ जोड़कर कहा, "हे मुनिवर! कृपा करके मुझे इस इंदिरा एकादशी व्रत की विधि विस्तार से बताएं, ताकि मैं अपने पिता का उद्धार कर सकूं।"
"देवर्षि नारद ने राजा को व्रत का विधान बताते हुए कहा":
*दशमी तिथि (व्रत से एक दिन पहले): दशमी के दिन प्रातः स्नान के बाद राजा शुद्ध और सात्विक भोजन करें। इसके बाद दोपहर में नदी या सरोवर में जाकर विधि-विधान से अपने पितरों का तर्पण करें। श्राद्ध और तर्पण की क्रिया के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं। स्वयं भी एक बार भोजन करें, लेकिन ध्यान रहे कि दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन न करें और रात्रि में भूमि पर शयन करें।
*एकादशी तिथि (व्रत का दिन): एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा करें। पुनः श्राद्ध विधि करें और एकाग्रचित्त होकर ब्राह्मणों को फलाहार, दक्षिणा और भोजन कराएं। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद गाय, कौए और कुत्ते को भी भोग दें। इस दिन रात्रि में जागरण करें और भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें। पूरा दिन निराहार रहकर अथवा केवल फलाहार करके व्यतीत करें।
*द्वादशी तिथि (पारण का दिन): द्वादशी के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। तत्पश्चात अपने परिवार के साथ भोजन करके व्रत का पारण (समापन) करें।
*देवर्षि नारद के बताए अनुसार, राजा इन्द्र सेन ने विधि-विधान से यह व्रत संपन्न किया। राजा के व्रत के पुण्य प्रभाव से स्वर्ग से पुष्पों की वर्षा हुई और राजा के पिता को यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिली। उन्होंने राजा को आशीर्वाद दिया और तत्काल बैकुंठ लोक को प्रस्थान कर गए।
*इस व्रत के प्रभाव से राजा इन्द्र सेन की इन्द्रियां (इंद्रियां) जाग्रत हो गईं और उन्हें ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति हुई। चूंकि यह एकादशी पितरों को मोक्ष दिलाकर इन्द्रियों को जाग्रत करती है, इसीलिए यह इंदिरा एकादशी के नाम से विख्यात हुई। इस व्रत को करने से न केवल पितरों को सद्गति मिलती है, बल्कि व्रती को भी मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
("नोट": यह कथा विभिन्न पुराणों और ग्रंथों के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है, यहां प्रमुख मान्यता के आधार पर संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।)
🔱 "भगवान विष्णु का स्वरूप"
*इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा की जाती है। चूंकि यह एकादशी पितृपक्ष में आती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों के निमित्त भी पूजा और तर्पण किया जाता है। भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है, इसलिए पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले भोग का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
🔮 "इंदिरा एकादशी के अचूक टोटके" (उपाय)
"पितृ दोष मुक्ति: एकादशी की रात को दक्षिण दिशा में पितरों के नाम का एक दीपक जलाएं। काले कपड़े में एक मुट्ठी काले तिल बांधकर घर की दक्षिण दिशा में रखें और अगले दिन ये तिल गाय को खिला दें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है"
"आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: तुलसी की जड़ को पीले कपड़े में बांधकर मंदिर में मां लक्ष्मी के सामने रखें। पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी में रख दें। मान्यता है कि इससे धन में अपार वृद्धि होती है"
"मनोकामना पूर्ति: पीपल के पेड़ के नीचे एक घी का दीपक जलाकर उसकी 11 बार परिक्रमा करें। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, जिससे देवता और पितर दोनों प्रसन्न होते हैं"
"नौकरी और व्यापार में सफलता: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान 11 पान के पत्तों पर रोली से 'श्री' लिखकर अर्पित करें। इससे नौकरी में तरक्की और व्यापार में नए अवसर मिलते हैं"
❓ "इंदिरा एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर"
प्र.*01: इंदिरा एकादशी क्यों मनाई जाती है?
उ: यह एकादशी पितृ पक्ष में आती है और इसका मुख्य उद्देश्य मृत पितरों को मोक्ष और सद्गति दिलाना है।
प्र.*02: एकादशी का व्रत किसे करना चाहिए?
उ: यह व्रत हर उस व्यक्ति को करना चाहिए, जो अपने पितरों के लिए मोक्ष और सद्गति की कामना करता है और भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहता है।
प्र.*03: क्या एकादशी पर तुलसी का पत्ता तोड़ सकते हैं?
उ: नहीं, एकादशी के दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना वर्जित है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी दल एक दिन पहले तोड़कर रख लेना चाहिए।
प्र.*04: एकादशी व्रत का पारण कैसे किया जाता है?
उ: व्रत का पारण द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद, तुलसी दल युक्त जल ग्रहण करके या अन्न का एक दाना खाकर किया जाता है।
🔬 "इंदिरा एकादशी का वैज्ञानिक, सामाजिक और धार्मिक पहलू"
"पहलू विवरण"
"धार्मिक यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका मुख्य धार्मिक महत्व पितृ ऋण से मुक्ति, पितरों को मोक्ष प्रदान करना और बैकुंठ धाम की प्राप्ति है। कथा श्रवण और मंत्र जाप से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है"
"वैज्ञानिक व्रत के दौरान अन्न (विशेष रूप से चावल) का त्याग करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। यह शरीर की प्राकृतिक सफाई (डिटॉक्सिफिकेशन) प्रक्रिया को बढ़ाता है। भूमि पर सोने और रात्रि जागरण से मन और शरीर का नियंत्रण बढ़ता है"
"सामाजिक एकादशी का व्रत दान और परोपकार को महत्व देता है। ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराने और दान देने से समाज में समरसता और सहयोग की भावना मजबूत होती है। यह अनुशासन और सादगी को बढ़ावा देता है"
🛑 "डिस्क्लेमर" (Disclaimer)
*यह ब्लॉग पोस्ट इंदिरा एकादशी के धार्मिक महत्व, पौराणिक कथाओं, पूजा विधि और मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई समस्त जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और लोक परंपराओं पर आधारित है।
*सटीकता का दावा नहीं: इस ब्लॉग में बताई गई पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और टोटके प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। हम किसी भी जानकारी की शत-प्रतिशत सटीकता या आपके व्यक्तिगत परिणाम की गारंटी नहीं देते हैं। मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए हमेशा अपने स्थानीय पंचांग और जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए।
*व्यक्तिगत आस्था: व्रत, उपवास और धार्मिक क्रियाएं पूर्ण रूप से व्यक्तिगत आस्था और श्रद्धा का विषय हैं। इन क्रियाओं को करते समय अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का ध्यान रखें। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले व्यक्तियों को उपवास या कठिन नियमों का पालन करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
*टोटके/उपाय: बताए गए टोटके या उपाय केवल लोक-मान्यताओं का हिस्सा हैं। इन्हें केवल आध्यात्मिक विश्वास के साथ ही करें। किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या भ्रम से बचें। आपका विश्वास और शुद्ध मन ही किसी भी व्रत या उपाय की सफलता का मुख्य आधार है।
*उद्देश्य: इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल धार्मिक और आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है, न कि किसी विशेष मत या संप्रदाय को बढ़ावा देना। किसी भी सामग्री के उपयोग से होने वाले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम के लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे।
"अतः, किसी भी नियम का पालन करने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें और किसी विद्वान पंडित या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।