Aja Ekadashi 2027 अजा एकादशी: व्रत कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, टोटके और विशेष रहस्य
byRanjeet Singh-
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"28 अगस्त 2027 दिन शनिवार को अजा एकादशी है। जानें इसकी पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, खाने-पीने के नियम, करने और न करने योग्य कार्य, तथा अचूक टोटके। पढ़ें पूरी जानकारी"
कैप्शन:🌼 “अजा एकादशी 2027 — पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का दिव्य व्रत। भगवान विष्णु के वामन रूप की आराधना से मिलती है जीवन में शुद्धता, सत्य और धर्म की विजय।”
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🪔 "अजा एकादशी 2027 की तिथि और शुभ मुहूर्त"
*तिथि: शनिवार, 28 अगस्त 2027
*पक्ष: भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष की एकादशी
*एकादशी प्रारंभ: 27 अगस्त 2027, शुक्रवार, शाम 05:12 बजे
*एकादशी समाप्त: 28 अगस्त 2027, शनिवार, शाम 06:02 बजे
*पारण (व्रत खोलने का समय): 29 अगस्त 2027, रविवार, प्रातः 07:00 बजे से 11:30 बजे तक। इस दौरान चर मुहूर्त, लाभ मुहूर्त और अमृत बहुत रहेगा।
👉* इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत शनिवार को पड़ने से यह “शनि-अजा एकादशी” का शुभ योग बनाएगा, जो पाप मुक्ति और कर्म शुद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
🌼 "अजा एकादशी का पौराणिक कथा"
*एक बार अयोध्या नगरी में नरेश राजा हरिश्चंद्र राज्य करते थे। वे सत्यवादी, धर्मनिष्ठ और प्रजा वत्सल राजा थे। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य था — सत्य और धर्म की रक्षा। एक बार उनके जीवन में एक विचित्र परीक्षा आई।
*ऋषि विश्वामित्र की परीक्षा
*एक दिन ऋषि विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा लेने का विचार किया। उन्होंने स्वप्न में राजा को एक अद्भुत वरदान का प्रलोभन दिया। जागने पर राजा ने देखा कि वह अपना समस्त राज्य, धन और संपत्ति खो चुके हैं।
*ऋषि विश्वामित्र ने कहा — “राजन! तुमने मुझे सब कुछ दान दिया है। अब वचन का पालन करो।”
*राजा ने धर्म की रक्षा हेतु राज्य छोड़ दिया। वे अपनी पत्नी शैव्या और पुत्र रोहिताश्व के साथ वन में भटकने लगे। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वे काशी पहुंचे, जहाँ उन्हें शव दाहक (श्मशान कर्म करने वाला) बनना पड़ा।
"पत्नी-पुत्र का दुःख"
*एक दिन जब उनके पुत्र की मृत्यु हुई, तो निर्धन हरिश्चंद्र ने स्वयं अपने पुत्र का दाह संस्कार किया। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा — “हे प्रिय, तुम्हें भी अंतिम संस्कार के लिए दक्षिणा देनी होगी।”
*इतना कहकर वे स्वयं श्मशान के नियमों का पालन करने लगे। तभी आकाशवाणी हुई —
“राजन! तुम्हारी सत्यनिष्ठा और धर्म पालन से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हो रहे हैं।”
"भगवान विष्णु का आशीर्वाद"
*भगवान विष्णु ने प्रकट होकर कहा —
“राजन, तुम्हारे दुखों का अंत हो गया। तुमने अपने जीवन से सत्य की पराकाष्ठा सिद्ध की है। तुम्हारे जैसे धर्मात्मा व्यक्ति के कारण ही यह लोक सुरक्षित है।”
*भगवान विष्णु ने बताया कि जिस दिन राजा हरिश्चंद्र ने अपने पुत्र के दाह संस्कार से पहले उपवास किया था, वह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी थी। इस एकादशी के प्रभाव से उनके समस्त पाप धुल गए और वे पुनः स्वर्गलोक को प्राप्त हुए।
*इस प्रकार, जो भी व्यक्ति अजा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करता है, उसे राजा हरिश्चंद्र के समान मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🌙 "अजा एकादशी पूजा विधि" (स्टेप-बाय-स्टेप)
*01. प्रातः स्नान: सूर्योदय से पहले स्नान करें, शुद्ध वस्त्र धारण करें।
*02. संकल्प लें: जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें — “मैं आज अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा हेतु रखता हूं।”
*03. भगवान विष्णु का पूजन: पीत वस्त्रों में विष्णुजी की मूर्ति या चित्र रखें।
*04. दीप प्रज्वलित करें: शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
*05. पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करें: गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें6. व्रत कथा श्रवण: अजा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें।
*06. नामस्मरण: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
*07. रात्रि जागरण: संभव हो तो विष्णु भजन करते हुए जागरण करें।
*08. अगले दिन पारण: द्वादशी तिथि में ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करें।
🍃 "अजा एकादशी के दिन क्या खाएं और क्या ना खाएं"
✅* क्या खाएं
*फलाहार: केले, सेब, अनार, नारियल पानी
*साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा लड्डू
*दूध, दही, मिश्री, और मखाना
❌ *क्या ना खाएं
*अनाज, चावल, गेहूं, दालें
*प्याज, लहसुन, मांस, मछली, शराब
*बासी भोजन, नमक अधिक मात्रा में
⚡ "अजा एकादशी के दिन क्या करें और क्या ना करें"
✅ *क्या करें
*भगवान विष्णु का पीले फूलों से पूजन करें।
*गरीबों को भोजन और वस्त्र दान दें।
*मन, वाणी और कर्म से संयम रखें।
*विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
❌ *क्या ना करें
*झूठ बोलना, क्रोध, आलस्य या निंदा न करें।
*व्रत के दिन तामसिक भोजन न बनाएं।
*शयन बिस्तर पर न करें, भूमि शयन (भूमि पर सोना) श्रेष्ठ है।
*रात्रि में मद्यपान या मांस भक्षण से बचें।
🔱 "अजा एकादशी में भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है"
*इस दिन भगवान विष्णु के “वामन अवतार” की विशेष पूजा की जाती है। वामन रूप में भगवान ने राजा बलि को तीन पग भूमि में बांधकर ब्रह्मांड की रक्षा की थी। यह व्रत अहंकार से मुक्त होने का प्रतीक है।
🛏️ "अजा एकादशी के दिन किस पर सोना चाहिए"
*व्रतधारी को इस दिन भूमि (फर्श) पर सोना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि भूमि पर सोने से शरीर की सात चक्र शक्तियां संतुलित रहती हैं और विष्णु कृपा प्राप्त होती है। पलंग या गद्दे पर सोना वर्जित माना गया ह
✨ *अजा एकादशी के अचूक टोटके"
*01. पीली कौड़ी का उपाय: अजा एकादशी की रात पीली कौड़ी विष्णु मंदिर में चढ़ाएं, धन लाभ होता है।
*02. तुलसी दीपदान: तुलसी के पास दीपक जलाने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
*03. शंख ध्वनि: संध्या के समय शंख बजाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
*04. वामन मंत्र जप: “ॐ वामनाय नमः” का 108 बार जप करें — कार्य में सफलता मिलती है।
*05. दान: गरीब को वस्त्र, भोजन या सोना दान करें — पितृ दोष शांत होता है।
🧘♂️ "अजा एकादशी का वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पहलू"
🔬 "वैज्ञानिक दृष्टि से":
*एकादशी व्रत के दिन फलाहार करने से शरीर में विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं, पाचन शक्ति सुधरती है। उपवास के दौरान शरीर की कोशिकाएं पुनर्जीवित होती हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
🧩 *सामाजिक दृष्टि से":
*यह व्रत समाज में दान, सहानुभूति और संयम का संदेश देता है। जब व्यक्ति एक दिन के लिए भी संयम रखता है, तो उसमें आत्मनियंत्रण और समाजसेवा की भावना बढ़ती है।
🕉️ *आध्यात्मिक दृष्टि से":
*अजा एकादशी मन को शुद्ध करने का दिन है। इस व्रत से मनुष्य को आत्मा के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है। यह व्रत अहंकार, मोह और पाप से मुक्ति का माध्यम है।
❓ *अजा एकादशी से संबंधित प्रश्न और उत्तर"
प्रश्न *01: अजा एकादशी का क्या अर्थ है?
👉 “अजा” शब्द का अर्थ होता है — “जिसका जन्म न हुआ हो” अर्थात् पापों से मुक्त स्थिति।
प्रश्न *02: अजा एकादशी का व्रत कौन रख सकता है?
👉 कोई भी पुरुष या महिला जो भगवान विष्णु का भक्त हो और नियमपूर्वक व्रत कर सके।
प्रश्न *03: क्या अजा एकादशी के दिन चावल खा सकते हैं?
👉* नहीं, चावल वर्जित माने गए हैं।
प्रश्न *04: "क्या एकादशी के दिन सो सकते हैं"?
👉 *नहीं, जागरण करना श्रेष्ठ है। रात्रि में भजन-कीर्तन करें।
प्रश्न *05: अजा एकादशी का मुख्य लाभ क्या है?
👉 इस व्रत से सभी पापों का क्षय होता है और मोक्ष प्राप्त होता है।
⚠️ "अजा एकादशी से संबंधित डिस्क्लेमर"
> इस ब्लॉग में दी गई धार्मिक, पौराणिक और ज्योतिषीय जानकारी प्राचीन ग्रंथों — पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण — से ली गई है। यह जानकारी केवल धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक अध्ययन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
*व्रत, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान करने से पूर्व अपने परिवार के पंडित, पुरोहित या विश्वसनीय ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत कुंडली और स्वास्थ्य की स्थिति अनुसार परामर्श अवश्य लें।
*किसी भी व्यक्ति को इस लेख में वर्णित विधियों का पालन अपने विवेक और श्रद्धा से करना चाहिए। ब्लॉग का उद्देश्य केवल सनातन परंपराओं के प्रति श्रद्धा बढ़ाना और सही जानकारी प्रसारित करना है, न कि किसी प्रकार की अंधविश्वासी धारणा को प्रोत्साहित करना।
*व्रत रखने वाले व्यक्ति यदि बीमार, गर्भवती या वृद्ध हैं तो पूर्ण उपवास की बजाय फलाहार या मानसिक व्रत रखें।
*hindudarmaranjeet.com इस लेख में दी गई जानकारी के किसी भी दुरुपयोग या गलत व्याख्या के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह सामग्री धर्म-जागरूकता और सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।