बहन शांता बनी चारों भाइयों के जन्म के कारक जानें कैसे

रामनवमी: प्रभु श्रीराम के प्राकट्य और देवी शांता के त्याग की अनसुनी गाथा

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय के सूर्योदय का प्रतीक है। हम सभी जानते हैं कि अयोध्या में राजा दशरथ के घर प्रभु श्रीराम का आगमन हुआ था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीराम के 'जन्म' और 'प्राकट्य' में एक गहरा आध्यात्मिक अंतर है? तुलसीदास जी लिखते हैं, 'भए प्रगट कृपाला दीन दयाला', यानी वे प्रकट हुए थे।

इस दिव्य लीला के पीछे एक ऐसा पात्र है जिसका नाम इतिहास के पन्नों में अक्सर ओझल रह जाता है— देवी शांता। राजा दशरथ की ज्येष्ठ पुत्री और चारों भाइयों की बड़ी बहन शांता ही वह मुख्य कारक बनीं, जिनके कारण पुत्रकामेष्टि यज्ञ संभव हुआ और अयोध्या को उसके उत्तराधिकारी मिले। इसके साथ ही, खीर के अद्भुत बंटवारे की वह कथा, जिसने लक्ष्मण और शत्रुघ्न के अटूट प्रेम की नींव रखी, भक्ति के रस में सराबोर कर देती है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम के आगमन की वह पौराणिक गाथा और महावीर झंडा गाड़ने की विधि, जो आपके जीवन में विजय का संचार करेगी।

नीचे दिए गए विषयों पर विस्तार से पढ़ें रंजीत के ब्लॉग पर 

रामनवमी चैत्र मास शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को श्रीराम का जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

प्रभु श्रीराम प्रकट हुए थे, जन्म नहीं हुआ था

एकलौती बहन शांता बनी चारों भाइयों के जन्म का कारक

खीर के बंटवारे में जन्में भाई लक्ष्मण और शत्रुघ्न

 महावीर झंडा गाड़ने की संपूर्ण विधि 

साथ में पढ़ें पौराणिक कथा के अनुसार श्रीराम प्रभु के जन्म की कहानी

श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे

श्री विष्णु भगवान के सातवें अवतार के रूप में जन्में और प्रकट हुए थे भगवान श्रीराम ? भगवान श्रीराम को ब्रह्मांड में मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से जानते हैं। अपने जीवन काल में मर्यादित और आदर्श मूल्यों के आधार पर जीने के कारण पूरे विश्व में पूज्यनीय हैं। वीरों के वीर भगवान हनुमान उनके चरणों में ध्यान लगाते हैं।

श्रीराम जन्म की कहानी पौराणिक कथा के अनुसार

रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र में एवं कर्क लग्न में कौशल्या माता के गर्भ से भगवान श्री राम प्रभु का जन्म अर्थात प्रकट हुए थे।

ऐसी बातें पौराणिक कथाओं में लिखा गया है। भगवान श्रीराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। श्रीराम प्रभु महारानी कौशल्या के पुत्र थे, जो राजा दशरथ के प्रथम और प्यारी रानी थी।

तुलसीदास जी ने रामायण में एक श्लोक में लिखे हैं। 

"भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी...?

श्रीरामचरितमानस के इस इस श्लोक से स्पष्ट हो जाता है कि भगवान श्रीराम प्रभु कौशल्या जी के सामने चार भुजा धारण किए, अस्त्र-शस्त्र लिए, दिव्य वस्त्र पहने और आभूषण साथ ही गले में वरमाला डालें भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम प्रभु के रूप में प्रगट हुए थे। इस प्रकार भगवान श्रीराम माता कौशल्या के गर्भ से नहीं जन्में थे। भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था।

चारों भाइयों के जन्म का कारक बनी बहन सांता

राजा दशरथ के एक पुत्री थी जिसका नाम था शांता। बड़ी बहन शांता की जन्म के संबंध में बाल्मीकि रामायण के बालकांड में एक श्लोक आता है।

शांता के जन्म के समय काशी में एक राजा हुआ करता थे। जिसका नाम था राजा सोमपाल।

बहुत दिनों से अयोध्या में बारिश नहीं हो रही थी। बारिश नहीं होने के कारण मंत्री सुमंत ने राजा दशरथ को सुझाव दिए। 

आप अपनी पुत्री शांता को महाराजा सोमपाल को गोद दे दे। सोमपाल के माध्यम से ऋषि भृगु से अपनी बेटी शांता की विवाह करा दे। इस प्रकार भृगु ऋषि आपके दामाद हो जायेंगे।

इसके बाद अयोध्या में बुलाकर बारिश कराने के लिए वृष्टि यज्ञ कराये जाए। गुरु वशिष्ठ जी का कहना था कि भृगु ऋषि द्वारा किए गए यज्ञ के प्रभाव से ही अयोध्या में बारिश होगी।

महाराजा सोमपाल के माध्यम से सांता का विवाह भृगु ऋषि के साथ संपन्न हो गया। इसके बाद भृगु ऋषि अयोध्या आए और एक विशाल यज्ञ करवाएं। यज्ञ के प्रभाव से अयोध्या में भारी बारिश हुई।

खीर के बंटवारे में जन्में लक्ष्मण और शत्रुघ्न

अयोध्या के महाराज दशरथ जी को उनके मंत्री सुमंत जी ने एक बार फिर सुझाव दिया कि, हे राजन ? एक बार फिर महर्षि भृगु को अयोध्या बुलाने का समय आ गया है। उन्हें बुलाकर पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्ठि यज्ञ करवाया जाए।

भृगु ऋषि अयोध्या आये और पुत्र कामेष्ठि यज्ञ करवाएं। भृगु ऋषि के भक्ति भाव से आहुति देने पर अग्निदेव हाथ में चरू (हविष्यान्न खीर) लेकर प्रकट हुए। 

राजा दशरथ ने अपनी पहली और प्यारी पत्नी कौशल्या को खीर का पात्र दे दिया। कौशल्या ने आधा खीर रानी कैकेई के दे दी।

इसके बाद कैकेई और कौशल्या ने अपने-अपने खीर का आधा हिस्सा रानी सुमित्रा को दे दी।

इस प्रकार मां कौशल्या के गर्भ सें श्री राम, कैकेई के गर्भ से भाई भरत और माता सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। खीर के बंटवारे से तीसरी रानी सुमित्रा को माता कौशल्या और देवी कैकेई के हिस्से से खीर मिला था।

इसी लिए परमात्मा ने श्रीराम प्रभु के साथ लक्ष्मण का भक्ति भाव और भरत के साथ शत्रुघ्न का त्यागी रहना लिख दिया था।

रामनवमी के दिन महावीरी झंडा गाड़ने का विधान

रामनवमी के दिन मंदिरों में और बहुत से हिन्दुओं के घरों में रामनवमी झंडा गाड़ने की परंपरा सदियों से चलते आ रहा है। इस दिन कच्चे बांस की ऊपरी छोर पर महावीरी झंडा पहनाया जाता है।

जानें महावीरी झंडा गाड़ने की विधि

महावीरी झंडा रामनवमी को दिन हिंदुओं के अधिकांश घरों में गाड़ा जाता है। शहर हो या गांव हर जगह कच्चे बास में महावीर झंडा को लगाकर अपने घर के आंगन में गाड़ने की परंपरा है।

आइए जानते हैं कैसे करें महावीरी झंडा गाड़ने का शुभारंभ 

सबसे पहले एक हरा बांस और भगवान बजरंगबली के चित्र बने भगवा झंडा घर लेकर आएं। इसके अलावा पान का पत्ता, मधु, दही, दूध, गाय का गोबर, आम का पत्ता, आम की लकड़ी, दूर्वा, गंगाजल, अक्षत, लड्डू, मौसमी फल, महावीरी सिंदूर और पैसा रख लें।

कच्चे बांस को शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद ध्वज को महावीरी सिंदूर उसमें लगाएं। आम के पत्तों से ध्वज को सजाएं। महावरी ध्वज गाड़ते समय 5 लोग एक साथ ध्वज को उठाकर उसे गड्ढा में डाल दें।

इसके बाद मिट्टी भर दें। महावीरी झंडा गाड़ने के पूर्व उस गड्ढे को विधि विधान से पूजा करें। गड्ढे में सबसे पहले सुपारी, अक्षत, सिंदूर, पान का पत्ता, मधु, दूध, घी, और पैसा आदि डालें। इसके बाद दीप जलाकर आरती करें और ध्वज का पांच बाद परिक्रमा करें। अंत में हवन कर अपने सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को दान दे। 

प्रश्न-उत्तर (FAQ Section)

1. प्रभु श्रीराम के जन्म को 'प्राकट्य' क्यों कहा जाता है?

शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा दशरथ और कौशल्या की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र रूप में दर्शन दिए थे। वे सामान्य मनुष्यों की तरह गर्भ से जन्म लेकर नहीं, बल्कि अपनी दिव्य माया से प्रकट हुए थे, इसलिए इसे 'प्राकट्य' कहा जाता है।

2. देवी शांता कौन थीं और उनका विवाह किससे हुआ था?

देवी शांता राजा दशरथ और रानी कौशल्या की पुत्री थीं। उन्हें अंगदेश के राजा रोमपाद ने गोद लिया था। उनका विवाह महान ऋषि ऋष्यशृंग से हुआ था, जिन्होंने राजा दशरथ के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया।

3. क्या शांता के बिना चारों भाइयों का जन्म असंभव था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुत्रकामेष्टि यज्ञ केवल ऋषि ऋष्यशृंग ही कर सकते थे। उन्हें अयोध्या लाने और प्रसन्न करने का मार्ग देवी शांता के माध्यम से ही प्रशस्त हुआ था, इसीलिए उन्हें भाइयों के जन्म का मुख्य कारक माना जाता है।

4. लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म में 'खीर' का क्या रहस्य है?

यज्ञ से निकली खीर का आधा हिस्सा कौशल्या को और आधा कैकेयी को दिया गया। दोनों ने अपने हिस्से का कुछ भाग सुमित्रा को दिया। कौशल्या के अंश से लक्ष्मण (राम के पूरक) और कैकेयी के अंश से शत्रुघ्न (भरत के पूरक) का जन्म हुआ।

5. महावीर झंडा गाड़ने का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

हनुमान जी का ध्वज (महावीर झंडा) विजय, सुरक्षा और नकारात्मक ऊर्जा के विनाश का प्रतीक है। इसे रामनवमी या हनुमान जयंती पर विधि-विधान से लगाने से घर में सुख-शांति और आत्मविश्वास का वास होता है।

डिस्क्लेमर

सूचना और उद्देश्य: इस ब्लॉग में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं (जैसे रामायण और लोक कथाएँ) और पारंपरिक रीति-रिवाजों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।

सत्यता और व्याख्या: विभिन्न क्षेत्रों और ग्रंथों (जैसे वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, और अन्य क्षेत्रीय पुराण) में इन कथाओं के विवरण में भिन्नता हो सकती है। हम यह दावा नहीं करते कि यहाँ दी गई जानकारी पूर्णतः ऐतिहासिक प्रमाणों पर आधारित है, क्योंकि धर्म और आस्था अक्सर व्यक्तिगत विश्वास का विषय होते हैं।

धार्मिक भावनाएँ: हमारा उद्देश्य किसी भी धर्म, समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। "महावीर झंडा" गाड़ने की विधि और अन्य अनुष्ठान सामान्य जानकारी के लिए हैं; इन्हें करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या कर्मकांडी पंडित से परामर्श अवश्य लें। किसी भी त्रुटि के लिए लेखक या ब्लॉग प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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